उत्तर प्रदेश

परिवहन मंत्री आप के एआरटीओ चोर लुटेरे, बेईमान व भ्र्ष्टाचारी, आप की इज्जत से खेल रहे बारी- बारी

● परिवहन मंत्री आप के एआरटीओ चोर लुटेरे, बेईमान व भ्र्ष्टाचारी, आप की इज्जत से खेल रहे बारी- बारी

◆ छह जिलों में फैला वसूली साम्राज्य, दयाशंकर सिंह की नाक के नीचे दो साल से लूट का नंगा नाच

● एआरटीओ, पीटीओ ने बनाया ओवरलोड का ‘सिंडिकेट

● गाड़ी ओवरलोड हो या न हो, वसूली फिक्स रकम न दी तो चालान-सीज की धमकी

● रायबरेली सीमा पर एआरटीओ अंबुज कुमार 3500 और पीटीओ रेहाना 1500 की उगाही में रंगे हाथ

● दो साल पहले पकड़े गए दलाल फिर सक्रिय विभाग ने आंख मूंद ली या हिस्सा बढ़ा

● गरीब रिक्शा-टेम्पो वालों से बदसलूकी में अव्वल रेहाना मैडम, अब खुद फंसी दलदल में

● अमेठी, रायबरेली, प्रतापगढ़, फतेहपुर, सुल्तानपुर और उन्नाव तक फैला जाल

● परिवहन कार्यालय तक घुसा ‘दलाल तंत्र’, अफसरों के व्हाट्सएप दिखाकर करते वसूली

● एसपी यशवीर सिंह की कार्रवाई से मची खलबली, 18 दलाल चिन्हित कई कर्मचारी घेरे में

● परिवहन मंत्री मौन ‘शून्य भ्रष्टाचार’ के दावे का सबसे बड़ा आईना

 

नैमिष प्रताप सिंह

 

रायबरेली/लखनऊ/उत्तर प्रदेश में सड़कें सिर्फ यात्रियों का बोझ नहीं ढो रही भ्रष्टाचार का पूरा साम्राज्य भी इन्हीं सड़कों पर पनप रहा है। रायबरेली, अमेठी और प्रतापगढ़ की सीमाओं पर ओवरलोड जांच के नाम पर पिछले दो साल से चल रहा उगाही तंत्र अब नंगा हो चुका है। एआरटीओ से लेकर पीटीओ तक सबकी जेबें इस अवैध खेल से गर्म होती रहीं और परिवहन मंत्री तक शायद यह सब पहुंच कर भी ठंडी राख की तरह मौन बैठे रहे। जिस सिस्टम को सरकार जीरो टॉलरेंस का ब्रांड बताती है, वही सिस्टम अब जनता की जेब पर डाका डालने का सबसे संगठित औजार बन चुका है। दलालों का ऐसा नेटवर्क सक्रिय है कि गरीब रिक्शा-टेम्पो वालों से लेकर बाहरी मालवाहक ट्रक तक हर चलती चीज से पैसे निचोड़े जा रहे हैं।

काला सच नहीं काला कारोबार, जो छह जिलों में फैला

रायबरेली, अमेठी, प्रतापगढ़, फतेहपुर, सुल्तानपुर और उन्नाव इन छह जिलों में ओवरलोड चेकिंग का नाम लेकर जो उगाही का खेल चल रहा है, वह किसी एक अफसर, एक दलाल या एक टीम का काम नहीं है।
यह एक संगठित वसूली साम्राज्य है। जहां हर व्यक्ति की भूमिका तय है। एक जगह से गाड़ी निकलती है, दूसरी जगह वसूली का संदेश जाता है, तीसरी जगह दलाल रोकते हैं, चौथी जगह सीधे रकम पहुंचती है। इस नेटवर्क में एआरटीओ, पीटीओ, चेकिंग टीमें और दलाल सभी की हिस्सेदारी बंटी है। यह कोई आज की कहानी नहीं है, दो साल पुराने अवैध खेल का पुनरागमन है।

वर्ष 2023 में पकड़े गए दलाल वापस, विभाग की चुप्पी संदिग्ध

2023 में जब अमेठी व प्रतापगढ़ में दलालों के एक बड़े गैंग का भंडाफोड़ हुआ था, उस समय दावा किया गया था कि नेटवर्क खत्म कर दिया गया है। लेकिन यह दावा भी उसी की तरह कागजी निकला जैसे अक्सर सरकारी दावे निकलते हैं। अब वही दलाल वही तरीका और वही रेट कार्ड फिर से एक्टिव है। सवाल उठता है कि क्या विभाग को इस पुनर्जीवित रैकेट की भनक नहीं लगी, या फिर इस बार उनकी हिस्सेदारी और मजबूत हो गई है इसलिए वे चुप हैं।

रायबरेली सीमा पर नंबरदार वसूली एआरटीओ व पीटीओ की भूमिका संदिग्ध

सूत्रों की मानें तो एआरटीओ अंबुज कुमार खुद 3500 रुपए प्रति गाड़ी तक की धन उगाही कर रहे हैं। वहीं पीटीओ रेहाना प्रति वाहन 1500 रुपए वसूल रही हैं। जिले की दो सबसे महत्वपूर्ण सीटों पर काबिज अधिकारी खुलेआम अवैध कमाई कर रहे थे और हैरत की बात यह कि यह सब लगातार, बेधड़क और बिना किसी डर के चल रहा था।

रेहाना मैडम जो गरीबों पर शेरनी, अमीरों पर भीगी बिल्ली!

सबसे दर्दनाक तस्वीर गरीब रिक्शा, ई-रिक्शा और टेम्पो चालकों की है। रेहाना मैडम उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर चालान काटने और वाहन सीज करने के लिए कुख्यात रही हैं।
गरीबों से बात करते समय उनका रवैया ऐसा होता था जैसे वे खुद जीरो टॉलरेंस की ब्रांड एंबेसडर हों।
लेकिन आज वही रेहाना भ्रष्टाचार के कीचड़ में गर्दन तक डूबी मिली हैं। गरीबों की हाय और बद्दुआ वाकई में बहुत जल्दी लगती है और इस बार यह सीधे पीटीओ दफ्तर में लगी है।

डीह थाने में दर्ज 19 लोगों पर नामजद मुकदमा 4 से 5 कर्मचारी भी फंसे

एसपी यशवीर सिंह की सक्रियता ने पूरे नेटवर्क में खलबली मचा दी है। डीह थाने में दर्ज मुकदमे में दलाल सहित 4 से 5 परिवहन कर्मचारी भी रडार पर हैं।
इनमें वे लोग शामिल हैं जो अमेठी, रायबरेली और प्रतापगढ़ में चल रहे इस उगाही नेटवर्क की रीढ़ थे।
इनकी भूमिका अब सिर्फ जांच का विषय नहीं, बल्कि कार्रवाई की मांग बन चुकी है।

विकास भवन में भी दलालों की घुसपैठ व्हाट्सएप दिखाकर धमकाते हैं अफसरों को

सिर्फ परिवहन विभाग ही नहीं, बल्कि रायबरेली के विकास भवन तक इस नेटवर्क की जड़ें फैल चुकी हैं।
यहां बैठे दलाल उच्च अधिकारियों के व्हाट्सएप संदेश, फॉरवर्डेड चैट और फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाकर पीड़ितों को डराते हैं कि देखो, हम ऊपर तक लिंक में हैं… हमारा कोई कुछ नहीं कर सकता और फिर उसी डर की कीमत वसूली जाती थी। एसपी की नजर इन पर भी है और जल्द ही कार्रवाई की दूसरी लिस्ट निकलने के आसार हैं।

यह सब दो साल से चलता रहा, पर परिवहन मंत्री को पता ही नहीं?

यह घटना सिर्फ एक जिला या दो अफसरों के भ्रष्टाचार की नहीं है। यह पूरे परिवहन विभाग के गिर चुके नैतिक स्तर का आईना है और सबसे बड़ा सवाल सुर्खियों के पार जाकर सीधे परिवहन मंत्री के दरवाके पर दस्तक देता है। क्या उन्होंने विभागीय समीक्षा में कभी इस मुद्दे की बात नहीं सुनी, या फिर भ्रष्टाचार की ये आवाजें उनके ऑफिस तक पहुंचकर भी रास्ते में ही दबा दी जाती थीं। जब छह जिलों तक फैले सिंडिकेट की उगाही महीने में करोड़ों तक पहुंचती हो तो मंत्री का मौन सबसे ज्यादा संदिग्ध लगता है। जीरो टॉलरेंस के नारे सिर्फ मंचों तक अच्छे लगते हैं, जमीन पर यह विभाग सौ टका टॉलरेंस पर चल रहा है।

छह जिलों में कैसे चलता है यह पूरा रैकेट, सिस्टम का असली ब्लूप्रिंट

इस उगाही नेटवर्क का पूरा मॉडल कुछ इस तरह चलता था। एसपी से बचने के लिए मैदानी स्तर पर निगरानी रखने वाले चिह्नित दलाल, हर गुजरने वाली गाड़ी की सूचना ग्रुप में कौन किससे कितना वसूलेगा, गाड़ी नंबर दिखते ही चेकिंग टीमें तैयार, पैसे की वसूली तय रेट कार्ड, क्लियर होने का संदेश, ताकि आगे दोबारा न रोका जाए, रकम का अधिकारी, दलाल, स्टाफ में बंटवारा प्रतिशत में। इसमें एआरटीओ और पीटीओ सबसे ऊपर की कमाई पर बैठे थे इसलिए इनका नाम आना किसी भी तरह चौंकाने वाला नहीं।

एसपी यशवीर सिंह ने खोला मोर्चा

रायबरेली के कप्तान यशवीर सिंह इस पूरे खेल को तोड़ने के लिए पिछले कुछ हफ्तों से गहराई से मॉनिटरिंग कर रहे थे। उन्होंने अलग-अलग थानों से इनपुट लिए, कुछ ड्राइवरों को सेफ स्पेस में बुलाकर बयान दर्ज किए, वहीं दलालों की कॉल डिटेल और लोकेशन पर भी गोपनीय रूप से टीम काम करती रही। यही वजह है कि जब मुकदमा दर्ज हुआ तो नेटवर्क का बड़ा हिस्सा उजागर हो गया। यह शुरुआत है पूरी सफाई अभी बाकी है।

जनता के जेब पर डाका, सरकार के गाल पर तमाचा

जब एक गाड़ी से 1500 से 3500 तक एडवांस वसूली हो। पीटीओ गरीबों पर सत्ता का डंडा चलाए लेकिन खुद अवैध वसूली पर लगी हो, एआरटीओ की जेब हर गुजरने वाली गाड़ी से मोटी हो और मंत्री मौन रहें तो सवाल सिर्फ भ्रष्टाचार का नहीं, पूरी शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता का बन जाता है। यह घटना उत्तर प्रदेश के परिवहन विभाग के उस चेहरे को दिखाती है, जो सीसीटीवी, इंटीग्रेटेड सिस्टम, पोर्टल और ई-गवर्नेंस की परतों के नीचे छिपा हुआ था।

* वसूली नेटवर्क छह जिलों में फैला हुआ, संगठित गिरोह की तरह कार्य।
* एआरटीओ और पीटीओ पर सीधा वसूली का आरोप रेट तय, हिस्सेदारी तय।
* 2023 के पकड़े गए दलाल फिर सक्रिय विभाग चुप।
* गरीब ई-रिक्शा, टेम्पो वालों पर अत्याचार, बड़े ट्रकों से सेटिंग।
* डीह थाने में मुकदमा, 19 नाम दर्ज दलाल सहित कई कर्मचारी घेरे में।
* परिवहन कार्यालय में भी दलाल सक्रिय अफसरों के नाम पर डराकर वसूली।
* एसपी यशवीर सिंह की कार्रवाई से नेटवर्क में खलबली।
* परिवहन मंत्री का मौन सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न।

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