पूर्ण बोरा ने लगातार अवैध प्लाटिंग पर कस रहे कमर, जारी रहेगा इनका अनियोजित विकास पर कहर
अवैध प्लाटिंग पर निर्णायक प्रहार सुनियोजित वाराणसी की दिशा में वीडीए का ठोस कदम

● पूर्ण बोरा ने लगातार अवैध प्लाटिंग पर कस रहे कमर, जारी रहेगा इनका अनियोजित विकास पर कहर
● अवैध प्लाटिंग पर निर्णायक प्रहार सुनियोजित वाराणसी की दिशा में वीडीए का ठोस कदम
● 25 दिसंबर 2025 को वीडीए उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में अहम बैठक
● सभी तहसीलों के एसडीएम और रजिस्ट्रार को अवैध प्लाटिंग पर सख्त निर्देश
● लेखपाल के माध्यम से तत्काल रोक और प्राधिकरण को सूचना अनिवार्य
● स्वीकृत ले-आउट वाले प्लॉट खरीदने को लेकर जन-जागरूकता पर जोर
● अवैध प्लाटिंग को भविष्य के शहरी संकट की जड़ बताया गया
● 25–30 वर्षों की विकास योजना के तहत सुनियोजित वाराणसी का लक्ष्य
◆ अमित मौर्य
वाराणसी। काशी केवल आस्था और परंपरा की नगरी नहीं है, बल्कि यह शहर आने वाले दशकों में आधुनिक शहरी विकास का एक सशक्त मॉडल भी बन सकता है। यदि विकास की दिशा सुनियोजित, पारदर्शी और कानून सम्मत हो। इसी सोच को आधार बनाकर वाराणसी विकास प्राधिकरण ने अवैध प्लाटिंग के खिलाफ एक अहम और निर्णायक पहल की है। 25 दिसंबर 2025 को वीडीए उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में आयोजित बैठक इस दिशा में एक स्पष्ट संदेश देती है कि अब शहर की जमीनों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
तेजी से बढ़ते शहरीकरण, ग्रामीण क्षेत्रों के शहरी सीमा में शामिल होने और जमीन की बढ़ती कीमतों ने वाराणसी में अवैध प्लाटिंग को एक गंभीर समस्या बना दिया है। खेतों, कृषि भूमि और बिना स्वीकृत ले-आउट के कॉलोनियों का जाल फैलाकर आम नागरिकों को सपनों का घर दिखाया जाता है, लेकिन बाद में वही प्लॉट उनके लिए कानूनी, आर्थिक और सामाजिक संकट बन जाता है। वर्षों से यह शिकायत रही है कि प्रशासनिक उदासीनता, सूचना के अभाव और विभागीय समन्वय की कमी के कारण अवैध प्लाटिंग फलती-फूलती रही। इसी पृष्ठभूमि में 25 दिसंबर को हुई यह बैठक केवल एक औपचारिक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भविष्य की वाराणसी को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और नागरिकों के हित में विकसित करने का संकल्प है। बैठक में वाराणसी की सभी तहसीलों के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) और रजिस्ट्रार को बुलाकर सीधे तौर पर जिम्मेदारी तय की गई। यह संदेश साफ था अब अवैध प्लाटिंग की जानकारी मिलते ही कार्रवाई होगी, और जिम्मेदारी तय होगी। वीडीए उपाध्यक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी भी क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग होती है, तो संबंधित लेखपाल के माध्यम से तत्काल उसे रोका जाए और प्राधिकरण को सूचना दी जाए। इसका उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि समय रहते अवैध गतिविधि को पनपने से रोकना है। यह एक ऐसा दृष्टिकोण है जो दंड के साथ-साथ रोकथाम और जागरूकता तीनों पर समान रूप से जोर देता है।
इस पहल का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि इसमें आम जनमानस को केंद्र में रखा गया है। उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि लोगों को लगातार जागरूक किया जाए कि वे केवल स्वीकृत ले-आउट वाले प्लॉट ही खरीदें। यह चेतावनी नहीं, बल्कि एक नागरिक सलाह है। जिसका पालन करके लोग भविष्य के बड़े नुकसान से बच सकते हैं। प्राधिकरण का दीर्घकालिक लक्ष्य भी इस बैठक में स्पष्ट रूप से सामने आया। आने वाले 25 से 30 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वाराणसी का सुनियोजित विकास। सड़क, सीवर, जलापूर्ति, हरित क्षेत्र, आवास और यातायात इन सभी बुनियादी जरूरतों की योजना तभी संभव है जब भूमि उपयोग नियमों का सख्ती से पालन हो। अवैध प्लाटिंग इस पूरी प्रक्रिया को अव्यवस्थित कर देती है। शहर का विकास केवल इमारतों से नहीं, बल्कि मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनहित में लिए गए फैसलों से होता है। 25 दिसंबर की यह बैठक उसी इच्छाशक्ति का संकेत देती है। अब सवाल केवल निर्देश देने का नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने का है।
अवैध प्लाटिंग के खिलाफ एक संयुक्त अभियान की शुरुआत
वाराणसी विकास प्राधिकरण कार्यालय में हुई बैठक को यदि प्रशासनिक भाषा में देखा जाए तो यह एक समन्वय बैठक थी, लेकिन वास्तविक अर्थों में यह अवैध प्लाटिंग के खिलाफ एक संयुक्त अभियान की शुरुआत है। वीडीए उपाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि प्राधिकरण अकेले इस समस्या से नहीं निपट सकता, इसके लिए राजस्व विभाग, तहसील प्रशासन और पंजीयन विभाग की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। बैठक में मौजूद सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने तहसील क्षेत्रों में सतर्क निगरानी रखें। जैसे ही कहीं भी खेतों की कटान, सड़कें बनाने, खंभे गाड़ने या प्लॉट चिन्हित करने जैसी गतिविधियां दिखें, लेखपाल के माध्यम से तत्काल रिपोर्ट तैयार की जाए। यह रिपोर्ट केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसी समय प्राधिकरण को भेजी जाए ताकि प्रवर्तन कार्रवाई की जा सके। वीडीए उपाध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि अवैध प्लाटिंग केवल भूमि कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि यह भविष्य के शहरी संकटों की जड़ है। बिना सड़क चौड़ाई, बिना नाली, बिना सीवर और बिना हरित क्षेत्र के बसाई गई कॉलोनियां आगे चलकर प्रशासन के लिए सिरदर्द बनती हैं। वहां रहने वाले लोग पानी, बिजली, सड़क और सफाई के लिए वर्षों तक संघर्ष करते हैं, और अंततः दबाव प्रशासन पर ही आता है।
बैठक में रजिस्ट्रार की भूमिका को भी अहम बताया गया। निर्देश दिए गए कि यदि किसी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर संदिग्ध बिक्री हो रही है, तो पंजीयन स्तर पर सतर्कता बरती जाए। भूमि के दस्तावेजों की जांच में यह देखा जाए कि कहीं बिना स्वीकृत ले-आउट के प्लॉट तो नहीं बेचे जा रहे। यह कदम अवैध प्लाटिंग के आर्थिक नेटवर्क को तोड़ने में सहायक होगा।
जिन ग्रामों को प्राधिकरण क्षेत्र में शामिल किया गया है, वहां विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाए
एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी रहा कि जिन ग्रामों को हाल के वर्षों में प्राधिकरण क्षेत्र में शामिल किया गया है, वहां विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाए। ग्रामीण इलाकों में लोग अक्सर दलालों के झांसे में आ जाते हैं, जो कम कीमत का लालच देकर जमीन बेच देते हैं। बाद में वही जमीन कानूनी विवादों में फंस जाती है। वीडीए उपाध्यक्ष ने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि लोगों को सुरक्षित निवेश का रास्ता दिखाना है। स्वीकृत ले-आउट वाले प्लॉट खरीदने से नागरिकों को यह भरोसा मिलता है कि वहां सड़क, पानी, सीवर और अन्य सुविधाएं योजनाबद्ध तरीके से मिलेंगी।
भविष्य में बैठकों की नियमित समीक्षा
बैठक में यह भी तय हुआ कि भविष्य में ऐसी बैठकों की नियमित समीक्षा की जाएगी। केवल एक दिन के निर्देश से काम नहीं चलेगा। हर तहसील से समय-समय पर रिपोर्ट ली जाएगी कि उनके क्षेत्र में कितनी अवैध प्लाटिंग रोकी गई, कहां कार्रवाई हुई और कहां जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए। अवैध प्लाटिंग के खिलाफ कार्रवाई क्यों देर से होती है। इस बैठक में दिए गए निर्देश यदि ईमानदारी से लागू होते हैं, तो यह पहली बार होगा जब अवैध प्लाटिंग को शुरुआती स्तर पर ही रोका जाएगा।
डिजिटल मैपिंग के जरिए अवैध प्लाटिंग की पहचान आसान बनाने कि तैयारी
शहर के विकास को लेकर वीडीए का दृष्टिकोण भी इस बैठक में साफ दिखा। 25 से 30 वर्षों की विकास योजना का मतलब है। आज लिए गए फैसलों का असर अगली पीढ़ी पर पड़ेगा। यदि आज अनियंत्रित कॉलोनियां बसती रहीं, तो कल वाराणसी भी उन शहरों की कतार में खड़ी होगी जहां ट्रैफिक जाम, जलभराव और अव्यवस्थित बस्तियां आम समस्या हैं। बैठक के दौरान यह भी संकेत दिया गया कि भविष्य में तकनीक का सहारा लिया जाएगा। सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन सर्वे और डिजिटल मैपिंग के जरिए अवैध प्लाटिंग की पहचान आसान बनाई जा सकती है। हालांकि इस दिशा में ठोस योजना अभी सामने नहीं आई है, लेकिन संकेत सकारात्मक हैं।
* अवैध प्लाटिंग पर सख्ती का स्पष्ट संदेश 25 दिसंबर 2025 को वीडीए उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में हुई बैठक ने साफ किया कि अवैध प्लाटिंग बर्दाश्त नहीं होगी।
* तहसील प्रशासन की सीधी जवाबदेही तय सभी तहसीलों के एसडीएम को अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध प्लाटिंग पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश।
* लेखपाल बने पहली कड़ी खेतों की कटान, सड़क निर्माण, खंभे गाड़ने या प्लॉट चिन्हित होते ही लेखपाल के माध्यम से तुरंत कार्रवाई।
* पंजीयन विभाग की भूमिका अहम रजिस्ट्रार को संदिग्ध बिक्री पर सतर्कता बरतने और बिना स्वीकृत ले-आउट वाले प्लॉट की रजिस्ट्री पर नजर रखने के निर्देश।
* जन-जागरूकता पर विशेष जोर आम नागरिकों को चेताया गया कि वे केवल स्वीकृत ले-आउट वाले प्लॉट ही खरीदें।
* नव-समाहित ग्रामों पर विशेष फोकस प्राधिकरण क्षेत्र में शामिल नए गांवों में दलालों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय।
* अवैध प्लाटिंग को शहरी संकट की जड़ बताया गया बिना सड़क, नाली, सीवर और हरित क्षेत्र की कॉलोनियां भविष्य में प्रशासन और नागरिकों दोनों के लिए बड़ा संकट बनती हैं।
* संयुक्त अभियान की शुरुआत राजस्व विभाग, तहसील प्रशासन, पंजीयन विभाग और वीडीए के समन्वय से अवैध प्लाटिंग पर एकजुट कार्रवाई की रणनीति।
* नियमित समीक्षा का फैसला भविष्य में ऐसी बैठकों की लगातार समीक्षा।
* तकनीक के इस्तेमाल के संकेत सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन सर्वे और डिजिटल मैपिंग के जरिए अवैध प्लाटिंग की पहचान आसान बनाने की तैयारी।
* 25–30 वर्षों की विकास दृष्टि आज लिए गए फैसलों से अगली पीढ़ी का भविष्य तय होगा।
* प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कसौटी निर्देश स्पष्ट हैं, उद्देश्य जनहित में है।




