चन्दौली के सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय का हाल: एआरटीओ प्रशासन सर्वेश गौतम का फंडा, हर काम का तय है फिक्स रकम का एजेंडा

~ चंदौली एआरटीओ कार्यालय बना भ्रष्टाचार का गढ़, बिना घूस कोई काम नहीं
~ दलालों का बोलबाला, आम जनता को हर मोर्चे पर अपमान
~ हर सेवा का ‘रेट कार्ड’ तय, नियम-कानून की जगह चल रहा रिश्वत का राज
~ कर्मचारियों और दलालों की साठगांठ से धड़ल्ले से चल रहा भ्रष्टाचार का धंधा
~ विशेष पहचान से काम आसान, दलालों के लिए नियम बेमतलब
~ सीधे आवेदन करने वालों की फाइलें जान बूझकर लटकाई जाती हैं
~ मीडिया में खुलासों के बावजूद अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं
~ जनता का टूटा भरोसा, भ्रष्टाचार के खिलाफ उठ रही आवाज
~ हाई-टेक सीसीटीवी, बायोमेट्रिक प्रवेश और स्वतंत्र जांच की मांग
~ कर्मचारियों और दलालों की सांठगांठ से फलफूल रहा धंधा
राजकुमार सोनकर
चंदौली। जनपद में सहायक सम्भागीय परिवहन कार्यालय इन दिनों भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का अड्डा बन चुका है। इसके सरगना है सर्वेश गौतम जो एआरटीओ प्रशाशन के पद पर तैनात है ड्राइविंग लाइसेंस, परमिट, फिटनेस सर्टिफिकेट और वाहन पंजीकरण जैसे जरूरी कार्यों में आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विभाग के कर्मचारियों और दलालों के बीच मजबूत साठगांठ के चलते बिना घूस दिए कोई भी काम आसानी से नहीं हो पाता।
दलालों का होता है ‘विशेष मार्क’ कर्मचारी पहचानते हैं इशारे से
चंदौली के एआरटीओ प्रशासन सर्वेश गौतम ने परिवहन कार्यालय के हर पटल के विभिन्न कार्यो एक अलग रेटकार्ड तय कर दिया है। दलालों की पहचान किसी छिपी हुई चीज नहीं रही। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि इन दलालों के पास किसी प्रकार का “विशेष मार्क” या संकेत होता है। जैसे एक विशेष फोल्डर, कलर कोड की फाइल, या यहां तक कि पहचान के लिए खास ‘बैज’ का इस्तेमाल किया जाता है। जिससे कर्मचारी उन्हें बिना पूछे पहचान लेते हैं। दलालों को लाइन में लगने की जरूरत नहीं होती, न ही कोई औपचारिकता पूरी करनी पड़ती है। जैसे ही वो दफ्तर में घुसते हैं, सीधे अंदर जाकर सर्वेश गौतम से बात करते हैं और उनके साथ ‘सेटिंग’ में तयशुदा रकम लेकर आते हैं। आम नागरिक जहां 4-5 बार दफ्तर का चक्कर काटता है, वहीं दलाल के जरिए आया व्यक्ति 10 मिनट में कागज लेकर बाहर निकलता है।
हर सेवा का ‘रेट कार्ड’ तय
एआरटीओ सर्वेश गौतम ने प्रत्येक काम के लिए एक ‘रेट कार्ड’ तैयार किया है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए दलालों के जरिए 1100 से 1400 रुपये तक वसूले जाते हैं। कमर्शियल वाहनों के परमिट और फिटनेस के नाम पर मनचाहा रुपये तक की मोटी रकम मांगी जाती है। यहां तक कि गाड़ियों के ट्रांसफर और पंजीकरण जैसे छोटे कार्यों में भी 1000 से 2000 रुपये की ‘सेवा शुल्क’ वसूली की जाती है।
दलालों का कब्जा, जनता लाचार
सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी के दफ्तर के बाहर और भीतर दलालों का एक पूरा नेटवर्क सक्रिय है। सुबह से शाम तक ये दलाल आने वाले लोगों को पकड़कर उन्हें भ्रमित करते हैं और सीधे सर्वेश गौतम तक पहुंचाने का दावा करते हैं। जिन लोगों को सरकारी प्रक्रिया की जानकारी नहीं होती, वे दलालों के झांसे में आकर मजबूरीवश रिश्वत देकर काम करवाते हैं।
सीधे जाने वालों की फाइलें हो जाती है पेंडिंग
एआरटीओ कार्यालय में अगर कोई व्यक्ति दलाल की मदद लिए बिना सीधे काम करवाने की कोशिश करता है, तो उसकी फाइलें हफ्तों या महीनों तक लंबित रखी जाती हैं। कभी फॉर्म में कमी बताई जाती है, तो कभी दस्तावेज अधूरे कहकर लौटा दिया जाता है। एक आम व्यक्ति तब मजबूर होकर दलाल का सहारा लेता है और यही भ्रष्ट तंत्र की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है।
कर्मचारियों और दलालों की सांठगांठ
यह बात किसी से छिपी नहीं कि सर्वेश गौतम के कार्यालय के कर्मचारी और दलालों की आपस में अच्छी समझ और हिस्सेदारी बनी हुई है। दलाल कार्यालय में घुसते ही सीधे कर्मचारियों से बात करते हैं, चाय पर बैठकों में फाइलें पास करने की बातें होती हैं और रिश्वत का हिस्सा किसे कितना मिलेगा, ये भी पहले से तय रहता है। लोगों का आरोप है कि कई बार मीडिया में खबरें चलने के बावजूद न तो किसी अधिकारी पर कोई कार्रवाई होती है और न ही दलालों की पकड़ कमजोर पड़ती है। इससे यह जाहिर होता है कि विभागीय अधिकारियों की मौन सहमति से ही यह भ्रष्टाचार फल-फूल रहा है।
जनता का भरोसा टूटा
चंदौली के निवासियों में सर्वेश गौतम को लेकर गहरी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि जब हर काम के लिए पैसे देने पड़ेंगे, तो सरकार द्वारा तय प्रक्रिया का क्या मतलब रह जाता है? आम आदमी के अधिकारों का खुलेआम हनन किया जा रहा है, लेकिन सुनवाई कहीं नहीं होती।
जनता की मांग आरटीओ कार्यालय में
सुधार के लिए ठोस कदम जरूरी
चंदौली के एआरटीओ कार्यालय में चल रहे संगठित भ्रष्टाचार को देखते हुए आम नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि आरटीओ कार्यालय में सीसीटीवी निगरानी की विशेष व्यवस्था लागू हो, परिसर के भीतर और बाहर हाई-क्वालिटी सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं ताकि हर गतिविधि रिकॉर्ड हो सके। इससे कर्मचारियों और दलालों की मिलीभगत पर लगाम लगेगी तथा जवाबदेही तय की जा सकेगी। दलालों को दफ्तर परिसर में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए। प्रवेश के लिए बायोमेट्रिक या पहचान पत्र आधारित प्रणाली लागू की जाए ताकि केवल वास्तविक आवेदकों को ही प्रवेश मिले। एक जन सुविधा केंद्र या हेल्प डेस्क की स्थापना की जाए जहां बिना किसी बिचौलिए के नागरिकों को मार्गदर्शन और सहायता मिले। साथ ही ऑनलाइन आवेदन प्रणाली का प्रचार-प्रसार हो ताकि अधिक से अधिक लोग डिजिटल माध्यम से प्रक्रिया पूरी कर सकें। स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच समिति गठित कर एआरटीओ सर्वेश गौतम समेत कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों के आचरण, संपत्ति और शिकायतों की जांच की जाए। दोषी पाए जाने पर तत्काल निलंबन और कानूनी कार्यवाही हो।




