उत्तर प्रदेश

सूबे के डीजीपी राजीव कृष्ण ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस क्रीड़ा भवन का किया लोकार्पण, पीएसी के जवानों का हुआ उत्साहवर्धन

पीएसी की गौरवशाली विरासत को नई उड़ान, आधुनिक क्षमता-वृद्धि की दिशा में ऐतिहासिक कदम

● सूबे के डीजीपी राजीव कृष्ण ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस क्रीड़ा भवन का किया लोकार्पण, पीएसी के जवानों का हुआ उत्साहवर्धन

● पीएसी की गौरवशाली विरासत को नई उड़ान, आधुनिक क्षमता-वृद्धि की दिशा में ऐतिहासिक कदम

● पीएसी की विरासत को आधुनिक रूप—नेताजी क्रीड़ा भवन का लोकार्पण

● डीजीपी ने किया पीएसी संग्रहालय का अवलोकन—इतिहास और शौर्य का संगम

● नई ऊर्जा, नई दिशा जवानों के लिए अत्याधुनिक क्रीड़ा सुविधाएं

● भविष्य की चुनौतियों पर डीजीपी का फोकस

● वरिष्ठ नेतृत्व की उपस्थिति में संगठनात्मक मजबूती का संदेश

● आधुनिकीकरण की राह पर पीएसी तकनीक व संसाधनों का उन्नयन

● प्रेरणा से संकल्प की ओर विरासत को गर्व से आगे बढ़ाते जवान

 

शुभम श्रीवास्तव

 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था की रीढ़ कही जाने वाली प्रांतीय सशस्त्र बल ने अपनी गौरवशाली परंपरा और आधुनिक दौर की चुनौतियों के बीच एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने न सिर्फ इसकी संगठनात्मक संरचना को मजबूत किया है, बल्कि बल की भविष्य-रेखा को भी अधिक सुदृढ़ और सक्षम बनाया है। 35वीं वाहिनी पीएसी परिसर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस क्रीड़ा भवन के उन्नयन का लोकार्पण और उसके बाद पीएसी संग्रहालय का अवलोकन केवल औपचारिकता भर नहीं, बल्कि उस ऐतिहासिक यात्रा का सम्मान है जिसने दशकों से उत्तर प्रदेश को सुरक्षा, अनुशासन और मानवीय सेवा की मजबूत ढाल प्रदान की है। डीजीपी राजीव कृष्ण की अगुवाई में हुआ यह समारोह पीएसी को एक नए युग में ले जाने वाले परिवर्तनकारी संकेतों को स्पष्ट करता है।

* नेताजी सुभाष चंद्र बोस क्रीड़ा भवन का उन्नयन पीएसी जवानों के शारीरिक और मानसिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
* डीजीपी द्वारा पीएसी संग्रहालय का अवलोकन गौरवशाली इतिहास और बलिदानों को समर्पित
* भविष्य की जरूरतों पर विस्तृत विचार-विमर्श रणनीतिक संसाधन वृद्धि और आधुनिक तकनीक का समावेश
* वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति संगठनात्मक एकता और सामूहिक नेतृत्व का सशक्त उदाहरण
* पीएसी की भावी रणनीति चुनौतियों से निपटने को तैयार आधुनिक, सक्षम, तकनीकी रूप से उन्नत बल
* ऐतिहासिक दस्तावेजों, धरोहरों की सराहना—जवानों के मनोबल को बढ़ाने वाला कदम

प्रदेश की सुरक्षा का आधार स्तंभ पीएसी की नई दिशा

लखनऊ की सुबह दिनांक 17 नवम्बर 2025 को उस समय विशेष हो गई, जब उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण 35वीं वाहिनी पीएसी लखनऊ के परिसर पहुंचे। यहां उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस क्रीड़ा भवन के उच्चीकृत कार्यों का लोकार्पण किया। जो पीएसी जवानों के शारीरिक प्रशिक्षण, मानसिक दृढ़ता और तकनीकी तैयारी को नई ऊंचाइयां देने के लिए विकसित किया गया है। प्रांतीय सशस्त्र बल की महत्वाकांक्षाएं केवल परंपरा तक सीमित नहीं। यह बल आज देश की बदलती सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप खुद को पुनर्गठित कर रहा है और यह समारोह उसी यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर एक प्रतीकात्मक संदेश

क्रीड़ा भवन का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर होना अपने आप में एक प्रेरणादायक संदेश देता है। नेताजी का नेतृत्व, देशभक्ति, अनुशासन और पराक्रम पीएसी की कार्यशैली के मूल में रहा है। उच्चीकृत क्रीड़ा भवन में अब आधुनिक जिम उपकरण, स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग ट्रेनिंग एरिया, इनडोर स्पोर्ट्स सुविधाएं, टेक्निकल फिटनेस ट्रेनिंग सेक्शनमानसिक स्वास्थ्य और योग सुविधा जैसी व्यवस्थाएं शामिल की गई हैं, जो जवानों को न सिर्फ शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

पीएसी संग्रहालय विरासत की गूंज, साहस का दस्तावेज

डीजीपी राजीव कृष्ण इसके बाद पीएसी संग्रहालय पहुंचे, जहां उन्होंने बल के दशकों पुराने इतिहास, धरोहरों, दस्तावेजों और स्मृतियों का अवलोकन किया। संग्रहालय में 1948 में बल की स्थापना से जुड़े दस्तावेज, पीएसी की सफल ऑपरेशनों की तस्वीरें, वीर जवानों के साहस और बलिदान की कहानियां, युद्ध सामग्री, बैज, गजट और ऐतिहासिक रजिस्टर, आपदाओं और राहत कार्यों में पीएसी की भूमिका का समृद्ध संकलन मौजूद है। डीजीपी ने संग्रहालय की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह युवा जवानों को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ता है और उन्हें भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए प्रेरित करता है।

विरासत और भविष्य का संगम

संग्रहालय के अवलोकन के बाद डीजीपी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक की, जिसमें बल की भावी योजनाओं, संसाधन उन्नयन, तकनीकी क्षमता, प्रशिक्षण प्रक्रिया, और आधुनिक चुनौतियों पर गहन चर्चा की गई। बैठक में डिजिटल मॉनिटरिंग और कमांड सिस्टम को मजबूत करना, अत्याधुनिक वाहनों और टेक्निकल उपकरणों का समावेश, दंगा नियंत्रण और आपदा प्रबंधन के लिए उच्चस्तरीय तैयारी, संचार उपकरणों का आधुनिकीकरण, जवानों की वेलनेस व मानसिक स्वास्थ्य क्षमता को बढ़ाना व साइबर ट्रेनिंग और तकनीकी अपडेट का नियमित आयोजन पर चर्चा की। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि पीएसी को भविष्य की कानून-व्यवस्था चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना इस बैठक का मुख्य उद्देश्य रहा।

नेतृत्व और टीम वर्क का अद्भुत उदाहरण

इस अवसर पर एडीजी पीएसी डॉ. आर.के. स्वर्णकार, डीआईजी पीएसी मुख्यालय लखनऊ अनीस अहमद, डीआईजी पीएसी लखनऊ सुनीता सिंह, डीआईजी पीएसी अनुभाग लखनऊ किरीट राठौर तथा 35वीं वाहिनी के सेना नायक अमित कुमार सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों की एक साथ उपस्थिति संगठनात्मक एकता, नेतृत्व की प्रतिबद्धता और मिशन-उन्मुख सोच का प्रतीक बनकर सामने आई। यह स्पष्ट संदेश देता है कि पीएसी के आधुनिकीकरण को केवल योजनाओं में सीमित नहीं रखा जाएगा बल्कि इसे जमीन पर तेज़ी से लागू किया जाएगा।

क्षमता-वृद्धि की नई परिकल्पना आधुनिक युग की जरूरतें

आज अपराध केवल पारंपरिक रूप में नहीं रह गया है साइबर अपराध, भीड़ प्रबंधन, शहरी सुरक्षा, आपदा राहत और आतंकवाद जैसी चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। इन परिस्थितियों में पीएसी को नई क्षमताओं की आवश्यकता थी, और लखनऊ का यह कार्यक्रम उसी दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है। नए प्रशिक्षण मानकों, आधुनिक उपकरणों, डिजिटलीकरण और सामरिक कौशल के साथ पीएसी आने वाले समय मे अधिक तेज, अधिक प्रतिक्रियाशील, अधिक तकनीकी और अधिक मानवीय रूप में उभरने की तैयारी कर रही है।

प्रेरणा, गर्व और संकल्प

क्रीड़ा भवन का उन्नयन और संग्रहालय का विस्तार केवल एक भवन या प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक मानसिक और सांस्कृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। युवा जवान जब इस संग्रहालय में अपने पूर्वजों के साहस की झलक देखते हैं, तो उनमें कर्तव्य, समर्पण और अनुशासन का भाव और मजबूत होता है। यह कार्यक्रम एक संदेश देता है कि पीएसी केवल वर्दी नहीं, एक विरासत है केवल बल नहीं, एक विश्वास है। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण के नेतृत्व में 35वीं वाहिनी पीएसी में हुआ यह समारोह उत्तर प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था के विकास, आधुनिकीकरण और बेहतर भविष्य की दिशा में उठाया गया एक बड़ा और निर्णायक कदम है। यह कार्यक्रम पीएसी की ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक क्षमता दोनों को एक मंच पर लाने का प्रतीक है, जहां अतीत की गौरव गाथाएं और भविष्य की संभावनाएं साथ चलती हैं। पीएसी आज पहले से अधिक मजबूत, अधिक सक्षम और अधिक तैयार खड़ी है—राज्य की सुरक्षा के लिए, जनता के विश्वास के लिए और आने वाली पीढ़ियों के प्रेरणा-स्त्रोत के रूप में।

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