चन्दौली

चन्दौली-जिला आबकारी अधिकारी का गोलमाल: सुभाष चन्द्र का गांजा व्यापारीयों को वरदहस्त,माल मुद्रा की माया में सब हो गए है, “मदमस्त”

चंदौली में सेक्टर इंस्पेक्टरो की मेहरबानी से फल-फूल रहा अवैध गांजा साम्राज्य

● चन्दौली-जिला आबकारी अधिकारी का गोलमाल

● सुभाष चन्द्र का गांजा व्यापारीयों को वरदहस्त, माल मुद्रा की माया में सब हो गए है मदमस्त

● चंदौली में सेक्टर इंस्पेक्टरो की मेहरबानी से फल-फूल रहा अवैध गांजा साम्राज्य

● प्रशासन की चुप्पी ने बढ़ाई तस्करों की हिम्मत, थाना क्षेत्रों में खुलेआम सप्लाई युवाओं का भविष्य दांव पर

● आबकारी की चुप्पी नहीं, संरक्षण की गूंज

● लगातार शिकायतों के बावजूद विभाग की खामोशी अब सवाल नहीं आरोप की पुष्टि बनी

● हेतिमपुर और बाड़ेपर में किताबों की जगह युवाओं के हाथों में नशे के पाउच

● इलिया में पन्ना लाल का ‘नशा साम्राज्य’ सूचना देने पर ग्रामीणों को ही मिलती है धमकी

● बनौली चट्टी में सचिदानंद की खुलेआम बादशाहत, हर तीसरे दिन नया सप्लायर…

● मुगलसराय जिले का सबसे बड़ा नशा का अड्डा, गोधना मोड़ से खोवा मंडी तक गांजा ऐसे बिकता जैसे किराना

● अलीनगर में हाईवे बना नशा एक्सप्रेस, भरछा गगेहरा में रात होते ही ट्रकों और दोपहियों से तेज डिलीवरी

● सैयदराजा में बॉर्डर का बफर बना हथियार, दुधारी से आसानी से पार होता माल

● पुलिस बेबस, विभाग बेपरवाह पुलिसकर्मी की कड़वी सच्चाई

 

राजकुमार सोनकर

चंदौली ( उ०प्र०)। जिले में अवैध गांजा कारोबार सिर्फ फल-फूल नहीं रहा… यह जिले की कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक ईमानदारी और समाज की रीढ़ पर खुलेआम लात मार रहा है। डरावनी बात यह है कि यह सब उसी विभाग की नाक के नीचे हो रहा है जिसका काम नशे के कारोबार पर नकेल कसना है। बार-बार शिकायतें, खबरें, जनदबाव, पुलिस इनपुट…सब बेअसर। जिला आबकारी अधिकारी और उनके मातहत न सिर्फ चुप हैं, बल्कि स्थानीय लोगों का कहना है कि चुप्पी का मतलब सेटिंग है। चंदौली में नशे का नेटवर्क अब इतना बेखौफ और शक्तिशाली हो चुका है कि तस्कर रात-दिन खुलेआम सप्लाई कर रहे हैं, और अधिकारी चुपचाप देख रहे हैं जैसे सब कुछ सामान्य हो। यह सिर्फ प्रशासन की नाकामी नहीं, एक पूरे जिले की बरबादी की कहानी है। स्कूल-कॉलेज के बच्चे नशे के दलदल में, ग्रामीण भयभीत, पुलिस असहाय, और विभाग ‘सेटिंग’ के कारण सुन्न। रिपोर्ट बताती है कि कौन से इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, कौन लोग इस गोरखधंधे को चला रहे हैं, कैसे संरक्षण मिल रहा है, और क्यों प्रदेश सरकार की ‘नशामुक्ति’ की घोषणाएं चंदौली में मजाक बन चुकी हैं। जिले में अवैध गतिविधियां तब फलती-फूलती हैं जब प्रशासन सो जाए या फिर सोने का नाटक करे। चंदौली में चल रहा अवैध गांजा कारोबार इसी नकली नींद का सबसे खतरनाक उदाहरण है। पिछले कई महीनों से ग्रामीण, दुकानदार, सामाजिक समूह और स्थानीय पत्रकार लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि जिले के कई थाना क्षेत्रों में गांजा की सप्लाई खुलेआम हो रही है। लेकिन जिला आबकारी सुभाष चन्द्र की नजर में सब चंगा है अवैध वसूली में ये हो गया नँगा है। इसकी ओर से न कोई छापेमारी, न कोई गिरफ्तारी, न कोई रिपोर्ट मानो पूरा विभाग इस अपराध के आगे हथियार डाल चुका है या फिर उसका हिस्सा बन गया है।

आबकारी की चुप्पी अब सिर्फ संदेह नहीं, आरोपों की पुष्टि

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला आबकारी अधिकारी सुभाष चन्द्र गांजा कारोबारियों से अपनी हिस्सेदारी तय कर चुका हैं। यही कारण है कि रोज सप्लाई होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। आबकारी विभाग के ही एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा ऊपर तक सेटिंग चलती है। नीचे वालों को मना किया जाता है। जो बोलता है उसे लाइन से बाहर कर देते हैं। अगर विभाग के अंदर से ऐसी आवाजें उठ रही हैं, तो समझना आसान है कि किस स्तर पर खेल चल रहा है।

चकिया का हेतिमपुर और बाड़ेपर थानाक्षेत्र शाम होते ही नशा मंडी में तब्दील

चकिया के हेतिमपुर और बाड़ेपर में गांधीजी की पंचायत नहीं, गांजा की महापंचायत हर शाम जमती है। स्थानीय युवाओं के हाथों में किताबें नहीं, गांजा के पाउच दिखते हैं। माता-पिता चिंतित हैं कि उनके बच्चे धीरे-धीरे नशे की जकड़ में जा रहे हैं। कई अभिभावक कहते हैं कि पुलिस-आबकारी को बताओ तो उल्टा हमारे ही बच्चों को रोक-टोक की धमकी मिलने लगती है।

इलिया थाना क्षेत्र का बेन तियरी में पन्ना लाल का दबदबा

इलिया के बेन और तियरी गांव में लोग खुलकर कुछ नहीं बोलते। कारण क्षेत्र में पन्ना लाल द्वारा संचालित बड़ा नेटवर्क। पुलिस या आबकारी को जानकारी देने पर सूचना उधर दबंगों तक पहुंच जाती है और पुलिस का मुखबिर बनते-बनते आम नागरिक खुद ही माफिया की सूची में शामिल हो जाता है।

बबुरी थाना क्षेत्र का बनौली चट्टी जहां सचिदानंद तिवारी का चलता है ओपन रैकेट

बनौली चट्टी लंबे समय से अवैध नशा व्यापार का स्थायी अड्डा बना हुआ है। यहां हर तीसरे दिन नया सप्लायर आता है। सूत्रों का कहना है कि शिकायत करने वाला ही बाद में परेशान होता है। विभाग वालों की मिलीभगत से कारोबार बढ़ रहा है।

मुगलसराय जिले का सबसे बड़ा गांजा हब

अगर चंदौली का सबसे बड़ा नशा केंद्र कहीं है तो वह है मुगलसराय। गोधना मोड़, धर्मशाला रोड, खोवा मंडी, दुल्हीपुर, पड़ाव, साहुपुरी इन जगहों पर गांजा ऐसा बिकता है जैसे कोई सामान्य किराना का सामान हो। धर्मशाला रोड के एक दुकानदार ने कहा कि
यहां प्रतिदिन माल आता है और बिकता है। किसी को डर नहीं, ऊपर वालों का वरदहस्त जो मिला है।

अलीनगर थाना क्षेत्र हाईवे किनारे रात में सप्लाई आसान

अलीनगर के भरछा और गगेहरा गांव हाईवे की वजह से पॉइंट-टू-पॉइंट सप्लाई रूट बन चुके हैं। रात में ट्रकों, पिकअप और दोपहिया वाहनों से तेजी से माल उतरता है। सूत्रों की मानें तो आने-जाने वाली गाड़ियों की कभी जांच नहीं होती क्योंकि सबको पता है क्या उतर रहा है।

सैयदराजा थाना बिहार सीमा ने आसान की तस्करी

दुधारी गांव बिहार बॉर्डर के कारण हमेशा से संवेदनशील रहा है। फायदा उठाकर तस्कर एक राज्य से दूसरे राज्य में माल भेजते रहते हैं। पुलिस कई बार छोटे तस्कर पकड़ती है, लेकिन कुछ ही घंटों में वे ऊपर के आदेश पर छूट जाते हैं। पुलिसकर्मी ने बताया कि जब तक आबकारी विभाग से सख्त आदेश नहीं आएंगे, कुछ नहीं बदलने वाला। हम पकड़ते हैं, लेकिन ‘उपर से’ छोड़ने का फोन आ जाता है।

● आबकारी इंस्पेक्टर की छत्रछाया में जिलेभर में अवैध गांजा कारोबार फल-फूल रहा है।

● शिकायतों, पुलिस इनपुट और स्थानीय विरोध के बावजूद विभाग की चुप्पी ‘संरक्षण’ की ओर इशारा करती है।

● चकिया के हेतिमपुर, बाड़ेपर में हर शाम खुलेआम गांजा बिक्री, युवा सबसे बड़े शिकार।

● इलिया के बेन-तियरी में पन्ना लाल का दबदबा, सूचना देने वालों को धमकियों के कारण दहशत।

● बबुरी के बनौली चट्टी में सचिदानंद तिवारी का ओपन रैकेट, हर तीसरे दिन नया सप्लायर सक्रिय।

● मुगलसराय जिले का सबसे बड़ा गांजा हब गोधना मोड़, खोवा मंडी, धर्मशाला रोड से लेकर पड़ाव, दुल्हीपुर तक।

● अलीनगर में हाईवे बना ‘नशा एक्सप्रेस’, भरछा और गगेहरा में रात के अंधेरे में तेज़ ट्रक-दोपहिया सप्लाई।

● सैयदराजा के दुधारी में बिहार सीमा का फायदा उठाकर माल की आसान पारगमन।

● पुलिस की सीमित कार्रवाई… ऊपर से आने वाले फोन पर छोड़े जाते हैं तस्कर, विभाग पूरी तरह बेपरवाह।

● अपराधियों का नेटवर्क, प्रशासनिक सेटिंग और नशे में फंसते स्कूली बच्चों का काला सच।

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