योगी ने सड़क सुरक्षा का किया समीक्षा, सड़क दुघर्टना में कमी हो यही है, सीएम की अदम्य इच्छा
आदतन उल्लंघन करने वालों के लाइसेंस जब्त, वाहन सीज की तैयारी

● योगी ने सड़क सुरक्षा का किया समीक्षा, सड़क दुघर्टना में कमी हो यही है, सीएम की अदम्य इच्छा
● सीएम योगी का सख्त संदेश आदतन नियम तोड़ने वालों पर अब नो टॉलरेंस
● जनवरी 2026 को बनाया रोड सेफ्टी संकल्प माह
● केवल चालान नहीं, व्यवहार बदलने पर जोर
● आदतन उल्लंघन करने वालों के लाइसेंस जब्त, वाहन सीज की तैयारी
● 4-ई मॉडल से सड़क सुरक्षा को मिला ठोस ढांचा
● ब्लैक स्पॉट सुधार और रोड सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य
● एम्बुलेंस व स्कूल वाहनों की फिटनेस पर विशेष निगरानी
● ज्यादा हादसे वाले जिलों के लिए अलग कार्ययोजना
● सड़क सुरक्षा को जन आंदोलन बनाने का आह्वान
उत्तर प्रदेश की सड़कों पर रोजाना बिखरती जिंदगियों, टूटते परिवारों और अनकहे सवालों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क सुरक्षा को लेकर स्पष्ट, कठोर और दूरगामी संदेश दिया है। वह केवल एक प्रशासनिक निर्देश नहीं, बल्कि शासन की प्राथमिकताओं में आए निर्णायक बदलाव का संकेत है। नए वर्ष की शुरुआत को औपचारिक उत्सवों से जोड़ने के बजाय मुख्यमंत्री ने इसे सड़क सुरक्षा जैसे अत्यंत संवेदनशील और जीवन-मरण से जुड़े मुद्दे से जोड़कर यह साफ कर दिया है कि सरकार अब आंकड़ों की खानापूर्ति नहीं, बल्कि जमीनी बदलाव चाहती है।
प्रदेश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं केवल यातायात व्यवस्था की विफलता नहीं हैं, बल्कि यह सामाजिक लापरवाही, प्रशासनिक ढिलाई और नियमों को हल्के में लेने की सामूहिक प्रवृत्ति का नतीजा हैं।
ऐसे में मुख्यमंत्री का यह कहना कि केवल चालान करना दुर्घटनाओं का स्थायी समाधान नहीं है, व्यवस्था की सोच में आए बदलाव को रेखांकित करता है। अब फोकस दंडात्मक कार्रवाई से आगे बढ़कर आदतों को बदलने, ढांचे को सुधारने और आपात सेवाओं को मजबूत करने पर है। 1 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक पूरे प्रदेश में सड़क सुरक्षा माह आयोजित करने का निर्देश देकर मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया है कि यह अभियान किसी विभागीय औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि इसे जन आंदोलन का रूप दिया जाए।
मुख्यमंत्री की यह अपेक्षा कि मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और वरिष्ठ अधिकारी खुद इसकी मॉनिटरिंग करें, इस बात का संकेत है कि जिम्मेदारी तय होगी और लापरवाही पर अब बहाने नहीं चलेंगे। सबसे अहम और सख्त संदेश उन लोगों के लिए है जो बार-बार यातायात नियमों को तोड़ते हैं। मुख्यमंत्री ने साफ निर्देश दिए हैं कि ऐसे आदतन नियम का उल्लंघन करने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस जब्त किए जाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर वाहन सीज किए जाएंगे। इसके लिए स्पष्ट नियमावली बनाने और उसका सख्ती से पालन कराने के आदेश यह दर्शाते हैं कि आने वाले समय में सड़क पर मनमानी ड्राइविंग की गुंजाइश कम होने वाली है। यह भी उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने सड़क सुरक्षा को केवल पुलिस या परिवहन विभाग का विषय मानने से इनकार करते हुए इसे 4-ई मॉडल शिक्षा, प्रवर्तन, इंजीनियरिंग और इमरजेंसी केयर के तहत संचालित करने का निर्देश दिया है। यह मॉडल दर्शाता है कि सरकार समस्या की जड़ तक जाना चाहती है, न कि केवल उसके लक्षणों पर मरहम लगाना।
बैठक में प्रस्तुत आंकड़े भी गंभीर चेतावनी देते हैं। वर्ष 2025 में नवंबर तक प्रदेश में 46,223 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 24,776 लोगों की मौत हुई। ये आंकड़े सिर्फ संख्याएं नहीं, बल्कि हर जिले, हर परिवार और हर सड़क से जुड़ी त्रासदी की कहानी कहते हैं। शायद यही वजह है कि मुख्यमंत्री ने जनवरी के पहले सप्ताह में हर तहसील, ब्लॉक और जिला मुख्यालय पर जागरूकता सामग्री लगाने और एनएसएस, एनसीसी, स्काउट-गाइड, आपदा मित्र व सिविल डिफेंस जैसे संगठनों को अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए हैं।
सड़क दुर्घटनाएं केवल प्रशासनिक आंकड़ा नहीं, मानव जीवन की क्षति
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सड़क सुरक्षा को लेकर जो निर्देश जारी किए गए, वे आने वाले समय में प्रदेश की यातायात संस्कृति को बदलने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सड़क दुर्घटनाएं केवल प्रशासनिक आंकड़ा नहीं, बल्कि मानव जीवन की क्षति हैं, जिन्हें हर हाल में कम करना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
आदतन नियम तोड़ने वालों पर सख्ती
मुख्यमंत्री ने सबसे पहले उन लोगों को चिन्हित करने पर जोर दिया जो बार-बार यातायात नियमों का उल्लंघन करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों पर केवल जुर्माना लगाकर छोड़ देना न्यायसंगत नहीं है। इनके ड्राइविंग लाइसेंस जब्त किए जाएं और जरूरत पड़ने पर वाहन सीज किए जाएं। इसके लिए एक स्पष्ट, पारदर्शी और प्रभावी नियमावली तैयार कर सभी जिलों में समान रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए।
सड़क सुरक्षा माह औपचारिकता नहीं, जन आंदोलन
1 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक आयोजित होने वाला सड़क सुरक्षा माह केवल बैनर-पोस्टर तक सीमित न रहे, इसके लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को व्यक्तिगत जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने कहा कि स्कूलों, कॉलेजों, बाजारों, पंचायतों और धार्मिक स्थलों तक संदेश पहुंचे। यही इस अभियान की सफलता होगी।
4-ई मॉडल पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के बिना अनुशासन संभव नहीं। बच्चों और युवाओं को कम उम्र से ही सही सड़क व्यवहार सिखाना होगा। प्रवर्तन के तहत नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए। इंजीनियरिंग के स्तर पर सड़कों के ब्लैक स्पॉट, अंधे मोड़, अवैध कट और गलत स्पीड ब्रेकर हटाए जाएं। इमरजेंसी केयर में एम्बुलेंस की त्वरित उपलब्धता और ट्रॉमा सेंटर की गुणवत्ता सुधारी जाए।
रोड सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य
मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग और अन्य एजेंसियों को निर्देश दिए कि सभी सड़कों का नियमित रोड सेफ्टी ऑडिट कराया जाए। खराब साइनेज, गलत डिजाइन और अव्यवस्थित स्पीड ब्रेकर दुर्घटनाओं को न्योता देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल टेबल टॉप स्पीड ब्रेकर ही बनाए जाएं।
एम्बुलेंस और स्कूल वाहन जांच
स्कूल वाहनों और एम्बुलेंस सेवाओं की फिटनेस की विशेष जांच के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों और मरीजों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
ज्यादा हादसे वाले जिलों पर विशेष नजर
हरदोई, प्रयागराज, आगरा और कानपुर जैसे जिलों में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या अधिक होने पर मुख्यमंत्री ने संबंधित डीएम से सीधे संवाद किया। इन जिलों में विशेष कार्ययोजना बनाकर सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए।
हाइवे पर न खड़े हों वाहन और डग्गामार बसें
हाइवे और एक्सप्रेसवे किनारे लंबे समय तक खड़े ट्रक, डग्गामार वाहन और अवैध बसें गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। मुख्यमंत्री ने इनके खिलाफ प्रभावी और निरंतर कार्रवाई के आदेश दिए।
* जनवरी 2026 को पूरे प्रदेश में सड़क सुरक्षा माह
* आदतन नियम तोड़ने वालों पर लाइसेंस जब्ती व वाहन सीज
* 4-ई मॉडल से सड़क सुरक्षा अभियान
* रोड सेफ्टी ऑडिट और ब्लैक स्पॉट सुधार अनिवार्य
* एम्बुलेंस व स्कूल वाहनों की विशेष फिटनेस जांच
* हरदोई, प्रयागराज, आगरा, कानपुर पर विशेष फोकस
* डग्गामार और हाइवे पर खड़े वाहनों पर सख्त कार्रवाई
* सड़क सुरक्षा को जन आंदोलन बनाने का संकल्प
रोड सेफ्टी में मुख्यमंत्री के आदेशों को हो अक्षरशः पालन -दयाशंकर सिंह
सूबे के परिवहन राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार दयाशंकर सिंह ने परिवहन विभाग को मुख्यमंत्री की बैठक के बाद परिवहन विभाग के उच्चाधिकारियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा की मुख्यमंत्री जी का सड़क सुरक्षा पर जो निर्देश है उसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराए। आप को बताते चले कि योगी ने दिनांक 20 दिसम्बर 2025 को सड़क सुरक्षा की बैठक लिया था जिसमे दयाशंकर सिंह भी शामिल थे। दयाशंकर भी सड़क सुरक्षा को लेकर काफी गम्भीर है,परिवहन मंत्री की मंशा है कि परिवहन अधिकारी सड़क पर रोड सेफ्टी जन जन को जागरूक करें व कड़ाई भी करे जिससे कि यातायात नियमो का उल्लंघन करने वालो को सबक भी मिले जिससे आगे की राह सही हो सके।
दयाशंकर पहले भी ओवरलोडिंग पर काफी सख़्त रहे है ये बात अलग है कि एआरटीओ प्रवर्तन बावजूद इसके भी इंट्री चलाने से बाज नही आते है। अब देखना है कि मुख्यमंत्री व परिवहन मंत्री के कड़े निर्देश के बाद परिवहन अधिकारी सुधरते है या फिर अपनी मनमर्जी पर आमादा रहते है।




