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पुलिस की सटीक पड़ताल,काबिल पुलिस अधिकारियों ने तोड़ दिया अपराधियों का बुना जाल

        • हत्या से सहमा बनारस हेलमेटधारी शूटरों ने दी वारदात को अंजाम
        • पुलिस की चाक-चौबंद रणनीति सीसीटीवी से सर्विलांस तक
        • कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने केस को व्यक्तिगत चुनौती माना, 50 जवानों ने संभाला मोर्चा
        • कर्ज और प्रॉपर्टी विवाद बनी मौत की वजह
        • वारदात से पहले जोगेंद्र मुंबई चला गया ताकि शक न हो
        • मुठभेड़ में दबोचा गया हथियार सप्लायर मुकीम ने खोला पोल
        • राजनीति और अपराध का गठजोड़, जनता का भरोसा पुलिस पर

देवनाथ मौर्य

वाराणसी। सारनाथ थानाक्षेत्र में 21 अगस्त की सुबह घटी कालोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया। हेलमेट पहने शूटर, बिना नंबर की बाइक और सन्नाटे को चीरती गोलियों ने न केवल एक कारोबारी की जान ले ली। इस हत्या ने प्रॉपर्टी की दुनिया और आपराधिक नेटवर्क के गहरे गठजोड़ को भी बेनकाब कर दिया। पुलिस के सामने चुनौती थी क्या वह इस ‘परफेक्ट क्राइम’ को सुलझा पाएगी। लेकिन सात दिनों की जद्दोजहद, तकनीक और जमीनी खुफिया तंत्र के इस्तेमाल से पुलिस ने इस सनसनीखेज हत्याकांड की गुत्थी सुलझा दी। हत्या की पटकथा लिखने वाले जोगेंद्र यादव से लेकर गैंगस्टर बनारसी यादव तक, सभी किरदार बेनकाब हो गए। यह केस कमिश्नरेट वाराणसी के लिए एक बड़ी सफलता और अपराध जगत के लिए एक करारा संदेश बनकर सामने आया।

मृतक महेन्द्र

पुलिस की चाक-चौबंद रणनीति सर्विलांस बना हथियार

हत्या की सुबह से ही पुलिस को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। शूटरों ने हेलमेट पहनकर चेहरे छिपा लिए थे और जिस बाइक से वारदात को अंजाम दिया, उस पर नंबर प्लेट नहीं थी। सीसीटीवी फुटेज से ज्यादा मदद नहीं मिली। यही वह मोड़ था, जब पुलिस ने फैसला किया कि केवल तकनीकी निगरानी ही इस केस को आगे बढ़ा सकती है। सर्विलांस सेल की टीम ने मोबाइल कॉल डिटेल खंगालना शुरू किया। जल्दी ही पुलिस के हाथ बड़ा सुराग लगा। हत्या से ठीक पहले संपूर्णानंद शुक्ला ने 18 बार फोन किया था, वहीं मुंबई में बैठे जोगेंद्र यादव ने संपूर्णानंद से 10 बार बातचीत की थी। यह पैटर्न साफ बता रहा था कि वारदात के पीछे एक संगठित साजिश है। इस सूचना को पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल के सामने रखा गया। उन्होंने तत्काल निर्देश दिया कि मामले को स्पेशल टीम के जरिए आगे बढ़ाया जाए। यही से इस केस ने निर्णायक मोड़ लिया।

पुलिस कमिश्नर की सक्रिय मॉनिटरिंग 50 जवानों के मोर्चे ने सुलझाई हत्या की गुत्थी

पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने इस केस को व्यक्तिगत चुनौती मान लिया। उन्होंने न सिर्फ जांच टीम को दिशा-निर्देश दिए, बल्कि पल-पल की जानकारी भी खुद लेते रहे। इस जांच अभियान में दो डीसीपी, छह वरिष्ठ अधिकारी और करीब 50 पुलिसकर्मी तैनात किए गए। एसीपी सारनाथ विजय प्रताप सिंह को टीम की कमान दी गई। एसओजी प्रभारी गौरव सिंह, उप निरीक्षक अभिषेक पांडेय, हेड कांस्टेबल चंद्रभान यादव, साइबर टेक्निकल विंग के सौरभ तिवारी, थानाध्यक्ष विवेक कुमार त्रिपाठी और वरिष्ठ उप निरीक्षक पंकज कुमार राय समेत कई पुलिसकर्मी दिन-रात जुटे रहे।
पुलिस कमिश्नर का एक्शन मोड में रहना और बार-बार टीम का उत्साहवर्धन करना ही था कि सातवें दिन यह केस पूरी तरह सुलझ गया।

कर्ज और प्रॉपर्टी विवाद ने लिखी मौत की पटकथा

हत्याकांड की जड़ें प्रॉपर्टी विवाद और कर्ज के दलदल में छिपी थीं। पुलिस की पूछताछ में जोगेंद्र यादव उर्फ फैटू ने माना कि उसके पास कई करोड़ का कर्ज हो गया था और महेंद्र गौतम बार-बार उसके रास्ते रोक रहे थे।

जोगेंद्र और महेंद्र के विवाद की पूरी कहानी

* सिंहपुर के अंजनीनाथ शुक्ला से 48 लाख देकर 4.5 बिस्वा जमीन खरीदी, महेंद्र ने दखल देकर सौदा बिगाड़ दिया।
* कैलाशनाथ शुक्ला से 7 लाख देकर 9 बिस्वा जमीन का एग्रीमेंट कराया, महेंद्र ने वहां रास्ता बंद कर दिया।
* राजेश पटेल से 13 लाख एडवांस देकर जमीन खरीदी, उस पर भी महेंद्र ने बाउंड्री खड़ी कर दी।
* घुरहूपुर में सात बिस्वा जमीन को महेंद्र ने घेरकर रास्ता बंद कर दिया।
* इन विवादों और बार-बार की रुकावटों से जोगेंद्र करीब 1.75 करोड़ रुपये का कर्जदार हो गया। अंततः उसने हत्या की पटकथा लिख डाली।

मुंबई से चला फरमान, वाराणसी में गूंजी गोलियां

हत्या की साजिश को ‘परफेक्ट’ दिखाने के लिए जोगेंद्र खुद मुंबई चला गया। उसकी सोच थी कि वारदात के समय वह दूर रहेगा तो शक उस पर नहीं आयेगा। उसकी जगह संपूर्णानंद शुक्ला ने मोर्चा संभाला। उसने महेंद्र को फोन कर जमीन देखने के बहाने बुलाया। महेंद्र देर कर रहे थे, तो उसने लगातार फोन कर उन्हें आने को मजबूर किया। इस बीच, बनारसी यादव द्वारा भेजा गया शूटर ‘फौजी’ पहले ही रेकी कर चुका था। जैसे ही महेंद्र मौके पर पहुंचे, तीन शूटरों ने उन्हें गोली मार दी। कुछ ही सेकंड में वारदात पूरी हुई और अपराधी फरार हो गए।

मुठभेड़ में हथियार तस्कर धर दबोचा गया

इस केस में हथियार सप्लाई की अहम कड़ी बना तस्कर मुकीम। वह शूटरों को असलहे पहुंचाने वाला था। पुलिस ने उसे सारनाथ-फरीदपुर रिंगरोड पर मुठभेड़ के दौरान दबोचा। मुठभेड़ में मुकीम के पैर में गोली लगी और उसके पास से एक देशी तमंचा, एक जिंदा कारतूस और एक खोखा बरामद किया गया। यह गिरफ्तारी पुलिस के लिए अहम सफलता साबित हुई।

जेल से बाहर आया गैंगस्टर बनारसी और हत्या की रची साजिश

जोगेंद्र यादव अकेला इस साजिश में शामिल नहीं था। गाजीपुर का इनामी गैंगस्टर बनारसी यादव भी उसके साथ था। बनारसी यादव सितंबर 2022 में गुजरात से गिरफ्तार हुआ था और गाजीपुर जेल में बंद रहा। दो माह पहले ही वह जमानत पर छूटकर बाहर आया। जेल से बाहर आते ही उसने जोगेंद्र के साथ मिलकर महेंद्र की हत्या की योजना बनाई। शूटरों की व्यवस्था और हथियार की सप्लाई में उसका अहम रोल रहा। गांव में उसकी दहशत इतनी थी कि लोग नाम लेने से कतराते थे। पुलिस के लिए भी यह साफ हो गया कि जोगेंद्र और बनारसी की ‘सांठगांठ’ ही इस वारदात की रीढ़ थी।

राजनीति और प्रॉपर्टी का गठजोड़

इस केस ने राजनीति और प्रॉपर्टी कारोबार के खतरनाक गठजोड़ को भी उजागर किया। जोगेंद्र यादव पंचायत चुनाव हार चुका था और अब जिला पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी में था। उसकी सत्ताधारी पार्टी के एक स्थानीय नेता से करीबी रिश्तेदारी थी। यही कारण था कि उसे लगता था कि चाहे वह कितना भी बड़ा कदम उठाए, राजनीति की ढाल उसे बचा लेगी। लेकिन पुलिस जांच ने सारे भ्रम तोड़ दिए।

जनता का भरोसा और पुलिस की सफलता

वाराणसी जैसे संवेदनशील शहर में यह हत्याकांड बड़ी चुनौती था। जनता का आक्रोश और मीडिया का दबाव दोनों पुलिस पर थे। लेकिन जिस तरह सात दिनों में वारदात की गुत्थी सुलझाई गई, उसने पुलिस की साख को मजबूत किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पुलिस इसी तरह तत्पर और निष्पक्षता से काम करती रही, तो अपराधियों की कमर टूट जाएगी। वहीं पुलिस के लिए यह केस आने वाले समय में ‘मॉडल केस’ के रूप में देखा जायेगा कि कैसे तकनीक और खुफिया तंत्र को मिलाकर अपराध की जड़ तक पहुंचा जा सकता है। महेंद्र गौतम की हत्या सिर्फ एक कारोबारी की हत्या की कहानी नहीं है, बल्कि यह वाराणसी और गाजीपुर के आपराधिक-प्रॉपर्टी नेटवर्क का आईना है। यह केस दिखाता है कि प्रॉपर्टी विवाद, कर्ज और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का घालमेल कैसे खून-खराबे में बदल जाता है। पुलिस ने न सिर्फ अपराधियों को पकड़कर अपना फर्ज निभाया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि अपराध कितना भी संगठित क्यों न हो, कानून की पकड़ से बचना असंभव है।

* 21 अगस्त की सुबह सारनाथ थानाक्षेत्र में प्रॉपर्टी डीलर महेंद्र गौतम की गोली मारकर हत्या।
* शूटरों ने हेलमेट पहनकर पहचान छुपाई और बिना नंबर की बाइक का इस्तेमाल किया।
* वारदात के बाद पूरे शहर में सनसनी, पुलिस के सामने बड़ी चुनौती।
* सीसीटीवी से ठोस सुराग न मिलने पर पुलिस ने तकनीकी निगरानी का सहारा लिया।
* सर्विलांस टीम ने कॉल डिटेल्स खंगाले।
* हत्या से पहले संपूर्णानंद शुक्ला ने 18 बार फोन किया, जोगेंद्र यादव ने मुंबई से 10 बार बातचीत की।
* कॉल पैटर्न ने पुलिस को साजिश की ओर इशारा दिया।
* दो डीसीपी, छह अधिकारी और 50 पुलिसकर्मी जांच में जुटे।
* एसीपी विजय प्रताप सिंह को मिली कमान
* एसओजी प्रभारी गौरव सिंह, सौरभ तिवारी, विवेक त्रिपाठी सहित कई पुलिसकर्मी शामिल।
* जोगेंद्र यादव प्रॉपर्टी विवाद और भारी कर्ज में डूबा था।
* महेंद्र गौतम लगातार उसके सौदों में अड़ंगे डाल रहे थे।* 1.75 करोड़ रुपए का कर्जदार बना जोगेंद्र, लिखी हत्या की पटकथा

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