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यूपी में चोर घूसखोर अधिकारीयों ने इस्तीफे का किया इमोशनल अत्याचार,दागियों सरीखा है इन भ्र्ष्टाचारियों का किरदार

उंगली काटकर शहीद बनने चले थे प्रशांत सिंह: निकले महाठग, चचेरे भाई ने खोली पोल- शाह के बयान से नया झोल

– आंखों की कमजोर बताकर हासिल किया विकलांगता प्रमाण पत्र
– पहले ट्यूशन पढ़ाते थे, लेकिन विधायक बनने का था सपना
– बिना स्नान किए माघ मेले से निकले ज्योर्तिमठ के शंकाराचार्य
– सनातन बनाम गैर सनातन के विवाद में बदल रही है सियासत
– जो सनातन को कमजोर करेगा, वह सत्ता से बाहर होगा- अमित शाह

लखनऊ।
माघ पूर्णिमा से शुरू हुआ उत्तरप्रदेश में बवाल खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। गत सप्ताह जहां मेले की समाप्ति पर ज्यार्तिपीठ के शंकाराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बिना गंगा स्नान किए रवानगी डाल रहे हैं, वहीं इस विवाद में यूजीसी की ओर से जारी नोटिफिकेशन ने बड़ा पेंच डाल दिया है। इस मुद्दे पर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफा देने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ के समर्थन में इस्तीफा देने वाले अयोध्या के जीएसटी विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह भी एक बड़े झमेले में फंस गए हैं।

बड़े भाई ने पोल खोली प्रशांत कुमार सिंह के बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने को मीडिया के सामने तमाम दस्तावेजों के साथ आरोप लगा दिया कि उनके भाई ने फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र के साथ सरकारी नौकरी हथियाई थी। उन्होंने बताया कि प्रशांत कुमार सिंह के खिलाफ मेडिकल बोर्ड की जांच अपने अंतिम चरण में है। जांच में दोषी पाए जाने और रिकवरी होने के डर से प्रशांत ने अपने पद से इस्तीफा दिया है, न कि शंकराचार्य विवाद या योगी के समर्थन में। उन्होंने मीडिया को अपने बयान में वे कागजात भी दिखाए, जिसमें उन्होंने अपने छोटे भाई के खिलाफ जांच की मांग की थी। अचूक संघर्ष के पास वे दस्तावेज मौजूद हैं।

बताई आंख की झूठी बीमारी

आरोप हैं कि प्रशांत कुमार सिंह ने सरकारी नौकरी पाने के लिए आंख में एक ऐसी बीमारी होने का दावा किया, जो 50 साल की उम्र से पहले किसी को होती ही नहीं है। उनके बड़े भाई विश्वजीत सिंह ने बताया कि इसी बीमारी के आधार पर प्रशांत ने सरकारी नौकरी पाई थी। वे फर्जी विकलांगता सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी में आए और उनके खिलाफ विभागीय जांच अभी आखिरी चरण में है और फैसला किसी भी समय आ सकता है। इस खुलासे के बाद शंकराचार्य विवाद अब फिर से उछल गया है। एक ओर जहां योगी विरोधी सनातनी गुट इसे शंकराचार्य का श्राप बता रहा है, वहीं योगी समर्थक गुट इसे बदनाम करने की विपक्ष की चाल बता रहे हैं।

शाह के बयान से मामला और बिगड़ा

उधर, गुजरात के अहमदाबाद में स्वामीनारायण संप्रदाय के एक कार्यक्रम में मंगलवार को बोलते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस बयान से विवाद को और तूल दे दिया है कि जो सरकार सनातन धर्म के मूल्यों को कमजोर करेगी, वह दोबारा सत्ता में नहीं आएगी। इस बीच, अपने पद से इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने मंगलवार को दावा किया कि उन्हें उनके घर में नजरबंद किया गया है। अलंकार का दावा है कि उनके घर के बाहर पुलिस बिठा दी गई है और उन्हें न तो किसी से मिलने दिया जा रहा है और न ही घर से बाहर जाने की अनुमति दी जा रही है।

आखिर क्या है प्रशांत सिंह का मामला

विश्वजीत सिंह के अनुसार, उनके छोटे भाई प्रशांत कुमार सिंह पर शक होने के बाद उनके खिलाफ विभागीय जांच बिठा दी गई। मामले की शिकायत खुद बड़े भाई ने ही की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मेडिकल बोर्ड ने इस मामले में जांच के लिए प्रशांत को दो बार बुलाया, लेकिन वे नहीं गए। इस बारे में मऊ के सीएमओ ने महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं उत्तरप्रदेश सरकार को 19 दिसंबर 2025 को पत्र लिखकर खुद इसकी जानकारी दी है। मऊ के रहने वाले प्रशांत कुमार सिंह के बारे में बताया जाता है कि सरकारी नौकरी पाने से पहले वह ट्यूशन पढ़ाते थे। शुरुआत से ही वह राजनीति में आने और विधायक बनने का सपना पाले हुए थे। वे समाजवादी पार्टी के नेता कम मैनेजर अमर सिंह के चेले बन गए और फिर जालसाजी कर सरकारी अफसर बन गए। उनहोंने सरकारी नौकरी पाने के लिए आंखों से कमजोर होने का एक विकलांगता सर्टिफिकेट बनाया और विकलांग कोटे से नौकरी हासिल कर ली।

विश्वजीत सिंह प्रशांत के सगे चचेरे भाई हैं।

विश्वजीत सिंह ने ही पांच साल पहले अपने भाई के खिलाफ शिकायत की थी। लेकिन इसे योगी राज का ठाकुरवाद कहें या फिर सिस्टम की कमजोरी, जांच को शुरू होने के बाद ही दबा दिया गया। सीएमओ की ओर से मेडिकल जांच के लिए दो बार नोटिस देने के बाद भी प्रशांत जांच के लिए हाजिर नहीं हुए। बताया जाता है कि एक ओर शंकराचार्य विवाद और दूसरी ओर यूजीसी मामले के उठने से सवर्णों की नाराजगी को देखते हुए प्रशांत सिंह ने उंगली काटकर खुद को शहीद करने की ठान ली और पद से इस्तीफा दे दिया। उन्हें अच्छी तरह यह मालूम था कि उनकी नौकरी के कुछ ही दिन बचे हैं, लेकिन इसी बीच सत्ता की करीबी पाने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी कुर्बान कर दी।

भाजपा से टिकट मांगा था

प्रशांत कुमार सिंह ने 2022 में सरकारी नौकरी में रहते हुए ही भाजपा से टिकट की दावेदारी की थी। उन्होंने मऊ जिले से ही भाजपा के लिए विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। उन्होंने टिकट की उम्मीद में अपने प्रचार के लिए पोस्टर और बैनर तक छपवा लिए थे। लेकिन जब टिकट नहीं मिला तो उन्होंने नौकरी नहीं छोड़ी और फिर प्रमोशन लेकर जीएसटी में डिप्टी कमिश्नर बन गए। 48 वर्षीय प्रशांत कुमार सिंह मूलतः मऊ जिले के सरवा गांव के निवासी हैं। उन्हें पहली तैनाती सहारनपुर में मिली थी और 21 अक्टूबर 2023 को उनकी पोस्टिंग अयोध्या में हुई।

अलंकार अग्निहोत्री की समर्थकों से अपील

इस बीच, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थन और यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ अपने पद से इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने मंगलवार को अपने व्हाट्सएप ग्रुप पर समर्थकों से अपील की कि वे उन्हें नजरबंदी से रिहा करवाने के लिए कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका दायर करें। अलंकार का व्हाट्सएप पर बरेली परिवार के नाम से एक ग्रुप है। अलंकार का आरोप है कि एडीएम कंपाउंड में ही उन्हें नजरबंद रखा गया है। न तो उनसे कोई मिल सकता है और न ही वे खुद बाहर जा सकते हैं। उनके पास बाहर की दुनिया से संपर्क साधने के लिए केवल एक मोबाइल फोन ही है। आपको बता दें कि अलंकार अग्निहोत्री को योगी सरकार ने निलंबित कर दिया है। उनका इस्तीफा सरकार ने अभी मंजूर नहीं किया है। वे फिलहाल एडीएम कार्यालय से अटैच हैं।

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