लोलार्क कुंड: श्रद्धालुओं ने लगायी तीन डुबकी

संतान की कामना लेकर देश भर से काशी पहुंचे श्रद्धालु, स्नान के बाद वस्त्र और आभूषण का किया त्याग

वाराणसी। संतान की कामना लेकर आए श्रद्धालुओं ने लोलार्क कुंड में डुबकी लगानी शुरू कर दी। यह सिलसिला शुक्रवार की देर रात चलेगा। स्रान के बाद श्रद्धालुओं ने वस्त्र और आभूषण का त्याग किया। आधी रात को लोलार्केश्वर महादेव की आरती के बाद जैसे ही लोलार्क कुंड का फाटक आम श्रद्धालुओं के लिए खुला तो भीड़ का दबाव तेजी से आगे बढ़ा। दंपती एक दूसरे का हाथ थामे हुए कुंड की ओर बढ़ रहे थे। कुंड की सीढ़ियों से नीचे उतरने के बाद उन्होंने तीन डुबकियां लगाईं। स्नान के 48 घंटे पहले ही श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होना शुरू कर दिया था। गुरुवार की रात से ही लोलार्क कुंड में षष्ठी का स्नान शुरू हो गया। पांच किलोमीटर लंबी बैरिकेडिंग में कतारबद्ध श्रद्धालु गलियों से होते हुए लोलार्क कुंड में पहुंचने लगे। भीड़ का दबाव होने के कारण भदैनी और अस्सी क्षेत्र की गलियों में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने चूल्हा भी लगा लिया था। सुबह से चूल्हे पर भोजन और प्रसाद बनना शुरू हो गया। बाढ़ के कारण घाटों पर जगह नहीं होने पर गली और सर्वजीनक स्थानों को श्रद्धालुओं ने घेर लिया था। जगह-जगह लोग चूल्हा जला रहे थे तो वहीं सड़क किनारे ही आराम भी करते नजर आ रहे थे। मान्यताओं के अनुसार स्रान के बाद एक फल या सब्जी के साथ ही पहने हुए वस्त्र और आभूषण का त्याग किया जाता है। स्नान का यह सिलसिला शुक्रवार की देर रात तक चलता रहेगा। मंदिर के पुजारी रमेश पांडेय ने बताया कि संतान की कामना से श्रद्धालुओं देश भर से लोलार्क कुंड में स्नान के लिए आते हैं। इस बार डेढ़ से दो लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।




