चन्दौली

चन्दौली के जिला आबकारी अधिकारी का हाल: सुभाष चन्द्र की अगुवाई में पूरे जिले में चल रहा गांजे का गन्दा कारोबार, जिम्मेदार ही बन गये हिस्सेदार

चंदौली में गांजा माफिया बेखौफ कार्रवाई सिर्फ कागज पर, सिस्टम ‘चुप्प’ नेटवर्क ‘मजबूत’

चन्दौली के जिला आबकारी अधिकारी का हाल: सुभाष चन्द्र की अगुवाई में पूरे जिले में चल रहा गांजे का गन्दा कारोबार, जिम्मेदार ही बन गये हिस्सेदार

चंदौली में गांजा माफिया बेखौफ कार्रवाई सिर्फ कागज पर, सिस्टम ‘चुप्प’ नेटवर्क ‘मजबूत’

 

चंदौली। कभी खेती और शांत जीवनशैली के लिए पहचाने जाने वाले चंदौली में इन दिनों हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लोग इसे पूर्वांचल का नया नशा हॉटस्पॉट कहने लगे हैं। जिले के थाना क्षेत्रों में गांजे का कारोबार इस कदर फैल चुका है कि ग्रामीणों को लगता है कि नशा बेचने वाला तंत्र, पकड़ने वाले तंत्र से कहीं ज्यादा ताकतवर हो चुका है। कार्रवाई के नाम पर महीने में एक-दो छापे, और वो भी पहले से लीक। असली कारोबारी गायब छोटे लड़के पकड़ कर फोटो खिंचाई मामला खत्म। जनपद के जिला आबकारी अधिकारी सुभाष चन्द्र के कुशल पर्यवेक्षण में गांजे का अवैध कारोबार फल -फूल रहा है।

गांव कस्बों तक फैलता नशे का कारोबार

वह जिला जो वर्षों तक धान, गेहूं और हरे भरे खेतों की वजह से जाना जाता रहा, अब नशे के कारोबार का हब बनकर उभर रहा है। ग्रामीणों और स्थानीय व्यापारियों के मुताबिक, गांजा तस्करी का नेटवर्क इतना मजबूत और फैला हुआ है कि अब यह किसी गुप्त काम जैसा नहीं, बल्कि खुले बाजार की तरह संचालित कारोबार बन चुका है। कहां बिकता है, कब आता है, कौन पहुंचाता है, यह सब जानकारी आम लोगों को है। लेकिन पता नहीं क्यों, यह जानकारी सिर्फ आबकारी विभाग को नहीं होती! सूत्रों का कहना है कि जिला आबकारी अधिकारी सुभाष चन्द्र देखो सुनो नजरअंदाज करो की नीति पर चलते दिख रहे हैं। विभागीय ढिलाई का परिणाम यह है कि छोटे कस्बों से लेकर हाईवे किनारे तक, नशे का सामान ऐसे घूम रहा है जैसे सब्जी का थैला।

जिले के प्रमुख नशा पॉकेट ग्रामीणों की गवाही सबसे बड़ा दस्तावेज

स्थानीय लोगों के अनुसार, चंदौली के कई थाना क्षेत्रों में लंबे समय से गांजे की सप्लाई बिना रुकावट जारी है। गांव वाले जानते हैं कि कहां कौन आता है, किस समय बाइक रुकती है, और किसके हाथों में पाउच दिए जाते हैं। चकिया थाना क्षेत्र के हेतिमपुर, हाजीपुर, बाड़ेपर यहां समय-समय पर सप्लाई की शिकायतें होती रहती हैं। ग्रामीणों का दावा है कि छापा पड़े ना पड़े, माल आता जाता रहता है। इलिया थाना क्षेत्र में बेन, तियरी युवाओं तक सबसे आसान पहुंच यहीं से बताई जाती है। बबुरी थाना क्षेत्र के बनौली चट्टी पर सूर्यास्त के बाद यह इलाका एक्टिव जोन में बदल जाता है। मुगलसराय थाना क्षेत्र का गोधना मोड़, धर्मशाला रोड (खोवा मंडी), दुल्हीपुर, पड़ाव, साहुपुरी। अलीनगर थाना क्षेत्र का भरछा, गगेहरा अड्डा बन चुका है। ग्रामीणों ने शिकायतें कई बार की, लेकिन विभाग अब तक नींद में सोता नजर आ रहा है। सैयदराजा थाना क्षेत्र का दुधारी, हाइवे के किनारे, ट्रकों और बसों के बीच नशे की अदला बदली अक्सर देखी जाती है।

आबकारी विभाग पर ग्रामीणों का आरोप सिर्फ कागज पर कार्रवाई, हकीकत में जीरो

ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के आरोप बेहद गंभीर हैं। उनके अनुसार शिकायत करने पर अधिकारी आएंगे, फोटो खिंचवाएंगे, दो पन्ने रिपोर्ट भेज देंगे…और बस। असली तस्कर तो पहले ही गायब हो जाते हैं। उनका कहना है कि शिकायतें महीनों से दी जा रही हैं, लेकिन कार्रवाई दिखावे से आगे नहीं बढ़ती। कई कस्बाई व्यापारियों ने कहा कि छोटे लड़के पकड़ लिए जाते हैं ताकि आंकड़े पूरे हों। बड़े सप्लायर डीओ सुभाष चन्द्र की की छाया में सुरक्षित रहते हैं।

कैसे चलता है चंदौली का गांजा नेटवर्क तस्करों की 3-लेयर रणनीति का खुलासा

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि चंदौली में नशा सप्लाई का नेटवर्क बेहद संगठित, स्मार्ट और तीन स्तरों पर काम करता है। पहला बाहरी सप्लाई चेन गांजा बिहार और झारखंड से ट्रेनों, बसों, निजी चारपहिया वाहन व बाइक से छोटे पाउच और पैकेट में आता है। यही वजह है कि रेलवे स्टेशन और बस अड्डों के आसपास डिलीवरी पॉइंट बने हुए हैं। दूसरा स्थानीय डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क बाइक सवार लड़के ही असली चेन हैं। ये कॉल आने पर तय पॉइंट पर छोटी खेप पहुंचाते हैं। जिनकी उम्र 18 से 25 वर्ष होती है ताकि पकड़े जाने पर छोटा केस लगे। तीसरा उपभोक्ताओं तक फाइनल डिलीवरी इनका नेटवर्क दुकानों, चाय–पान के ठेलों, सुनसान गलियों, फुटपाथ और नाके तक फैला है। कुछ मामलों में स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटर के आसपास भी इनकी सक्रियता देखी जा सकती है।

नशे का असर अपराधों की बढ़ती लिस्ट

पिछले दो वर्षों में, चंदौली पुलिस के रिकॉर्ड खुद कहते हैं कि चोरी, झपटमारी, बाइक चोरी, घरेलू कलह, युवाओं की आपसी मारपीट में बहुत तेजी से बढ़ोतरी हुई है। कई मामलों का सीधा लिंक नशा सेवन से जुड़ता है।
पुलिस का भी मानना है कि लड़ाई–झगड़े और छोटे अपराधों में नशा सेवन करने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।

सामाजिक संगठनों का आरोप नेटवर्क इतना मजबूत कि खुलेआम सप्लाई

चकिया, बबुरी, इलिया, अलीनगर, सैयदराजा के सामाजिक कार्यकर्ता खुलकर आरोप है कि ये लोग जानते हैं कि किस स्नैक्स सेंटर, किस मोड़ और किस चौराहे पर शाम के बाद सप्लाई होती है। यह कोई गुप्त बात नहीं है। लेकिन प्रशासन को या तो इसकी भनक नहीं लगती—या फिर वह लगने देना नहीं चाहता।ग्रामीणों का आरोप और भी गंभीर है उनका कहना है कि नशा का कारोबार चरम पर है, लेकिन कार्रवाई सिर्फ दिखावटी। असली खेलने वाले कभी पकड़े नहीं जाते।

आबकारी विभाग पर सबसे बड़ा सवाल

जिले में नशे के विस्तार को देखते हुए जनता के मन में कई तीखे सवाल उठ रहे हैं कि इतनी शिकायतों के बाद भी बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। छापे की जानकारी तस्करों को पहले कैसे मिल जाती है। पुलिस व आबकारी विभाग का संयुक्त अभियान क्यों नहीं चल रहा। आबकारी अधिकारी फील्ड में दिखाई ही नहीं देते। एक स्थानीय शिक्षक का कहना है कि नशा बेचने वाले खुलेआम घूमते हैं। विभाग कहता है हमें जानकारी नहीं है। पैसे के लिये सुभाष चन्द्र ने अपना दीन धर्म ईमान सब गांजे के कारोबारियों के हाथ बेच दिया है ।

पुलिस का दावा कार्रवाई कर रहे

नाम न छापने की शर्त पर कुछ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि हमने कई जगह चेकिंग की है, गिरफ्तारी भी हुई है, टीमें लगाई गई हैं। लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकारा कि इनका नेटवर्क बहुत मजबूत है। इसे खत्म करने में समय लगेगा। पुलिस के लिए यह लड़ाई आसान नहीं पर सवाल यह है कि आबकारी विभाग और प्रशासन तो लड़ाई शुरू करने को भी तैयार नहीं दिखते!

जिला रहना चाहिए सुरक्षित पर हालात उलट

नशे का यह फैलाव सिर्फ अपराध बढ़ा रहा ऐसा नहीं, बल्कि युवाओं का भविष्य, सामाजिक माहौल, परिवारों की शांति, गांवों की संस्कृति सब पर भारी असर डाल रहा है। पूरा जिला धीरे–धीरे नशे के दलदल में उतरता दिख रहा है। लोगों की मांग है कि पूरे जिले में एक बड़ा, सतत, बिना लीक हुए अभियान चलाया जाए तभी नशा माफिया खत्म होगा। लेकिन यह तभी होगा जब आबकारी विभाग जागे, पुलिस खुले अभियान चलाए और अधिकारियों की मिलीभगत पर भी कार्रवाई हो।वरना चंदौली में नशा कारोबार ऐसे ही फलता–फूलता रहेगा और प्रशासन सिर्फ कागज़ के जंगल में दौड़ता नजर आएगा।

* चंदौली में गांजा नेटवर्क तेजी से फैलता, कई थाना क्षेत्र बने सप्लाई पॉइंट
* आबकारी विभाग की कार्रवाई पर लोगों में भारी अविश्वास
* तस्करों की 3-लेयर सप्लाई चेन बिहार/झारखंड से खेप, बाइक वालों के जरिए डिलीवरी
* गांवों, चौराहों, हाईवे, ठेलों और स्कूलों तक पहुंच
* अपराधों में पिछले दो साल में भारी बढ़ोतरी
* ग्रामीणों का सीधा आरोप मिलीभगत नहीं होती तो सिस्टम इतना चुप नहीं रहता
* प्रशासन से बड़े और संयुक्त अभियान की मांग तेज

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