वीडीए के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने मातहतो का का बढ़ाया मान, इनकी कार्य प्रणाली से बढ़ा प्राधिकरण का सम्मान
ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति से बदली कार्यसंस्कृति, उत्कृष्ट अधिकारियों को उपाध्यक्ष ने किया सम्मानित

● वीडीए के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने मातहतो का का बढ़ाया मान, इनकी कार्य प्रणाली से बढ़ा प्राधिकरण का सम्मान
● ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति से बदली कार्यसंस्कृति, उत्कृष्ट अधिकारियों को उपाध्यक्ष ने किया सम्मानित
● ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति में रिकॉर्ड प्रदर्शन करने वाले अधिकारी सम्मानित
● भ्रष्टाचार पर सीधा प्रहार डिजिटल प्रणाली से दलाल तंत्र और अनावश्यक देरी पर प्रभावी अंकुश
● आम नागरिक को राहत समयबद्ध, सरल और पारदर्शी सेवाओं से जनता का भरोसा बढ़ा
● कर्मचारियों में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा बेहतर कार्य के लिए प्रेरणा और कार्यसंस्कृति में सुधार
● वीडीए नेतृत्व की स्पष्ट मंशा शासन के निर्देशों के अनुरूप जवाबदेही और पारदर्शिता पर जोर
● जहां वर्षों तक सवाल थे, वहां अब सुधार की ठोस शुरुआत
◆ अमित मौर्य
वाराणसी। विकास प्राधिकरण की पहचान लंबे समय तक फाइलों के बोझ, देरी व कथित भ्रष्टाचार से जुड़ी रही है। आम नागरिक के लिए नक्शा पास कराना एक जटिल, खर्चीला और मानसिक रूप से थकाने वाला अनुभव रहा है। लेकिन वीडीए में बीते कुछ महीनों से जो बदलाव दिख रहा है, वह न केवल व्यवस्था में सुधार का संकेत है, बल्कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति का भी प्रमाण है। 1 जनवरी 2026 को वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा द्वारा आयोजित सम्मान समारोह इसी बदली हुई कार्यसंस्कृति का प्रतीक बनकर सामने आया। दिसंबर माह में ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति प्रणाली के अंतर्गत सर्वाधिक और त्वरित रूप से मानचित्र स्वीकृत करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह संदेश भी था कि ईमानदार, तेज और पारदर्शी काम अब उपेक्षित नहीं रहेगा, बल्कि सम्मानित होगा। अपने संबोधन में उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप पारदर्शी, सरल और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना प्राधिकरण की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति प्रणाली ने आमजन को बड़ी राहत दी है और साथ ही उस व्यवस्था को कमजोर किया है, जहां भ्रष्टाचार पनपने की गुंजाइश रहती थी। क्या विकास प्राधिकरण केवल नोटिस और कार्रवाई तक सीमित रहेंगे या फिर आम नागरिक के जीवन को वास्तव में आसान बनाएंगे। इस समारोह ने यह संकेत दिया है कि यदि नेतृत्व स्पष्ट हो और कर्मचारियों को प्रोत्साहन मिले, तो व्यवस्था बदली जा सकती है।

जहां से सवाल उठे, वहीं से सुधार की शुरुआत
वाराणसी विकास प्राधिकरण वर्षों से अवैध निर्माण, नक्शा पास कराने में देरी, दलालों की भूमिका और अधिकारियों की कथित मनमानी को लेकर चर्चा में रहा है। आम आदमी के लिए नक्शा स्वीकृत कराना सिर्फ तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक संघर्ष बन चुका था।
ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति प्रणाली लागू होने के बाद इस प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आया है। अब फाइलें टेबल से टेबल नहीं, बल्कि सिस्टम के माध्यम से आगे बढ़ती हैं। समय सीमा तय है, जवाबदेही तय है और हर गतिविधि का डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद है।

उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा का संदेश केवल तकनीक नहीं, सोच में बदलाव
सम्मान समारोह में उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने साफ कहा कि तकनीक तभी कारगर होती है, जब उसके पीछे ईमानदार मंशा और कड़ी निगरानी हो। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन प्रणाली से आम नागरिक को बार-बार दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने पड़ते अनावश्यक लेन-देन की संभावनाएं घटती है। अधिकारियों की कार्यक्षमता मापी जा सकती है उनका यह बयान महत्वपूर्ण है, क्योंकि अक्सर योजनाएं बनती हैं, लेकिन उनका मूल्यांकन नहीं होता। यहां पहली बार प्रदर्शन के आधार पर अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया गया।
कौन हुए सम्मानित
दिसंबर 2025 में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया गया, उनमें अपर नगर नियोजक एवं जोनल अधिकारी सौरभ जोशी, अवर अभियंता जय प्रकाश गुप्ता, अवर अभियंता प्रिया अग्रहरी, जोन-3 के जोनल अधिकारी सौरभ देव प्रजापति, अवर अभियंता रविन्द्र प्रकाश, एसोसिएट इंजीनियर सुशील कुमार इन अधिकारियों ने न केवल संख्या के लिहाज से अधिक मानचित्र स्वीकृत किए, बल्कि समयबद्धता और प्रक्रिया की शुद्धता का भी पालन किया।

सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका
कार्यक्रम में मौजूद वीडीए सचिव डॉ. वेद प्रकाश मिश्रा ने कहा कि डिजिटल प्रणाली के सफल क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की मानसिकता में बदलाव सबसे जरूरी है। अपर सचिव गुड़केश शर्मा, नगर नियोजक प्रभात कुमार, सुनीता गुप्ता सहित अन्य अधिकारियों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि यह पहल केवल एक विभाग तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे प्राधिकरण की सामूहिक सोच का परिणाम है।
आमजन को क्या मिला
ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति से समय की बचत व खर्च में कमी, पारदर्शिता और सबसे अहम, सम्मान के साथ सेवा नागरिकों ने स्वीकार किया कि पहले जहां महीनों लग जाते थे, अब वही काम तय समय में हो रहा है।
सकारात्मक प्रतिस्पर्धा बनाम पुरानी संस्कृति
सरकारी दफ्तरों में अक्सर यह शिकायत रहती है कि अच्छा काम करने और न करने वालों के बीच कोई फर्क नहीं किया जाता। इस सम्मान समारोह ने उस धारणा को चुनौती दी है। जब अधिकारियों को सार्वजनिक मंच से सम्मान मिलता है, तो यह।दूसरों के लिए प्रेरणा बनता है, कार्यसंस्कृति में प्रतिस्पर्धा लाता है और लापरवाही पर नैतिक दबाव बनाता है। यह आयोजन इस बात का संकेत है कि यदि राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त, तकनीक-आधारित और जवाबदेह प्रणाली लागू हो, तो विकास प्राधिकरण भी जनहित का माध्यम बन सकते हैं। हालांकि, यह भी जरूरी है कि यह पहल स्थायी हो, केवल प्रशस्ति पत्र तक सीमित न रहे। आने वाले महीनों में यह देखा जाना चाहिए कि क्या देरी करने वालों पर कार्रवाई भी होगी या नहीं। क्या ऑनलाइन प्रणाली में शिकायत निवारण तंत्र मजबूत होगा।
* ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति से वीडीए की छवि में सुधार
* उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा की स्पष्ट और पारदर्शी प्रशासनिक नीति
* उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को सार्वजनिक सम्मान
* आम नागरिक के लिए आसान और समयबद्ध सेवाएं
भ्रष्टाचार की संभावनाओं में कमी
* सकारात्मक प्रशासनिक बदलाव की ठोस शुरुआत
* * प्राधिकरणों की पहचान लंबे समय तक फाइलों के बोझ, देरी, और कथित भ्रष्टाचार से जुड़ी रही है।
* * आम नागरिक के लिए नक्शा पास कराना एक जटिल, खर्चीला और मानसिक रूप से थकाने वाला अनुभव रहा है।




