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चुनाव आयोग ने काटे गए 65 लाख वोटरों का नाम बताने से किया इनकार,निंदनीय है ईसीआई का किरदार

चुनाव आयोग जो कभी अपनी निष्पक्षता के लिये जाना जाता रहा,वर्तमान समय मे सत्ता की कठपुतली बन बैठा है

प्रमोद जैन पिंटू

चुनाव आयोग ने जो जवाब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया उसमें उन्होंने कहा कि हमने राजनीतिक दलों को ड्राफ्ट लिस्ट दे दी है जिसमें बता दिया है यह 65 लाख मतदाता कौन है और किस वजह से बाहर की है वहीं आज राहुल गांधी ने 300 सांसदों के साथ चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर जो प्रदर्शन किया उसके बाद गिरफ्तारी के बाद छूटने के बाद वह फिर इलेक्शन आयोग के दफ्तर के सामने पहुंचे और उन्होंने कहा कि मैं शपथ पत्र देने को तैयार हूं पर चुनाव आयोग ने 65 लाख मतदाता जो गहन परीक्षण के नाम पर चुनाव आयोग ने हटाए हैं उनके ड्राफ्ट लिस्ट राजनीतिक दलों को दे!

चुनाव आयोग का जो जवाब सुप्रीम कोर्ट में था उसमें उन्होंने कहा था कि हम किसी कानून के तहत बाध्य नहीं है हम उन मतदाताओं के नाम बताएं , और किसी संस्था को उनके नाम दें।
उल्लेखनीय है एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिए थे जो 65 लाख वोट हटाए गए हैं उनकी सूची उन्हें दें।
65 लाख मतदाता जो हटाए गए हैं उनको लेकर चुनाव आयोग का रवैया बड़ा संदेहास्पद है ।

अपना जवाब देने के बाद उन्होंने ड्राफ्ट लिस्ट जो वेबसाइट पर थी उसको इंक्रिप्ट कर स्कैन कर कर दोबारा से डाला ताकि कंप्यूटर से किसी प्रकार की सर्चिंग ना हो पाए।
क्योंकि देशभर के एक्टिवस्टो ने उसे सूची में कई खामियां जग जाहिर कर दी थी।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया की 00 एड्रेस बता कर 3 लाख मतदाताओं के नाम उसमें है,
फुलवारी में एक ही बूथ पर दर्जनों लोगों ने यह शिकायत की कि हम बिहार में ही रहते हैं हमने दस्तावेज भी दिए बीएलओ भी हमारे यहां आया , हमारा नाम मतदाता सूची में क्यों नहीं है? उन्होंने कहा की हमें प्रवासी तो माना नहीं जा सकता तो क्या हम मृत मतदाता है ?

लेकिन चुनाव आयोग किसी प्रकार की जानकारी देने को तैयार ही नहीं है।
बिहार के उपमुख्यमंत्री के तेजस्वी यादव की तरह दो मतदाता पहचान पत्र हैं उनको लेकर भी बिहार में हल्ला मचा हुआ है।
माता-पिता पति के नाम में कई गड़बड़ और लगभग दर्जन पर लोगों की आयु 125 से 150 वर्ष के बीच में बताई गई है उसे लेकर भी लोग सवाल उठा रहे हैं।
लेकिन नाम ना बताने के पीछे चुनाव आयोग के जो मंशा है उसके पीछे बहुत बड़ा खेल छुपा हुआ है।
दरअसल जो महत्वपूर्ण तथ्य है वह एडिशन को लेकर है क्योंकि चुनाव आयोग ने कितने लोग नए ऐड किए गए इसकी सूचना नहीं
दी है ।
उन्होंने 64 लाख लोगों का डिलेशिन बताया है वह नेट संख्या है, एक अनुमान मान ले तो लगभग 10 लाख नए वोट ऐड किया है हो गए होंगे तो फिर यह डीलेशन 74 लाख हो जाएगा।
दरअसल जो नए मतदाता जोड़े गए हैं उनकी संख्या पब्लिक डोमेन में नहीं आए क्योंकि अभी जो भी आंदोलन हो रहा है उसके मूल में यही फर्जी वोट है जो जोड़े जाते हैं।
कर्नाटक के खुलासे के बाद चुनाव आयोग फूंक फूंक कर कदम रख रहा है इसलिए वह जिन मदाताओं को सूची से हटाया गया है उनकी पूरी जानकारी देने से डर रहा है।

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