बेटियों की कोख पर सौदेबाजी का काला खेल , यूपी में हर मोर्चे पर स्वास्थ्य व्यवस्था हुई फेल

अमरोहा में अवैध लिंग जांच गिरोह का भंडाफोड़
लखनऊ / अमरोहा।उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से सामने आए अवैध लिंग जांच गिरोह के खुलासे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।
राजा चौधरी
बेटियों की कोख में ही हत्या की साजिश रचने वाले इस संगठित गिरोह का पर्दाफाश होने के बाद स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क कई जिलों तक फैला हुआ था और गर्भ में पल रहे शिशु का लिंग बताने के बदले मोटी रकम वसूली जा रही थी।

स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गिरोह से जुड़े कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, निजी चिकित्सालय से जुड़े कर्मचारी और दलाल शामिल बताए जा रहे हैं। प्रशासन को आशंका है कि इस पूरे रैकेट के तार दूसरे जिलों और पड़ोसी राज्यों तक भी जुड़े हो सकते हैं।
जानकारी के अनुसार लंबे समय से प्रशासन को शिकायत मिल रही थी कि अमरोहा और आसपास के क्षेत्रों में गुप्त रूप से भ्रूण के लिंग की जांच कराई जा रही है। शिकायतों के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने विशेष निगरानी शुरू की। इसके बाद एक गुप्त टीम बनाई गई जिसमें स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ पुलिस कर्मियों को भी शामिल किया गया।
जांच के दौरान अधिकारियों ने एक महिला को ग्राहक बनाकर गिरोह तक पहुंच बनाई। सूत्रों के अनुसार दलालों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को गुप्त स्थानों तक ले जाया जाता था जहां मोटी रकम लेकर भ्रूण का लिंग बताया जाता था। यदि गर्भ में बेटी होने की जानकारी मिलती तो बाद में अवैध गर्भपात कराने का रास्ता भी सुझाया जाता था।
छापेमारी के दौरान कई संदिग्ध दस्तावेज, मोबाइल फोन और लेनदेन से जुड़े अभिलेख बरामद किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में लाखों रुपये के अवैध कारोबार के संकेत मिले हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाक्टर सत्यप्रकाश ने बताया कि यह कार्रवाई लंबे समय से मिल रही शिकायतों के आधार पर की गई। उन्होंने कहा कि भ्रूण लिंग जांच पूरी तरह गैरकानूनी है और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरे नेटवर्क की विस्तृत जांच कराई जा रही है।
अमरोहा की जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं बल्कि सामाजिक अपराध भी है। उन्होंने कहा कि बेटियों के खिलाफ मानसिकता रखने वाले ऐसे लोगों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को जिले में चल रहे सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों की दोबारा जांच करने के निर्देश दिए हैं।
पुलिस अधीक्षक अमित कुमार आनंद ने बताया कि गिरोह से जुड़े लोगों के मोबाइल और बैंक खातों की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि अब तक कितनी महिलाओं की अवैध जांच कराई गई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि बिना अधिकारियों की मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर अवैध कारोबार संभव नहीं हो सकता। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि बेटियों की सुरक्षा और सम्मान केवल नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे अपराधों के खिलाफ कठोर और निरंतर अभियान चलाना होगा।
महिला संगठनों ने भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि तकनीक का इस्तेमाल बेटियों को जन्म से पहले खत्म करने के लिए किया जाना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि समाज में आज भी बेटियों को बोझ मानने की मानसिकता खत्म नहीं हो पाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश के कई हिस्सों में आज भी भ्रूण लिंग जांच का अवैध कारोबार गुप्त रूप से चल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और पुत्र मोह की मानसिकता इस अपराध को बढ़ावा देती है। कई बार गरीब और अशिक्षित परिवार दलालों के जाल में आसानी से फंस जाते हैं।
सरकारी अभिलेखों के अनुसार प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में लिंगानुपात सुधारने के लिए कई अभियान चलाए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अब भी गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं। “बेटी बचाओ” जैसे अभियानों के बावजूद अवैध लिंग जांच के मामले लगातार सामने आना प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अमरोहा में हुए इस खुलासे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कानून के डर से अधिक जरूरी सामाजिक सोच में बदलाव है। जब तक समाज में बेटियों को बराबरी और सम्मान की नजर से नहीं देखा जाएगा, तब तक ऐसे अपराध पूरी तरह समाप्त होना मुश्किल रहेगा।
फिलहाल पूरे प्रदेश की नजर इस मामले की जांच पर टिकी हुई है। प्रशासन दावा कर रहा है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है। वहीं जनता यह जानना चाहती है कि आखिर इतने लंबे समय से चल रहे इस काले कारोबार पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई।




