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एमपी के बेईमान सीएम मोहन यादव पर अखिलेश मेहरबान, ये रिश्ता क्या कहलाता है साहेबान?

जमीन घोटाला मामले में मोहन यादव के बचाव में क्यों कूदे अखिलेश यादव?

  •  परिवार को बचाने एक तीर से किए कई शिकार, अब भाजपा हुई लाचार
  •  ओमप्रकाश राजभर ने खोल दिया अखिलेश के बयान का राज
  •  पूछा – क्या है एमपी कैडर के आईएएस भरत यादव से अखिलेश का रिश्ता?
  •  अखिलेश के करीबी चंद्रपाल यादव के दामाद हैं भरत यादव
  •  क्या एमपी से आने वालों हाईवे की जमीनों पर है नजर?
  •  अखिलेश के ‘यादव फैक्टर’ ने भाजपा की बढ़ाई बेचैनी

नई दिल्ली/ लखनऊ। मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव के उज्जैन में जमीन घोटाले में फंसने के बाद शुरू हुए विवाद और बयानबाजियों के बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव का मोहन यादव के बचाव में कूदना किसी को समझ नहीं आ रहा है, क्योंकि विपक्ष ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया है। लेकिन अखिलेश का मानना है कि मोहन यादव को फंसाया गया है, ताकि भाजपा मध्यप्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन कर सके। कई राजनीतिक विश्लेषक इस अखिलेश के यादव प्रेम से जोड़ रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। अखिलेश के इस यादव प्रेम का राज उनके परिवार में छिपा हुआ है।

 

क्या कहा है अखिलेश ने बयान में

अखिलेश यादव ने एमपी के सीएम मोहन यादव का बचाव करते हुए कहा कि एमपी में भाजपा की सरकार है… मोहन यादव भाजपा पार्टी से ही मुख्यमंत्री बने हैं… उन पर कथित तौर पर जमीन घोटाले का आरोप लगाया गया है। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि अखिलेश ने विपक्ष का होने के बावजूद मोहन यादव के समर्थन में उतरकर ‘यादव फैक्टर’ के माध्यम से एक नया राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। जमीन को लेकर किए गए दावों को फिजूल बताते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि वह पहले रियल स्टेट का कारोबार करते थे। सपा प्रमुख ने दावा किया कि मोहन यादव और राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा को पद से हटाने के लिए साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा में तीन मुख्यमंत्रियों को हटाने की तैयारी है।

असल में मामला यह है

लेकिन, काफी विवादों के बाद सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने आखिरकार इस मसले का राज खोल ही दिया। उन्होंने कहा, ‘अखिलेश जी! एमपी कैडर के आईएएस भरत यादव जो राज्य सड़क विकास निगम के चेयरमैन हैं, उनसे आपने अपना रिश्ता छिपा लिया। अखिलेश जी भरत यादव आपके ‘कुबेर’ चंद्रपाल यादव के दामाद हैं। चंद्रपाल यादव सपा के कद्दावर नेता और पार्टी कोषाध्यक्ष रहे हैं। उम्मीद है कि आपको याद आ गया होगा। मध्यप्रदेश में हाईवे का रास्ता कहां से जाएगा- यह भरत यादव तय करते हैं या उन्हें इस बात की जानकारी होती है। जो आपके हैं, अपने हैं, खास हैं।’ राजभर ने आगे कहा, ‘इस मामले में अखिलेश की तिलमिलाहट बता रही है कि भरत यादव ने आपसे और अपने लोगों से वहां की जमीनों में भारी निवेश करवाया है। और जमीन ‘खाने’ के मामले में सैफई परिवार बहुत अनुभवी है। इसे पूरा उत्तर प्रदेश जानता है। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे में सैफई परिवार ने यही किया था। फिरोजाबाद से इटावा तक जमीनें खरीदी गईं और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के रूट को मनमाने तरीके से मोड़ा गया। निजी फायदे के लिए सैफई तक अनावश्यक रूप से रूट का मार्ग घुमाकर एक्सप्रेसवे की दूरी 30 किमी और ज्यादा बढ़ा दी गई। औने-पौने दाम में जमीनों को खरीदकर भारी भरकम मुआवजा वसूला गया।’ राजभर ने कहा कि जांच एजेंसियों को पता लगाना चाहिए कि मध्य प्रदेश में उत्तर प्रदेश के कौन-कौन से सफेदपोश निवेशक शामिल हैं।

अखिलेश ने एक तीर से साधे कई निशाने

पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने मोहन यादव का बचाव करके एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है। सोशल मीडिया पर जाति की जो चर्चा चल रही है, वह भी अखिलेश के लिए फायदेमंद है। दरअसल, सपा के लिए यूपी की राजनीति में यादव और मुस्लिम दो सबसे मजबूत स्तंभ रहे हैं और अखिलेश यादव ने मोहन यादव का बचाव करके संभवत: अहीरों को संदेश देने की कोशिश की है। इसके अलावा उन्होंने भाजपा पर साजिश का आरोप लगाकर मोहन यादव के समर्थकों में पार्टी के प्रति असंतोष के बीज बोने की कोशिश की। इसके अलावा उन्होंने महीन तरीके से निशाने पर योगी को भी ले लिया और कहा कि भाजपा मध्यप्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों को हटाना चाहती है। सपा प्रमुख ने उस मध्यप्रदेश कांग्रेस की धार को भी कुंद कर दिया, जिसने कभी उनके लिए ‘अखिलेश-वखिलेश’ संबोधन का इस्तेमाल किया था।

क्या है जमीन हड़पने का पूरा मामला

साल 2004 में उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष बनने से लेकर दिसंबर 2023 में बतौर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के ढाई साल के भीतर ही मोहन यादव का सामूहिक विस्तारित परिवार, कुल 335 एकड़ जमीन का मालिकाना हक लेकर उज्जैन में रियल एस्टेट के धंधे का धुरंधर बन चुका है। 2004 से 2021 तक जहां मोहन यादव के सामूहिक परिवार के पास महज 82 एकड़ के लगभग ही ज़मीनें थी, उसमें मोहन यादव के शिक्षा मंत्री रहते 2021 से 23 तक 85 एकड़ की वृद्धि हुई। मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद 2024-25 में यादव परिवार ने उज्जैन और आसपास के अन्य 168 एकड़ की 137 अतिरिक्त प्लॉट भी अपने नाम कर ली। मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी पारिवारिक 168 एकड़ जमीन में से करीब 111 एकड़ जमीनें ऐसी परियोजनाओं के आसपास हैं, जिनकी घोषणा खुद उनकी ही भाजपा सरकार ने की है। लेकिन बड़ी चालाकी से मोहन यादव ने मंत्री बनने से लेकर मुख्यमंत्री बनने तक अपने नाम कोई नई ज़मीन नहीं खरीदी है। एक अंग्रेजी अखबार में दावा किया गया है कि इन जमीनों की खरीद करीब 45 करोड़ रुपये में की गई। चौंकाने वाली बात यह है कि ये भूखंड उन इलाक़ों में हैं जहाँ सरकार नए हाईवे बना रही है और लैंड यूज नियम को बदला गया है। सवाल इसीलिए उठ रहे हैं क्योंकि इनमें से बड़ी संख्या में भूखंड ऐसे क्षेत्रों में हैं जहां राज्य सरकार ने नई सड़कें, हाईवे और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शुरू की हैं या जहां भूमि उपयोग में बदलाव कर कृषि भूमि को आवासीय और व्यावसायिक उपयोग के लिए खोला गया है। इस रिपोर्ट के आने के बाद कांग्रेस नेता और एमपी कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मोहन यादव पर हमला किया है। उन्होंने कहा, ‘मुख्यमंत्री जी, सत्ता की सड़कें, किसकी संपत्ति बढ़ा रही हैं?’

रिपोर्ट में यादव परिवार का नाम

अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, खरीदारों में खुद सीएम मोहन यादव, उनकी पत्नी सीमा यादव, उनके बेटे वैभव, पुत्रवधू शालिनी यादव, भाई नंदलाल यादव, नारायण यादव, उनकी बहन कलावती और गोविंद यादव, निलेश यादव, रेखा यादव, अभय यादव जैसे क़रीबी रिश्तेदार बताए गए हैं। इसके अलावा परिवार से जुड़ी चार रियल एस्टेट कंपनियों के माध्यम से भी जमीन खरीदी गई। ये ज़मीनें गंगेड़ी, उनहेल, जयवंतपुरा, चंदेसरा, कराड़िया, नवाखेड़ा और करोंदिया जैसे प्रमुख क्षेत्रों में हैं। रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय रियल एस्टेट कारोबारियों का कहना है कि इन क्षेत्रों में सड़क परियोजनाओं के कारण ज़मीन की क़ीमतों में भविष्य में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार गंगेड़ी क्षेत्र में उज्जैन-इंदौर और उज्जैन-बड़नगर हाईवे के जंक्शन के क़रीब परिवार ने 38 अलग-अलग सौदों के ज़रिए क़रीब 51 एकड़ जमीन खरीदी। अंग्रेज़ी अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार इसी तरह उनहेल में नए उज्जैन-नागदा हाईवे के दोनों ओर लगभग 29 एकड़ भूमि खरीदी गई। विवाद का दूसरा बड़ा पहलू उज्जैन मास्टर प्लान 2035 से जुड़ा है। इस प्लान के तहत खेती की ज़मीन को आवासीय और व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए बदला गया है। रिपोर्ट के अनुसार यादव परिवार की जमीन उन क्षेत्रों में भी मौजूद हैं जहां कृषि भूमि को आवासीय और व्यावसायिक उपयोग के लिए बदला गया है। नानाखेड़ा, सावराखेड़ी और ढेढ़िया जैसे क्षेत्रों में भी परिवार की जमीन मौजूद बताई गई है। विपक्ष का आरोप है कि लैंड यूज बदलाव से उन इलाकों की कीमतें बढ़ीं जहां परिवार की पहले से बड़ी हिस्सेदारी थी। इस मामले पर मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके कार्यालय को विस्तृत सवाल भेजे गए थे, लेकिन उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

सीएम हैं तो क्या, धंधा भी न करें?

अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री के चचेरे भाई गोविंद यादव के पुत्र अनंत यादव ने कहा कि उनका ‘परिवार 2010 से रियल एस्टेट व्यवसाय में है जब मेरे पिता ने 100 बीघा की प्रॉपर्टी बनाई’। उन्होंने कहा कि कई जमीन सौदे ऐसे हैं जिनकी प्रक्रिया 2020 में शुरू हो गई थी, जब मोहन यादव मुख्यमंत्री तो दूर मंत्री भी नहीं थे। अनंत यादव ने कहा, ‘अगर परिवार का कोई सदस्य मुख्यमंत्री बन गया है तो क्या बाकी लोगों को अपना व्यवसाय बंद कर देना चाहिए?’ उज्जैन के गंगेड़ी में चल रहे प्रोजेक्ट के बारे में उन्होंने कहा, ‘मेरे पिता इसके अकेले मालिक नहीं हैं। उनके छह-सात बिज़नेस पार्टनर हैं। भले ही यह 2023 में रजिस्टर हुआ हो, लेकिन ज़मीन खरीदने की डील 2020 में ही हो गई थी, जब वे मंत्री भी नहीं थे। हाईवे का काम 2019 में ही मंज़ूर हो गया था। यह ज़मीन हाईवे से 100 मीटर दूर है।’ परिवार की ओर से खरीदी गई कुछ जमीनों को बाद में आवासीय परियोजनाओं में बदला जा रहा है। गोविंद यादव और उनके सहयोगियों ने गंगेड़ी में खरीदी गई लगभग 41 एकड़ जमीन को इंदौर की एक निर्माण कंपनी को विकास के लिए सौंप दिया है।

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