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माफ़िया ब्रजेश सिंह के बेहद करीबी अजय खलनायक व राजेश यादव सपा नेता सन्दीप के व्यापारिक साझेदार, बेहद घिनौना है इन दोनों का किरदार

जहर, जलन और जाल: क्या गुरुग्राम कड़ी में छिपा है साजिश का सूत्र?

                                                                               *थैलियम कांड – भाग 5*

वाराणसी। संदीप सिंह स्वर्णकार के थैलियम कांड में अब जांच की सुई एक नई दिशा की ओर घूमती दिखाई दे रही है। पहले पार्ट में जहां FIR और मेडिकल खुलासे सामने आए, वहीं पार्ट 4 में संदीप ने स्वयं अपनी आपबीती सुनाते हुए पांच नामों का उल्लेख किया था। अब इस पूरी कड़ी में दो नाम विशेष रूप से चर्चा में हैं-राजेश यादव और अजय सिंह उर्फ खलनायक।

 

*गुरुग्राम की कड़ी: कौन था मौजूद?*

जैसा कि पहले भागों में उल्लेखित है, जब शिव प्रसाद यादव उर्फ शिव सरदार गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती थे, उस दौरान संदीप सिंह भी वहीं मौजूद थे। Zero FIR में दर्ज विवरण के अनुसार पांच लोग इस दौरान साथ थे-राजेश यादव, प्रवीण यादव, किशन दीक्षित, अंकित रस्तोगी और पुरु यादव।
सूत्रों के मुताबिक राजेश यादव उस समूह का प्रमुख चेहरा माना जाता है। यह भी चर्चा है कि वे पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह का बेहद करीबी हैं।

*संदीप और शिव सरदार की नजदीकी-क्या बनी वजह?*

हमारे सूत्रों का दावा है कि शिव सरदार संदीप पर भरोसा करते थे और कई व्यापारिक व निजी विषयों पर उनसे चर्चा करते थे। कुछ लोगों के बीच यह भी चर्चा रही कि इस समीकरण से सबसे ज्यादा राजेश यादव और प्रवीण यादव को असहजता पैदा हुई थी। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि संदीप की मौजूदगी के कारण ये लोग अपने प्रभाव या नियंत्रण को सीमित महसूस करते थे। जिसके कारण ये लोग संदीप से बेहद नफ़रत करते थें।

*आर्थिक मोर्चा: क्या लेन-देन बना विवाद का कारण?*

पार्ट 4 में संदीप ने दावा किया था कि अंजलि कंस्ट्रक्शन, जो अजय सिंह उर्फ खलनायक से जुड़ी बताई जाती है, पर उनका लगभग 1 करोड़ 15 लाख रुपये बकाया था।
अब अजय सिंह खलनायक की माने तो उनका दावा है कि संदीप की बीमारी के दौरान उक्त रकम को अन्य खातों में ट्रांसफर किया जा चूका है। जबकि सूत्र भी बता रहे हैं कि राजेश यादव ने उक्त रकम को लेकर कथित तौर पर हस्तक्षेप किया और भुगतान किसी अन्य खाते में ट्रांसफर हुआ। यदि यह तथ्यात्मक रूप से सिद्ध होता है, तो यह केवल कारोबारी विवाद नहीं बल्कि गंभीर आर्थिक साजिश की ओर संकेत करेगा।

*मानसिक और सामाजिक दबाव के आरोप*

संदीप के बयान में यह भी सामने आया था कि बीमारी के दौरान और उसके बाद कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनके खिलाफ खबरें प्रसारित की गईं। आरोप है कि गलत और भ्रामक जानकारी देकर उनकी सामाजिक साख को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।यह कोशिश भी राजेश यादव एवं प्रवीण यादव के करीबी मित्र एवं एक तथाकथित पत्रकार द्वारा की गयी जिसके खिलाफ संदीप की पत्नी एवं संदीप ने लखनऊ के पुलिस कमिश्नर के यहाँ शिकायत दर्ज कराया है। कुछ सूत्र यह भी दावा करते हैं कि इन खबरों के पीछे संदीप को मानसिक प्रताड़ना देने की सुनियोजित रणनीति है।

*सबसे गंभीर प्रश्न*

क्या संदीप को आर्थिक, सामाजिक और मानसिक रूप से कमजोर करने की सुनियोजित कोशिश हुई?
क्या गुरुग्राम प्रवास के दौरान भोजन और देखरेख से जुड़ी परिस्थितियों की पर्याप्त जांच हुई?
क्या वित्तीय लेनदेन की फोरेंसिक जांच की जा रही है?
अब तक की पुलिस कार्रवाई सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी नहीं दे रही है। संदीप स्वयं मुख्यमंत्री से सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग कर चुके हैं।
थैलियम जैसा दुर्लभ और घातक जहर किसी सामान्य विवाद का परिणाम नहीं माना जाता। यह मामला अब केवल व्यक्तिगत शत्रुता नहीं, बल्कि संभावित संगठित साजिश, आर्थिक हित और प्रभाव की लड़ाई का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
हालांकि अंतिम सत्य केवल निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच से ही सामने आएगा। जब तक जांच पूरी नहीं होती, सभी आरोप जांच के दायरे में माने जाएंगे।

*सवाल अब भी जिंदा है*

क्या संदीप सिंह के साथ जो हुआ, वह केवल संयोग था?
या गुरुग्राम की उस अस्पताल यात्रा में ही साजिश की बुनियाद रखी गई थी?
(जारी…)

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