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ट्रांसफर के बाद भी नही हुई बीडीओ दिनेश सिंह की बिदाई,मनरेगा के भ्र्ष्टाचार की खा रहा मलाई

ट्रांसफर के बाद भी नहीं हुई रवानगी, बीडीओ दिनेश सिंह का स्थानांतरण रद्द होने की चर्चा तेज

  • शहाबगंज ब्लॉक के सभी विकास कार्यों का फिक्स है कमिशन रेट, बिना कमीशन के फाइल हो जाती हैं रद्द
  • शहाबगंज बीडीओ दिनेश सिंह मनरेगा योजना के घोटाले का सरगना, बिना कमीशन के कोई फाइल पास नहीं होता
  • कई ग्राम पंचायतों में मजदूरों की उपस्थिति और कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल
  • शहाबगंज ब्लॉक में मनरेगा के तहत जितने भी फर्जी कार्य होते हैं उसके मुख्य जिम्मेदार तकनीकी सहायक के इशारे पर मुख्य जेई नेहा सिंह के द्वारा किया जाता है
  • बीडीओ शहाबगंज दिनेश सिंह, एपीओ मनरेगा राजन सिंह, जेई, तकनीकी सहायक ग्राम पंचायत सचिव, ग्राम पंचायत और क्षेत्र पंचायत कार्यों में खुलेआम हो रहा घोटाला

अचूक संघर्ष शहाबगंज/चंदौली। शहाबगंज विकास खंड के अंतर्गत अमाव, अरारी, अतायगंज, बड़ौरा, बराव, बेलावर, बेन, भुड़कुड़ा, छितमपुर, इलिया, घोरसारी, हाटा, जेगुरी, केरायगांव, खखड़ा, मंगरौर, मलहर, मसोई, मुबारकपुर, पचपरा, पालपुर, रोहाखी, सेमरा, सुल्तानपुर, तियरी, विशुनपुरा सहित कई ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्यों को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई कार्यस्थलों पर मस्टर रोल में दर्ज मजदूरों की संख्या और मौके पर मौजूद श्रमिकों की संख्या में अंतर दिखाई देता है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ स्थानों पर कागजों में बड़ी संख्या में मजदूर दर्शाए जाते हैं, जबकि वास्तविक संख्या काफी कम होती है।

ट्रांसफर के बाद भी नहीं हुई रवानगी, बीडीओ दिनेश सिंह का स्थानांतरण रद्द होने की चर्चा तेज

शहाबगंज खंड विकास अधिकारी दिनेश सिंह का स्थानांतरण होने के बाद भी उनका तबादला रद्द होने की चर्चा जिले में तेजी से फैल रही है। प्रशासनिक गलियारों से लेकर राजनीतिक हलकों तक इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। स्थानीय स्तर पर यह कहा जा रहा है कि सत्ता और राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले एक प्रभावशाली नेता के हस्तक्षेप के बाद स्थानांतरण आदेश निरस्त हुआ है।

हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद भी उसे रद्द किया गया है तो इसके पीछे के कारणों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। वहीं प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अब सभी की निगाहें शासन और प्रशासन की ओर हैं कि इस मामले पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया जाता है या नहीं।

मस्टर रोल और उपस्थिति को लेकर चर्चा

ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा कार्यों की ऑनलाइन उपस्थिति और फोटो अपलोडिंग प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। कुछ लोगों का दावा है कि कार्यस्थलों की तस्वीरों और उपस्थिति रजिस्टरों का सत्यापन कराया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।
अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने खंड विकास कार्यालय, मनरेगा प्रकोष्ठ और तकनीकी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि जिन कार्यों को स्वीकृति दी गई है, उनका भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए।
लोगों का कहना है कि यदि कहीं अनियमितता हुई है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

कई पंचायतों में स्थलीय जांच की मांग

क्षेत्रीय नागरिकों ने मांग की है कि विभिन्न ग्राम पंचायतों में चल रहे मनरेगा कार्यों की संयुक्त टीम द्वारा जांच कराई जाए। इसमें मस्टर रोल, जियो टैगिंग, श्रमिकों की उपस्थिति, भुगतान विवरण और कार्य की वास्तविक प्रगति का सत्यापन शामिल हो।

एक ग्रामीण ने कहा,

“यदि सभी कार्य सही तरीके से हुए हैं तो जांच से किसी को डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन यदि कहीं गड़बड़ी है तो वह भी सामने आनी चाहिए।”

मनरेगा की पारदर्शिता पर जोर

मनरेगा योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराना और स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण करना है। ऐसे में यदि किसी स्तर पर अनियमितता की शिकायतें सामने आती हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि योजना की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियमित निरीक्षण, सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) और तकनीकी सत्यापन को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, मुख्य विकास अधिकारी और मनरेगा विभाग से मांग की है कि—
सभी विवादित कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए।
मस्टर रोल और भुगतान अभिलेखों की जांच हो।
श्रमिकों के बयान दर्ज किए जाएं।
सोशल ऑडिट कराया जाए।
यदि अनियमितता मिले तो दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी सच्चाई

फिलहाल शहाबगंज ब्लॉक में मनरेगा कार्यों को लेकर उठे सवाल क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं। अब लोगों की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों में कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं।

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