वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने बिल्डरों को चेताया,सीसी न लेने वालों का बिगाड़ देंगे काया
बोरा ने की अगुवाई में प्राधिकरण अपने अब तक के स्वर्णिम दौर में,जो काम अब तक कभी नही हुआ,वो उपाध्यक्ष के दृढ़ संकल्प से पूरे हो रहे है

सुरक्षित और व्यवस्थित आवास की दिशा में सख्त कदम
73 ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं पर वीडीए की बड़ी कार्रवाई
वीडीए की समीक्षा में बड़े बिल्डरों की परियोजनाएं भी दायरे में, सैकड़ों परिवारों की सुरक्षा पर प्रश्न
फायर सेफ्टी और लिफ्ट सुरक्षा पर गंभीर सवाल
पूर्णता प्रमाण-पत्र महज कागज नहीं, सुरक्षा की गारंटी
फ्लैट बिके, लोग बसे… पर कानूनी प्रक्रिया अधूरी
बिल्डरों को नोटिस, समय सीमा तय
विकास होगा, लेकिन नियमों के भीतर

वाराणसी। काशी के तेजी से बदलते शहरी परिदृश्य में विकास की रफ्तार जितनी तेज हुई है, उतनी ही तेज गति से ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं का विस्तार भी हुआ है। शहर के विभिन्न हिस्सों में बहुमंजिला आवासीय इमारतें खड़ी हो गईं, फ्लैट बिक गए, लोग बस गए, लेकिन एक बेहद महत्वपूर्ण सवाल अक्सर अनदेखा रह गया क्या इन इमारतों को विधिवत पूर्णता प्रमाण-पत्र प्राप्त है। अब वाराणसी विकास प्राधिकरण ने इसी सवाल को केंद्र में रखकर एक व्यापक समीक्षा की है और 73 ऐसी ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं को चिन्हित किया है, जिन्होंने अब तक पूर्णता प्रमाण-पत्र प्राप्त नहीं किया है। वीडीए ने स्पष्ट किया है कि पूर्णता प्रमाण-पत्र कोई औपचारिक कागजी प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह भवन की संरचनात्मक मजबूती, फायर सेफ्टी, पार्किंग व्यवस्था, विद्युत प्रणाली, जल निकासी, लिफ्ट सुरक्षा, सामुदायिक सुविधाओं और स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप निर्माण की अंतिम वैधानिक पुष्टि है। बिना इस प्रमाण-पत्र के किसी भी परियोजना को पूर्ण रूप से सुरक्षित और नियमानुसार निर्मित नहीं माना जा सकता। यही कारण है कि प्राधिकरण ने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित बिल्डरों और प्रवर्तकों को नोटिस जारी कर दिया है। इन परियोजनाओं में सैकड़ों परिवार निवास कर रहे हैं। ऐसे में पूर्णता प्रमाण-पत्र के अभाव की स्थिति न केवल कानूनी अनिश्चितता उत्पन्न करती है, बल्कि निवासियों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर भी चिंता खड़ी करती है। वीडीए की यह कार्रवाई दंडात्मक कम और सुधारात्मक अधिक मानी जा रही है। प्राधिकरण का उद्देश्य स्पष्ट है। शहर में सुनियोजित, सुरक्षित और नियमसम्मत विकास सुनिश्चित करना। इसके लिए बिल्डरों को निर्धारित समयावधि में सभी आवश्यक दस्तावेज, अनुपालन रिपोर्ट और तकनीकी प्रमाण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि समय पर अनुपालन नहीं हुआ, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। तेजी से फैलते शहरीकरण के बीच यह कदम वाराणसी को अव्यवस्थित कंक्रीट जंगल बनने से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। यह संदेश भी स्पष्ट है कि विकास होगा, लेकिन नियमों के भीतर होगा; निर्माण होगा, लेकिन सुरक्षा और वैधानिकता के साथ होगा।

पूर्णता प्रमाण-पत्र क्यों है यह अनिवार्य दस्तावेज?
पूर्णता प्रमाण-पत्र वह वैधानिक दस्तावेज है, जो यह प्रमाणित करता है कि भवन निर्माण स्वीकृत मानचित्र, निर्धारित भवन उपविधियों, अग्नि सुरक्षा मानकों और अन्य नियामक शर्तों के अनुरूप पूरा किया गया है। इसके बिना भवन को कानूनी रूप से पूर्ण नहीं माना जाता। यह प्रमाण-पत्र निम्न बिंदुओं की पुष्टि करता है कि स्वीकृत नक्शे के अनुरूप निर्माण, संरचनात्मक स्थायित्व प्रमाणन, फायर विभाग की अनापत्ति
लिफ्ट निरीक्षण प्रमाण, पार्किंग एवं ओपन एरिया का अनुपालन, जल निकासी और सीवरेज व्यवस्था, विद्युत सुरक्षा मानक यदि इनमें से किसी भी बिंदु पर कमी पाई जाती है, तो प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया जाता।
73 परियोजनाएं चिन्हित समीक्षा में सामने आई स्थिति
वीडीए की हालिया समीक्षा में कुल 73 ग्रुप हाउसिंग परियोजनाएं ऐसी पाई गईं, जिन्होंने निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया, फ्लैटों की बिक्री भी कर दी, लेकिन पूर्णता प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन या प्रक्रिया पूरी नहीं की।
नन्द विराट पैराडाइज, वृन्दावन रेजीडेंसी, बेबीलोन हाइट्स, जीत रिवेरा, भानु प्रताप टावर, सी.आई.पी.एल. एन्क्लेव इन परियोजनाओं में बड़ी संख्या में निवासी रह रहे हैं, जिससे मामला और गंभीर हो जाता है।
निवासियों पर संभावित प्रभाव
पूर्णता प्रमाण-पत्र न होने की स्थिति में बिजली का स्थायी कनेक्शन बाधित हो सकता है। जल आपूर्ति पर वैधानिक समस्या आ सकती है। बैंक लोन या पुनर्विक्रय में दिक्कत, बीमा क्लेम में जटिलता, कानूनी विवाद की आशंका सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा से जुड़ी है। यदि फायर सेफ्टी मानक अधूरे हैं या लिफ्ट निरीक्षण विधिवत नहीं हुआ है, तो दुर्घटना की स्थिति में गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
वीडीए का रुख सख्ती के साथ सुधार का अवसर
प्राधिकरण ने बिल्डरों को नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयसीमा में आवश्यक अनुपालन प्रस्तुत किया जाए। यह कदम दंडात्मक कार्रवाई से पहले सुधार का अवसर देने के उद्देश्य से उठाया गया है। यदि बिल्डर समय पर दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करते, तो जुर्माना, निर्माण पर रोक, वैधानिक कार्रवाई के साथ ही परियोजना सील करने तक की कार्रवाई संभव है।
सुनियोजित विकास की दिशा में पहल
वाराणसी एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी है। यहां विकास की आवश्यकता है, लेकिन अव्यवस्थित विकास शहर की पहचान और संरचना दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है। ग्रुप हाउसिंग परियोजनाएं शहरी विस्तार का हिस्सा हैं, पर उनका नियमन आवश्यक है। वीडीए का यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि खुले क्षेत्र सुरक्षित रहें, पार्किंग अतिक्रमण में न बदले
फायर सेफ्टी उपकरण कार्यशील हों, सामुदायिक सुविधाएं वास्तव में उपलब्ध हों।
बिल्डरों की जिम्मेदारी और जवाबदेही
रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य है। फ्लैट बेचने के बाद बिल्डर की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। पूर्णता प्रमाण-पत्र प्राप्त करना उसकी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है। वीडीए ने संकेत दिया है कि भविष्य में नियमित निरीक्षण, डिजिटल मॉनिटरिंग, निर्माण के प्रत्येक चरण की रिपोर्टिंग को अनिवार्य किया जा सकता है।
नियमों से ही सुरक्षित विकास
यह कार्रवाई केवल 73 परियोजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए संदेश है कि बिना वैधानिक अनुपालन के विकास स्वीकार्य नहीं होगा।
वाराणसी के नागरिकों के लिए भी यह अवसर है कि वे फ्लैट खरीदने से पहले पूर्णता प्रमाण-पत्र की स्थिति अवश्य जांचें। वीडीए की यह कार्रवाई शहर को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और नियमसम्मत विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का संकेत है। यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा, कानूनी स्पष्टता और शहरी अनुशासन से जुड़ा विषय है। यदि बिल्डर समय पर अनुपालन करते हैं, तो यह पहल शहर के आवासीय ढांचे को मजबूत और भरोसेमंद बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
* 73 ग्रुप हाउसिंग परियोजनाएं बिना पूर्णता प्रमाण-पत्र के चिन्हित
* प्रमुख परियोजनाएं भी सूची में शामिल
* फायर सेफ्टी, पार्किंग, लिफ्ट सुरक्षा पर सवाल
* बिल्डरों को नोटिस जारी
* निर्धारित समयसीमा में अनुपालन का निर्देश
* सुनियोजित और सुरक्षित विकास की दिशा में कदम




