वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा कमर्शियल बिल्डिंगों की कराएंगे जांच,विधि विरुद्ध भवनों का बिगाड़ देंगे साज

- सिद्धगिरीबाग हादसे के बाद सख्त कार्रवाई अवैध निर्माणों पर कसा शिकंजा, जोनल अधिकारियों की जवाबदेही तय
- सिद्धगिरीबाग में 17 फरवरी को मोल्डिंग गिरने से हुई दुर्घटना के बाद प्रशासन सक्रिय
- उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने अवैध वाणिज्यिक निर्माणों पर सख्त रुख अपनाया
- सभी जोनल अधिकारियों व अवर अभियंताओं को होटल, मॉल और कमर्शियल भवनों की जांच के निर्देश
- भवन संख्या D-55/57, दशाश्वमेध वार्ड में स्वीकृत मानचित्र से अधिक निर्माण का मामला उजागर
- उ.प्र. नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा 27, 28(1), 28(2) के तहत कार्रवाई
- संबंधित जोनल अधिकारी को प्रतिकूल प्रविष्टि और कारण बताओ नोटिस जारी

वाराणसी। सिगरा क्षेत्र के हृदयस्थल सिद्धगिरीबाग में 17 फरवरी को मोल्डिंग गिरने से हुई दुर्घटना ने एक बार फिर शहर में अनियंत्रित और अनियमित निर्माणों की भयावह सच्चाई को उजागर कर दिया। यह महज एक तकनीकी चूक या सौंदर्यीकरण के दौरान हुई दुर्घटना नहीं थी, बल्कि उस प्रशासनिक लापरवाही और नियमों की अनदेखी का परिणाम थी, जो वर्षों से शहर के विकास के नाम पर पनप रही है। दुर्घटना का संज्ञान लेते हुए वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) के उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने नगर क्षेत्र में संचालित और निर्माणाधीन सभी होटल, मॉल तथा अन्य वाणिज्यिक भवनों की व्यापक जांच का आदेश दिया है। यह आदेश केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक सख्त संदेश है—कि अब नियमों की अनदेखी कर शहर की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रकरण भवन संख्या डी-55/57, सिद्धगिरी बाग, दशाश्वमेध वार्ड से जुड़ा है, जहां निर्माणकर्ता अभिषेक अरोड़ा द्वारा स्वीकृत मानचित्र का उल्लंघन करते हुए अतिरिक्त तल का निर्माण किया गया। स्वीकृति बी+जी+2 तलों के लिए थी, लेकिन स्थल पर बी+जी+3 तल का निर्माण किया गया और ऊपरी हिस्से में टीन शेड भी लगाया गया। यही नहीं, फ्रंट एलिवेशन में पीओपी, फसाड लाइट्स और डेकोरेटिव मोल्डिंग्स का कार्य भी किया जा रहा था, जिसके दौरान दुर्घटना हुई। वीडीए ने पूर्व में 1 नवंबर 2025 को उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा 27, 28(1) और 28(2) के तहत विधिक कार्रवाई भी की थी। इसके बावजूद यदि निर्माण कार्य जारी रहा, तो यह केवल निर्माणकर्ता की मनमानी नहीं, बल्कि निगरानी तंत्र की विफलता भी है। इसी आधार पर संबंधित जोनल अधिकारी की प्रथम दृष्टया जिम्मेदारी तय करते हुए उन्हें प्रतिकूल प्रविष्टि प्रदान कर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
यह घटना शहर के सुनियोजित विकास, सुरक्षित निर्माण और नागरिकों की सुरक्षा के प्रश्न को केंद्र में ला खड़ा करती है। क्या वाराणसी में वाणिज्यिक भवनों का निर्माण नियमों के अनुरूप हो रहा है? क्या स्वीकृत मानचित्रों की नियमित निगरानी होती है? और यदि उल्लंघन होते हैं, तो कार्रवाई समय पर क्यों नहीं होती? सिद्धगिरी बाग की यह दुर्घटना केवल एक इमारत की कहानी नहीं, बल्कि पूरे शहर में फैल रहे अवैध निर्माणों के जाल का संकेत है।



हादसे से हिला सिद्धगिरीबाग
17 फरवरी को जब भवन के फ्रंट हिस्से में मोल्डिंग का कार्य चल रहा था, उसी दौरान संरचनात्मक हिस्सा नीचे गिर गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, कार्य में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही थी। हालांकि राहत की बात यह रही कि बड़ी जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह घटना भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी बनकर सामने आई है।
स्वीकृत मानचित्र बनाम वास्तविक निर्माण
जांच में सामने आया कि भवन के लिए बी+जी+2 तलों का कार्यालय उपयोग हेतु मानचित्र स्वीकृत था। लेकिन स्थल पर बी+जी+3 तल का निर्माण किया गया। अतिरिक्त तल का निर्माण न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि भवन की संरचनात्मक क्षमता पर भी प्रश्न खड़ा करता है। ऊपरी हिस्से में टीन शेड लगाकर अतिरिक्त भार डाला गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि संरचना का मूल डिजाइन अतिरिक्त भार के अनुरूप न हो तो दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।
कानूनी कार्रवाई क्या पर्याप्त?
वीडीए ने 1 नवंबर 2025 को धारा 27, 28(1) और 28(2) के तहत कार्रवाई की थी। इन धाराओं के तहत अवैध निर्माण पर रोक, ध्वस्तीकरण या दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। सवाल यह है कि यदि कार्रवाई हो चुकी थी तो निर्माण कार्य दोबारा कैसे शुरू हुआ, क्या सीलिंग के बाद निगरानी नहीं हुई? क्या स्थानीय स्तर पर मिलीभगत थी? या फिर नोटिस के बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया?
जोनल अधिकारी की जवाबदेही
वीडीए उपाध्यक्ष ने संबंधित जोनल अधिकारी की प्रथम दृष्टया जिम्मेदारी तय करते हुए प्रतिकूल प्रविष्टि और कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कदम प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण है।
लेकिन क्या केवल एक अधिकारी पर कार्रवाई से व्यवस्था सुधर जाएगी? या फिर यह कार्रवाई भी फाइलों तक सीमित रह जाएगी?
शहर में फैलता अवैध निर्माण का जाल
सिद्धगिरीबाग का यह मामला अपवाद नहीं है। वाराणसी में तेजी से बढ़ते वाणिज्यिक निर्माणों में नियमों की अनदेखी आम शिकायत है। होटल, गेस्ट हाउस, मॉल और बहुमंजिला इमारतें स्वीकृत मानचित्र से अधिक ऊंचाई तक खड़ी हो रही हैं। पार्किंग मानकों की अनदेखी, अग्निशमन सुरक्षा की कमी, और संरचनात्मक प्रमाणन का अभाव ये सभी जोखिम शहर के नागरिकों के सिर पर मंडरा रहे हैं।
सौंदर्यीकरण या जोखिम?
फ्रंट एलिवेशन में पीओपी, फसाड लाइट्स और डेकोरेटिव मोल्डिंग्स का कार्य चल रहा था। अक्सर बाहरी सौंदर्यीकरण के नाम पर भारी संरचनात्मक बदलाव कर दिए जाते हैं, जो मूल डिजाइन से मेल नहीं खाते। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी वाणिज्यिक भवन में अतिरिक्त भार डालने से पहले संरचनात्मक ऑडिट अनिवार्य होना चाहिए।
प्रशासन की अपील
वीडीए ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य प्रारंभ करने से पूर्व विधिवत मानचित्र स्वीकृत कराएं और नियमों का पालन करें। वाराणसी जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक शहर में अनियोजित वाणिज्यिक विस्तार भविष्य में बड़े हादसों को न्योता दे सकता है। सिद्धगिरीबाग की घटना चेतावनी है यदि सख्ती नहीं हुई तो कोई बड़ा हादसा शहर को झकझोर सकता है।
* सिद्धगिरीबाग में 17 फरवरी को मोल्डिंग गिरने से दुर्घटना।
* स्वीकृत मानचित्र से अधिक निर्माण का खुलासा।
* अतिरिक्त तल और टीन शेड लगाया गया।
* धारा 27, 28(1), 28(2) के तहत पूर्व में कार्रवाई।
* संबंधित जोनल अधिकारी को कारण बताओ नोटिस।
* नगर में सभी कमर्शियल भवनों की जांच के आदेश।
* नागरिकों से नियमों के पालन की अपील।




