पीएम केयर्स का 6283 करोड़ गए डकार, क्या पीएम मोदी ने कर दिया इतना बड़ा भ्र्ष्टाचार
अब संसद में इस पर सवाल पूछने तक की कर दी मनाही, किसकी तिजोरी में गए इतने पैसे?

– पीएमओ का निर्देश- लोकसभा में इस पर सवाल भी नहीं पूछ सकते
– पीएम राष्ट्रीय आपदा कोष और रक्षा कोष में जमा पैसे पर भी पर्दा डाला
– न आम जनता, न तो भारत की संसद- कोई नहीं जान पाएगा कि पैसा कहां-किसके खाते में गया
– विपक्ष ने फिर उठाए सवाल, पीएमओ और लोकसभा सचिवालय की बोलती बंद

नई दिल्ली। कोविड महामारी के दौरान मार्च 2020 को गठित पीएम केयर्स फंड के बारे में अब कोई भी सांसद संसद में सवाल नहीं पूछ सकता। प्रधानमंत्री कार्यालय ने लोकसभा सचिवालय को लिखे पत्र में इस बारे में कोई भी सवाल न लेने के निर्देश जारी किए हैं। 30 जनवरी 2026 को जारी इस निर्देश में न केवल पीएम केयर्स, बल्कि प्रधानमंत्री राहत कोष और राष्ट्रीय रक्षा कोष में जमा पैसे के बारे में भी कोई सवाल नहीं पूछे जा सकेंगे। मार्च 2023 तक की स्थिति में पीएम केयर्स में 6283 करोड़ रुपए जमा हैं। लेकिन अभी यह पता नहीं है कि इसमें बीते 5 साल में कितना ब्याज आया और उस ब्याज की राशि किसकी जेब में गई।
आखिर इतनी पर्दादारी क्यों?
अब सवाल खड़ा हो गया है कि तीनों ही बड़े राहत कोष, जिसमें करोड़ों रुपए जमा हैं, उनके उपयोग और पैसों के आवंटन को लेकर न तो सूचना के अधिकार के तहत जानकारी दी जा रही है और न ही पीएम केयर्स जैसे कोष से आवंटन को लेकर कोई ऑडिट क्यों नहीं किया जा सकेगा। अकेले पीएम केयर्स में 2020 के बाद से 13 हजार 605 करोड़ रुपए जमा हुए, जिसमें से कोविड काल में बच्चों के लिए और मरीजों के वेंटिलेटर्स के लिए कुल 439 करोड़ रुपए ही खर्च किए गए हैं। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने एक फैसले में पीएम केयर्स को एक प्राइवेट फंड मानकर इसे सूचना के अधिकार और ऑडिट की प्रक्रिया से दूर रखने का फैसला दिया गया था। वहीं, सूचना के अधिकार के तहत कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पीएम केयर्स में जमा राशि का हिसाब जानने के लिए आरटीआई लगाई थी, लेकिन भारत सरकार के सूचना आयोग ने इस पर जानकारी देने से इंकार कर दिया। अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हुआ है कि किसी भी आपदा या आपातकालीन स्थितियों में लोगों को राहत और सहायता पहुंचाने के मकसद से बनाए गए इस पीएम केयर्स फंड को लेकर इतनी पर्दादारी क्यों है? क्या भारत के लोगों और कई कंपनियों और रक्षा सेनाओं के जवानों की एक दिन की सैलरी से बने इस फंड से किसको कितना पैसा मिला, क्या लोगों को यह भी जानने का हक नहीं है? यहां तक कि भारत की संसद से भी यह जानकारी क्यों छिपाई जा रही है ?
संसद के इस नियम का दिया हवाला
प्रधानमंत्री कार्यालय ने लोकसभा सचिवालय को लिखे पत्र में निचले सदन की कार्यवाही के नियम 41(2) सब सेक्शन 8 और 41(2) सब सेक्शन 17 के हवाले से पीएम केयर्स के बारे में कोई भी सवाल न लेने का निर्देश दिया गया है। अब प्रधानमंत्री कार्यालय और लोकसभा सचिवालय दोनों इसकी वजह बताने को तैयार नहीं हैं। पीएम केयर्स को लेकर विपक्ष शुरू से ही केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर हमलावर रहा है। विपक्ष का कहना है कि जब प्रधानमंत्री राहत कोष नाम का एक फंड पहले से है तो फिर पीएम केयर्स के नाम से एक अलग फंड बनाने की जरूरत क्या है? नियम 41(2) सब सेक्शन 8 के तहत लोकसभा में ऐसे सवाल नहीं पूछ जा सकते, जिनका भारत सरकार से कोई संबंध नहीं है। वहीं, 41(2) सब सेक्शन 17 के तहत ऐसे सवाल नहीं पूछे जा सकते, जिनका संबंध ऐसे किसी निकाय या व्यक्ति से हो, जो भारत सरकार के अधीन नहीं है। पीएमओ के अनुसार, चूंकि पीएम केयर्स में लोगों या कंपनियों ने अपनी स्वेच्छा से चंदा दिया था और उसमें भारत सरकार का कोई अंशदान नहीं है, इसलिए इसे लेकर सवाल नहीं खड़े किए जा सकते हैं।
हमेशा दिया है गोलमोल जवाब
केंद्र सरकार ने दिसंबर 2020 में एक आरटीआई के जवाब में कहा कि पीएम केयर्स का फंड भारत सरकार के अधीन है। फिर भी यह आरटीआई के अंतर्गत इसलिए नहीं आता, क्योंकि इसमें रखा पैसा प्राइवेट कंपनियों और निजी लोगों का है। वहीं, सितंबर 2021 में केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि पीएम केयर्स फंड न तो राज्य और न ही सार्वजनिक प्राधिकर्ता के तहत आता है। इसलिए उसे सूचना के अधिकार के तहत नहीं माना जाना चाहिए। केंद्रीय सूचना आयोग ने आरटीआई के तहत दायर की गई एक अपील के जवाब में आयकर विभाग को पीएम केयर्स के बारे में सूचना को सार्वजनिक करने के आदेश दिए थे। लेकिन जनवरी 2024 को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने आयोग के निर्देश को खारिज करते हुए कहा था धारा 138 के तहत आयकर विभाग को ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है।
पीएम केयर्स में पड़े हैं 6283 करोड़
पीएम केयर्स फंड की आधिकारिक वेबसाइट में दर्ज रसीदों और भुगतान के की रिपोर्टों के आधार पर 2022-23 तक के लेखा रिपोर्ट के अनुसार खाते में 6,283.7 करोड़ रुपए पड़े हैं। मार्च 2023 तक पीएम केयर्स में इतनी ही रकम जमा दर्ज थी। उसके बाद से इस फंड में कोई नई एंट्री दर्ज नहीं है। इनके अलावा जिन और दो खातों के बारे में संसद में सवाल पूछने पर रोक लगाई गई है, वे दोनों भी पीएम केयर्स की तरह पीएमओ से ही संचालित होते हैं। पीएम राष्ट्रीय आपदा राहत कोष का गठन 1948 में किया गया था। इस पैसे का उपयोग तूफान, बाढ़ या भूकंप जैसी आपदाओं में लोगों को राहत और बचाव कार्यों के लिए किया जाता है। इसके साथ बड़ी दुर्घटनाओं और दंगों के दौरान लोगों को हुए नुकसान के लिए भी इसी कोष से पैसा दिया जाता है। राष्ट्रीय रक्षा कोष सेना, अर्धसैन्य बलों के जवानों और उनके परिजनों के कल्याण के लिए बनाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने माना धर्मार्थ खाता
8 अगस्त 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने एक एनजीओ की याचिका पर पीएम केयर्स के फंड में जमा पैसे को राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) में ट्रांसफर करने की यह कहते हुए अनुमति नहीं दी कि दोनों अलग कोष हैं और दोनों के गठन का मकसद भी अलग है। एनडीआरएफ के कोष का बाकायदा सीएजी ऑडिट करने का नियम है, लेकिन पीएम केयर्स असल में एक सार्वजनिक धर्मार्थ खाता है। इसलिए इसकी ऑडिट की कोई जरूरत नहीं है।
इन विदेशी कंपनियों से मिले पैसे
पीएम केयर्स के लिए चीनी कंपनी टिकटॉक ने 30 करोड़, एक और चीनी कंपनी हुआवे ने 7 करोड़, शाओमी ने 5 करोड़ और चीन से नाता रखने वाली कंपनी पेटीएम ने 100 करोड़ रुपए दिए थे। भारत की तीनों सेनाओं के जवानों और अफसरों ने अपनी एक दिन की सैलरी के 200 करोड़ रुपए, बैंक कर्मियों के 200 करोड़ रुपए, शिक्षकों और शिक्षा कर्मियों के योगदान के 21 करोड़ रुपए, सर्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी ओएनजीसी, इंडियन ऑयलऑयल और एनटीपीसी के 2100 करोड़ रुपए के साथ 38 करोड़ रुपए अन्य सरकारी उपक्रमों से भी मिले थे। 2022-23 की स्थिति में पीएम केयर्स फंड में घरेलू चंदे के 909 करोड़ रुपए जमा थे। इस राशि पर 170 करोड़ रुपए का ब्याज भी पीएम केयर्स को ही मिला। लोगों, कंपनियों और विदेशी संस्थाओं ने यह पैसा भारत के कोविडग्रस्त लोगों की मदद के लिए दिया था, लेकिन इस पैसे से केवल 439 करोड़ रुपए ही खर्च किए गए। अब कोई नहीं जान पाएगा कि बाकी का पैसा किसका है और किसकी तिजोरी में गया है।




