वीडीए के सचिव वेद प्रकाश मिश्रा ने पिंडरा तहसील में लेखपालों से कहा अवैध प्लाटिंग पर करे कारवाई, प्राधिकरण की जारी रहेगी कड़ाई
पिन्ड्रा तहसील में अवैध प्लाटिंग पर शिकंजा कसने की तैयारी

● वीडीए के सचिव वेद प्रकाश मिश्रा ने पिंडरा तहसील में लेखपालों से कहा अवैध प्लाटिंग पर करे कारवाई, प्राधिकरण की जारी रहेगी कड़ाई
● अवैध प्लाटिंग पर वीडीए का सख्त रुख, पिन्ड्रा में संयुक्त कार्रवाई का ऐलान
● पिन्ड्रा तहसील में अवैध प्लाटिंग पर शिकंजा कसने की तैयारी
● वीडीए सचिव डॉ. वेद प्रकाश मिश्रा ने लेखपालों को दिए सख्त निर्देश
● बिना नक्शा पास निर्माण पर तत्काल रोक और सूचना अनिवार्य
● राजस्व विभाग वीडीए की संयुक्त टीम चलाएगी निरीक्षण अभियान
● अवैध प्लाटिंग से नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं का संकट
● नियम उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई, कोई ढील नहीं : वीडीए
◆ अमित मौर्या
वाराणसी। नियोजित शहरी विकास को अवैध प्लाटिंग की अराजकता से बचाने के लिए वीडीए ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। तेजी से फैल रही अवैध प्लाटिंग, अनियंत्रित भूमि विभाजन और बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण कार्यों पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से मंगलवार, 30 दिसंबर को एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता वीडीए सचिव डॉ. वेद प्रकाश मिश्रा ने की। यह बैठक विशेष रूप से पिन्ड्रा तहसील क्षेत्र में लगातार सामने आ रही अवैध प्लाटिंग की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए बुलाई गई थी। हाल के महीनों में पिन्ड्रा और आसपास के ग्रामीण–अर्धशहरी इलाकों में कृषि भूमि को नियमों को ताक पर रखकर छोटे-छोटे प्लॉट्स में तब्दील किए जाने, बिना सड़क, जल निकासी और सीवर जैसी बुनियादी सुविधाओं के कॉलोनियां विकसित किए जाने की शिकायतें लगातार प्राधिकरण तक पहुंच रही थीं।
इसी पृष्ठभूमि में पिन्ड्रा तहसील के समस्त लेखपालों, राजस्व विभाग के कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों को बैठक में बुलाया गया। वीडीए सचिव ने न केवल वीडीए अधिनियम और प्रचलित भवन एवं विकास नियमों की विस्तृत जानकारी दी, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि अब अवैध प्लाटिंग को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही या आंख मूंदने की प्रवृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डॉ.वेद प्रकाश मिश्रा ने दो टूक शब्दों में कहा कि अवैध प्लाटिंग केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह भविष्य में आम नागरिकों के लिए गंभीर संकट का कारण बनती है। बिना नियोजन के विकसित की गई कॉलोनियों में न सड़क होती है, न जल निकासी, न सीवर और न ही सुरक्षित विद्युत व्यवस्था। बाद में इन्हीं बस्तियों के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए प्रशासन के चक्कर काटते हैं, जिससे सरकार और स्थानीय निकायों पर अनावश्यक दबाव बढ़ता है।
बैठक में यह भी साफ किया गया कि लेखपाल और तहसील स्तर के कर्मचारी अवैध प्लाटिंग की पहली कड़ी होते हैं। यदि प्रारंभिक स्तर पर ही भूमि विभाजन और अवैध बिक्री की सूचना समय से वीडीए को दे दी जाए, तो ऐसे मामलों को बढ़ने से रोका जा सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए बैठक में राजस्व विभाग और वीडीए के बीच समन्वय को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अक्सर अवैध प्लाटिंग के मामलों में स्थानीय स्तर पर मिलीभगत, अनदेखी या देर से कार्रवाई के आरोप लगते रहे हैं। जहां नियमों को दरकिनार कर कॉलोनाइजरों ने खुलेआम जमीनों की खरीद-फरोख्त की और प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। इस बैठक के माध्यम से वीडीए ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि अब कागजी चेतावनियों से आगे बढ़कर जमीनी कार्रवाई की जाएगी।
पिन्ड्रा में क्यों बढ़ी अवैध प्लाटिंग की समस्या
पिन्ड्रा तहसील क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकास की ओर बढ़ा है। वाराणसी एयरपोर्ट की निकटता, राष्ट्रीय राजमार्गों से बेहतर कनेक्टिविटी और अपेक्षाकृत सस्ती भूमि के कारण यह इलाका कॉलोनाइजरों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। इसी का फायदा उठाकर कई भू-माफिया और अवैध कॉलोनाइजर बिना किसी स्वीकृति के कृषि भूमि को छोटे-छोटे प्लॉट्स में काटकर बेच रहे हैं। इन कॉलोनियों में न तो ले-आउट प्लान स्वीकृत होता है, न सड़क चौड़ाई, न हरित क्षेत्र और न ही जल निकासी की कोई योजना। परिणामस्वरूप, कुछ ही वर्षों में ये इलाके अव्यवस्था, जलभराव और यातायात संकट का केंद्र बन जाते हैं।
वीडीए सचिव के सख्त निर्देश
बैठक में वीडीए सचिव डॉ. वेद प्रकाश मिश्रा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की अवैध प्लाटिंग या भूमि विभाजन की जानकारी मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जाए। बिना स्वीकृत मानचित्र के किसी भी निर्माण कार्य को प्रारंभिक स्तर पर ही रोका जाए। लेखपाल अपने क्षेत्र में हो रही गतिविधियों की नियमित निगरानी करें और रिपोर्ट समय से वीडीए को भेजें। कहा कि यदि भविष्य में यह पाया गया कि किसी अधिकारी या कर्मचारी ने जानबूझकर सूचना छिपाई या देर से दी, तो उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
संयुक्त निरीक्षण अभियान का निर्णय
बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि अब तहसील स्तर पर राजस्व विभाग और वाराणसी विकास प्राधिकरण संयुक्त रूप से निरीक्षण अभियान चलाएंगे। इन अभियानों के दौरान संदिग्ध भूमि विभाजन की मौके पर जांच होगी। अवैध रूप से विकसित हो रही कॉलोनियों को चिन्हित किया जाएगा। आवश्यक होने पर तत्काल सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। इस संयुक्त व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अवैध प्लाटिंग को प्रारंभिक अवस्था में ही रोका जा सके, न कि बाद में केवल नोटिस और औपचारिक कार्रवाई तक सीमित रहा जाए। डॉ.मिश्रा ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अवैध प्लाटिंग का सबसे बड़ा नुकसान आम नागरिकों को होता है। लोग जीवनभर की कमाई लगाकर प्लॉट खरीदते हैं, लेकिन बाद में उन्हें पता चलता है कि न सड़क है, न पानी की व्यवस्था और न ही सीवर। ऐसे में न तो नगर निगम जिम्मेदारी लेता है और न ही विकास प्राधिकरण, क्योंकि कॉलोनी ही अवैध होती है। बैठक में उपजिलाधिकारी प्रतिभा मिश्रा, सब-रजिस्ट्रार, नगर नियोजक प्रभात कुमार सहित राजस्व और वीडीए के कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने अवैध प्लाटिंग के खिलाफ समन्वित प्रयास करने पर सहमति जताई।
कठोर कार्रवाई की चेतावनी
वीडीए की ओर से स्पष्ट किया गया कि भविष्य में यदि किसी क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग पाई जाती है, तो संबंधित कॉलोनाइजर के विरुद्ध एफआईआर, भूमि सीलिंग और अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, लापरवाह अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
* पिन्ड्रा तहसील में बढ़ती अवैध प्लाटिंग पर वीडीए सख्त
* लेखपालों को अधिनियम और नियमों की विस्तृत जानकारी
* बिना नक्शा पास निर्माण पर तत्काल रोक के निर्देश
* राजस्व विभाग-वीडीए का संयुक्त निरीक्षण अभियान
* नागरिकों के हित में नियोजित विकास पर जोर
* भविष्य में अवैध प्लाटिंग पर कठोर कार्रवाई तय




