
~ मोदी जी के संसदीय क्षेत्र में प्रशांत उर्फ लड्डू का प्रतिबंधित सिरप का काला कारोबार,नारकोटिक्स माफ़िया पर किसकी कृपा है बरखुदार ?
~ काशी का काला कारोबारी प्रशांत ‘लड्डू’ उपाध्याय ने दवा के नाम पर खड़ी की 1000 करोड़ के मौत की सल्तनत
~ कोडिन सिरप से साम्राज्य, कानून से ऊपर ‘लड्डू’
~ मड़ौली की 100 करोड़ की कोठी काले धन की गवाही
~ नेताओं मंत्रियों का वरदहस्त, पुलिस-प्रशासन मौन
~ कोविड के दौर में पकड़ा गया खेल, फिर भी हड़कंप नहीं
~ सहारनपुर कनेक्शन विभोर व विशाल राणा से गहरे रिश्ते
~ काशी के दिल में अवैध नारकोटिक्स का अड्डा
~ होटल, कॉम्प्लेक्स और बेनामी साम्राज्य सबकुछ ब्लैक
~ क्या काशी में कानून माफियाओं की दासी बन चुका है?
मायारानी अग्रहरि एडवोकेट
वाराणसी। काशी जिसे दुनिया मोक्ष की नगरी कहती है, आज एक ऐसे ‘व्यापारी’ के नकली भक्ति गान के नीचे कराह रही है जिसने दवा के कारोबार की आड़ में शहर में नशे का साम्राज्य खड़ा कर दिया। यह कहानी एक ऐसे आदमी की है जिसने औषधि के पवित्र पेशे को कोडिन, नारकोटिक्स और मौत के खेल में बदल दिया। उसका नाम है प्रशांत उपाध्याय उर्फ लड्डू, जिसकी फर्म राजेंद्र ड्रग एजेंसीज और राधिका एंटरप्राइज सिर्फ कागजों पर दवा का व्यापार करती हैं, हकीकत में यह काशी के युवाओं के शरीर और भविष्य को खोखला कर देने वाला सबसे बड़ा नशा सिंडिकेट है। यह वही काशी है जहां अपराधियों की सांसें थम जानी चाहिए थीं, लेकिन नेताओं के आशीर्वाद, मंत्रियों के संरक्षण और प्रशासन की चुप्पी के बल पर लड्डू उपाध्याय फल-फूल रहा है।
दवा कारोबारी नहीं, नारकोटिक्स का बादशाह
प्रशांत उपाध्याय उर्फ लड्डू, नाम भले ही मीठा हो, लेकिन काशी के युवाओं के जीवन में उसने जो जहर घोला है, उसका कोई मापदंड नहीं। कहने को यह व्यक्ति एक दवा व्यापारी है, लेकिन कोडिन कफ सिरप और अन्य नारकोटिक्स उत्पादों के अवैध कारोबार की असली व्यापार करता है। राजेंद्र ड्रग एजेंसीज और राधिका एंटरप्राइज ये फर्में कागजों पर दवा सप्लाई का काम करती हैं, लेकिन शहर का हर फार्मासिस्ट, हर थोक व्यापारी और हर दवा व्यवसायी जानता है कि इन फर्मों से निकलने वाला सबसे बड़ा माल कोडिन सिरप, ट्रामाडोल, प्रतिबंधित इंजेक्शन, सायकोट्रॉपिक टैबलेट और नशे में इस्तेमाल होने वाले अन्य दवाएं हैं। कोडिन सिरप, जो असल में सिर्फ गंभीर मरीजों के लिए नियंत्रित दवा है, प्रशांत उपाध्याय के हाथों सस्ती किक बन गई। सैकड़ों पेटी हर महीने अलग-अलग नेटवर्कों के जरिए पूरे पूर्वांचल, बिहार सीमा और यूपी के कई जिलों में भेजी जाती है। इस कारोबार में पैसा ऐसा बरसता है कि एक आम व्यापारी 20 साल में जितना नहीं कमाता, लड्डू उतना एक साल में कमा लेता है।
अवैध दौलत से मड़ौली की 100 करोड़ की कोठी
प्रशांत उपाध्याय की मड़ौली में बनी आलीशान कोठी सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि काले धन का भव्य स्मारक है। जानकारों का दावा है कि इसकी कीमत कम से कम 100 करोड़ रुपये से ऊपर है। कारों का काफिला, विदेशी इंटीरियर, सुरक्षा के नाम पर गुंडे और प्रशासनिक अफसरों के आने-जाने का गुप्त रिकॉर्ड यह साबित करते हैं कि दवा तो सिर्फ बहाना है, असली खेल करोड़ों का नशा कारोबार है।
100 करोड़ का होटल और काशी का नया ‘सिंडिकेट टॉवर’
रोहनिया में तेजी से बन रहा लड्डू का होटल शहर में चर्चा का विषय है। जानकारी के अनुसार इसकी कीमत भी 100 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। सवाल यह है कि ऐसी दौलत कहां से आ रही है? क्या दवा व्यापार इतना लाभकारी है कि कोई व्यापारी दो-दो सौ करोड़ की परियोजनाएं अकेले खड़ी कर दे, या फिर यह पूरा ढांचा उसी अवैध पैसे का है जिसे लड्डू ने कोडिन और नारकोटिक्स की तस्करी से कमाया है। प्रशासन जानता है, और सत्ता में बैठे लोग भी। लेकिन कार्रवाई कौन करेगा यह बताने वाला कोई नहीं।
सप्तसागर और सिगरा का साम्राज्य, कांप्लेक्सों के पीछे काला धन
सप्तसागर मैदागिन में इसका बड़ा कॉम्प्लेक्स और सिगरा में भवानी मार्केट के नाम से खड़ा एक और विशाल व्यावसायिक भवन ये दोनों उसकी आर्थिक ताकत का सार्वजनिक प्रमाण हैं। रियल एस्टेट में धड़ाधड़ निवेश, मार्केट में दुकानें खरीदना, किराए पर कारोबार देना। सब कुछ उसी पैसे से किया गया है जो शहर के युवाओं की नसों से निचोड़ा गया है।
कोविड-19 में खुला था काला खेल, लेकिन ‘पैसे’ ने दबा दिया सच
कोविड-19 महामारी के दौरान जब पूरा देश लॉकडाउन में था, तब एक अखबार ने प्रशांत उपाध्याय के संदिग्ध कारोबार को उजागर किया था। जिसमें उसने स्पष्ट किया था कि कोडिन सिरप की अवैध सप्लाई महामारी के दौरान कई गुना बढ़ गई। युवा बेरोजगार थे, घरों में बंद थे, और इस मौके का फायदा उठाकर लड्डू ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अपना नेटवर्क और मजबूत किया। रिपोर्ट छपने के बाद जो होना चाहिए था, वह नहीं हुआ। न कोई एफआईआर हुई और न कोई छापा पड़ा जिससे प्रशांत का मनोबल बढ़ता चला गया। समाचार छापने वाले रिपोर्टर पर दबाव बनाया गया और अखबार प्रबंधन को भी चुप करा दिया गया। यह तभी संभव है जब किसी माफिया को सत्ता और प्रशासन दोनों का वरदहस्त हासिल हो।
नेताओं और मंत्रियों का वरदहस्त कानून से ऊपर ‘लड्डू राज’
काशी के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा कोई राज नहीं कि प्रशांत उपाध्याय की पहुंच कई बड़े नेताओं और मंत्रियों तक है। जब भी कोई शिकायत उठती है, एक फोन जाता है और मामले का अंत हो जाता है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के तबादलों से लेकर जांचों को ठंडे बस्ते में डालने तक सब कुछ मैनेज होने की बातें खुलकर चलती हैं। इन्हीं राजनीतिक संरक्षणों के बूते प्रशांत उपाध्याय काशी का सबसे बड़ा ‘अस्पृश्य व्यापारी’ बन चुका है। अस्पृश्य यानी जिसे कानून छू नहीं सकता।
1000 करोड़ की संपत्ति, असली खेल बेनामी संपत्तियों का
जानकारों का दावा है कि प्रशांत उपाध्याय बीते वर्षों में लगभग 1000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित कर चुका है। यह तो सिर्फ वह संपत्ति है जो लोगों को दिखाई देती है। इसके अलावा कई करोड़ की बेनामी संपत्ति शहर के अलग-अलग हिस्सों में प्लॉट, दुकानों, होटलों और फार्म हाउस के रूप में मौजूद है। दवा व्यापार से यह कमाई असंभव है। सिर्फ और सिर्फ अवैध नारकोटिक्स कारोबार ही इतनी तेज गति से पैसा देता है।
सहारनपुर के विभोर राणा और विशाल राणा से रिश्ते
हाल ही में सहारनपुर के विभोर राणा और विशाल राणा की गिरफ्तारी ने उत्तर प्रदेश के नारकोटिक्स नेटवर्क की पोल खोल दी थी। जानकार बताते हैं कि प्रशांत उपाध्याय का व्यापारिक संबंध लंबे समय से इन दोनों से रहा है। नारकोटिक्स सप्लाई, पैसों का लेनदेन यह सब एक बड़ा नेटवर्क है। जिसमें काशी भी अहम केंद्र के रूप में मौजूद है। यह कनेक्शन बताता है कि यह खेल सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि अंतर-जिला और अंतर-राज्यीय स्तर पर फैला हुआ है।
कानून किसके लिए
प्रशांत उपाध्याय की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, यह काशी की प्रशासनिक सड़ांध का असल आईना है। जहां पुलिस मूकदर्शक, प्रशासन निर्देश की प्रतीक्षा में और नेता इस माफिया को सुरक्षा कवच प्रदान कर रहे हैं। क्या काशी का कानून सिर्फ गरीबों के लिए है। बड़े माफिया कानून से ऊपर बैठकर अरबों की संपत्ति खड़ी कर सकते हैं, और कोई उन्हें छू भी नहीं सकता। यही योगी मॉडल है, यही कानून-व्यवस्था की मजबूती है।
* प्रशांत उपाध्याय उर्फ लड्डू दवा व्यापारी की आड़ में नारकोटिक्स सिंडिकेट।
* राजेंद्र ड्रग एजेंसीज व राधिका एंटरप्राइज कोडिन सिरप का बड़ा अवैध नेटवर्क।
* मड़ौली में 100 करोड़ की कोठी काले धन की पहली निशानी।
* रोहनिया में 100 करोड़ का होटल निर्माण जारी।
* सप्तसागर (मैदागिन) व सिगरा में बड़े कॉम्प्लेक्स अवैध संपत्ति का साम्राज्य।
* कोविड के दौरान काला खेल उजागर लेकिन राजनीतिक संरक्षण ने दबाया मामला।
* 1000 करोड़ से अधिक की घोषित-अघोषित संपत्ति।
* सहारनपुर के विभोर राणा और विशाल राणा से व्यावसायिक रिश्ता।




