वाराणसी

पूर्ण बोरा ने संविधान दिवस पर लिया संकल्प,संवैधानिक पदों पर बैठे हम लोगो को करना होगा समाज का कायाकल्प

संविधान दिवस पर वीडीए का संकल्प, पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसेवा की राह पर मजबूत कदम

● पूर्ण बोरा ने संविधान दिवस पर लिया संकल्प,संवैधानिक पदों पर बैठे हम लोगो को करना होगा समाज का कायाकल्प

● संविधान दिवस पर वीडीए का संकल्प, पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसेवा की राह पर मजबूत कदम

● पन्नालाल पार्क में डॉ.अम्बेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर संविधान दिवस की औपचारिक शुरुआत

● वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा के नेतृत्व में प्रस्तावना का सामूहिक वाचन

● अधिकारों और कर्तव्यों पर संवाद, कर्मचारियों ने साझा किए संवैधानिक मूल्य

● संविधान केवल दस्तावेज नहीं, लोकतंत्र की धड़कन-पूर्ण बोरा

● पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और संवेदनशील शासन की प्रतिज्ञा

● सभी विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों की सहभागिता, लोकतांत्रिक मूल्यों पर गहन चर्चा

 

◆ अमित मौर्य

वाराणसी। वीडीए ने संविधान दिवस को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संवैधानिक चेतना को कार्य-संस्कृति में उतारने के संकल्प दिवस के रूप में मनाया। 26 नवम्बर 2025 की सुबह पन्नालाल पार्क में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत हुई। उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन हुआ, कर्मचारियों ने अधिकारों व कर्तव्यों पर विचार साझा किए और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के संरक्षण पर चर्चा की। माहौल में गंभीरता भी थी और समर्पण भी जैसे संस्थान अपने दायित्वों को नए दृष्टिकोण से पुनर्परिभाषित कर रहा हो। संविधान दिवस के अवसर पर वाराणसी विकास प्राधिकरण ने पन्नालाल पार्क को एक लोकतांत्रिक संवाद के मंच में बदल दिया। सुबह की ताजी धूप और हल्की ठंड के बीच जुटे अधिकारी और कर्मचारी केवल कार्यक्रम में शामिल होने नहीं, बल्कि संविधान की भावना को अपने दैनिक प्रशासनिक कार्यों से जोड़ने का संदेश देने आए थे। यह आयोजन उन दिनों में विशेष महत्व रखता है जब शासन-प्रशासन पर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग निरंतर बढ़ रही है।

डॉ.अम्बेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर संकल्प की शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर हुआ। उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा, अपर सचिव गुडाकेश शर्मा, विभिन्न विभागों के प्रभारी और कर्मचारियों ने संविधान निर्माता को नमन किया।
माल्यार्पण मात्र श्रद्धा का प्रतीक नहीं था, बल्कि यह बताने का प्रयास था कि संस्था का प्रत्येक निर्णय, प्रत्येक फाइल और प्रत्येक नीति संविधान से निर्देशित होनी चाहिए। डॉ. अम्बेडकर की प्रतिमा के सामने खड़े अधिकारियों के चेहरे पर गंभीरता और प्रतिबद्धता साफ दिखाई दे रही थी, जैसे वे अपने कर्तव्यों को दोबारा समझ रहे हों।

संविधान के प्रति सामूहिक सम्मान

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने सभी कर्मचारियों को संविधान की प्रस्तावना के पास बुलाया। एक स्वर में, एक ताल में हम भारत के लोग…” की गूंज पन्नालाल पार्क में फैल गई। यह वाचन औपचारिकता से कहीं अधिक था। प्रस्तावना की पंक्तियां न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व वीडीए की कार्य-संस्कृति को दिशा देने वाले चार स्तंभों के रूप में सामने आईं। कई कर्मचारियों ने बाद में कहा कि वर्षों से प्रस्तावना पढ़ते आ रहे हैं, लेकिन आज उसे महसूस किया। संविधान दिवस का सबसे बड़ा उद्देश्य होता है, सिर्फ पढ़ना नहीं, बल्कि उसे जी पाना ही सबसे बड़ी यह अनुभूति है।

अधिकार, कर्तव्य पर गहन संवाद

प्रस्तावना वाचन के बाद कर्मचारियों और अधिकारियों ने संविधान के मूल तत्वों, नागरिक अधिकारों, कर्तव्यों और लोकतांत्रिक व्यवस्था की निरंतर रक्षा पर खुलकर अपने विचार रखे। कहा कि संविधान हमारी प्रशासनिक दिशायें तय करता है। हम किसी भवन का नक्शा पास करते समय भी संविधान के मूल्यों के प्रति उत्तरदायी होते हैं, यह जिम्मेदारी छोटी नहीं है। आज के समय में नागरिकों के अधिकारों के साथ-साथ सरकारी संस्थाओं में संवाद के दौरान जनसेवा में संवेदनशीलता, निर्णयों में पारदर्शिता, फाइलों में गति, नागरिकों के साथ व्यवहार में विनम्रता, भ्रष्टाचार से लड़ने की व्यक्तिगत प्रतिज्ञा के दायित्वों को भी समझना जरूरी है। इस दौरान कर्मचारियों ने कहा कि संविधान केवल उच्च संस्थाओं के लिए नहीं, बल्कि हर विभाग, हर कार्यालय और हर कर्मचारी के लिए एक समान रूप से मार्गदर्शक है।

संविधान केवल दस्तावेज नहीं, लोकतंत्र की धड़कन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने कहा कि संविधान सिर्फ एक पुस्तक नहीं है। यह हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला, प्रेरणा और मर्यादा तीनों है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही केवल शब्द नहीं, बल्कि व्यवहार में दिखने वाली करने योग्य मूल्य हैं। पूर्ण बोरा ने यह भी याद दिलाया कि विकास प्राधिकरण जैसी संस्था का हर निर्णय नागरिकों के जीवन, उनके मकानों, उनके व्यवसायों और उनकी उम्मीदों को प्रभावित करता है। इसलिए जरूरी है कि निर्णय संविधान-सम्मत हों, पक्षपात से मुक्त हों और जनहित में हों। उपाध्यक्ष ने कर्मचारियों से अपील की कि वे संवेदनशीलता को अपनी कार्यशैली का स्थायी भाग बनाएं। साधारण नागरिक हमारे पास समाधान के लिए आता है, समस्या बढ़ाने के लिए नहीं। इसलिए हमारे व्यवहार में सम्मान और संवेदना दोनों होनी चाहिए।

संवैधानिक मूल्यों की संस्थागत आत्मा बनने की पहल

वीडीए की यह पहल इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि हाल के वर्षों में जनता की अपेक्षाएं बढ़ी हैं चाहे वह निर्माण कार्यों की पारदर्शिता हो, भवन अनुमति का समयबद्ध निस्तारण हो या अवैध निर्माण पर समय पर कार्रवाई। ऐसे में संविधान दिवस जैसे आयोजन संस्थाओं के लिए आत्म-मूल्यांकन का अवसर देते हैं।
कार्यक्रम में कर्मचारियों ने साझा किया कि उन्हें अपने विभागीय कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए। डिजिटल फाइलों में विलंब न हो, नागरिकों की शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण, कार्यालयों के व्यवहार में भेदभाव मुक्त संस्कृति, अवैध निर्माण के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई, निर्णय प्रक्रियाओं में सार्वजनिक हित को सर्वोच्च प्राथमिकता जैसे सुझावों पर चर्चा हुई।

लोकतांत्रिक दायित्व पर नई रोशनी

कार्यक्रम में नागरिक अधिकारों और सरकारी कर्तव्यों के बीच संबंध पर चर्चा। कई कर्मचारियों ने कहा कि नागरिकों के प्रति व्यवहार केवल नियमों की व्याख्या भर नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक नैतिकता का भी हिस्सा है। कर्मचारी ने टिप्पणी की। कि हम नियम लागू करते हैं, लेकिन संविधान हमें बताता है कि नियम क्यों हैं और जनता हमें ‘क्यों’ मानती है। यह समझ शासन के मानव पक्ष को मजबूत करती है।

गुडाकेश शर्मा की उपस्थिति और विभागीय समन्वय

कार्यक्रम में वीडीए के अपर सचिव गुडाकेश शर्मा की उपस्थिति महत्वपूर्ण थी। उन्होंने कार्यक्रम को संघटित रूप देने में प्रमुख भूमिका निभाई।
विभिन्न विभागों भवन, अभियांत्रिकी, वित्त, भू-अधिग्रहण, नक्शा अनुमोदन, जनसूचना, प्रशासनिक सेल के कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। यह व्यापक सहभागिता इस बात का संकेत थी कि संविधान दिवस को संस्था ने गंभीरता और सामूहिकता के साथ मनाया।

संविधान के प्रति प्रतिज्ञा

अंत में सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर यह संकल्प लिया कि वे संविधान की आत्मा को अपने दैनिक कार्यों में उतारेंगे, जनता के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूती देंगे, नागरिक शिकायतों का संवेदनशील और समयबद्ध समाधान करेंगे, लोकतांत्रिक मूल्यों की गरिमा को संस्थागत नैतिकता में बदलेंगे। समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, सभी कर्मचारियों के चेहरे पर संतोष था कि जैसे उन्हें यह एहसास हुआ कि उनका काम केवल नौकरी नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व है।

* भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत
* वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने की कार्यक्रम की अध्यक्षता
* कर्मचारियों द्वारा संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन
* अधिकार, कर्तव्य, न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों पर अभिव्यक्ति
* पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशील प्रशासन पर बल
* अपर सचिव गुडाकेश शर्मा सहित सभी विभागों की सहभागिता

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