योगी ने चालक-परिचालक का मानदेय बढ़ाया,दयाशंकर सिंह ने सीएम को सराहा
सीएम जनता सेवा योजना को नई रफ्तार चालक-परिचालकों का मानदेय बढ़ा, ग्रामीण रूटों पर किराया 20 फीसदी घटा

सीएम जनता सेवा योजना के तहत चालक-परिचालकों के मानदेय में 14 पैसे प्रति किमी की बढ़ोतरी
2.18 की जगह 2.32 रुपये प्रति किमी भुगतान, हजारों कर्मियों को सीधा लाभ
ग्रामीण रूटों पर बस किराया 20 फीसदी कम, यात्रियों को बड़ी राहत
प्रदेश भर में योजना के तहत 299 बसों का संचालन
दूरदराज गांवों की जिला मुख्यालयों, तहसीलों व कस्बों से बेहतर कनेक्टिविटी
कर्मचारियों के मनोबल और सेवा गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद
छात्रों, कामगारों और ग्रामीण परिवारों के मासिक खर्च में कमी
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक परिवहन को मिलेगा बढ़ावा

लखनऊ/बलिया | उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम और जनहितकारी कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने सीएम जनता सेवा योजना के अंतर्गत संचालित बस सेवाओं को नई ऊर्जा देने का फैसला किया है। इस फैसले के केंद्र में दो बड़े निर्णय हैं। पहला, बस चालक और परिचालकों के मानदेय में बढ़ोतरी और दूसरा, ग्रामीण रूटों पर यात्रियों के लिए बस किराए में 20 प्रतिशत की कटौती। इन दोनों फैसलों को एक साथ देखने पर यह साफ होता है कि सरकार ने परिवहन व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले कर्मचारियों और रोजमर्रा की यात्रा करने वाली आम जनता दोनों के हितों को संतुलित करने का प्रयास किया है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह द्वारा घोषित इस निर्णय के अनुसार, सीएम जनता सेवा योजना के तहत कार्यरत बस चालक और परिचालकों को अब 2.18 रुपये प्रति किलोमीटर की जगह 2.32 रुपये प्रति किलोमीटर मानदेय दिया जाएगा। यानी प्रति किलोमीटर 14 पैसे की सीधी बढ़ोतरी। यह राशि भले ही सुनने में कम लगे, लेकिन नियमित रूप से सैकड़ों किलोमीटर चलने वाले चालक-परिचालकों के लिए यह मासिक आय में एक उल्लेखनीय इजाफा है। खासकर ऐसे समय में जब महंगाई लगातार बढ़ रही है, ईंधन, खाद्य पदार्थ और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रही हैं, यह बढ़ोतरी कर्मचारियों के लिए राहत की सांस जैसी है। वहीं दूसरी ओर, ग्रामीण अंचलों में संचालित बसों के किराए में 20 प्रतिशत की कमी कर सरकार ने लाखों यात्रियों को सीधा लाभ पहुंचाया है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग अक्सर रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक कार्यों के लिए शहरों और कस्बों का रुख करते हैं। बस ही उनका मुख्य साधन होती है। किराया कम होने से न केवल उनकी जेब पर बोझ घटेगा, बल्कि नियमित यात्रा भी आसान होगी। छात्रों के लिए कॉलेज और कोचिंग जाना सस्ता पड़ेगा, मजदूरों और नौकरीपेशा लोगों के लिए रोजाना आना-जाना कम खर्चीला होगा और छोटे व्यापारियों के लिए बाजार तक पहुंच सरल बनेगी। सीएम जनता सेवा योजना राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसकी शुरुआत ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों में परिवहन की लंबे समय से चली आ रही कमी को दूर करने के उद्देश्य से की गई थी। प्रदेश के कई हिस्सों में निजी बसें या तो चलती नहीं थीं या फिर अनियमित थीं, जिससे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। ऐसे में इस योजना के तहत सरकारी सहयोग से बस सेवाएं शुरू की गईं, ताकि अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा सके। वर्तमान में प्रदेशभर में 299 बसें इस योजना के तहत संचालित हो रही हैं, जो सैकड़ों गांवों को जिला मुख्यालयों, तहसीलों और प्रमुख कस्बों से जोड़ रही हैं। सरकार का मानना है कि परिवहन केवल एक सेवा नहीं, बल्कि विकास का माध्यम है। बेहतर सड़क और बस सेवा से जहां शिक्षा और स्वास्थ्य तक पहुंच आसान होती है, वहीं रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी खुलते हैं। इसी सोच के तहत मानदेय बढ़ोतरी और किराया कटौती जैसे फैसलों को एक व्यापक सामाजिक-आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जा रहा है। यह कदम न सिर्फ आज की जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि भविष्य की परिवहन नीति की दिशा भी तय करता है।

योजना का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
सीएम जनता सेवा योजना को उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण परिवहन के उस खालीपन को भरने के लिए शुरू किया था, जहां वर्षों से नियमित बस सेवा का अभाव था। प्रदेश के सैकड़ों गांव ऐसे थे, जहां से जिला मुख्यालय या तहसील तक पहुंचने के लिए लोगों को निजी साधनों या महंगे विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ता था। इस योजना ने सरकारी निगरानी में ऐसी बस सेवाओं की शुरुआत की, जो तय समय पर, तय रूट पर और किफायती किराए में उपलब्ध हों।
मानदेय बढ़ोतरी का फैसला
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि चालक और परिचालक किसी भी बस सेवा की रीढ़ होते हैं। लंबे समय से कर्मचारी संगठनों की ओर से मानदेय बढ़ाने की मांग की जा रही थी। सरकार ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए 14 पैसे प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी का निर्णय लिया। इससे कर्मचारियों की आय बढ़ेगी, उनका मनोबल ऊंचा होगा और वे अधिक जिम्मेदारी व समर्पण के साथ काम करेंगे।
कर्मचारियों पर असर
मानदेय बढ़ने से न केवल आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि नौकरी के प्रति संतुष्टि भी बढ़ेगी। परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बेहतर भुगतान से कर्मचारियों का पलायन रुकेगा, अनुशासन में सुधार आएगा और सेवा की गुणवत्ता बेहतर होगी। समय पालन, यात्रियों से व्यवहार और बसों की देखरेख में भी सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है।
ग्रामीण किराया कटौती राहत का दूसरा पहलू
ग्रामीण रूटों पर किराया 20 प्रतिशत घटाने का निर्णय सरकार की जनहितकारी सोच को दर्शाता है। ग्रामीण यात्रियों की आय सीमित होती है और यात्रा उनके मासिक खर्च का बड़ा हिस्सा ले लेती है। किराया कम होने से परिवारों की बचत बढ़ेगी और वे अपनी आय का बेहतर उपयोग कर सकेंगे।
छात्रों और कामगारों को लाभ
ग्रामीण इलाकों के छात्र अक्सर उच्च शिक्षा के लिए कस्बों और शहरों में जाते हैं। किराया कम होने से उनकी पढ़ाई का खर्च घटेगा। इसी तरह, रोजाना शहर जाकर काम करने वाले मजदूरों और कर्मचारियों के लिए यह फैसला सीधा आर्थिक लाभ लेकर आया है।
कनेक्टिविटी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था
बेहतर बस सेवा से ग्रामीण उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में सुविधा होगी। किसान और छोटे व्यापारी अपने उत्पाद आसानी से मंडियों तक ले जा सकेंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और आय के नए स्रोत विकसित होंगे।
सरकार की मंशा
परिवहन मंत्री ने साफ कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल बसें चलाना नहीं, बल्कि सुरक्षित, सुलभ और किफायती परिवहन उपलब्ध कराना है। चालक-परिचालकों को सम्मान और यात्रियों को राहत यही इस नीति का मूल मंत्र है।
प्रतिक्रिया और स्वागत
इस फैसले का चालक-परिचालकों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि महंगाई के दौर में यह बढ़ोतरी जरूरी थी। वहीं ग्रामीण यात्रियों, छात्रों और सामाजिक संगठनों ने किराया कटौती को जनहित में बड़ा कदम बताया है।
* मानदेय बढ़ोतरी से कर्मचारियों का मनोबल ऊंचा।
* किराया घटने से यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना।
* ग्रामीण कनेक्टिविटी मजबूत।
* शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक बेहतर पहुंच।
* सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा।
* ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती।
* सरकार की जनहितकारी नीति का उदाहरण।
* सीएम जनता सेवा योजना को नई पहचान।




