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बिजनेस के बहाने स्विट्जरलैंड में मौजमस्ती करने गए नेता! लड़कियों संग 4 रातों का पैसा भरे गरीब जनता

एक करोड़ में 5 लड़कियों के साथ 4 रातों की रंगीनियां- क्या भारत के नेता इसीलिए एमओयू करने जाते हैं दावोस?

– आर्थिक समझौतों के नाम पर आसमानी दावे, पर जमीन पर कुछ नहीं
– कौन उठाता है हमारे नेताओं, अफसरों की रंगीन रातों का भारी खर्च?
– अब देश मांगता है हिसाब- हमारे टैक्स के पैसों से ऐश करने कैसे जा सकते हैं?
– बेहतर है ऐसे व्यापारिक समझौते भारत में इन्वेस्टर मीट में किए जाएं

नई दिल्ली।स्विट्जरलैंड के आल्प्स पर्वतमालाओं के बीच बचा एक खूबसूरत शहर। नाम है दावोस। इस शहर के बारे में एक बार मशहूर है कि यह चाहने वालों का एक ऐसा शहर है, जो दिल के बेहद करीब है। हर साल के आखिर में इस शहद में दुनिया की बड़ी नामी कंपनियों का एक मेला लगता है, जिसे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम कहते हैं। बड़ी कंपनियां, शानदार आयोजन, चमचमाते होटलों में आलीशान पार्टियां और इसी के साथ सजती है एक काले कारोबार की संगीन दुनिया।

 

बाजार की भाषा में इसे सेक्स की दुनिया कहते हैं, जो एक अंतरराष्ट्रीय रैकेट है। इसी के इर्द-गिर्द बसती है विश्व आर्थिक मंच (WEF) की नगरी, जहां पूंजीपति आकर अपने ग्राहकों को लुभाने के लिए कॉल गर्ल्स का सहारा लेते हैं। 19 से 23 जनवरी 2026 तक चले सम्मेलन में भी यही हुआ, लेकिन इस आशिक मिजाजी बाजार के पैकेज को जानकर आप हैरान रह जाएंगे। साल 2026 के विश्व आर्थिक मंच (WEF) में 5 लड़कियों के साथ 4 रातों का प्रति व्यक्ति का पैकेज 1 करोड़ रुपए का था, जिसमें खाने-पीने और शराब के साथ मनोरंजन का एक पूरा गुच्छा होता है। सवाल यह है कि महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस और मध्यप्रदेश के पर्यटन मंत्रालय के अधिकारी और राजनेता क्या कॉर्पोरेट के पैसे से अय्याशी करने दावोस जाते हैं।

 

इलीट सेक्स पार्टी और एस्कॉर्ट बुकिंग का भी इंतजाम

यह सारा घिनौना काम उन कॉर्पोरेट कंपनियों के अधिकारी करते हैं, जिन्हें दावोस में बड़े ठेके मिलने की उम्मीद होती है। इस बार यह काम कुछ वेबसाइटों की मदद से किया गया था, जिसमें 90 खास ग्राहकों के लिए 300 लड़कियां और ट्रांसजेंडर्स एस्कॉर्ट सर्विस के रूप में किराए पर मंगाए गए थे। इसके अलावा दावोस में ‘इलिट सेक्स पार्टीज’ का भी इंतजाम था। इन सभी लड़कियों और ट्रांसजेंडर्स के साथ एक नॉन-डिसक्लोज़र एग्रीमेंट (NDA) साइन किया गया, ताकि वे अपने ग्राहकों के नाम न बता सकें। ऐसे 90 ग्राहकों के लिए होटलों में शानदार कमरे बुक किए गए, जिनमें स्वीमिंग पूल की सुविधा भी थी। पूरा पैकेज एक करोड़ रुपए के बराबर (स्विस फ्रांक में तीन लाख रुपए) था, जिसमें एक मेहमान चार दिन तक के लिए 5 लड़कियों और ट्रांसजेंडर्स के साथ वक्त बिता सकता है। इस रकम में होटल का किराया और आवाजाही के लिए लिए होने वाला खर्च शामिल नहीं है। यह सारा खर्च उन बड़ी कंपनियों के अधिकारी वहन करते हैं, जिनके बदले में उन्हें ठेके मिलते हैं। यह पैसा ठेकों के बदले दिए जाने वाले कमीशन में जोड़ा जाता है।
एक बुकिंग की कमाई 6 हजार पाउंड

स्विट्जरलैंड में वेश्यावृत्ति कानूनी अपराध नहीं है। वहां अमूमन एक बुकिंग में लड़कियां रातभर में 6 हजार पाउंड की आमदनी बटोर लेती हैं। लेकिन दावोस जैसे अरबपतियों के सम्मेलन में, जहां दुनियाभर की कारोबारी और राजनीतिक हस्तियां भाग लेती हैं, यह कमाई लाखों में पहुंच जाती हैं। दिनभर की बिजनेस मीटिंग के बाद शाम ढलते ही इन रईसों के लिए रातों को रंगीन करने वाली महिलाओं की जरूरत पड़ती है। ब्रिटिश अखबार डेली मेल ने इस बार दावोस में हुए विश्व आर्थिक मंच की एक खास रिपोर्ट की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक हफ्ते तक चलने वाले इस सम्मेलन के लिए डेटिंग ऐप टिट फॉर टैट के साथ एक खास अनुबंध किया गया था, जहां इस बार डेटिंग की मांग में 400 फीसदी का इजाफा देखा गया। इसी ऐप पर एक बड़ी हस्ती ने चार दिन के लिए पांच लड़कियों को बुक किया। इसका खर्च 96 हजार स्विस फ्रांक आया। इसके अलावा माय लेडीज जैसी स्विस एस्कॉर्ट एजेंसियों ने भी जमकर कमाई की। इस एजेंसी से एक लड़की की एस्कॉर्ट के रूप में बुकिंग करने में 17 हजार पाउंड खर्च होते हैं, जो कि भारतीय मुद्रा में 21 लाख रुपए से अधिक है। एजेंसी के एक अधिकारी ने बताया कि दावोस में आने वाले अरबपति ऐसी लड़कियां चाहते हैं, जिनसे दोस्त जैसी फीलिंग आए। ये लड़कियां महंगी पार्टियों, इवेंट्स और अन्य कार्यक्रमों में गर्लफ्रेंड की तरह शामिल होती हैं। ऐसी ही एक एस्कॉर्ट गर्ल को सम्मेलन के बाद उसे बुक करने वाले एक कंपनी के सीईओ ने अपनी कंपनी में नौकरी तक दे दी।

इस तरह की अश्लील मांगें

माय लेडीज की प्रवक्ता ने डेली मेल को बताया कि दावोस में भाग लेने आए एक जाने-पहचाने शख्स ने एक ऐसी लड़की की मांग की, जो स्वेट पैंट में उसके लिए पिज्जा लेकर आए। इसके लिए वे 5 हजार स्विस फ्रैंक तक खर्च करने को राजी थे। एक और सीईओ चाहते थे कि एस्कॉर्ट गर्ल सम्मेलन में उनके भाषण को स्विम सूट पहनकर चुपचाप सुनती रहे। एक अन्य एस्कॉर्ट एजेंसी के अधिकारी बताते हैं कि ज्यादातर अरबपति और राजनेता लड़कियों से चुपचाप हुक्म मानने की उम्मीद करते हैं। इसमें सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं सेक्स पार्टीज में लड़कयों की अलग-अलग भूमिकाएं। इनमें लड़कियों को गुलामों की तरह बर्ताव करते हुए हर बात माननी पड़ती है।

भारत में हंगामा

दावोस में भारत के राजनेताओं की जरूरत से ज्यादा दिलचस्पी पर खूब हंगामा मचा हुआ है। शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता आदित्य ठाकरे ने विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) में महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि वे जिनसे समझौता करने वहां गए हैं, वे भारत में आसानी से उपलब्ध हैं। इससे पहले फडणवीस ने दावोस में कहा था कि उन्होंने महाराष्ट्र के लिए 30 लाख करोड़ के समझौता ज्ञापनों पर दस्तखत किए हैं, जिनसे 40 लाख तक नौकरियां उपलब्ध हो सकती हैं। लेकिन शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत ने दावोस जाने वाले राज्य के नेताओं से यात्रा के खर्च की जानकारी को सार्वजनिक करने की मांग की थी। उन्होंने ऐसी यात्राओं को पिकनिक बताते हुए ऐसे कार्यक्रमों में उनकी शिरकत को हास्यास्पद बताया था।

दावोस का मतलब न्यू ईयर की रंगीन पार्टी

जी हां। साल की शुरुआत में स्विट्जरलैंड के इस खूबसूरत शहर में होने वाला विश्व आर्थिक मंच का यह सम्मेलन भारत के राजनेताओं के लिए बिजनेस लाने का रास्ता नहीं, बल्कि न्यू ईयर की रंगीन पार्टियां मनाने की जगह बन चुका है। इस बार यूपी का भी एक प्रतिनिधिमंडल वित्त और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना की अगुवाई में दावोस गया था। खन्ना के अनुसार, इस एक हफ्ते के सम्मेलन में यूपी सरकार को 3 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। लेकिन ये प्रस्ताव कब जमीन पर उतरेंगे, कब समझौता होगा और कब राज्य के लोगों को इसका फायदा मिलेगा- ये सभी बड़े सवाल हैं। दावोस में इस तरह की डीलिंग से पहले कई एजेंसियां राज्यों की ब्रांडिंग करती हैं। कमीशन तय होते हैं। गिफ्ट के रूप में लुभावने ऑफर्स दिए जाते हैं। ऐसे में आम जनता के टैक्स के पैसों से दावोस जाने वाले राज्य सरकार के नेताओं और अफसरों को यह बताना चाहिए कि उनकी यात्रा पर कितना खर्च आया और वह पैसा किसने दिया, साथ ही आम लोगों को उनकी यात्रा से क्या फायदा हुआ। बेहतर होगा कि ऐसे सम्मेलन भारत में ही इन्वेस्टर समिट के रूप में किए जाएं।

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