एपेक्स हॉस्पिटल का संचालक डॉक्टर संतोष करता है लाशों पर व्यापार, यमराज सरीखा है इस अस्पताल का किरदार

मौत का अड्डा बना वाराणसी का एपेक्स हॉस्पिटल, पुलिस भी बचाने में लगी!
इलाज नहीं, मौत का कारोबार अपेक्स हॉस्पिटल का असली चेहरा
फ्रैक्चर से ‘हार्ट अटैक’ डॉक्टरों की झूठी कहानी और लापरवाही
लाश देने के लिये थमाया 80 हजार का बिल, जिंदगी मुफ्त, इंसान से बड़ा कैश काउंटर
धरना, नारे और सड़क जाम जनता ने खोला अस्पताल का काला सच
पुलिस बनी पहरेदार प्रबंधन को बचाने में लगी वर्दी
लूट और लीपापोती निजी अस्पतालों की आदत बन चुकी है हत्या
सीएमओ व डॉ.पीयूष राय की मिलीभगत स्वास्थ्य तंत्र का नंगा सच
सरकार की चुप्पी, जनता की बारी कब तक बिकती रहेगी जिंदगी

वाराणसी। भिखारीपुर स्थित एपेक्स हॉस्पिटल का सच बेहद भयावह है। इलाज के नाम पर यह अस्पताल मरीजों की जान से खिलवाड़ करता चला आ रहा है। अस्पताल की लापरवाही, मोटे बिल और मौतों का सिलसिला कोई नई बात नहीं। विदित हो कि राजातालाब के अध्यापक सुजीत कुमार वर्मा की जान सिर्फ अस्पताल की घोर लापरवाही के चलते चली गई। इलाज में लापरवाही और बाद में दिल का दौरा बताकर मामले की लीपापोती करने का प्रयास किया गया। क्या निजी अस्पतालों की लूट और हत्या का यह धंधा ऐसे ही चलता रहेगा और पुलिस-प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा रहा।
अपेक्स हॉस्पिटल इलाज नहीं, मौत बांटने का अड्डा
भिखारीपुर का एपेक्स हॉस्पिटल वर्षों से विवादों में रहा है। पहले भी मरीजों की मौत पर कई बार हंगामे हुए, लेकिन प्रबंधन ने कभी सबक नहीं लिया। अस्पताल में न इलाज की पारदर्शिता है, न ही मरीजों की सुरक्षा। हर बार मौत को सामान्य घटना बताकर मामला दबा दिया जाता है।
सुजीत की जिंदगी अस्पताल की लापरवाही निगल गई
6 सितंबर को सड़क हादसे में घायल सुजीत कुमार वर्मा को पहले बीएचयू में प्राथमिक इलाज मिला। 7 सितंबर को अपेक्स हॉस्पिटल लाया गया। डॉक्टरों ने सामान्य फ्रैक्चर को बड़ा मामला बना ऑपरेशन कर दिया। 9 सितंबर को ड्रेसिंग के दौरान अचानक उन्हें ‘हार्ट अटैक’ आना बता कर सीसीयू में बंद कर दिया। दो दिन बाद, 10 सितंबर की शाम, उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। परिजन का कहना है कि मौत अस्पताल की लापरवाही और गलत इलाज का परिणाम है।
ऑपरेशन के बाद ड्रेसिंग में ‘हार्ट अटैक’ क्या यह मजाक है
डॉक्टरों का दावा है कि ड्रेसिंग के दौरान मरीज को दिल का दौरा पड़ा। चिकित्सा विज्ञान में यह बेहद असामान्य है। परिजनों का सवाल जायज़ है कि हल्के फ्रैक्चर का इलाज दिल का दौरा कैसे बना? यह साफ इशारा है कि अस्पताल अपनी लापरवाही को छिपाने के लिए झूठे बहाने गढ़ रहा है।
मौत छुपाने का खेल और 80 हजार का बिल
जब सुजीत की मौत हुई तो प्रबंधन ने परिवार को न तो रिपोर्ट दी और न ही सही जानकारी। बल्कि उल्टे 80 हजार रुपये का बिल थमा दिया। यह सिर्फ लूट नहीं बल्कि निर्लज्जता की पराकाष्ठा है। इंसान मर जाए, लेकिन अस्पताल का ‘कैश काउंटर’ चलता रहे यही इस धंधे का असली चेहरा है।
जनता का फूटा गुस्सा धरना, हंगामा और सड़क जाम
सुजीत की मौत के बाद परिजन, सहकर्मी और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। अस्पताल का गेट बंद कर धरना हुआ, नारेबाजी हुई और भिखारीपुर-अमरा-अखरी मार्ग पर चक्का जाम कर दिया गया। लोग चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे थे ‘डॉक्टर नहीं, ये कसाई हैं… अस्पताल नहीं, मौत का सौदागर है।
पुलिस-प्रशासन की बस्ती और दबाव की राजनीति
चितईपुर पुलिस और एसीपी मौके पर पहुंचे, लेकिन उनका रवैया भी अस्पताल प्रबंधन को बचाने वाला दिखा। हर बार की तरह उच्च अधिकारियों को सूचना देकर मामला ठंडा करने की कोशिश की गई। सवाल है कि पुलिस जनता की है या इन मौत बांटने वाले अस्पतालों की सुरक्षा गार्ड!
लूट, लापरवाही और लीपापोती का धंधा
निजी अस्पतालों का धंधा यही है बीमार को डराकर मोटा बिल वसूलना, इलाज में लापरवाही करना और मौत के बाद लीपापोती। यही पैटर्न हर जगह दोहराया जाता है। वाराणसी का अपेक्स हॉस्पिटल इसकी जीती-जागती मिसाल है।
सरकार कब जागेगी, सुधार नहीं तो और लाशें मिलेंगी
हर घटना के बाद हंगामा होता है, मुकदमा दर्ज होता है, और फिर सब भूल जाते हैं। लेकिन अपेक्स जैसे अस्पताल मौत बांटने का कारोबार चलता रहता है। ऐसे मामलों में जब तक सरकार कठोर कदम नहीं उठाती अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर जिम्मेदार डॉक्टरों को जेल नहीं भेजा जाता तब तक यह सिलसिला चलता ही रहेगा। सबसे बड़ी बात स्वास्थ्य विभाग का नोडल अधिकारी सीएमओ होता है, लेकिन जबसे सीएमओ डॉ.संदीप चौधरी ने स्वास्थ्य विभाग की कमान संभाली स्थिति बद से बदत्तर होती जा रही है और इसमें उनका सबसे बड़ा सिपहसलार डॉ.पीयूष राय बने। अध्यापक सुजीत वर्मा की मौत केवल एक हादसा नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की नंगी सच्चाई है। निजी अस्पतालों ने इलाज को धंधा बना लिया है और प्रशासन आंखें मूंदकर बैठा है। अगर आज अपेक्स हॉस्पिटल जैसे कसाई खानों पर गाज नहीं गिरी तो कल हर परिवार की बारी आ सकती है। यह लड़ाई सिर्फ सुजीत की नहीं यह आम जनता की जिंदगी और अधिकार की लड़ाई है।
* एपेक्स हॉस्पिटल पहले से विवादों में, मौतों का इतिहास रहा है।
* सुजीत वर्मा का फ्रैक्चर इलाज में बदला मौत में।
* डॉक्टरों ने ड्रेसिंग के दौरान ‘हार्ट अटैक’ बताकर लापरवाही छिपाई।
* प्रबंधन ने मौत छिपाने के बजाय 80 हजार का बिल थमा दिया।
* परिजन व ग्रामीणों का धरना, नारेबाजी और सड़क जाम।
* पुलिस-प्रशासन पर प्रबंधन को बचाने का आरोप।
* निजी अस्पतालों का धंधा लूट, लापरवाही और लीपापोती।
* कठोर कार्रवाई न हुई तो अपेक्स जैसे हॉस्पिटल और लाशें देंगे।




