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डीजीपी राजीव कृष्ण ने दिवंगत पुलिस अधिकारियों को श्रद्धासुमन किये अर्पित, पुलिस प्रमुख गुड पुलिसिंग के लिये रहते है सदैव समर्पित

 

● कर्तव्य, निष्ठा और सम्मान की विरासत पुलिस मुख्यालय में तीन महान अधिकारियों को

● सेवा, समर्पण और सौम्यता के प्रतीक रहे सियाल, हरभजन और ज्ञान सिंह

● डीजीपी राजीव कृष्ण और वरिष्ठ अधिकारियों ने दी श्रद्धांजलि, गूंजा ‘अमर रहें हमारे प्रहरी’

● आईपीएस से लेकर पीपीएस तक तीन पीढ़ियों की सेवा यात्रा में समर्पण की मिसाल

● कर्तव्यपथ पर बिताए गए दशकों की याद में संवेदना और गर्व का संगम

● ‘सेवा ही सर्वोपरि’ नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बने उनके जीवन मूल्य

 

शुभम श्रीवास्तव

 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय का सभागार गुरुवार को एक भावनात्मक क्षण का साक्षी बना, जब पुलिस सेवा के तीन दिग्गज अधिकारियों सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक स्व.बिक्रम जीत सिंह सियाल, पुलिस महानिरीक्षक स्व.हरभजन सिंह और पुलिस उप महानिरीक्षक स्व.ज्ञान सिंह की स्मृति में शोक सभा की गई। इस मौके पर प्रदेश पुलिस प्रमुख डीजीपी राजीव कृष्ण सहित मुख्यालय के तमाम वरिष्ठ अधिकारियों ने दिवंगत आत्माओं को श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके असाधारण योगदान को याद किया। यह केवल एक शोक सभा नहीं थी, बल्कि यह उस पुलिस परंपरा का सम्मान था, जिसने दशकों तक जनसुरक्षा, अनुशासन और नैतिकता की मिसाल कायम की। सभा के दौरान वातावरण में गूंजती मौन श्रद्धा ने सबको यह याद दिलाया कि वर्दी केवल शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि सेवा और त्याग की अमर परंपरा है।

कर्तव्य की कसौटी पर खरे उतरने वाले अधिकारी

स्व.बिक्रम जीत सिंह सियाल का नाम उत्तर प्रदेश पुलिस इतिहास में एक गौरवशाली अध्याय के रूप में दर्ज है।
वर्ष 1959 में भारतीय पुलिस सेवा में चयनित होकर उन्होंने 34 वर्षों से अधिक का सेवाकाल पूरी निष्ठा और दृढ़ता से निभाया। सियाल साहब ने अपने कार्यकाल में न केवल अपराध नियंत्रण और प्रशासनिक दक्षता की नई परिभाषाएं गढ़ीं, बल्कि मानवाधिकार और संवेदनशील पुलिसिंग के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किए। उनकी कार्यशैली का एक मूल सिद्धांत था कि पुलिस केवल कानून की नहीं, समाज की भी रक्षक है। सेवानिवृत्ति के वर्षों बाद भी उनके साथी अधिकारी और अधीनस्थ कर्मचारी उन्हें ‘आदर्श अधिकारी’ के रूप में याद करते हैं।

हरभजन सिंह सेवा, समर्पण और सजगता के पर्याय

वर्ष 1976 में आईपीएस में चयनित स्व.हरभजन सिंह ने 28 वर्षों से अधिक तक पुलिस सेवा में रहते हुए निष्ठा, ईमानदारी और अनुशासन का जो उदाहरण प्रस्तुत किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरक है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई संवेदनशील जिलों में तैनाती के दौरान यह सिद्ध किया कि कठोरता और करुणा, दोनों मिलकर ही न्यायपूर्ण पुलिसिंग की आधारशिला है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें याद करते हुए कहा कि हरभजन सिंह जी जैसे अधिकारी दुर्लभ होते हैं। वे न तो मीडिया की सुर्खियों के पीछे भागते थे, न सत्ता की कृपा के पीछे। वे केवल कर्तव्य को जानते थे और वही निभाते थे। डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि उन्होंने पुलिस सेवा को जनसेवा के समान माना। उनके जैसे अधिकारी वर्दी को नैतिक आभा प्रदान करते हैं।

ज्ञान सिंह वर्दी में विनम्रता की मिसाल

स्व.ज्ञान सिंह, जो वर्ष 1980 में प्रांतीय पुलिस सेवा में चयनित हुए। उन्होंने अपनी सादगी, संवेदनशीलता और दक्षता से पुलिस विभाग को गौरवान्वित किया। वे उन अधिकारियों में रहे जिन्होंने सीमित संसाधनों में भी उत्कृष्ट परिणाम दिए। चाहे अपराध जांच हो या सामाजिक सामंजस्य बनाए रखने की जिम्मेदारी। ज्ञान सिंह ने हर मोर्चे पर पुलिस की छवि को ऊंचा किया। उनके सहकर्मी का कहना है कि वे सख्त अनुशासनप्रिय होने के बावजूद बेहद मानवीय अधिकारी थे। किसी जवान की पारिवारिक परेशानी हो या थाने के स्तर पर उत्पन्न समस्या वे हर व्यक्ति को अपना समझते थे। उनका यह वाक्य आज भी कई पुलिसकर्मियों के जेहन में गूंजता है कि वर्दी का गर्व तब तक अर्थपूर्ण है, जब तक वह जनता की सुरक्षा में निहित हो।

मौन श्रद्धांजलि भावनाओं का प्रवाह

शोक सभा में डीजीपी राजीव कृष्ण ने तीनों दिवंगत अधिकारियों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित की, तो सभागार में उपस्थित हर अधिकारी ने मौन धारण किया। मौन की उस गहराई में संवेदना का सागर लहराया
कोई अपने गुरु को याद कर रहा था, कोई अपने वरिष्ठ की सीख को। डीजीपी ने कहा कि स्व. सियाल, स्व.हरभजन और स्व. ज्ञान सिंह तीनों ने अपने जीवन से यह सिखाया कि पुलिसिंग केवल कानून लागू करने का नहीं, समाज को भरोसे में लेने का काम है। आज की नई पीढ़ी के लिए उनका जीवनचरित्र मार्गदर्शन का स्रोत है।सभा में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशासन), पुलिस महानिरीक्षक (मुख्यालय), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, प्रशासनिक अधिकारी, तकनीकी शाखाओं के प्रमुख, और मुख्यालय के सैकड़ों कर्मियों ने भाग लिया।

कर्तव्य और चरित्र की विरासत

तीनों अधिकारियों के व्यक्तित्व में एक समान सूत्र था कर्तव्य के प्रति समर्पण और सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी। जहां सियाल साहब ने अनुशासन और संगठनात्मक नेतृत्व की मिसाल कायम की, वहीं हरभजन सिंह ने सेवा में सादगी और सजगता को प्रतिष्ठित किया। ज्ञान सिंह ने इन दोनों गुणों को एक मानवीय संवेदना से जोड़ा। इन तीनों की सेवाओं का एक साझा संदेश था कि पुलिस की ताकत जनता के विश्वास से आती है, डर से नहीं। यह संदेश आज के समय में और भी प्रासंगिक प्रतीत होता है, जब पुलिसिंग की नई चुनौतियां केवल अपराध नियंत्रण नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद और विश्वास निर्माण से जुड़ी हैं।

परंपरा को जीवित रखना ही सच्ची श्रद्धांजलि

डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि हम अपने पूर्व वरिष्ठों की सेवाओं का ऋण केवल शब्दों से नहीं, कर्म से चुका सकते हैं। उनके आदर्शों को अपनाना, उनकी ईमानदारी को व्यवहार में उतारना यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यालय में शीघ्र ही एक स्मृति दीवार स्थापित की जाएगी, जिसमें ऐसे सभी अधिकारियों के नाम अंकित होंगे जिन्होंने अपने जीवन से पुलिस सेवा को गरिमा दी। सभा के अंत में सभी ने तीनों अधिकारियों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। सभागार में जब राष्ट्रीय ध्वज की ओर सभी ने सिर झुकाया, तो यह केवल एक औपचारिकता नहीं थी यह उन मूल्यों को प्रणाम था, जिन पर उत्तर प्रदेश पुलिस की नींव रखी गई थी।

* तीन दिवंगत अधिकारियों की स्मृति में पुलिस मुख्यालय में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।
* डीजीपी राजीव कृष्ण सहित तमाम वरिष्ठ अधिकारियों ने मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।
* स्व. बिक्रम जीत सिंह सियाल 1959 बैच के आईपीएस, जिन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस को पेशेवर नई ऊंचाई दी।
* स्व.हरभजन सिंह 1976 बैच के अधिकारी, जिनकी पहचान अनुशासन, मानवीयता और निष्ठा से बनी।
* स्व. ज्ञान सिंह 1980 में पीपीएस के रूप में चयनित, जिन्होंने जमीनी स्तर पर कानून-व्यवस्था को नई दिशा दी।
* साथियों ने साझा की स्मृतियां, पुलिस सेवा में उनके योगदानों को रेखांकित किया गया।
* डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि ‘पुलिस सेवा केवल वर्दी नहीं, यह जनता के प्रति एक आजीवन व्रत है।’
* तीनों अधिकारी उत्तर प्रदेश पुलिस की उस परंपरा का हिस्सा रहे, जिसने ईमानदारी को पहचान बनाया।
* सेवा, निष्ठा और सत्य का यह दीपक हमेशा जलता रहेगा।

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