हेरिटेज मेडिकल कॉलेज पर दाग नर्सिंग छात्रा संग डॉक्टर की छेड़खानी,डॉक्टरी पेशे का उतर गया “पानी”
रात की ड्यूटी बनी भय का कारण, डॉक्टर विवेक सोनी पर छात्रा का गंभीर आरोप

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- अनुचित छूने और डराने-धमकाने का आरोप, छात्रा ने लिखा सुपरवाइजर को पत्र
- एमएस पर शिकायत को दबाने का गंभीर आरोप
- आक्रोशित छात्र-छात्राओं ने मुख्य गेट पर सात घंटे तक नारेबाजी
- आरोप डॉक्टर अक्सर लड़कियों से करते हैं अभद्र व्यवहार, खुद को बताते हैं अयोध्या का गुंडा
- संस्थान की चुप्पी पहले भी कई मामलों को दबाने का आरोप
- तहरीर के आधार पर डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज
- मेडिकल संस्थानों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल पढ़ाई के बीच भय का साया
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वाराणसी। गंगा-जमुनी तहजीब और शिक्षा की नगरी वाराणसी में स्थित हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, भदवर का नाम इन दिनों किसी शोध या उपलब्धि के लिए नहीं, बल्कि एक गंभीर शर्मनाक घटना के कारण सुर्खियों में है। बीएससी नर्सिंग तृतीय वर्ष की छात्रा ने संस्थान के डॉक्टर विवेक सोनी पर छेड़खानी का आरोप लगाया है। इस आरोप ने न केवल संस्थान की छवि पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया, बल्कि यह भी उजागर किया कि मेडिकल शिक्षा संस्थानों में महिला सुरक्षा कितनी उपेक्षित है। मिली जानकारी के अनुसार रोहनिया थानाक्षेत्र के भदवर स्थित हेरिटेज मेडिकल कॉलेज में जहां जीवन बचाने की शिक्षा दी जाती है, वहां एक नर्सिंग छात्रा ने जिस तरह छेड़खानी का आरोप लगाया, उसने न केवल शिक्षा संस्थान की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए बल्कि मेडिकल कॉलेज की गरिमा को भी तार-तार कर दिया। डॉक्टर विवेक सोनी पर गंभीर आरोपों के बाद जब संस्थान ने शिकायत को दबाने की कोशिश की, तो छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। सात घंटे तक मुख्य गेट पर ताला बंद धरना, नारेबाजी और पुलिस के दखल के बाद ही मामला दर्ज हुआ। सवाल अब यह है कि जब डॉक्टर ही छात्राओं के लिए खतरा बन जाएं, तो उनकी सुरक्षा की गारंटी कौन देगा।
* बीएससी नर्सिंग छात्रा ने डॉक्टर विवेक सोनी पर छेड़खानी का आरोप लगाया।
* छात्रा का बयान अनुचित तरीके से छुआ व धमकाया।
* छात्र-छात्राओं का आरोप डॉक्टर अक्सर अभद्र व्यवहार करता है, खुद को अयोध्या का गुंडा बताता है।
* सुपरवाइजर और एमएस पर गंभीर आरोप शिकायत दबाने की कोशिश।
* सात घंटे धरना और नारेबाजी के बाद पुलिस पहुंची।
* पुलिस ने छात्रा से तहरीर लेकर मुकदमा दर्ज किया।
* मेडिकल संस्थानों की साख और छात्राओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल।
घटना की रात और छात्रा का आरोप
पीड़ित छात्रा का आरोप है कि 2 और 3 सितंबर की रात उसकी ड्यूटी अचानक बदल दी गई थी। नाइट शिफ्ट के दौरान डॉक्टर विवेक सोनी उसके पास पहुंचे और बार-बार उसका नाम-पता पूछते रहे। उन्होंने यह तक पूछा नाइट में अकेली हो क्या। छात्रा के अनुसार, जब वह ड्यूटी के बीच थोड़ी देर आराम करने गई तो डॉक्टर वहां भी पहुंच गए। आरोप है कि उन्होंने अनुचित तरीके से छूते हुए कहा सो रही हो क्या उठो। छात्रा बताती है कि वह घबरा गई और तुरंत वहां से हट गई। उसने घटना की जानकारी ड्यूटी पर मौजूद नर्सों और स्पेशल नर्स को दी। साथ ही सुपरवाइजर को लिखित पत्र भी सौंपा। लेकिन आरोप है कि एमएस सर ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया और मामले को दबाने की कोशिश की।
छात्रों का गुस्सा और गेट पर ताला
जब छात्रा ने अपनी पीड़ा साथियों से साझा की तो आक्रोश भड़क उठा। देखते ही देखते बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मुख्य गेट पर इकट्ठा हो गए। गेट पर ताला जड़ दिया गया। सात घंटे तक जोरदार नारेबाजी होती रही छेड़खानी बर्दाश्त नहीं होगी, महिला सुरक्षा सुनिश्चित करो, डॉक्टर को तुरंत बर्खास्त करो। धरना देर रात तक चला और पूरा परिसर तनावग्रस्त हो गया। छात्रों का आरोप है कि डॉ.विवेक सोनी अक्सर लड़कियों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं और खुद को अयोध्या का गुंडा बता कर डराने की कोशिश करते हैं।
संस्थान की चुप्पी और पुरानी घटनाओं का जिक्र
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि यह पहली घटना नहीं है। संस्थान में पहले भी कई छात्राओं ने अनुचित व्यवहार की शिकायत की थी। लेकिन हर बार शिकायतों को दबा दिया गया। प्रशासन का रवैया शिकायतकर्ता को चुप कराने वाला रहा। पीड़िताओं को समझा-बुझाकर मामला रफा-दफा कर दिया गया। डॉक्टरों और प्रबंधन की लापरवाही ने छात्राओं की सुरक्षा को दांव पर लगा दिया। यह रवैया दिखाता है कि संस्थान के लिए छात्राओं की गरिमा और सुरक्षा से अधिक उसकी अपनी छवि और हित अहम है। आखिरकार देर रात हंगामे की सूचना पुलिस तक पहुंची। पुलिस ने मौके धरना दे रहे छात्रों को समझाने की कोशिश की। पीड़ित छात्रा से लिखित तहरीर ली गई। इसी आधार पर डॉक्टर विवेक सोनी को हिरासत में लिया गया। उनके खिलाफ़ छेड़खानी बीएनएस की धारा 354 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
डॉक्टर की गुंडागर्दी और डर का माहौल
छात्रों ने खुलासा किया कि विवेक सोनी न केवल छेड़खानी करते थे, बल्कि गुंडागर्दी वाली छवि गढ़कर छात्राओं को डराते थे। खुद को अयोध्या का गुंडा बताते हैं और विरोध करने पर धमकी देते हैं। डॉ.विवेक संस्थान के माहौल का फायदा उठाकर खुद को सुरक्षित मानते। यह रवैया बताता है कि जब संस्थान में ही जवाबदेही का अभाव हो तो ऐसे लोगों के हौसले कैसे बुलंद हो जाते हैं।
छात्राओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
मेडिकल कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में यह घटना बेहद शर्मनाक है। छात्राएं यहां डॉक्टर बनने की शिक्षा लेने आती हैं, लेकिन अगर वहीं पर उन्हें डर और असुरक्षा मिले तो यह समाज की विडंबना है। संस्थान में एंटी-हैरासमेंट सेल या महिला सुरक्षा समिति कितनी सक्रिय है, यह बड़ा सवाल है। अगर पहले की शिकायतों पर कार्रवाई हुई होती तो शायद यह घटना टल सकती थी।
समाज और शिक्षा तंत्र पर असर
इस घटना ने केवल एक संस्थान की साख पर धब्बा लगाया, बल्कि पूरे मेडिकल शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। डॉक्टर पर जिन मरीजों की जान और छात्राओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है, वही अगर दोषी पाए जाते हैं तो यह दोहरा अपराध है। ऐसे मामलों में मेडिकल कॉलेजों की विश्वसनीयता पर आघात होता है। छात्राओं और अभिभावकों का भरोसा डगमगा जाता है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए संस्थानों को कड़े कदम उठाने होंगे। आंतरिक शिकायत निवारण समिति को सक्रिय और पारदर्शी बनाना। दोषी पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई और बर्खास्तगी। छात्राओं को स्वतंत्र माहौल और सुरक्षा का आश्वासन के साथ ही पुलिस और प्रशासन की निगरानी होनी चाहिए। शिकायत को दर्ज करना और सार्वजनिक करना आवश्यक होना चाहिए। वाराणसी का हेरिटेज मेडिकल कॉलेज अब एक कठिन मोड़ पर खड़ा है। जहां पढ़ाई और सेवा की बात होनी चाहिए थी, वहां अब छेड़खानी, गुंडागर्दी और छात्र विरोध की खबरें आ रही हैं। डॉ.विवेक सोनी पर मुकदमा दर्ज हो गया है। हेरिटेज मेडिकल कॉलेज का यह प्रकरण बताता है कि अगर लापरवाही और दबाव का खेल चलता रहा तो शिक्षा के मंदिर भी भय और शोषण के अड्डे बन जाएंगे।




