वाराणसी

पूर्ण बोरा तालाबों पुनरुत्थान को लेकर गम्भीर, बदल देंगे विभिन्न जलाशयों की तस्वीर

●  पूर्ण बोरा तालाबों पुनरुत्थान को लेकर गम्भीर, बदल देंगे विभिन्न जलाशयों की तस्वीर

●  तालाबों की प्राकृतिक सांस लौटेंगी : वीडीए के उपाध्यक्ष ने शुरू किया पारिस्थितिक पुनरुत्थान अभियान

●  कर्दमेश्वर, कंदवा और कंचनपुर तालाबों का विस्तृत निरीक्षण, पुनरुद्धार योजना को मिली गति

●  नेचर-बेस्ड सॉल्यूशन पर जोर तालाबों को उनके मूल स्वरूप में लौटाने की तैयारी

●  डिसिल्टिंग, डी-वीडिंग, सिल्ट ट्रैप और प्राकृतिक फ़िल्टर बेड होंगे मुख्य आधार

●  भू-जल रिचार्ज, जलधारा संरक्षण और जैव विविधता के लिए वैज्ञानिक सर्वेक्षण अनिवार्य

●  नागरिकों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और सुंदर पब्लिक स्पेस के रूप में विकसित होंगे जलाशय

●  वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा का निर्देश गुणवत्ता, पारदर्शिता और समय-सीमा से कतई समझौता नहीं

 

अमित मौर्य

 

वाराणसी। जलाशयों में नई ऊर्जा, नई उम्मीद और नई जान फूंकने की दिशा में वाराणसी विकास प्राधिकरण ने एक बड़ा कदम उठाया है। तालाबों के पारिस्थितिक पुनरुत्थान एवं सौंदर्यीकरण परियोजना के अंतर्गत सोमवार 19 नवम्बर को वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने कर्दमेश्वर महादेव मंदिर अपस्ट्रीम तालाब, कंदवा तालाब और कंचनपुर तालाब का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया। यह निरीक्षण केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि शहर के जल संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और शहरी सौंदर्यीकरण को नई दिशा देने वाला ठोस कदम माना जा रहा है। वाराणसी का जल जो काशी की अस्मिता, संस्कृति और जीवन रेखा का आधार रहा है। पिछले कई दशकों से शहरी विस्तार, अनियंत्रित प्रदूषण और लापरवाही के कारण गंभीर संकटों से जूझ रहा था। तालाब सिकुड़ते गए, जलधाराएं टूटती गईं और भूगर्भीय जल का स्तर लगातार नीचे खिसकता गया। ऐसे दौर में वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा तालाबों के पारिस्थितिक पुनर्जीवन की दिशा में कदम उठाना केवल विकास कार्य नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार सार्वजनिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। इसी क्रम में वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने सोमवार को कर्दमेश्वर अपस्ट्रीम तालाब, कंदवा तालाब और कंचनपुर तालाब का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने न सिर्फ स्थल की भौतिक संरचना का मूल्यांकन किया, बल्कि प्रस्तावित कार्यों की तकनीकी क्षमताओं और पर्यावरणीय आवश्यकताओं का भी गहन विश्लेषण किया।

कर्दमेश्वर अपस्ट्रीम तालाब 3000 से 3500 वर्गमीटर का जलाशय काशी की सांस्कृतिक धरोहर

कर्दमेश्वर महादेव मंदिर के अपस्ट्रीम स्थित तालाब का एक बड़ा सांस्कृतिक महत्व है। यह केवल जल संचयन का स्रोत नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों के पर्यावरणीय संतुलन का भी प्रमुख आधार है। उपाध्यक्ष ने यहाँ निर्देश दिया कि नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस को प्राथमिकता देते हुए पूरे तालाब को उसके प्राकृतिक स्वरूप में पुनर्जीवित किया जाए। डिसिल्टिंग, डी-वीडिंग और तलछट की सफाई को समयबद्ध रूप से पूरा कर जलधारण क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया। साथ ही, प्राकृतिक जलधारा कनेक्टिविटी को मजबूत करने का भी स्पष्ट निर्देश दिया गया, ताकि वर्षाजल सीधे तालाब तक पहुंचे और भू-जल रिचार्ज हो सके।

कंदवा तालाब 2500 से 3000 वर्गमीटर का भू-जल

कंदवा तालाब शहर के तेजी से विकसित होते क्षेत्र में स्थित है। रोजाना बढ़ते कंक्रीट के फैलाव के बीच यह तालाब भू-जल रिचार्ज का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। यदि इसके रख-रखाव में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जाए। निरीक्षण के दौरान उपाध्यक्ष ने कैचमेंट एरिया की स्थिति देखी और अधिकारियों को निर्देश दिया कि अनियमित जल प्रवाह, कचरा फेंकने और बाहरी प्रदूषण को रोकने के लिए उच्च स्तरीय संरचनात्मक सुधार सुनिश्चित किए जाएं। प्राकृतिक फिल्टर बेड, फ्लोटिंग वेटलैंड्स और इन-सीटू वाटर ट्रीटमेंट तकनीकों के जरिए जल गुणवत्ता सुधारने की योजना को भी स्वीकृति दी गई।

कंचनपुर तालाब 2000 से 2500 वर्गमीटर का छोटा लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण जल स्रोत

कंचनपुर तालाब क्षेत्रफल में भले ही छोटा है, लेकिन इसका पारिस्थितिक योगदान किसी बड़े जलाशय से कम नहीं। यह तालाब आसपास की बस्तियों के लिए जल-संतुलन का आधार है। उपाध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि छोटे तालाबों को भी बड़े जलस्रोतों की तरह वैज्ञानिक रूप से पुनर्जीवित करना आवश्यक है, क्योंकि कई बार यही छोटे जल निकाय बड़े जल-तंत्र का आधार बनते हैं।

नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस प्रोजेक्ट की रीढ़

परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें विकास से अधिक प्राकृतिक पुनरोद्धार पर बल दिया गया है। प्राकृतिक वनस्पतियां, स्थानीय प्रजातियों के पौधे, जैव विविधता को बढ़ावा देने वाली तकनीकें और जलधाराओं का संरक्षण ये सभी उपाय तालाबों को कृत्रिम पार्क में बदलने की बजाय प्राकृतिक पारिस्थितिक क्षेत्र के रूप में स्थापित करेंगे।

प्रोजेक्ट की विशेषताएं

1. डिसिल्टिंग, डी-वीडिंग और नियमित तलछट सफाई
2. सिल्ट ट्रैप निर्माण, ताकि नालों का कचरा सीधे तालाब में न गिरे
3. प्राकृतिक फ़िल्टर बेड, जो जल को बिना रसायन के साफ करेंगे
4. फ्लोटिंग वेटलैंड्स, जो जल गुणवत्ता सुधार में प्रभावी माने जाते हैं
5. इन-सीटू जल उपचार तकनीक, जिससे पानी वहीं पर शुद्ध होगा
6. भू-जल रिचार्ज को मजबूत करने वाले चैनल
7. सॉफ्ट स्केप, हार्ड स्केप, पैदल पथ, लाइटिंग और नागरिक सुविधाएं
8. यह मॉडल आधुनिक शहरों में जल संरक्षण का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन सकता है।

पर्यावरणीय संतुलन से जन-सुविधा तक दोहरा लाभ

प्राधिकरण की यह योजना केवल तालाबों की खुदाई और सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक लक्ष्य काशी के उन सार्वजनिक स्थलों को संवारना है, जहां नागरिक स्वच्छ, सुरक्षित और शांत वातावरण में समय बिता सकें। वीडीए उपाध्यक्ष ने कहा कि परियोजना पूर्ण होने के बाद ये तालाब स्थानीय निवासियों के लिए आकर्षक पब्लिक स्पेस बनेंगे। जहां लोग सुबह-शाम टहल सकें, बैठ सकें और प्रकृति के साथ समय बिता सकें।

वीडीए की स्पष्ट नीति समय-सीमा और पारदर्शिता

अक्सर देखा जाता है कि सरकारी परियोजनाएं तकनीकी मानकों और समय सीमा में पिछड़ जाती हैं। लेकिन इस परियोजना को लेकर उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने साफ निर्देश दिए हैं कि गुणवत्ता और समय-सीमा पर कोई समझौता नहीं होगा। सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि कार्य की नियमित मॉनिटरिंग की जाए सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी तरीके से की जाएं। किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कार्रवाई तय होगी।

जन-विश्वास से जुड़ने वाला विकास मॉडल

जल संरक्षण से जुड़ी परियोजनाएं तभी सफल होती हैं, जब वे नागरिकों के व्यवहार और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं। तालाबों का पुनरुत्थान न केवल प्राकृतिक संसाधनों को बचाएगा, बल्कि यह भी संदेश देगा कि विकास का मतलब सिर्फ कंक्रीट बिछाना नहीं, बल्कि प्रकृति और शहरी जीवन के बीच संतुलन बनाना है। यह कहना गलत नहीं होगा कि वाराणसी की आत्मा तभी सुरक्षित रहेगी, जब उसके जलस्रोत सुरक्षित रहेंगे।
यह परियोजना उसी दिशा में एक ठोस, सकारात्मक और दूरगामी कदम है।

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