
– सरकार का दावा- अभी भी तेल कंपनियों को रोजाना 600 करोड़ का घाटा
– कोविड के बाद से लगातार सस्ता तेल खरीद रही सरकार ने तेल के दाम नहीं घटाए
– तेल कंपनियों के रिकार्डतोड़ मुनाफे को आम लोगों से छिपा रही है सरकार
– जून तक 5% को पार कर सकती है महंगाई, आने वाले हैं और बुरे दिन

नई दिल्ली। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद 15 मई से बढ़ती महंगाई ने आम लोगों में हड़कंप मचा दिया है। पिछले 11 दिन में पेट्रोल-डीजल 7.52 रुपए तक महंगा हो चुका है। वहीं, सीएनजी के दाम में केंद्र सरकार 6 रुपए का इजाफा कर चुकी है। केंद्रीय वित्त मंत्री ने जहां रविवार को कहा कि सरकार ने तेल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपए घटाकर आम लोगों को महंगाई से बड़ी राहत दी है, वहीं पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि अभी भी तेल कंपनियों को 600 करोड़ रुपए का घाटा हर रोज हो रहा है।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार जहां इसके लिए अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण बंद हुए हॉर्मूज को जिम्मेदार बता रही है, वहीं एक रिपोर्ट के अनुसार तेल कंपनियों से सरकार को लाभांश के रूप में 1.27 लाख करोड़ रुपए मिले हैं। एक अन्य रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2021 से 2025 तक तेल कंपनियों का मुनाफा लगातार बढ़ा है और बीते साल, यानी 2025 को सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने 77 हजार करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया।


सच नहीं बता रही है मोदी सरकार
विपक्ष लगातार यह दावा करता रहा है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा कर रही केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार लोगों को सच नहीं बता रही है। कोविड महामारी के दौरान जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम कम थे, तब भी केंद्र सरकार ने आम लोगों को इसका फायदा नहीं दिया और पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी लगातार बढ़ाती रही। इस तरह से केंद्र सरकार ने आम लोगों से इन्हीं दोनों जरूरी वस्तुओं से 39 लाख करोड़ रुपए लूटे। विपक्ष के इस दावे को अब सरकारी आंकड़े ही पुख्ता कर रहे हैं। एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 90 फीसदी तेल बेचने वाली तीन सरकारी तेल कंपनियों ने 2026, यानी इसी साल की पहली तिमाही में 19,470 करोड़ का मुनाफा कमाया। कंपनियों का मुनाफा बीते साल की इसी अवधि में करीब 41% ज्यादा है। 2025-26 के दौरान इन तेल कंपनियों का मुनाफा 130% बढ़ा और उन्होंने 77 हजार 28280 करोड़ रुपए कमाए। इसके पीछे सबसे अहम वजह यह थी कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम पूरे सालभर स्थिर रहे। लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने इसका लाभ भारत की जनता को नहीं दिया और तेल के दाम में कोई गिरावट नहीं हुई।
महंगा तेल बेचकर सरकार को हुआ मुनाफा
इस बीच एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी/सीएनजी बेचने वाली पांच सरकारी कंपनियों ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को मिले 3 लाख करोड़ रुपए के लाभांश में से 42.3% हिस्सा चुकाया। इसका मतलब यह हुआ कि इन कंपनियों ने 2020-21 से 2024-25 के बीच पांच साल में 1 लाख 27 हजार करोड़ रुपए का लाभांश दिया। ये कंपनियां हैं- इंडियन ऑयल, ओनएजीसी, कोल इंडिया, भारत पेट्रोलियम और गेल इंडिया। केंद्र सरकार के आंकड़े भी इस बात की तस्दीक करते हैं, क्योंकि इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम दोनों का लाभांश ही इस अवधि में 255% बढ़ा, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में 65% की कमी हो चुकी थी। इसमें से केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने आम लोगों को कीमतों में केवल 2% कमी का ही लाभ दिया, बाकी 63% फायदा खुद हड़प लिया। नवंबर 2024 के बाद से केंद्र सरकार ने सभी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को अपने मुनाफे में से 30% या नेटवर्थ का 4% सरकारी खजाने में जमा करने को अनिवार्य बना दिया है। इतनी बड़ी रकम से केंद्र सरकार को तो पेट्रोल-डीजल महंगा बेचकर खूब फायदा हुआ, लेकिन आम लोगों की हालत तेल भरवाकर खस्ता हो गई।
महंगाई डायन खाय जात है
अब जो लोग पेट्रोल-डीजल की महंगाई से बचने के लिए सीएनजी गाड़ियां चला रहे थे, वो भी इस महंगाई से बच नहीं पाए हैं। पिछले कुछ दिनों में सीएनजी के दाम भी चार बार बढ़ चुके हैं। कई शहरों में सीएनजी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। दूध में प्रति लीटर 2 से 4 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। दूध के अलावा ब्रेड, दाल भी महंगा हो चुका है। इन चीजों का महंगा होना सीधे किचन के बजट पर असर डाल रहा है। भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और सोने-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ने से जून 2026 तक खुदरा महंगाई बढ़कर 5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मई में महंगाई दर 4 से 4.5% और जून में 4.5 से 5% के दायरे में रह सकती है। मई महीने के महंगाई आंकड़े 12 जून को जारी होंगे। जेरोधा के को-फाउंडर नितिन कामथ ने चेतावनी दी है कि अगर इस साल मानसून कमजोर रहा और साथ में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो देश में महंगाई बेलगाम हो सकती है। हालात ऐसे बने तो भारतीय रिजर्व बैंक यानी रिजर्व बैंक को ब्याज दरें बढ़ाने का कदम उठाना पड़ सकता है। ब्याज दर बढ़ने का मतलब है महंगा लोन और ऊंची ईएमआई।
केरल में अटका मॉनसून
भारतीय मौसम विभाग ने इस साल 26 मई तक केरल में मॉनसून का आगाज होने की संभावना जताई थी। अमूमन केरन में मॉनसून एक जून तक पहुंच जाता है। लेकिन इस बार समय से पहले आने के बाद भी केंरल से 35 किलोमीटर दूर मॉनसून के बादल बीते 3 दिन से अटके हुए हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर इस साल बारिश सामान्य से कम रहती है, तो महंगाई के और बढ़ने के साथ ही देश पर आर्थिक संकट के और ज्यादा गहराने की आशंका बढ़ जाएगी। खेती, ग्रामीण आय और खाने पीने की चीजों की कीमतें सीधे मानसून पर निर्भर करती हैं। ऐसे में कमजोर बारिश का असर गांव से लेकर शेयर बाजार तक हर जगह दिखाई दे सकता है। मौसम विभाग ने इस बार मानसून को लॉन्ग पीरियड एवरेज के 92 फीसदी रहने का अनुमान जताया है, जिसे सामान्य से कम माना जाता है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि कमजोर बारिश से खाद्य महंगाई और ग्रामीण मांग पर असर पड़ सकता है। भारत की जीडीपी में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 15 से 16 फीसदी है, जबकि देश की लगभग 45 फीसदी आबादी किसी न किसी रूप में खेती पर निर्भर है। ऐसे में कमजोर या देरी से आने वाली बारिश धान, दाल, गन्ना, सोयाबीन और तिलहन जैसी फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है।
विपक्ष ने दिखाया गुस्सा
अयोध्या में सपा सांसद अवधेश प्रसाद के नेतृत्व में सपा नेताओं ने मंगलवार को सहादतगंज में बढ़ती महंगाई, बदहाल बिजली व्यवस्था, पेपर लीक आदि मुद्दों पर प्रदर्शन किया। इस दौरान नेताओं ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। इस दौरान राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन भेजा गया। प्रदर्शन में सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि प्रदेश और देश की जनता आज महंगाई, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं के संकट से जूझ रही है। सरकार जनता की समस्याओं के समाधान के बजाय केवल दिखावे की राजनीति कर रही है। समाजवादी पार्टी हमेशा जनता के हक और सम्मान की लड़ाई लड़ती रही है। आगे भी मजबूती से लड़ती रहेगी। कांग्रेस का आरोप है कि मध्य-पूर्व संकट का हवाला देकर सरकार आम जनता पर बोझ डाल रही है। पार्टी ने मांग की है कि केंद्र सरकार तुरंत कीमतों में राहत दे और संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा करे।
बढ़ गए इन चीजों के दाम
कच्चा माल अप्रैल 2026 में बढ़ोतरी
तांबा 17.3%
एल्युमीनियम 20.6%
क्रूड उत्पाद 49.3%
गैस उत्पाद 19.1%




