वाराणसी

परिवहन मंत्री दयाशंकर का बयान, हिजाब वाली महिलाएं भी सत्ता के शीर्ष पदों पर हो सकती है विराजमान

महिला सम्मान और लोकतांत्रिक शुचिता का संदेश कंबल वितरण मंच से परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह उवाच

● परिवहन मंत्री दयाशंकर का बयान, हिजाब वाली महिलाएं भी सत्ता के शीर्ष पदों पर हो सकती है विराजमान

● महिला सम्मान और लोकतांत्रिक शुचिता का संदेश कंबल वितरण मंच से परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह उवाच

● कड़ाके की ठंड में राहत, कलक्ट्रेट में कंबल वितरण का मानवीय संदेश

● महिला को वर्गों में नहीं, अवसरों में बांटिए-परिवहन मंत्री

● हिजाब पर बहस नहीं, योग्यता पर भरोसा मंत्री का साफ संदेश

● राष्ट्रपति का उदाहरण सामान्य परिवार से सर्वोच्च पद तक

● अखिलेश यादव पर हमला जनता को भ्रमित करने की राजनीति

● मतदाता सूची विवाद चार नाम नहीं, एक ही जगह एक नाम

● लोकतंत्र की मजबूती के लिए पारदर्शिता जरूरी

 

कंचन सिंह

बलिया। विगत सप्ताह कलक्ट्रेट परिसर में आयोजित कंबल वितरण कार्यक्रम केवल ठंड से राहत का आयोजन नहीं था, बल्कि वह एक ऐसा मंच बन गया जहां सामाजिक न्याय, महिला सम्मान और लोकतांत्रिक पारदर्शिता जैसे अहम मुद्दों पर खुलकर बात हुई। उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने इस अवसर पर जिस स्पष्टता और दृढ़ता के साथ अपने विचार रखे, उसने राजनीतिक बयानबाज़ी से आगे जाकर सामाजिक विमर्श को छूने का प्रयास किया। ठिठुरती ठंड के बीच जब जरूरतमंदों को कंबल सौंपे जा रहे थे, तब मंत्री ने कहा कि समाज का असली विकास तब होता है जब अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक राहत पहुंचती है। लेकिन इस मानवीय पहल के बीच पूछे गए एक सवाल ने कार्यक्रम को राजनीतिक और वैचारिक बहस के केंद्र में ला खड़ा किया। सवाल था महिला सम्मान, हिजाब और अवसरों को लेकर। जवाब में दयाशंकर सिंह ने दो टूक कहा कि महिला का सम्मान हर जगह और हर परिस्थिति में होना चाहिए। महिला को किसी वर्ग विशेष में बांटने की सोच समाज को पीछे ले जाती है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं को पहचान, पहनावे या किसी धार्मिक-सांस्कृतिक खांचे में नहीं, बल्कि उनकी योग्यता और क्षमता के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उनका यह कथन है कि यदि किसी हिजाब वाली महिला में योग्यता होगी तो वह भी भारत की प्रथम महिला होने का गौरव प्राप्त कर सकती है। आज के समय में उस बहस को नया आयाम देता है, जहां महिला सशक्तिकरण को अक्सर प्रतीकों और विवादों में उलझा दिया जाता है। परिवहन मंत्री ने देश की राष्ट्रपति का उदाहरण देते हुए कहा कि आज भारत की राष्ट्रपति एक सामान्य परिवार से आती हैं और यह पूरे देश की महिलाओं के लिए प्रेरणा है। यह उदाहरण बताता है कि लोकतंत्र में अवसर खुले हैं, बशर्ते योग्यता और परिश्रम हो। मंत्री का यह बयान उस सोच को चुनौती देता है जो महिलाओं की राह में सामाजिक दीवारें खड़ी करती है। कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से भी मंत्री पीछे नहीं हटे। उन्होंने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि वे खुद अपने कार्यकर्ताओं से हर जगह वही काम करवा रहे हैं, लेकिन जनता को गुमराह कर रहे हैं। मतदाता सूची में नाम कटने और जोड़ने को लेकर उठ रहे सवालों पर दयाशंकर सिंह ने स्पष्ट किया कि जिनके नाम मतदाता सूची में नहीं हैं या कटे हैं, उन्हें प्रकाशित क्यों नहीं किया जाता यह सवाल विपक्ष को खुद से पूछना चाहिए। उन्होंने यह भी साफ किया कि मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता है और किसी व्यक्ति के चार-चार नाम अलग-अलग जगह नहीं रह सकते। जिसका नाम चार जगह होगा, वह अंततः एक ही जगह रहेगा। यह कथन न केवल तकनीकी प्रक्रिया की ओर इशारा करता है, बल्कि उस आशंका को भी खारिज करता है जिसे लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है। देखा जाए तो यह पूरा घटनाक्रम सत्ता के बयान से अधिक, लोकतंत्र के बुनियादी सवालों से जुड़ा है। महिला की गरिमा, अवसर की समानता और मतदाता सूची की शुचिता। यह वही सवाल हैं जिन पर जवाब देना हर सरकार और हर विपक्ष की जिम्मेदारी है।

कंबल वितरण राहत के साथ संदेश

10 जनवरी 2026 को कलक्ट्रेट परिसर में आयोजित कंबल वितरण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोग पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने स्वयं कंबल वितरित किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार का दायित्व केवल नीतियां बनाना नहीं, बल्कि जमीन पर उसका असर दिखाना भी है। ठंड से बचाव के लिए कंबल वितरण जैसे कार्यक्रम सामाजिक संवेदनशीलता का प्रतीक हैं।

महिला सम्मान पर स्पष्ट रुख

कार्यक्रम के दौरान पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि महिला का सम्मान किसी एक स्थान या परिस्थिति तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, महिला को किसी वर्ग विशेष में बांटना गलत है। हमें उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने की जरूरत है। यह बयान उस सामाजिक सोच पर प्रहार करता है, जहां महिला की पहचान को सीमित कर दिया जाता है।

हिजाब और योग्यता की बहस

हिजाब को लेकर देश में चल रही बहस के बीच मंत्री का बयान संतुलन और समावेशिता की बात करता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी हिजाब वाली महिला में योग्यता है, तो वह देश के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकती है। यह कथन स्पष्ट करता है कि पहनावा या पहचान नहीं, बल्कि योग्यता निर्णायक होनी चाहिए।

राष्ट्रपति का उदाहरण: प्रेरणा का प्रतीक

मंत्री ने देश की राष्ट्रपति का उदाहरण देते हुए कहा कि वे सामान्य परिवार से आती हैं और यह साबित करती हैं कि लोकतंत्र में हर किसी के लिए रास्ते खुले हैं। यह उदाहरण महिला सशक्तिकरण के नारों को वास्तविकता से जोड़ता है।

अखिलेश यादव पर राजनीतिक हमला

दयाशंकर सिंह ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव खुद अपने कार्यकर्ताओं से हर जगह वही काम करवा रहे हैं, लेकिन जनता को गुमराह कर रहे हैं कि यह धोखा है। मंत्री के अनुसार, यह दोहरी राजनीति है। एक तरफ कार्यकर्ताओं को निर्देश, दूसरी तरफ जनता के सामने भ्रम।

मतदाता सूची विवाद पर सफाई

मंत्री ने कहा कि जिन लोगों का नाम मतदाता सूची में नहीं है या कट गया है, उन्हें सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची की प्रक्रिया में पारदर्शिता है और डुप्लीकेसी की कोई गुंजाइश नहीं है।

चार नाम नहीं, एक नाम

परिवहन मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि यदि किसी व्यक्ति के चार नाम अलग-अलग जगह दर्ज हैं, तो अंततः सत्यापन के बाद उसका नाम केवल एक ही स्थान पर रहेगा। यह बयान उस आशंका को खारिज करता है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जा रही है।

लोकतंत्र और पारदर्शिता

मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए पारदर्शिता जरूरी है। जनता को भ्रमित करने के बजाय तथ्यों के साथ सामने आना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि यदि कोई आपत्ति है तो उसे संवैधानिक और कानूनी दायरे में उठाया जाए।

* कंबल वितरण कार्यक्रम सामाजिक संवेदनशीलता का प्रतीक
* महिला सम्मान को वर्गों में बांटने का विरोध
* हिजाब पर नहीं, योग्यता पर जोर
* राष्ट्रपति का उदाहरण देकर महिला सशक्तिकरण की बात
* अखिलेश यादव पर जनता को गुमराह करने का आरोप
* मतदाता सूची में पारदर्शिता का दावा
* चार नाम नहीं, एक नाम की स्पष्ट नीति
* लोकतंत्र में सवाल-जवाब और जवाबदेही जरूरी

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