वाराणसी

प्राधिकरण के सचिव डॉ. वेद प्रकाश मिश्रा ने की जन सुनवाई, वादकारियों को समस्याओं से राहत दिलाई

वीडीए की पहल से बढ़ी पारदर्शिता, मानचित्र निस्तारण कैम्प में जनता को त्वरित समाधान

● प्राधिकरण के सचिव डॉ. वेद प्रकाश मिश्रा ने की जन सुनवाई, वादकारियों को समस्याओं से राहत दिलाई

● वीडीए की पहल से बढ़ी पारदर्शिता, मानचित्र निस्तारण कैम्प में जनता को त्वरित समाधान

● वीडीए सचिव डॉ. वेद प्रकाश मिश्रा ने स्वयं सुनी शिकायतें

● 72 भवन स्वामी पहुंचे, 28 नोटिस प्रकरणों की सुनवाई हुई

● 11 मानचित्रों का मौके पर निस्तारण, 7 को मिली स्वीकृति

● नियमित साप्ताहिक कैम्प से मिलेंगे समयबद्ध फैसले

● भवन स्वामियों को एक ही स्थान पर सभी विभागों की सुविधा

 

अमित मौर्य

 

वाराणसी। वीडीए लंबे समय से शहर के विकास और नियोजन को लेकर आलोचनाओं के घेरे में रहा है, लेकिन हाल के दिनों में प्राधिकरण ने जिस तेजी, पारदर्शिता और जवाबदेही का मॉडल खड़ा किया है, उसने शहर के भवन स्वामियों में भरोसा जगाया है। उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा के निर्देश पर सचिव डॉ. वेद प्रकाश मिश्रा द्वारा 20 नवंबर 2025 को आयोजित मानचित्र निस्तारण एवं नोटिस सुनवाई कैम्प ने साबित किया कि यदि मंशा साफ हो और सिस्टम सक्रिय, तो वर्षों से लंबित मामलों का निस्तारण महज़ कुछ घंटे में किया जा सकता है। कैम्प में जिस तरह सभी अनुभाग एक ही छत के नीचे मौजूद रहे, वह वाराणसी के विकास प्रशासन में एक नई संस्कृति की शुरुआत है।

एक ही स्थान पर सभी अनुभाग

इस कैम्प की सबसे खास बात यह रही कि प्राधिकरण के सभी संबंधित अनुभाग, नियोजन, आवाप्ति, सीलिंग, विधि, जोनल अधिकारी, अवर अभियंता और लिपिक एक ही जगह मौजूद रहे। इसके चलते भवन स्वामी को अलग-अलग टेबलों या अनुभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़े और तकनीकी आपत्तियों का तुरंत समाधान हुआ।
नोटिस से जुड़े प्रकरणों पर तत्काल जांच और रिपोर्टिंग संभव हो सकी और सबसे महत्वपूर्ण प्राधिकरण के भीतर तालमेल और जवाबदेही की नई प्रणाली स्थापित हुई सचिव डॉ. मिश्रा ने सभी अनुभागाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिया कि मानचित्र आपत्तियों और नोटिसों का ऑनलाइन व ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से प्राप्त प्रत्येक प्रकरण का तत्काल समाधान किया जाए।

11 मानचित्रों का मौके पर निस्तारण

कैम्प के दौरान नियोजन अनुभाग ने कुल 11 मानचित्रों का तत्काल निस्तारण किया। ये वे मानचित्र थे जो या तो तकनीकी आपत्तियों में फंसे थे या भवन स्वामियों को कुछ आवश्यक दस्तावेजों की कमी थी। मौके पर अधिकारियों द्वारा कमियों की पहचान, दस्तावेज सत्यापन, पुनः जियो-रेफरेंसिंग और तकनीकी मानकों का मिलान किया गया और तत्पश्चात निस्तारण की प्रक्रिया पूरी की गई।

7 लंबित मानचित्रों को स्वीकृति

लंबे समय से अटके 7 मानचित्रों को कैम्प में ही स्वीकृति प्रदान की गई। कई भवन स्वामी महीनों से प्राधिकरण के चक्कर काट रहे थे, मगर पहली बार एक ही दिन में उनकी समस्याओं का समाधान हुआ। इससे यह संदेश गया कि वी.डी.ए. अब रुकावट आधारित व्यवस्था से हटकर समाधान आधारित व्यवस्था की ओर अग्रसर है।

नए शमन प्रकरणों पर तुरंत कार्रवाई

कैम्प में 3 नए शमन मानचित्र आवेदन प्राप्त हुए। इन पर नियोजन अनुभाग ने मौके पर ही प्रारंभिक जांच शुरू कर दी और संबंधित फाइलें विधि तथा प्रवर्तन अनुभाग को हस्तांतरित कर दी गईं। कैम्प के दौरान यह भी स्पष्ट निर्देश दिया गया कि जहां भी शमन के बावजूद निर्माण मानक विपरीत पाया जाए, वहां प्रवर्तन टीम विधिक कार्रवाई करे।

गलत, अमान्य मानचित्रों पर ध्वस्तीकरण का आदेश

सचिव ने उन मानचित्रों के संबंध में भी सख्त निर्देश जारी किए जिन्हें तकनीकी त्रुटियों या नियमों के उल्लंघन के कारण रिजेक्ट किया गया था। उन्होंने प्रवर्तन टीम से कहा कि बिना स्वीकृति के निर्माण गलत तथ्य प्रस्तुत करने वाले तथा नियमों के विरुद्ध बनाई गई इमारतों पर आवश्यक विधिक कार्यवाही और ध्वस्तीकरण सुनिश्चित किया जाए। इससे यह साफ हो गया कि प्राधिकरण अब नियमों को कड़ाई से लागू करने के मूड में है।

72 भवन स्वामी रहे उपस्थित

कैम्प में 72 भवन स्वामियों की उपस्थिति अपने आप में बड़ा संदेश देती है। लोगों ने खुलकर अपनी समस्याएं रखीं, जमीन के दस्तावेजों की तकनीकी विसंगतियां, नोटिस के आधार पर मानचित्र स्वीकृति में देरी, सीलिंग और आवाप्ति से जुड़ी समस्याएं, शमन के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं, पुराने प्रकरणों में लंबित रिपोर्ट सचिव और विभागीय अधिकारियों ने धैर्यपूर्वक प्रत्येक प्रकरण सुना और मौके पर ही कार्रवाई की पहल की।

28 नोटिस प्रकरणों की सुनवाई

भवन स्वामियों को जारी 28 नोटिसों की सुनवाई भी इसी कैम्प में की गई। इनमें निर्माण मानकों का उल्लंघन, मानचित्र अनुरूप परिवर्तन न करना अवैध हिस्से जोड़ना और गलत जानकारी प्रस्तुत करना जैसे मामले शामिल थे। प्रत्येक प्रकरण की फाइल, जियो-लोकेशन, निरीक्षण रिपोर्ट और फोटो सबूतों को सामने रखकर सुनवाई की गई। कई मामलों में तत्काल संशोधन के निर्देश दिए गए, तो कुछ मामलों में प्रवर्तन टीम को कार्रवाई हेतु आदेशित किया गया। यह पूरी प्रक्रिया नोटिस डराने का नहीं, न्याय देने का साधन है इस विचार को मजबूत करती है।

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