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वीडीए उपाध्यक्ष ने चंद्रा ग्रुप को नही दी कोई ढील, अनुराग चंद्रा का ग्रुप हाउसिंग कराया सील

वीडए का अवैध निर्माण पर जीरो टॉलरेंस, सेहमलपुर में बिना नक्शा बने फ्लैट सील

 

* उपाध्यक्ष के निर्देश पर जोन-1 की प्रवर्तन टीम की बड़ी कार्रवाई

* शिल्पी इंटर प्राइजेज के 32 फ्लैट सील, नियम विरुद्ध निर्माण पर प्रहार

* नगर नियोजन अधिनियम-1973 की धारा 27, 28 के तहत की गई कार्रवाई

* ईडब्ल्यूएस और एलआईजी के नाम पर स्वीकृति, मौके पर अलग निर्माण

* प्रवर्तन टीम व पुलिस बल की संयुक्त मौजूदगी में सीलिंग
आमजन से अपील–स्वीकृत ले-आउट और मानचित्र की जांच कर ही करें निवेश

वाराणसी। काशी के सुनियोजित और संतुलित विकास को लेकर वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि शहर में अवैध निर्माण के लिए कोई जगह नहीं है। उपाध्यक्ष श्री बोरा के स्पष्ट निर्देशों के क्रम में जोन-1 की प्रवर्तन टीम ने वार्ड शिवपुर क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए बिना स्वीकृत मानचित्र के किए जा रहे निर्माण को सील कर दिया। मौजा सेहमलपुर, अठगांवा स्थित आराजी नंबर 13, 17, 18 व 19 पर शिल्पी इंटर प्राइजेज द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्य को नियमानुसार अनुमति न होने और स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण पाए जाने पर उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा 27 तथा धारा 28 (I), 28 (II) के तहत सील किया गया। प्राधिकरण की यह कार्रवाई केवल एक भवन को सील करने की प्रक्रिया भर नहीं है, बल्कि यह शहर में अनुशासित शहरीकरण की दिशा में उठाया गया सख्त और सकारात्मक कदम है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पूर्व में स्वीकृत मानचित्र के अनुसार कुल छह ब्लॉकों में ईडब्ल्यूएस एवं एलआईजी श्रेणी के 32 फ्लैटों का निर्माण प्रस्तावित था। किंतु मौके पर जांच में पाया गया कि निर्माण कार्य स्वीकृत मानचित्र से भिन्न और नियमानुसार अनुमति के बिना किया जा रहा था।
वीडीए की प्रवर्तन टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया और स्पष्ट उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से सीलिंग की कार्रवाई की। इस दौरान सहायक नगर नियोजक सौरभ जोशी, अवर अभियंता जयप्रकाश गुप्ता, प्रवर्तन दल के सदस्य, सुपरवाइजर तथा पुलिस बल मौजूद रहे। कार्रवाई पूरी पारदर्शिता और विधिक प्रक्रिया के तहत संपन्न की गई। उपाध्यक्ष श्री बोरा ने दो टूक कहा है कि प्राधिकरण का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि शहर को व्यवस्थित विकास की दिशा में आगे बढ़ाना है। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे केवल वीडीए से स्वीकृत ले-आउट वाले प्लॉट ही खरीदें और किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य मानचित्र स्वीकृत कराए बिना न करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि कोई नियमों की अनदेखी करता है तो प्राधिकरण कठोर कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगा। काशी की ऐतिहासिक पहचान और तेजी से हो रहे शहरी विस्तार के बीच यह आवश्यक हो गया है कि विकास योजनाबद्ध और नियम सम्मत हो। अवैध निर्माण न केवल शहर की संरचना को अव्यवस्थित करते हैं, बल्कि भविष्य में नागरिकों को कानूनी और आर्थिक संकट में भी डालते हैं। ऐसे में वीडीए की यह कार्रवाई उन निवेशकों और आम नागरिकों के लिए भी चेतावनी है जो बिना जांच-पड़ताल के संपत्ति खरीद लेते हैं।
वीडीए का यह कदम यह संदेश देता है कि काशी का विकास अब केवल विस्तार का नाम नहीं, बल्कि व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही का प्रतीक होगा।

वीडीए की बड़ी कार्रवाई, अवैध निर्माण पर सख्त प्रहार

वाराणसी। काशी के सुनियोजित विकास की दिशा में वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) ने एक बार फिर स्पष्ट संदेश दिया है कि शहर में अवैध निर्माण को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उपाध्यक्ष श्री बोरा के निर्देश पर जोन-1 की प्रवर्तन टीम ने वार्ड शिवपुर के सेहमलपुर, अठगांवा क्षेत्र में बिना स्वीकृत मानचित्र के किए जा रहे निर्माण कार्य पर सीलिंग की कार्रवाई की। यह कदम न केवल नियमन की दृढ़ता को दर्शाता है, बल्कि आमजन के हितों की रक्षा की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

सेहमलपुर, अठगांवा की आराजी संख्या 13, 17, 18, 19 हुई कार्रवाई

प्रवर्तन टीम द्वारा की गई कार्रवाई मौजा-सेहमलपुर, अठगांवा स्थित आराजी नंबर 13, 17, 18 व 19 पर केंद्रित रही। यहां शिल्पी इंटर प्राइजेज, चंद्र टावर बजरिया अनुराग चंद्र के नाम से निर्माण कार्य संचालित किया जा रहा था। प्राथमिक जांच में सामने आया कि निर्माण कार्य विधिवत स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप नहीं था। वीडीए के अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण कर दस्तावेजों का मिलान किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे भवन निर्माण नियमों का उल्लंघन स्पष्ट रूप से सामने आया।

क्या था स्वीकृत मानचित्र, और क्या मिला मौके पर

प्राधिकरण से पूर्व में स्वीकृत मानचित्र के अनुसार कुल छह ब्लॉकों में ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) और एलआईजी (निम्न आय वर्ग) के लिए कुल 32 फ्लैटों का निर्माण प्रस्तावित था। यह परियोजना सामाजिक आवास की श्रेणी में आती थी, जिसका उद्देश्य निम्न आय वर्ग के लोगों को नियमानुसार आवास उपलब्ध कराना था। लेकिन मौके पर जांच में पाया गया कि निर्माण कार्य स्वीकृत मानचित्र की शर्तों से अलग तरीके से किया जा रहा था। भवन संरचना, ब्लॉक व्यवस्था और निर्माण स्वरूप में स्पष्ट विचलन दर्ज किया गया। ऐसे में यह मामला केवल तकनीकी त्रुटि का नहीं, बल्कि नियमों की अनदेखी का प्रतीक बन गया।

कानूनी कार्रवाई अधिनियम-1973 की धारा 27 व 28 के तहत सीलिंग

उल्लंघन की पुष्टि होने के बाद उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा 27 तथा धारा 28 (I), 28 (II) के अंतर्गत कार्रवाई की गई। प्रवर्तन टीम ने विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए पुलिस बल की मौजूदगी में निर्माण स्थल को सील कर दिया।
यह कार्रवाई पूर्ण पारदर्शिता और विधिक औपचारिकताओं के साथ संपन्न हुई। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया कि आगे भी यदि नियमों की अवहेलना पाई गई तो दंडात्मक कदम और कठोर हो सकते हैं। कार्रवाई के दौरान सहायक नगर नियोजक सौरभ जोशी, अवर अभियंता जयप्रकाश गुप्ता, प्रवर्तन दल के सदस्य, सुपरवाइजर तथा पर्याप्त पुलिस बल मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने स्थल का मुआयना कर आवश्यक दस्तावेजों का परीक्षण किया और तत्पश्चात सीलिंग की प्रक्रिया पूरी की। पुलिस बल की मौजूदगी ने यह सुनिश्चित किया कि कार्रवाई शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो।

उपाध्यक्ष का स्पष्ट संदेश नियमों से समझौता नहीं

वीडीए उपाध्यक्ष श्री बोरा ने कहा कि काशी का विकास योजनाबद्ध और संतुलित ढंग से होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राधिकरण का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि शहर की संरचना को सुरक्षित और सुव्यवस्थित रखना है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे केवल वीडीए से स्वीकृत ले-आउट वाले प्लॉट ही खरीदें। साथ ही, किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य प्रारंभ करने से पहले मानचित्र की विधिवत स्वीकृति अवश्य प्राप्त करें। अन्यथा प्राधिकरण द्वारा सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मानचित्र स्वीकृति क्यों जरूरी

मानचित्र स्वीकृति केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह भवन की सुरक्षा, अग्नि प्रबंधन, जल निकासी, पार्किंग, सड़क चौड़ाई और सार्वजनिक सुविधाओं के संतुलन को सुनिश्चित करती है। यदि निर्माण कार्य नियमों के विपरीत होता है तो भविष्य में रहने वालों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अवैध निर्माण न केवल शहर की रूपरेखा को बिगाड़ते हैं, बल्कि नागरिकों को कानूनी विवाद और आर्थिक नुकसान की स्थिति में भी डाल सकते हैं।
आमजन के लिए चेतावनी और सलाह वीडीए ने नागरिकों से आग्रह किया है कि संपत्ति खरीदते समय केवल विज्ञापन या आकर्षक ऑफर के आधार पर निर्णय न लें। ले-आउट की स्वीकृति, मानचित्र की प्रति और प्राधिकरण से संबंधित अनुमतियों की पुष्टि अवश्य करें। प्राधिकरण की यह कार्रवाई एक चेतावनी भी है और एक सकारात्मक पहल भी चेतावनी उन लोगों के लिए जो नियमों की अनदेखी करते हैं, और सकारात्मक पहल उन नागरिकों के लिए जो सुरक्षित और वैध निवेश करना चाहते हैं।

सुनियोजित विकास की दिशा में कदम

तेजी से विकसित हो रहा है। ऐसे में यदि निर्माण गतिविधियां नियंत्रण में न हों तो भविष्य में यातायात, सीवर, जल निकासी और पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। वीडीए की यह कार्रवाई इस दिशा में एक मजबूत संदेश है कि विकास होगा। लेकिन नियमों के दायरे में। काशी के संतुलित और सुरक्षित शहरी भविष्य के लिए यह जरूरी है कि प्रशासन और नागरिक दोनों मिलकर नियमों का पालन करें। वीडीए की यह पहल उसी सामूहिक जिम्मेदारी का उदाहरण है।

* आराजी नंबर 13, 17, 18, 19 मौजा-सेहमलपुर, अठगांवा में कार्रवाई
* शिल्पी इंटर प्राइजेज द्वारा बिना मानचित्र स्वीकृति निर्माण
* ईडब्ल्यूएस/एलआईजी के 32 फ्लैट प्रस्तावित, मौके पर मानचित्र से भिन्न कार्य
* उप्र नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा 27, 28 के तहत कार्रवाई
* सहायक नगर नियोजक व अवर अभियंता की मौजूदगी
* पुलिस बल के सहयोग से सीलिंग
* उपाध्यक्ष की सख्त चेतावनी अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं

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