तत्कालीन एआरटीओ महोबा एमपी सिंह पर 19 जुलाई को दर्ज हुई एफआईआर, बे-ईमान बीएन सिंह को अब किस बात का है इंतजार?
किस तरह तत्कालीन एआरटीओ प्रशासन महोबा ने सत्येंद्र को कितना किया परेशान,एकदम निकृष्ट है ये इंसान
- छोटी सी छोटी घटना पर अन्य परिवहन कर्मियों का करता है बीएन सिंह निलंबन,चिरकुट परिवहन आयुक्त इतने गम्भीर प्रकरण के आरोपी का क्यो कर रहा महिमामंडन
- परिवहन विभाग में महोबा से बरेली तक भ्रष्टाचार की बेशर्मी, कागजों में गोलमाल
- फर्जी पंजीयन की पटकथा जब पते से लिखी गई धोखाधड़ी की इबारत
- जिनके नाम पर वाहन उसे खबर तक नहीं
- आईडी प्रूफ का अपराधों में उपयोग शासन को चिठ्ठियां, लेकिन मौन कायम
- पते का दुरुपयोग चालानों के जरिए सामाजिक अपमान की साजिश
- बांदा से बरेली तक जांच स्तानान्तरित मकसद सिर्फ लीपापोती
- 419,420,467,468,471 की बेहद गम्भीर धाराओं में केस हुआ है दर्ज, एमपी सिंह सहारनपुर के एआरटीओ प्रवर्तन के चार्ज पर मदमस्त
- बृजेश नारायण सिंह की कार्यप्रणाली ये सिद्ध कर रही है कि पैसे दम पर एआरटीओ एमपी सिंह को अभयदान दे रहा है ये निकम्मा व निकृष्ट अधिकारी

महोबा। योगी राज यानी राज में बड़ी गजब राम कहानी चल रही है।एकतरफ मुख्यमंत्री लगातार मंच माइक व मीडिया के सामने बखान करते रहते है कि भ्र्ष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति चल रही है।वही दूसरी तरफ सूबे के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह भी भ्र्ष्टाचार पर काफी सख्त है,लेकिन साहब ये केवल जुबानी है हकीकत में भ्र्ष्टाचार करने वाले मजा काट रहे है।ताजा मामला उत्तर प्रदेश के परिवहन विभाग की कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महोबा निवासी सत्येन्द्र कुमार अग्निहोत्री की शिकायत पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट महोबा नितिन राठी ने धारा 173(4) बीएनएस के अंतर्गत मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। आरोप है कि सत्येन्द्र के आईडी दस्तावेजों और पते का दुरुपयोग कर बिना अनुमति कई वाहनों का पंजीकरण उनके नाम पर कर दिया गया। न केवल यह आईडी धोखाधड़ी का मामला है, बल्कि इससे जुड़ा पूरा तंत्र महोबा से लखनऊ और बरेली तक फैले एक संगठित भ्रष्टाचार को उजागर करता है। वहीं दूसरी तरफ न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बाद महोबा के कबरई थाना में तत्कालीन एआरटीओ प्रशासन समेत अन्य 7 लोगों पर आईपीसी की गम्भीर धाराओं ,419,420,467,468,471 में मुकदमा दर्ज किया गया है।सबसे बड़ी बात की एफआईआर हुए लगभग 1 महीना होने को आ रहा है है लेकिन एक नम्बर के घूसखोर नारायणी कोठा के मालिक ब्रजेश नारायण सिंह द्वारा अभी तक कोई कार्यवाही नही की गई है।
* सत्येन्द्र कुमार के आईडी दस्तावेजों का फर्जी इस्तेमाल कर वाहनों का हुआ पंजीयन
* बिना सहमति महोबा के पते का दुरुपयोग, चालानों से किया गया अपमानित
* न्यायालय ने एफआईआर दर्ज तो कर दिया गया ,लीपापोती जारी है।
* मुख्य आरोपी तत्कालीन एआरटीओ महोबा वर्तमान में सहारनपुर में एआरटीओ प्रवर्तन पद पर तैनात एमपी सिंह को बचाने में बृजेश नारायण सिंह की बे-ईमानी के किरदार में
* रजिस्टर्ड डाक से शिकायतों की झड़ी, लखनऊ से बरेली तक सिस्टम खामोश
* फर्जी पंजीयन सुरक्षा के लिए खतरा बनीं
* महोबा परिवहन कार्यालय बना फर्जीवाड़े का अड्डा
प्रशासनिक चुप्पी ने भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया, कोई कार्रवाई नहीं
सत्येन्द्र कुमार अग्निहोत्री, निवासी इन्द्रानगर कबरई, महोबा, पेशे से व्यवसायी हैं। उनके पास तीन वैध वाहन हैं एक बाइक, एक कार और एक डम्पर। इन वाहनों के पंजीयन के लिए उन्होंने परिवहन कार्यालय में पहचान पत्र (आईडी) व हलफनामे समेत दस्तावेज जमा किए थे। बाद में उन्हें पता चला कि उनके दस्तावेजों की फोटोकॉपी का उपयोग कर उनके नाम और पते पर कई वाहनों को पंजीकृत कर दिया गया है। यह जानकारी उन्हें तब हुई जब उनके पते पर लगातार चालान पहुंचने लगे।
पंजीयन प्रक्रिया में हेराफेरी कैसे
सत्येन्द्र के मुताबिक, उन्होंने केवल तीन गाड़ियों के लिए ही अपने दस्तावेज और पहचान पत्र दिए थे, मगर परिवहन विभाग ने उनकी फाइल से फोटोकॉपी निकालकर अन्य वाहनों के पंजीयन में भी उनका नाम-पता जोड़ दिया। किसी भी वाहन स्वामी को उन्होंने सहमति नहीं दी, न ही हस्ताक्षर किए।
दस्तावेजों का दुरुपयोग और मानसिक उत्पीड़न
इन फर्जी पंजीयन के कारण सत्येन्द्र को दर्जनों चालान झेलने पड़े। चालान पर जब पुलिस सत्यापन के लिए उनके घर पहुंची तो स्थानीय लोगों के बीच उनकी प्रतिष्ठा पर प्रश्नचिह्न लगा। पुलिस पूछताछ और बेइज्जती के चलते उन्होंने बार-बार शिकायत दर्ज कराई, मगर हर बार उन्हें टाल दिया गया।
कौन-कौन जिम्मेदार?
पुलिस के एफआईआर में तत्कालीन एआरटीओ प्रशाशन व वर्तमान तैनाती सहारनपुर एआरटीओ प्रवर्तन एमपी सिंह इसी ने घुस लेकर फर्जी बसों का पंजीयन किया है। दर्ज प्राथमिकी में मुख्य अभियुक्त भी यही है। बावजूद इसके एक नम्बर का चिरकुट परिवहन आयुक्त इस बेईमान को बचाने के लिए जी जान एक किये हुए है। महोबा में इसके कार्यकाल में न केवल सत्यापन के नियमों को दरकिनार किया गया, बल्कि पंजीयन व पहचान पत्र के मानक भी नजरअंदाज किए गए। इसके बावजूद उनके खिलाफ कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई। जांच बांदा आरटीओ से लगायत बरेली आरटीओ तक वर्तमान समय ने लंबित है। ने
न्यायालय का हस्तक्षेप जगी उम्मीद की किरण
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट महोबा नितिन राठी ने जब मामले का संज्ञान लिया तो पाया कि यह कृत्य भारतीय न्याय संहिता की धारा 173(4) के अंतर्गत गंभीर आपराधिक अपराध है। उन्होंने महोबा कोतवाली को निर्देश दिया कि एफआईआर दर्ज कर 15 दिन के भीतर कर न्यायालय को कार्रवाई से अवगत कराएं।
परिवहन तंत्र की गिरावट और ‘वाहन माफिया’ का गठजोड़
इस पूरे प्रकरण ने उत्तर प्रदेश में चल रहे वाहन माफिया और परिवहन विभाग के बीच के गठजोड़ को सामने ला दिया है। बिना फिटनेस, बिना बीमा और फर्जी पंजीयन वाली बसें यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। परिवहन आयुक्त व एआरटीओ प्रवर्तन दलों की मिलीभगत से ये वाहन हर रोज सड़कों पर दौड़ते हैं।
प्रशासनिक चुप्पी और राजनीतिक संरक्षण
इस केस में शासन का मौन रहना और जिम्मेदार अफसरों का बच निकलना इस बात का संकेत है कि भ्रष्टाचार को कहीं-न-कहीं राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। पीड़ित को न्याय की जगह प्रताड़ना मिली, और व्यवस्था अपनी नाकामी पर पर्दा डालती रही। मामले की न्यायिक निगरानी में जांच होने की आवश्यकता है। परिवहन विभाग में बड़े पैमाने पर ऑडिट की जरूरत है। परिवहन आयुक्त बीएन सिंह समेत जो परिवहन अधिकारी जांच प्रक्रिया को अभी तक लंबित रखे हुए है पर आपराधिक मुकदमा चलाना ही एकमात्र रास्ता है जिससे भविष्य में कोई अन्य व्यक्ति इसी तरह पीड़ित न हो। यह प्रकरण सिर्फ एक व्यक्ति की पहचान चोरी और दस्तावेज़ दुरुपयोग का मामला नहीं, बल्कि पूरे परिवहन विभाग की व्यवस्था पर सवालिया निशान है। जब तक दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक फर्जी पंजीयन की आड़ में ऐसे संगठित फर्जीवाड़े चलते रहेंगे। कभी किसी सत्येन्द्र के नाम पर, तो कभी किसी और की जान पर।
* न्यायालय ने कहा प्रथम दृष्टया अपराध साबित होता है कि परिवहन विभाग ने बिना सहमति दस्तावेज़ों का दुरुपयोग किया
* बिना फिजिकल वेरीफिकेशन, कैसे पते पर पंजीयन?
* सत्यापन अधिकारी की रिपोर्ट कहां है?
* सिस्टम में सड़ांध जब बरेली और लखनऊ भी मूक दर्शक बन गए
* फर्जी पंजीयन कराने वाले और भ्रष्ट अफसरों पर कोई कार्रवाई कब
* सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, व्यवस्था की हत्या हुई
* दस्तावेज़ों की गोपनीयता, पहचान का सम्मान और प्रशासनिक जवाबदेही तीनों खतरे में
* दोषियों पर कठोर आपराधिक मुकदमे और निलंबन जरूरी
* पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सत्यापन तंत्र को अनिवार्य बनाना होगा
* आईडी प्रूफ और पते का बिना अनुमति दुरुपयोग
* चालान और पुलिसिया पूछताछ से मानसिक प्रताड़ना
* रजिस्टर्ड डाक और पोर्टल पर भेजी गई शिकायतों को अनदेखा किया गया
* न्यायालय के आदेश पर19 जुलाई 2025 को दर्ज हुई एफआईआर लेकिन बे-ईमान ब्रजेश नारायण सिंह ने अभी तक कोई कार्यवाही क्यो नही किया?
* परिवहन विभाग की चुप्पी भ्रष्टाचार की आ रही बू


सत्येन्द्र कुमार अग्निहोत्री उम्र 40 वर्ष पुत्र जे.पी. अग्निहोत्री निवासी मुहल्ला इन्द्रानगर कबरई थाना कबरई जिला महोबा ने जो न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया जिसके आधार पर एफआईआर हुई । उसमें नम्बर 1 तत्कालीन सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी महोबा। 2-के सी. जैन ट्रैवर्ल्स निवासी एन. के टवर सेकेण्ड फ्लोर अपोजिट न्यू कोहिनूर सिनेमा जोधपुर राजस्थान। पिनकोड-342001 वाहन स्वामी बस वाहन संख्या यूपी-95 टी-3997, यूपी-95टी-4113, यूपी-95टी-3997, यू.पी.-95टी-3996, यूपी-95टी -4153, यूपी-95टी-4156, यूपी-95टी-4179, यू.पी.-95टी-4155, यूपी-95 टी-4177, यू.पी-95टी-4154, यूपी-95टी-4178, यूपी-95टी-4139, यूपी-95टी 4157, यूपी-95टी-4152, 3- मनीष जैन पुत्र करनचन्द्र जैन निवासी डी-95. शास्त्रीनगर जोधपुर राजस्थान। पिन कोड-342001 वाहन संख्या-यू.पी 95 टी.-4115, यूपी-95टी-3975, यूपी-95टी 4114, यू.पी.-95टी-4136, यूपी-95टी-4135, यूपी-95टी-4137, 4-करनचन्द्र जैन पुत्र किशोर मल जैन निवासी डी.-95, शास्त्रीनगर जोधपुर राजस्थान। पिन कोड-342001, वाहन संख्या-यू.पी.-95टी-4005, 5-हवेली टू एण्ड ट्रैवलर्स प्रालि निवासी एन के टवर सेकेण्ड फ्लोर अपोजिट न्यू कोहिनूर सिनेमा जोधपुर राजस्थान। पिनकोड-342001, वाहन स्वामी बस वाहन संख्या-यू.पी. -95टी.-3999 व यूपी-95टी-4002 व यू.पी 95 टी-3998, 6-दीपक अग्रवाल पुत्र श्री दिनेशचन्द्र अग्रवाल निवासी वार्ड-29 शान्तिनगर कालौनी इनफन्ट एस. डी. एम. मिश्रा छतरपुर मप्र पिनकोड-471001 वाहन पंजीयन संख्या-यू पी-95टी-4772 व यूपी-95टी-4773. व यू.पी-95टी-4229,7-बिटी आध्या पत्नी मि० राजकुमार आध्या निवासी नियर डा मोघे हस्पिटल शिवाजी मार्ग शिवपुरी मध्य प्रदेश। पिन कोड-473551, यूपी-95टी-4138, यूपी-95टी-4066 । विपक्षीगण। प्रार्थनापत्र अंतर्गत धारा-175 (3) बीएनएसएस थाना-कबरई, जिला-महोबा उप्र । तहरीर में लिखा विनम्र निवेदन है कि प्रार्थी मुहल्ला इन्द्रानगर कबरई थाना कबरई जिला महोबा का निवासी है। प्रार्थी के पास वाहन मोटर साईकिल, कार, डम्फर, आदि के बैध वाहन विपक्षी संख्या-1 के कार्यालय से पंजीकृत है। जिनमें प्रार्थी के उपरोक्त वाहनों के पंजीयन के समय आई डी पूफ हेतु कागजात विपक्षी संख्या-1 के कार्यालय में मौजूद है। प्रार्थी के उक्त आई.डी. पूफ कागजात व हलफनामा आधारकार्ड महोबा उपसम्भागीय कार्यालय द्वारा फाईल से फोटोकापी कर अन्य वाहन स्वामियों के वाहनों का पंजीयन मुझ प्रार्थी के नाम व पता का गलत दुरूपयोग करते हुये उपरोक्त वाहनों का पंजीयन मेरे पत्ते पर करवाया गया है जबकि मुझ प्रार्थी द्वारा केवल वाहन संख्या-यू.पी.-95 टी-7777, यूपी-95टी-4878 व यूपी-95टी-4877 में मेरे द्वारा आई.डी. प्रूफ व शपथपत्र दिये गये थे और अपनी सहमति प्रदान की गयी थी जबकि उपरोक्त वाहनों व उनके स्वामियों को मुझ प्रार्थी द्वारा इस प्रकार की कोई भी सहमति प्रदान नहीं की गयी है और ना ही प्रार्थी के द्वारा किसी भी वाहन स्वामी को अपने पते की अनुमति दी गयी है।
बल्कि मुझ प्रार्थी के नाम व पता विपक्षी संख्या-1 के कार्यालय में उपस्थित कागजातों का दुरुपयोग करके उक्त कृत्य किया गया है जो कि एक आपराधिक श्रेणी के अंतर्गत आता है। उपरोक्त विपक्षीगणों के वाहनों के चालान काटकर मुझ प्रार्थी के नाम पते पर भेजकर स्थानीय पुलिस से बेइज्जत कराया जा रहा है जिससे मुझ प्रार्थी की आम छवि धूमिल हो रही है तथा प्रतिष्ठा भी गिर रही है। मुझ प्रार्थी को स्थानीय पुलिस द्वारा उपरोक्त वाहनों (जो कि मेरे नहीं है) का चालान भेजकर मानसिक पीडा पहुंचायी जा रही थी जिसके संबंध में मुझ प्रार्थी ने पूर्व में दिनांक-02.03.2020 एवं 20. 02.2020 व 26.05.2022 को ए.आर.टी.ओ. महोबा व आर.टी.ओ. बाँदा व आर.टी.ओ. कानपुर आर टी ओ. लखनऊ व जिलाधिकारी महोबा व पुलिस अधीक्षक महोबा व आई. जीआरएस व माननीय मुख्य मंत्री महोदय को रजिस्टर्ड डाक से सूचना भी प्रेषित की जा चुकी है किन्तु आज तक कोई भी कार्यवाही नही की गयी है। जिससे प्रार्थी मानसिक रूप से अत्याधिक परेशान है। जरा सोचिए कि इतने बाद भी तत्कालीन एआरटीओ प्रशासन व वर्तमान में सहारनपुर में एआरटीओ प्रवर्तन के पद पर बैठकर 419, 420,467,468,471 के मुकदमे का मुख्य अभियुक्त मलाई काट रहा है। ये है मुख्यमंत्री व परिवहन मंत्री के भ्र्ष्टाचार मुक्त शासन की हकीकत बाकी राम राज में सब चंगा है आम आदमी परेशान व नंगा है।




