साइबर क्राइम पर पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल हुए सख्त, डिजिटल अपराधी को कर देंगे पस्त
साइबर अपराध पर पुलिस कमिश्नर की सर्जिकल स्ट्राइक

● साइबर क्राइम पर पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल हुए सख्त, डिजिटल अपराधी को कर देंगे पस्त
● साइबर अपराध पर पुलिस कमिश्नर की सर्जिकल स्ट्राइक
● ठगी पर मिनट-टू-मिनट एक्शन अब शिकायत पर घंटों नहीं, मिनटों में कार्रवाई
● 5 लाख से ऊपर फ्रॉड सीधे एफआईआर, सीधे कार्रवाई
● साइबर गिरोहों के मोबाइल नंबर और आईएमईआई होंगे तत्काल ब्लॉक
● हर थाने में अलग आईएमईआई रजिस्टर बनेगा, फर्जी सिम जारी करने वालों पर शिकंजा
● म्यूल अकाउंट पर सबसे कड़ा प्रहार अब बैंक खाते भी बनेंगे अपराध का सबूत
● ठगी में इस्तेमाल खातों की ब्लैक लिस्टिंग, फ्रीजिंग और कड़ी कार्रवाई
● पुराने साइबर अपराधियों पर डिजिटल नजर अब छुपना मुश्किल
◆ जितेंद्र यादव
वाराणसी। साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों के बीच पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने मोर्चा अपने हाथों में ले लिया है। सख्त निर्देश, तेज रफ्तार जांच, तकनीकी समन्वय और जवाबदेही आधारित व्यवस्था इन्हीं चार स्तंभों पर उन्होंने एक ऐसा साइबर सुरक्षा मॉडल खड़ा करने की पहल की है, जो पूरे प्रदेश के लिए आदर्श बन सकता है। पुलिस कमिश्नरेट की इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि साइबर अपराधों में शून्य सहनशीलता, त्वरित कार्रवाई और वैज्ञानिक जांच ही हमारी प्राथमिकता है। उनकी यह पहल न सिर्फ कानून-व्यवस्था का स्तर उठाती है, बल्कि डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौती ऑनलाइन ठगी, चोरी, और आर्थिक अपराध के खिलाफ एक मजबूत व्यवस्था के निर्माण की भी दिशा तय करती है।
ठगी करने वाले गिरोहों में खलबली
साइबर अपराध के बढ़ते केस अब पुलिस की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर हैं। डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई और सोशल मीडिया के युग में वाराणसी भी देश के उन महानगरों की कतार में आ खड़ा हुआ है जहां साइबर ठगों के गिरोह रोज नए तरीकों से आम लोगों की मेहनत की कमाई पर डाका डाल रहे हैं। लेकिन इसी पृष्ठभूमि के बीच पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने एक ऐसा व्यापक अभियान शुरू किया है जिससे अब ठगी करने वाले गिरोहों में खलबली मचना तय है। पुलिस आयुक्त की अध्यक्षता में हुई साइबर क्राइम एवं क्राइम ब्रांच की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में जिस तरह के निर्देश जारी किए गए, वह वाराणसी को साइबर अपराधों के प्रति अधिक सुरक्षित, संगठित और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ी पहल मानी जा रही है। बैठक में पुलिस उपायुक्त अपराध सरवणन टी, अपर पुलिस उपायुक्त साइबर क्राइम नीतू, सहायक पुलिस आयुक्त साइबर क्राइम विदुष सक्सेना समेत अनेक विशेषज्ञ व अधिकारी मौजूद रहे।
एनसीसीआर पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने यह स्पष्ट कहा कि एनसीसीआरपी पोर्टल पर दर्ज हर शिकायत पर समयबद्ध और परिणामकारी कार्रवाई होनी चाहिए।
यानी अब शिकायत दर्ज होने के बाद वेटिंग का दौर खत्म। रियल-टाइम ट्रैकिंग, तुरंत नोटिस, पहली कॉल बैक और त्वरित जांच ये अब अनिवार्य होंगे। कहा कि जिस व्यक्ति के खाते से पैसे चले गए, उसके लिए हर मिनट मायने रखता है, इसलिए पुलिस की कार्रवाई मिनटों में होनी चाहिए, घंटों में नहीं।
5 लाख रुपये से अधिक फ्रॉड पर तुरंत एफआईआर
साइबर अपराधों में कई बार पीड़ित दिनों-हफ्तों तक एफआईआर दर्ज कराने के लिए भटकते थे। लेकिन पुलिस आयुक्त ने नया आदेश देते हुए कहा कि 5 लाख रुपये या उससे अधिक की साइबर ठगी पर तुरंत अभियोग दर्ज किया जाए। इससे बड़े रैकेटों पर सीधा प्रहार होगा, और पुलिस पर समयबद्ध कार्रवाई की जवाबदेही भी तय होगी। साइबर अपराध में प्रयुक्त मोबाइल नंबर व आईएमईआई तुरंत ब्लॉक रैकेट की कमर तोड़ेगा यह कदम। साइबर ठग एक नंबर बंद होने पर दूसरा खरीद लेते हैं। लेकिन अब यह खेल इतना आसान नहीं रहेगा।
पुलिस आयुक्त का निर्देश
साइबर अपराध में प्रयुक्त प्रत्येक मोबाइल नंबर को तुरंत ब्लॉक कराया जाए। उस नंबर का आईएमईआई भी ब्लॉक किया जाए। हर थाने में एक अलग आईएमईआई ब्लॉक रजिस्टर बने। यह कदम ठगों की आर्थिक क्षमता, तकनीकी प्रयोग और नेटवर्क को तोड़ने में बेहद कारगर साबित होगा।
ओटीपी फ्रॉड से लेकर सोशल इंजीनियरिंग अब हर डेटा साइबर सेल के साथ साझा होगा
सबसे अधिक मामले ओटीपी, केवाईसी अपडेट, बैंक कॉल और सोशल मीडिया हैकिंग से जुड़े सामने आने लगे हैं। पुलिस आयुक्त ने निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में प्रयुक्त मोबाइल नंबरों की सूची तुरंत साइबर सेल को भेजी जाए ताकि रैकेट की लिंक चेन बन सके, डिवाइस लोकेशन ट्रेस हो सके और बड़े गिरोहों की धर-पकड़ आसान हो।
म्यूल अकाउंट पर सबसे बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक
साइबर ठगी में सबसे खतरनाक भूमिका होती है म्यूल अकाउंट की यह ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनमें ठग चोरी का पैसा सबसे पहले ट्रांसफर कराते हैं। अब पुलिस आयुक्त ने यह भी अनिवार्य कर दिया है कि हर थाने में म्यूल अकाउंट रजिस्टर बने, ऐसे खातों को ब्लैकलिस्ट किया जाए, उनके धारकों पर मुकदमा लिखा जाए और बैंक के साथ मिलकर जल्द से जल्द खाते फ्रीज किए जाएं। यह साइबर ठगी की रीढ़ तोड़ने वाला कदम माना जा रहा है।
सिम दर्ज करने वालों का वेरिफिकेशन अब ‘फर्जी पहचान का खेल’ खत्म
कई साइबर अपराध फर्जी आधार कार्ड और फर्जी पहचान पर जारी सिम के जरिए होते हैं। पुलिस आयुक्त ने सख्त वेरिफिकेशन का आदेश जारी करते हुए कहा कि जिस दुकान से सिम जारी हुई है। जिस कर्मचारी ने केवाईसी अपलोड किया है उसकी पूरी जांच हो और दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मोबाइल नेटवर्क आधारित साइबर अपराध को रोकने में महत्वपूर्ण है।
पुराने साइबर अपराधियों की प्रोफाइल की डिजिटल निगरानी
पुलिस आयुक्त ने वाराणसी में पहली बार यह आदेश दिया कि जिन व्यक्तियों के खिलाफ पहले साइबर अपराध के मामले दर्ज हैं, उन सबका डिजिटल प्रोफाइल तैयार हो उनके मोबाइल नंबर, बैंक खातों, सोशल मीडिया आईडी और गतिविधियों की लगातार निगरानी की जाए। अगर वो दोबारा अपराध करते पाए गए, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह निर्देश साइबर जगत में सक्रिय पुराने अपराधियों पर कड़ा शिकंजा कसने जैसा है।
जीआईएस पोर्टल पर अनिवार्य अपडेट, जांच की पूरी डिजिटल मॉनिटरिंग
थानों में लंबित विवेचनाओं को लेकर पुलिस आयुक्त की सबसे बड़ी चिंता यह रही कि केस टाइमलाइन के बिना अनिश्चितकाल तक लटके रहते हैं। लेकिन अब जीआईएस पोर्टल पर हर सप्ताह अपडेट हर केस की डिजिटल मॉनिटरिंग और समयबद्ध निस्तारण लागू होगा। यह सिस्टम पुलिस की जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों को मजबूत करेगा।
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल तेज, स्पष्ट फैसलों के लिए जाने जाते हैं
वाराणसी में साइबर अपराध केवल तकनीकी चुनौती नहीं है, बल्कि यह आम लोगों के विश्वास, उनके बैंक खातों और उनकी डिजिटल पहचान से सीधा जुड़ा सवाल है। एक क्लिक में होने वाली ठगी शहर के हर वर्ग छात्र, व्यापारी, गृहिणी, बुजुर्ग सभी को प्रभावित कर रही है। लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है कि पुलिस कमिश्नरेट ने साइबर अपराध को ‘अपराधों की श्रेणी’ में नहीं बल्कि ‘युद्धस्तर’ की चुनौती मानकर व्यापक ढांचा तैयार किया है। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल तेज, स्पष्ट और बिना किसी तरह की प्रशासनिक हिचक के फैसलों के लिए जाने जाते हैं। संकेत दिया कि वाराणसी में साइबर अपराध अब नो-गो जोन बनने जा रहा है। इन निर्देशों से पुलिस की कार्यप्रणाली में गति आएगी, तकनीकी मजबूती बढ़ेगी और जवाबदेही की एक नई संस्कृति विकसित होगी। वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट का यह कदम सिर्फ बातचीत नहीं, बल्कि एक बड़ा रोडमैप है जिसके केंद्र में है जनता की सुरक्षा, डिजिटल विश्वास, और कानून का पूर्ण सम्मान। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने यह साफ कर दिया है कि साइबर अपराधियों के लिए यह शहर अब आसान निशाना नहीं रहेगा।
* एनसीसीआरपी पोर्टल पर दर्ज हर शिकायत का समयबद्ध निस्तारण अनिवार्य।
* 5 लाख रुपये से अधिक फ्रॉड मामलों पर तत्काल अभियोग पंजीकरण।
* साइबर अपराध में प्रयुक्त मोबाइल नंबर, आईएमईआई को तुरंत ब्लॉक कराने के आदेश।
* थानेवार आईएमईआई ब्लॉक रजिस्टर और म्यूल अकाउंट रजिस्टर बनाने का निर्देश।
* संदिग्ध बैंक खातों को ब्लैकलिस्ट कर तत्काल ‘फ्रीज’ कराने की व्यवस्था।
* फर्जी ओटीपी फ्रॉड में शामिल नंबरों का डेटा साइबर सेल के साथ साझा करने का निर्देश।
* पहले से चिन्हित साइबर अपराधियों का डिजिटल प्रोफाइल तैयार किया जाएगा।
* लंबित विवेचनाओं की जीआईएस पोर्टल पर अनिवार्य डिजिटल मॉनिटरिंग।




