डीजीपी राजीव कृष्ण साइबर क्राइम पर गम्भीर, डिजिटल अपराधियों पर चलाएंगे कानून के “तीर”
पुलिस मुख्यालय लखनऊ में आयोजित साइबर अपराध के कार्यक्रम में अध्यक्ष रहे पुलिस महानिदेशक
~ साइबर सुरक्षा में उत्तर प्रदेश बनेगा ‘राष्ट्रीय मॉडल’
~ राज्य और केंद्र के बीच समन्वय से साइबर अपराधों पर निर्णायक कदम की तैयारी
लखनऊ। डिजिटल युग में जैसे-जैसे तकनीक का दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे साइबर अपराधों की चुनौतियां भी गंभीर रूप ले रही हैं। ऑनलाइन ठगी से लेकर सोशल मीडिया अपराध, डेटा चोरी, साइबर बुलिंग और बच्चों को निशाना बनाने वाली डिजिटल गतिविधियां इन सभी से निपटने के लिए अब उत्तर प्रदेश पुलिस ने निर्णायक कदम उठाए हैं। पुलिस मुख्यालय लखनऊ में आयोजित एक अहम बैठक में यह तय किया गया कि राज्य और केंद्र के बीच तालमेल को और मजबूत कर एक समग्र रणनीति बनाई जाएगी, ताकि यूपी को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में देश का रोल मॉडल बनाया जा सके।

उच्चस्तरीय बैठक से बनी ठोस कार्ययोजना
बैठक की अध्यक्षता पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने की, जिसमें एडीजी साइबर क्राइम विनोद कुमार सिंह, इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के सीईओ राजेश कुमार और खतरा विश्लेषण इकाई की प्रतिनिधि रूपा एम.शामिल रहीं। बैठक में ऑनलाइन अपराधों के विभिन्न पहलुओं, नए-नए अपराध तरीकों, तकनीकी सहायता, संसाधन साझाकरण और केस ट्रैकिंग सिस्टम पर विस्तृत चर्चा हुई। यह स्पष्ट किया गया कि साइबर अपराध की चुनौती को केवल पुलिस बल नहीं, बल्कि तकनीक, प्रशिक्षण और जनसहयोग के त्रिकोण से ही मात दी जा सकती है।
समर्पित ‘साइबर क्राइम सेंटर’ की स्थापना
उत्तर प्रदेश में अब एक अत्याधुनिक डेडिकेटेड साइबर क्राइम सेंटर स्थापित होगा, जो सभी ऑनलाइन अपराध मामलों के लिए नोडल पॉइंट के रूप में कार्य करेगा।
यह केंद्र त्वरित शिकायत निस्तारण, तकनीकी साक्ष्य एकत्रण, डेटा विश्लेषण और केस मॉनिटरिंग के लिए अत्याधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित कर्मियों से लैस होगा। इससे न केवल मामलों के समाधान की गति तेज होगी, बल्कि केस सॉल्व करने की सफलता दर भी बढ़ेगी।

महिला और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष फोकस
बैठक में यह तय किया गया कि महिला और बच्चों से जुड़े ऑनलाइन अपराधों साइबर बुलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, अश्लील कंटेंट का प्रसार, बाल अश्लीलता और सोशल मीडिया ब्लैकमेलिंग के लिए एक स्पेशलाइज्ड यूनिट बनाई जाएगी। यह इकाई पीड़ितों के लिए सेंसिटिव और सपोर्टिव अप्रोच अपनाएगी, जिससे पीड़ित बिना डर के शिकायत दर्ज करा सकें। इस यूनिट को मनोवैज्ञानिक परामर्श, कानूनी सहायता और डिजिटल फॉरेंसिक की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी।
त्वरित शिकायत निस्तारण के लिए सरल व्यवस्था
साइबर अपराध की एक बड़ी चुनौती यह होती है कि शिकायत दर्ज होने और कार्रवाई शुरू होने में देरी हो जाती है। इसे दूर करने के लिए वन-स्टॉप साइबर हेल्पडेस्क तैयार किया जाएगा। पीड़ित सीधे टोल-फ्री नंबर, ऑनलाइन पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकेगा। सिस्टम ऑटोमैटिक रूप से शिकायत को नजदीकी साइबर सेल को फॉरवर्ड करेगा। हर शिकायत पर ट्रैकिंग आईडी दी जाएगी, ताकि पीड़ित ऑनलाइन अपनी शिकायत की प्रगति देख सके।
साइबर ठगी के ‘हॉटस्पॉट’ पर लक्षित कार्रवाई
बैठक में यूपी पुलिस ने ऐसे भौगोलिक क्षेत्रों की पहचान करने पर जोर दिया जहां से सबसे ज्यादा साइबर ठगी के मामले सामने आते हैं।
इन हॉटस्पॉट्स पर स्थानीय पुलिस और साइबर क्राइम यूनिट संयुक्त ऑपरेशन चलाएगी, संदिग्ध बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की मॉनिटरिंग होगी और अंतरराज्यीय गैंग्स पर शिकंजा कसने के लिए पड़ोसी राज्यों के साथ विशेष समन्वय बनाया जाएगा।
पुलिस बल का तकनीकी सशक्तिकरण
डीजीपी राजीव कृष्ण ने साफ कहा कि साइबर अपराध से निपटने के लिए पुलिस को उतनी ही तेज़ और स्मार्ट तकनीक से लैस होना होगा जितने स्मार्ट अपराधी होते हैं। इसके लिए हर जिले में साइबर क्राइम सेल को डिजिटल फॉरेंसिक टूल्स, डार्क वेब मॉनिटरिंग सिस्टम, सोशल मीडिया ट्रैकिंग साफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एनालिटिक्स टूल्स से लैस किया जाएगा।
जन-जागरूकता पर बड़ा अभियान
साइबर अपराध रोकथाम का एक महत्वपूर्ण पहलू जन-जागरूकता है। बैठक में यह तय किया गया कि पूरे प्रदेश में सुरक्षित यूपी-साइबर सुरक्षित नागरिक नाम से अभियान चलेगा। इसके तहत स्कूल, कॉलेज, पंचायत और मोहल्ला स्तर पर वर्कशॉप, सोशल मीडिया पर शॉर्ट वीडियो और पोस्टर, प्रिंट, डिजिटल मीडिया में नियमित जागरूकता संदेश जारी होंगे। संदेश का मुख्य फोकस होगा अनजान लिंक पर क्लिक न करें, संदिग्ध कॉल पर बैंक डिटेल न दें और पासवर्ड सुरक्षित रखें।
यूपी को राष्ट्रीय मॉडल बनाने का संकल्प
उत्तर प्रदेश पुलिस केंद्र सरकार के साथ मिलकर साइबर सुरक्षा का राष्ट्रीय मॉडल तैयार करेगी। डीजीपी ने कहा हमारा लक्ष्य सिर्फ अपराध घटाना नहीं, बल्कि एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनाना है, जहां हर नागरिक आत्मविश्वास के साथ तकनीक का उपयोग कर सके। इसके लिए न सिर्फ पुलिस बल, बल्कि समाज, निजी क्षेत्र और केंद्र-राज्य एजेंसियों का सामूहिक प्रयास जरूरी होगा।
उत्तर प्रदेश देशभर के लिए एक प्रेरक मॉडल बनेगा
पुलिस की यह पहल केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक को मात देने की दिशा में उठाया गया ठोस और दूरदर्शी कदम है। तकनीकी संसाधन, प्रशिक्षित पुलिस बल, त्वरित शिकायत निस्तारण और व्यापक जन-जागरूकता इन सभी के संगम से यूपी न केवल अपने नागरिकों को साइबर अपराध से बचा सकेगा, बल्कि देशभर के लिए एक प्रेरक मॉडल बनेगा।




