योगी के सपनो को पूर्ण बोरा ने दी ऊंची उड़ान,ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर काशी के विकास का है प्लान
काशी को नई उड़ान योगी के विजन को पूर्ण बोरा ने दिया आकार

नोएडा मॉडल पर बसाया जाएगा ‘ग्रेटर बनारस’
नोएडा-ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर विकसित होगा ग्रेटर बनारस
60 किमी रिंग रोड के दायरे में सुनियोजित शहरी विस्तार
1272 एकड़ भूमि पर छह नई सिटी बसाने की योजना
6812 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक भूमि अधिग्रहण प्रस्ताव
मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत 1000 करोड़ की स्वीकृति
मेडिसिटी, स्पोर्ट्स सिटी, वैदिक सिटी सहित छह थीम आधारित सिटी
अस्पताल, मॉल, होटल, आईटी पार्क और ग्रीन जोन का विकास
काशी के गांवों, युवाओं और रोजगार को मिलेगा नया भविष्य
वाराणसी। काशी केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। सदियों से यह नगरी आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक निरंतरता और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक रही है। लेकिन बदलते समय के साथ काशी के सामने एक बड़ी चुनौती रही है। विकास और विरासत के बीच संतुलन। इसी संतुलन को साधने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस आधुनिक, सुव्यवस्थित और आत्मनिर्भर काशी का सपना देखा है, उसे अब ग्राउंड पर उतारने की ठोस शुरुआत हो चुकी है। इस सपने को प्रशासनिक उड़ान देने का काम किया है वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने। नोएडा और ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर अब काशी के चारों ओर ‘ग्रेटर बनारस’ बसाने की ऐतिहासिक योजना पर काम तेज हो गया है। यह योजना केवल शहर विस्तार नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल के आर्थिक, सामाजिक और शहरी परिदृश्य को बदलने वाली परियोजना मानी जा रही है।
योजना के तहत 60 किलोमीटर लंबे रिंग रोड के दायरे में सड़क के दोनों ओर 200-200 मीटर तक सुनियोजित विकास किया जाएगा। यहां अस्पताल, मॉल, होटल, स्कूल, कॉलेज, आईटी इंडस्ट्री, कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स और ग्रीन एरिया विकसित होंगे। यानी वह विकास, जो अब तक दिल्ली-एनसीआर तक सीमित था, अब काशी की परिधि में आकार लेगा। सरकार ने इसके लिए 1272 एकड़ भूमि चिन्हित की है। भूमि अधिग्रहण पर लगभग 6812.93 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के अंतर्गत 1000 करोड़ रुपये विशेष रूप से ग्रेटर बनारस बसाने के लिए आवंटित किए गए हैं। यह निवेश इस बात का संकेत है कि काशी अब केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि आधुनिक शान वाला वैश्विक शहर बनने की ओर अग्रसर है। पूरी योजना की खास बात यह है कि यह विकास केवल शहर केंद्रित नहीं है। रिंग रोड के आसपास बसने वाली नई टाउनशिप से ग्रामीण क्षेत्रों का भी कायाकल्प होगा। गांवों को शहर से जोड़ने वाली यह योजना शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी। पूर्ण बोरा के नेतृत्व में तैयार यह मास्टर प्लान बताता है कि विकास केवल इमारतें खड़ी करने का नाम नहीं, बल्कि सुनियोजित जीवन देने की प्रक्रिया है। काशी अब अराजक विस्तार नहीं, बल्कि सेक्टोरल डेवलपमेंट और एकीकृत टाउनशिप मॉडल के जरिए आगे बढ़ेगी।
नोएडा मॉडल पर काशी का विस्तार ‘ग्रेटर बनारस’ क्यों है समय की जरूरत
वाराणसी बीते दस वर्षों में जिस रफ्तार से आगे बढ़ा है, उसने विकास के साथ नई चुनौतियां भी पैदा की हैं। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, रिंग रोड, फ्लाईओवर, एयरपोर्ट विस्तार, पर्यटन परियोजनाएं और बढ़ती निवेश संभावनाओं ने शहर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूती से स्थापित किया है। लेकिन इसी के साथ आबादी का दबाव, अनियोजित निर्माण, ट्रैफिक जाम, आवास संकट और रोजगार की सीमित संभावनाएं भी तेजी से उभरी हैं। शहर के भीतर ही इन समस्याओं का समाधान खोजने की कोशिश अब व्यावहारिक नहीं रह गई थी। यही कारण है कि शासन और प्रशासन ने मिलकर यह स्वीकार किया कि काशी के संतुलित विकास के लिए शहर के बाहर सुनियोजित शहरी विस्तार ही एकमात्र रास्ता है। इसी सोच से जन्म लिया है ‘ग्रेटर बनारस’ की अवधारणा ने। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन है कि काशी की आत्मा सुरक्षित रहे, लेकिन उसका भविष्य आधुनिक, रोजगारोन्मुख और वैश्विक मानकों के अनुरूप हो। इस विजन को जमीन पर उतारने का दायित्व वाराणसी विकास प्राधिकरण को सौंपा गया और उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा के नेतृत्व में इसका ठोस रोडमैप तैयार किया गया।
रिंग रोड ग्रेटर बनारस की रीढ़
ग्रेटर बनारस की पूरी परिकल्पना 60 किलोमीटर लंबे रिंग रोड को केंद्र में रखकर तैयार की गई है। यह रिंग रोड न केवल ट्रैफिक डायवर्जन का साधन बनेगा, बल्कि आने वाले दशकों में काशी के आर्थिक और शहरी विस्तार की रीढ़ होगा। योजना के अनुसार रिंग रोड के दोनों ओर 200-200 मीटर तक नियंत्रित और नियोजित निर्माण होगा। अराजक प्लॉटिंग और अवैध निर्माण पर रोक लगेगी। भूमि उपयोग पहले से तय सेक्टरों में होगा, इस मॉडल से एक ओर जहां शहर के भीतर का दबाव कम होगा, वहीं दूसरी ओर काशी के आसपास नए आर्थिक केंद्र विकसित होंगे।
1272 एकड़ में फैला भविष्य
ग्रेटर बनारस के लिए कुल 1272 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। यह भूमि बिखरी हुई नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से उन क्षेत्रों में चयनित की गई है, जहां सड़क, परिवहन और भविष्य के विस्तार की संभावनाएं मौजूद हैं। भूमि के अधिग्रहण पर लगभग 6812.93 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह राशि अपने आप में बताती है कि यह परियोजना केवल कागजी योजना नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिक विकास योजनाओं में शामिल है।
इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत 1000 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान ग्रेटर बनारस के लिए किया गया है, ताकि बुनियादी ढांचे के निर्माण में किसी स्तर पर संसाधनों की कमी न आए।
छह थीम आधारित सिटी : विकास का विकेंद्रीकरण
ग्रेटर बनारस की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है, थीम आधारित सिटी मॉडल। इसका उद्देश्य यह है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, आध्यात्म और आवास को एक ही स्थान पर केंद्रित करने के बजाय अलग-अलग सिटी के रूप में विकसित किया जाए।

1. मेडिसिटी-लालपुर ऐढ़े
यह सिटी पूर्वांचल को स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर होगी।
200 एकड़ क्षेत्र
1619.43 करोड़ रुपये की लागत
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल
मेडिकल कॉलेज, हेल्थ रिसर्च और ट्रॉमा सेंटर
यह मेडिसिटी न केवल वाराणसी, बल्कि पूर्वांचल, बिहार और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों के लिए भी वरदान साबित होगी।
2. वैदिक सिटी-सारनाथ संदहा
काशी की आध्यात्मिक पहचान को आधुनिक संदर्भ में आगे बढ़ाने के लिए वैदिक सिटी का खाका तैयार किया गया है।
204 एकड़ क्षेत्र
1090.20 करोड़ रुपये की लागत
वैदिक अध्ययन केंद्र, योग, आयुर्वेद और ध्यान संस्थान
आध्यात्मिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र
3. विद्या निकेतन सिटी मढ़नी रिंग रोड
यह सिटी काशी को शिक्षा का आधुनिक हब बनाएगी।
207 एकड़ क्षेत्र
496.80 करोड़ रुपये की लागत
स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट सेंटर
4. स्पोर्ट्स सिटी-गंजारी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम के पास
खेल को करियर के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम।
208 एकड़ क्षेत्र
998.40 करोड़ रुपये की लागत
खेल अकादमी, प्रशिक्षण केंद्र
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की सुविधा
5. वरुणा विहार सिटी-खेवसीपुर रिंग रोड
यह एक आधुनिक रिहायशी और ग्रीन सिटी होगी।
208 एकड़ क्षेत्र
981.38 करोड़ रुपये की लागत
पर्यावरण संतुलन पर आधारित आवासीय मॉडल
6. वर्ल्ड सिटी-हरहुआ कोइराजपुर
यह ग्रेटर बनारस का ग्लोबल फेस होगा।
245 एकड़ क्षेत्र
1626.72 करोड़ रुपये की लागत
अंतरराष्ट्रीय मानकों के रिहायशी और कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स

भूमि अधिग्रहण, पारदर्शिता और जिम्मेदारी
इन सभी सिटी को विकसित करने की जिम्मेदारी वाराणसी विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद को सौंपी गई है। मढ़नी और गंजारी क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। शासन स्तर से स्पष्ट निर्देश हैं कि किसानों के हित सुरक्षित रहें, मुआवजा पारदर्शी हो, किसी भी प्रकार की जबरदस्ती न हो, ग्रामीण विकास और रोजगार का नया अध्याय
ग्रेटर बनारस परियोजना का सबसे बड़ा प्रभाव शहर से बाहर देखने को मिलेगा।
हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार
स्थानीय युवाओं को काम के अवसर गांवों में सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं, जमीन की कीमतों में संतुलित और नियंत्रित वृद्धि यह परियोजना गांव और शहर के बीच की खाई को पाटने की दिशा में निर्णायक कदम है।
शासन की सीधी निगरानी
परियोजना की कार्ययोजना शासन स्तर पर मांगी गई है। संयुक्त सर्वे और अंतिम रिपोर्ट के बाद चरणबद्ध तरीके से काम आगे बढ़ेगा, ताकि विकास नियंत्रित, टिकाऊ और जनहितैषी रहे। ग्रेटर बनारस केवल एक नई टाउनशिप नहीं, बल्कि काशी के भविष्य का रोडमैप है।
योजना बताती है कि विकास अगर सही सोच, मजबूत नीति और ईमानदार क्रियान्वयन के साथ हो, तो विरासत भी सुरक्षित रहती है और भविष्य भी उज्ज्वल बनता है।
* ग्रेटर बनारस का मास्टर प्लान तैयार
* 60 किमी रिंग रोड के आसपास सुनियोजित विकास
* 1272 एकड़ भूमि चिन्हित
* 6812 करोड़ से अधिक का भूमि अधिग्रहण
* छह थीम आधारित नई सिटी
* मेडिसिटी, स्पोर्ट्स सिटी, वैदिक सिटी प्रमुख आकर्षण
* वीडीए और आवास विकास परिषद को जिम्मेदारी
* काशी और गांव दोनों का समग्र विकास




