वाराणसी

पूर्ण बोरा की अवैध प्लॉटिंग पर सख्ती, कॉलोनाइजरो की हालत हो गयी सख्ती

● पूर्ण बोरा की अवैध प्लॉटिंग पर सख्ती, कॉलोनाइजरो की हालत हो गयी सख्ती

● ड्रोन-जीआईएस से निगरानी और त्वरित स्वीकृति का भरोसा

● वीडीए ने 18 दिसंबर 2025 को जोनवार समीक्षा बैठक कर अवैध प्लॉटिंग पर कड़ा रुख दोहराया

● ड्रोन सर्वे और 3-डी जीआईएस मॉडलिंग से लगभग 200 अवैध प्लॉट चिन्हित

● ले-आउट स्वीकृति 7 दिन और भवन मानचित्र 48 घंटे में देने का दावा

● प्रवर्तन मजबूत करने के लिए 20 नए स्टाफ की भर्ती की प्रक्रिया शुरू

● बिना स्वीकृत मानचित्र निर्माण पर होम लोन नहीं मिलने की चेतावनी

● वीडीए की अपनी आवासीय कॉलोनी जल्द विकसित करने की घोषणा।

 

◆ अमित मौर्य

वाराणसी। एक ऐसा नगर, जो आस्था, संस्कृति और इतिहास का जीवंत संगम है। लेकिन इसी विरासत के समानांतर बीते वर्षों में अनियंत्रित शहरी विस्तार, अवैध प्लॉटिंग और नियमों को दरकिनार कर किए गए निर्माण ने इस पौराणिक शहर के भविष्य पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं। गलियों से लेकर बाहरी इलाकों तक, खेतों और आरक्षित जमीनों पर रातों-रात उग आई कॉलोनियां न सिर्फ नियोजन को चुनौती दे रही हैं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं, पर्यावरण और नागरिक सुरक्षा के लिए भी खतरा बन चुकी हैं। इन्हीं चुनौतियों के बीच वीडीए ने एक बार फिर स्पष्ट संकेत दिया है कि ‘अब जैसे चलता है’ का दौर समाप्त हो चुका है। 18 दिसंबर 2025 को उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा की अध्यक्षता में आयोजित जोनवार समीक्षा बैठक महज एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि यह उस बदले हुए प्रशासनिक तेवर का संकेत थी, जिसमें तकनीक, समयबद्धता और सख्त प्रवर्तन को केंद्र में रखा गया है। वीडीए का दावा है कि अब अवैध प्लॉटिंग को पकड़ना मुश्किल नहीं रहेगा। ड्रोन सर्वे और 3-डी जीआईएस मॉडलिंग के जरिए पूरे प्राधिकरण क्षेत्र की निगरानी की जा रही है। सोशल मीडिया, जनसंपर्क माध्यमों और स्थानीय सूचनाओं के आधार पर करीब 200 अवैध प्लॉट पहले ही चिन्हित किए जा चुके हैं। प्राधिकरण का कहना है कि इन पर जल्द ही कठोर और विधिक कार्रवाई होगी। बैठक का एक अहम संदेश यह भी था कि वीडीए अब केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वैध और नियोजित विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने का प्रयास कर रहा है। ले-आउट स्वीकृति सात दिन में और स्वीकृत ले-आउट पर भवन मानचित्र 48 घंटे में देने की घोषणा इसी कड़ी का हिस्सा है। हालांकि, वाराणसी जैसे शहर में ऐसे दावों को लेकर जनता के मन में संदेह भी कम नहीं है। अतीत में फाइलों के अटकने, रिश्वतखोरी और चुनिंदा बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के आरोप बार-बार सामने आते रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या यह नई व्यवस्था वास्तव में जमीन पर दिखेगी, या फिर यह भी कागजी संकल्प बनकर रह जाएगी?

वीडीए ने प्रवर्तन को मजबूत करने के लिए 20 नए कर्मचारियों की भर्ती की घोषणा की है। जिसमें 5 एसोसिएट इंजीनियर और 15 फील्ड स्टाफ शामिल हैं। इसके साथ ही प्राधिकरण की अपनी आवासीय कॉलोनी विकसित करने की योजना भी सामने आई है, जिसे पूरी तरह नियोजित और मानक अनुरूप बताया जा रहा है। 18 दिसंबर 2025 को हुई जोनवार समीक्षा बैठक में वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने दो टूक शब्दों में कहा कि वाराणसी विश्व का सबसे पौराणिक नगर है और यहां सुनियोजित एवं संतुलित विकास सुनिश्चित करना प्राधिकरण का प्रमुख दायित्व है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब विकास और प्रवर्तन दोनों मोर्चों पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

ड्रोन और 3-डी जीआईएस से निगरानी

वीडीए के अनुसार, सभी जोनों में ड्रोन सर्वे और 3-डी जीआईएस मॉडलिंग के माध्यम से व्यापक जांच की जा रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी अवैध प्लॉटिंग या अनधिकृत निर्माण प्रशासन की नजर से न बच सके। सोशल मीडिया और जनसंपर्क माध्यमों से मिली सूचनाओं के आधार पर करीब 200 अवैध प्लॉट चिन्हित किए गए हैं। यह पहली बार है जब प्राधिकरण ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि सोशल मीडिया अब निगरानी का एक अहम स्रोत बन चुका है। हालांकि, सवाल यह भी है कि क्या इस तकनीकी निगरानी के दायरे में संरक्षित प्लॉटर्स और प्रभावशाली बिल्डर भी आएंगे।

ले-आउट और मानचित्र स्वीकृति में तेजी

उपाध्यक्ष ने प्लॉटर्स और डेवलपर्स को स्पष्ट चेतावनी दी कि वे जल्द से जल्द अपने ले-आउट को वीडीए से स्वीकृत कराएं। निर्धारित समयावधि में ऐसा न करने पर सख्त विधिक कार्रवाई की जाएगी। वीडीए का दावा है कि ले-आउट स्वीकृति मात्र 7 दिवस में और भवन मानचित्र 48 घंटे में होगा। यदि यह व्यवस्था ईमानदारी से लागू होती है, तो यह वाराणसी के विकास इतिहास में एक बड़ा बदलाव होगा। लेकिन अचूक संघर्ष यह सवाल उठाता है कि क्या यह समय सीमा सभी के लिए समान होगी, या फिर तेज फाइल का रास्ता अब भी खुलेगा।

आम जनता के लिए चेतावनी और संदेश

वीडीए ने आम नागरिकों को भी जागरूक करते हुए कहा कि बिना स्वीकृत मानचित्र के भवन निर्माण करने पर बैंक से होम लोन नहीं मिल सकता। यह संदेश उन हजारों लोगों के लिए अहम है, जो सस्ते प्लॉट के लालच में अवैध कॉलोनियों में निवेश कर बैठते हैं और बाद में कानूनी संकट में फंस जाते हैं।

प्रवर्तन को मजबूत करने की तैयारी

अवैध प्लॉटिंग और निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के लिए 20 नए कर्मचारियों की भर्ती की जा रही है। इनमें 5 एसोसिएट इंजीनियर और 15 फील्ड स्टाफ शामिल होंगे। सवाल यह है कि क्या यह संख्या वाराणसी जैसे विशाल और तेजी से फैलते शहर के लिए पर्याप्त है, या यह सिर्फ प्रतीकात्मक कदम है?

वीडीए की अपनी आवासीय कॉलोनी

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि वीडीए शीघ्र ही अपनी स्वयं की आवासीय कॉलोनी विकसित करेगा, जिसमें पूरी तरह नियोजित और मानक अनुरूप विकास सुनिश्चित किया जाएगा। यदि यह परियोजना पारदर्शी ढंग से लागू होती है, तो यह निजी बिल्डरों की मनमानी के मुकाबले एक सकारात्मक विकल्प बन सकती है।

सीधा संवाद का दावा

उपाध्यक्ष ने कहा कि किसी भी समस्या, सुझाव या जानकारी के लिए आमजन और प्लॉटर्स प्रतिदिन सुबह 10 से 12 बजे तक उनसे सीधे मिल सकते हैं। साथ ही हेल्पलाइन नंबर 0542-2283305 और 7518102822 जारी किए गए हैं। यह पहल प्रशासन और जनता के बीच की दूरी कम करने का दावा करती है, लेकिन इसका असर तभी दिखेगा जब शिकायतों पर वास्तविक कार्रवाई हो।

* अवैध प्लॉटिंग पर जीरो टॉलरेंस का दावा
* ड्रोन और जीआईएस से निगरानी का विस्तार
* 200 अवैध प्लॉट चिन्हित, कार्रवाई जल्द
* 7 दिन में ले-आउट, 48 घंटे में मानचित्र स्वीकृति
* 20 नए कर्मचारियों की भर्ती
* वीडीए की नियोजित आवासीय कॉलोनी की घोषणा
* आम जनता के लिए होम लोन से जुड़ी चेतावनी
* उपाध्यक्ष से सीधे संवाद की व्यवस्था की

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