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डीजीपी राजीव कृष्ण की तत्परता से बची एक युवती की जान,पुलिस महकमे की बढ़ गयी शान

    • सिर्फ 19 मिनट मिला गया महिला को नया जीवन
    • रात 11:34 बजे मेटा से आया जीवनरक्षक अलर्ट
    • मुख्यालय की सोशल मीडिया टीम ने मिनटों में खोजी लोकेशन
    • डीजीपी के आदेश पर गाजीपुर की पुलिस रिकॉर्ड समय में मौके पर पहुंची
    • अचेतावस्था में मिली युवती, तुरंत अस्पताल में भर्ती
    • नौकरी छूटने से टूटा हौसला, रिश्ते में दरार बनी वजह
    • मेटा और यूपी पुलिस के बीच 2022 से चल रही जीवनरक्षक साझेदारी
    • तीन साल में 1241 जिंदगियां बचाने का रिकॉर्ड
    • समाज के लिए संदेश हर समस्या का हल आत्महत्या नहीं

लखनऊ। रात का सन्नाटा, घड़ी की सुइयां 11 बजकर 34 मिनट पर ठिठकी हुई सी और जनपद गाजीपुर के सादात कस्बे के एक घर में जिंदगी और मौत के बीच झूलती 21 वर्षीय युवती। उसी क्षण लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय के सोशल मीडिया सेंटर के इनबॉक्स में मेटा कंपनी का एक ई-मेल अलर्ट पहुंचा। संदेश साफ था, एक लड़की इंस्टाग्राम पर अपनी आखिरी पोस्ट लिख चुकी थी। यह सिर्फ एक डिजिटल सूचना नहीं थी, यह एक जीवन की पुकार थी। डीजीपी राजीव कृष्ण ने तत्काल युवती को बचाने का निर्देश दिया। अगले 19 मिनट में जो हुआ, उसने साबित कर दिया कि तकनीक, संवेदनशीलता और तत्परता जब एक साथ आती है, तो मौत को भी मात दी जा सकती है।

रात की खामोशी में जिंदगी की पुकार

10 अगस्त 2025 की रात, समय 11:34 बजे। गाजीपुर जिले के थाना सादात के एक घर में चारपाई पर लेटी 21 वर्षीय युवती जहरनुमा दवाओं का घोल पीने चुकी थी। उसकी सांसों की रफ्तार धीमी हो रही थी, और दिमाग में सिर्फ एक सोच अब कोई नहीं रोक सकता।
लेकिन उसी समय, लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय के सोशल मीडिया सेंटर के कंप्यूटर स्क्रीन पर एक ई-मेल चमका। यह ई-मेल था मेटा कंपनी का, जिसमें एक इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट और मोबाइल नंबर के साथ लोकेशन की जानकारी थी। डीजीपी राजीव कृष्ण ने मेल पढ़ा जिसमें लिखा था। ‘मुझे जहर खाने के लिए मजबूर कर दिया… अब जीने का कोई कारण नहीं।’ यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से निकली जीवन की अंतिम पुकार थी।

मेटा अलर्ट ने दी जीवन की घंटी

10 अगस्त 2025, समय रात 11:34 बजे। उत्तर प्रदेश पुलिस के सोशल मीडिया सेंटर को मेटा से एक आपातकालीन ई-मेल मिला। ई-मेल में एक लिंक, कुछ स्क्रीनशॉट, और एक मोबाइल नंबर था। यह सूचना थी कि गाजीपुर जिले की एक 21 वर्षीय युवती ने इंस्टाग्राम पर ऐसा संदेश पोस्ट किया है, जिसमें उसने साफ लिखा है कि उसे जहर खाने के लिए मजबूर किया गया है और अब वह अपनी जिंदगी खत्म करने जा रही है। पुलिस के लिए यह कोई साधारण संदेश नहीं था। यह वक्त के खिलाफ दौड़ की शुरुआत थी।

मुख्यालय की सोशल मीडिया टीम ने मिनटों में निकाली लोकेशन

अलर्ट प्राप्त होते ही ड्यूटी पर तैनात कर्मियों ने डीजीपी को स्थिति से अवगत कराया। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने तुरंत निर्देश दिए कि एक पल भी मत गंवाना, लोकेशन ट्रेस करो और स्थानीय पुलिस को भेजो। सोशल मीडिया सेंटर ने मोबाइल नंबर और डिजिटल डेटा की मदद से युवती की सटीक लोकेशन ट्रेस की। यह लोकेशन थी थाना सादात, जनपद गाजीपुर के अंतर्गत एक छोटा सा मोहल्ला। इस पूरी प्रक्रिया में महज कुछ मिनट लगे। समय की हर टिक-टिक युवती की सांसों के लिए अहम थी।

19 मिनट में मौके पर पहुंची थाना सादात पुलिस

जैसे ही लोकेशन फाइनल हुई, पुलिस मुख्यालय से डीजीपी कृष्ण कुमार का मैसेज गाजीपुर पुलिस के पास पहुंचा। डीजीपी का मैसेज पढ़कर सादात थाने के थानाध्यक्ष ने बिना देर किए महिला आरक्षी और अन्य पुलिसकर्मियों के साथ युवती को बचाने निकल पड़े। रात के अंधेरे में तेज रफ्तार से चलती पुलिस की जीप 19 मिनट बाद उस घर के बाहर रुकी। घर के दरवाजे पर हलचल और अंदर से आती सिसकियों के बीच पुलिस ने परिजनों को आवाज दी और भीतर दाखिल हुए।

अचेतावस्था में मिली युवती, अस्पताल तक की दौड़

दूसरे कमरे में चारपाई पर युवती अचेतावस्था में पड़ी थी। बगल में पानी का गिलास और कुछ दवाइयों के खाली पत्ते थे। पुलिस और परिजनों ने मिलकर उसे तुरंत उठाया और पास के अस्पताल की ओर दौड़ पड़े। अस्पताल में चिकित्सकों ने त्वरित उपचार शुरू किया। समय पर पहुंचने के कारण, दवाइयों का असर जानलेवा होने से पहले ही नियंत्रित कर लिया गया। डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा कि अगर 15-20 मिनट और देर हो जाती, तो मामला हाथ से निकल सकता था।

दिल दहला देने वाली वजह

इलाज के बाद जब युवती होश में आई, तो महिला आरक्षी ने उससे बात की। युवती ने बताया कि कुछ समय पहले वह दिल्ली में पानी सप्लाई का काम करती थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात प्रयागराज निवासी एक युवक से हुई और दोनों ने प्रेम विवाह का सपना देखना शुरू किया। लेकिन नौकरी छूटने के बाद उसे घर लौटना पड़ा। शुरू में युवक उससे बात करता रहा, लेकिन धीरे-धीरे दूरी बनाने लगा। आखिरकार उसने संबंध तोड़ने की बात कह दी। इस भावनात्मक आघात ने युवती को तोड़ दिया, और उसने यह कदम उठाया।

मेटा और यूपी पुलिस की साझेदारी जीवन रक्षा का डिजिटल मॉडल

यह घटना कोई पहला मामला नहीं है। वर्ष 2022 से मेटा और उत्तर प्रदेश पुलिस के बीच एक विशेष व्यवस्था लागू है। इसके तहत यदि कोई भी व्यक्ति फेसबुक या इंस्टाग्राम पर आत्महत्या से संबंधित कोई पोस्ट करता है, तो मेटा तत्काल ई-मेल और फोन के माध्यम से यूपी पुलिस को सूचित करता है। इस व्यवस्था की बदौलत सोशल मीडिया पर डाली गई आखिरी पोस्ट भी जीवन बचाने का जरिया बन जाती है।

3 साल में 1241 जिंदगियां बचाने का रिकॉर्ड

आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि 1 जनवरी 2023 से 8 अगस्त 2025 तक इस प्रणाली के जरिए यूपी पुलिस ने 1241 लोगों की जान बचाई है। इनमें से कई लोग गंभीर मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह, आर्थिक संकट या प्रेम संबंधों में टूटन से गुजर रहे थे। हर केस में पुलिस ने मिनटों में लोकेशन ट्रेस कर मौके पर पहुंचकर जीवन रक्षा की।

समाज के लिए बड़ा संदेश

यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं बल्कि एक संदेश है कि जिंदगी कितनी भी कठिन क्यों न हो, आत्महत्या कभी समाधान नहीं। पुलिस और मेटा जैसे संस्थानों की तत्परता ने साबित किया है कि मदद हमेशा पास है, बस हाथ बढ़ाने की जरूरत है। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना, और संकट की घड़ी में मदद लेना ही सही रास्ता है।

* इंस्टाग्राम पर आत्महत्या की पोस्ट, दवा का सेवन
* मेटा कंपनी का ई-मेल पुलिस मुख्यालय लखनऊ को
* 19 मिनट में स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची
* युवती को अचेतावस्था में अस्पताल ले जाकर बचाया गया
* प्रेम संबंध टूटना, मानसिक तनाव
* 2022 से मेटा और यूपी पुलिस की आत्महत्या रोकथाम व्यवस्था
* 1 जनवरी 2023 से 8 अगस्त 2025 तक 1241 लोगों की जान बचाई गई

तकनीक और संवेदनशीलता का संगम

पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने बताया कि ‘तकनीक सिर्फ तभी कारगर होती है, जब उसके पीछे संवेदनशील इंसान हों। यह साझेदारी दिखाती है कि सोशल मीडिया और कानून-व्यवस्था मिलकर जान बचा सकते हैं।’
मेटा के भारत प्रमुख ने भी कहा हमारी प्राथमिकता है कि सोशल मीडिया किसी की अंतिम मंजिल न बने, बल्कि मदद तक पहुंचने का पुल बने।

मानसिक स्वास्थ्य अनदेखा संकट

विशेषज्ञ मानते हैं कि युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे गंभीर हो चुके हैं।
मनोचिकित्सक कहते हैं कि ब्रेकअप, बेरोजगारी, पढ़ाई का दबाव ये सब आज के युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं। आत्महत्या का विचार आने पर समय रहते काउंसलिंग मिलना बेहद जरूरी है।

* ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और तकनीकी अलर्ट पर समय से प्रतिक्रिया देना
* मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन को पुलिस रिस्पॉन्स से जोड़ना
* स्कूली स्तर पर भावनात्मक शिक्षा और तनाव प्रबंधन

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