
– बंगाल की महिला-बाल विकास मंत्री बोलीं- जो SIR में नहीं, वो योजना में भी नहीं
– अब बंगाल में SIR से बाहर लोगों के मकान छीनने की तैयारी, सीएम बोले- सर्वे करो
– बंगाल सरकार का सीधा फरमान- SIR से छूटे लोग भारत के नागरिक नहीं
– आखिर किसने दिया चुनाव आयोग को नागरिकता साबित करने का अधिकार?

कोलकाता/पटना। जैसी कि उम्मीद की जा रही थी, भाजपा ने पश्चिम बंगाल की सत्ता में आते ही उन सभी लोगों को सरकारी योजनाओं से बेदखल कर दिया, जो हाल के चुनाव में SIR की प्रक्रिया में बाहर हो गए थे। राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने बुधवार को कहा कि केवल उन्हीं महिलाओं को भाजपा सरकार की अन्नपूर्णा भंडार स्कीम का फायदा मिलेगा, जिनके नाम SIR की अंतिम सूची में शामिल हैं। इस स्कीम के तहत भाजपा सरकार ने आगामी एक जून से महिलाओं को हर महीने 3000 रुपए देने का वादा किया है। चुनाव आयोग ने राज्य में 91 लाख लोगों को SIR की प्रक्रिया में बाहर किया है।उधर, बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने भी SIR की सूची से बाहर हुए लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ देने से मना कर दिया है।


ममता के लक्ष्मी भंडार की जगह अन्नपूर्णा भंडार
इससे पहले पश्चिम बंगाल की करीब ढाई करोड़ महिलाओं को पिछली ममता बनर्जी सरकार में लक्ष्मी भंडार योजना के तहत हर महीने 1500 रुपए का लाभ मिलता था। भाजपा ने चुनाव जीतने पर इसकी जगह अन्नपूर्णा भंडार स्कीम लाने का ऐलान करते हुए सभी अधिसूचित महिलाओं को प्रतिमाह 3000 रुपए देने की पेशकश की थी। अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि प्रतिमाह 3000 रुपए का कैश ट्रांसफर लेने के लिए पात्रता की शर्तों में SIR की सूची में नाम का शामिल होना जरूरी है। आपको बता दें कि चुनाव आयोग ने SIR की प्रक्रिया में बंगाल में 91 लाख लोगों के नाम काटे हैं। इनमें से 58 लाख लोगों के नाम उनकी मौत, बंगाल से चले जाने, पता बदलने या फिर दो स्थानों पर वोटर लिस्ट में नाम शामिल होने के एवज में काटे गए हैं। इनके अलावा 27 लाख लोगों के नाम मात्रागत गड़बड़ी के आरोप में काटे गए हैं। इनका मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। अब देखना होगा कि अगर सुप्रीम कोर्ट इन सभी 27 लाख लोगों के मताधिकार को बहाल करता है तो SIR की शिकार महिलाओं में से कितने को भाजपा सरकार अन्नपूर्णा योजना का लाभ देती है। इससे पहले महाराष्ट्र में लाडकी बहिन योजना और मध्यप्रदेश में लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत बड़ी संख्या में महिलाओं को अपात्र घोषित कर उनके नाम हितधारकों की लिस्ट में काट दिए गए थे।
पात्र महिलाओं की नागरिकता भी देखेंगे
अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि अन्नपूर्णा भंडार स्कीम की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी, जिसमें कई कारकों में यह भी देखा जाएगा कि क्या महिला हितधारक भारतीय नागरिक हैं? आपको बता दें कि यह चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया के भीतर एक और SIR प्रक्रिया जैसा मामला होगा। राज्य सरकार को किसी भी व्यक्ति की नागरिकता तय करने का कोई अधिकार नहीं है। यह केवल केंद्रीय गृह मंत्रालय ही तय कर सकता है। लेकिन भाजपा सरकार इससे पहले के अन्य राज्यों की तरह कैश ट्रांसफर योजनाओं की सूची लगातार छोटी करती रही है। मिसाल के लिए महाराष्ट्र में सरकारी नौकरी, महिला के घर चौपहिया वाहन, अपना मकान या इसी तरह की कोई संपत्ति होने पर उसे लाडकी बहिन योजना से बाहर कर दिया गया था। हालांकि, पूर्ववर्ती ममता सरकार ने लक्ष्मी भंडार योजना के तहत पात्रता के लिए ऐसी कोई शर्त नहीं रखी थी। पॉल ने कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट SIR की प्रक्रिया से बाहर किए गए उन 27 लाख लोगों के मताधिकार पर कोई फैसला नहीं कर लेता, उस लिस्ट में शामिल महिलाओं को योजना से जोड़ने का कोई सवाल ही नहीं है।
केंद्रीय योजनाओं को बंगाल से जोड़ने के आदेश
सत्ता में आने के बाद भाजपा की नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करते हुए राज्य के नवनियुक्त सीएम शुभेंदु अधिकारी ने ऐलान किया है कि बंगाल में चल रही केंद्र सरकार की किसी भी स्कीम को बंद नहीं किया जाएगा। यह जरूर है कि सरकार उसका नाम बदलकर कुछ संशोधनों के साथ उन्हें पेश करेगी। लेकिन किसी भी मृत, फेक या गैर भारतीय निवासी को योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। शुभेंदु ने केंद्र सरकार की सभी स्कीम को बंगाल से जोड़ने की मंजूरी दी, जिनमें आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा स्कीम भी शामिल है। भाजपा की केंद्र सरकार ने ममता की पिछली सरकार पर फर्जी हितधारकों को जोड़ने का आरोप लगाते हुए राज्य को बीते 10 साल से इन योजनाओं से वंचित रखा था। बंगाल की महिला और बाल विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि सरकार का जोर उन महिलाओं को अन्नपूर्णा भंडार स्कीम से जोड़ने का है, जो पात्र और प्रमाणीकृत हितधारक हैं। उन्होंने कहा कि योजना की समीक्षा में भी इन्हीं दोनों बिंदुओं पर प्रमुखता से ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि योजना से महिला हितधारकों को बाहर करने का फैसला राज्य की संशोधित मतदाता सूची और प्रमाणीकरण प्रक्रिया के आधार पर लिया जाएगा।
करीब 90 लाख लोगों पर सवाल
पहले ममता बनर्जी सरकार में चल रही लक्ष्मीर भंडार योजना की जगह अब अन्नपूर्णा भंडार लागू होगी। पहले 2.2 करोड़ महिलाएँ इस योजना का लाभ ले रही थीं। नई सरकार अब इन सभी नामों को SIR में कटे 63 लाख लोगों और 27 लाख अपील वाले लंबित मामलों की लिस्ट से मिलाकर जाँच करेगी। एक सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘अगर बाद में किसी का नाम वोटर लिस्ट में वापस जुड़ जाता है, तो उसे योजना में शामिल कर लिया जाएगा।’ कैबिनेट की बैठक में सीएम शुभेंदु अधिकारी ने अधिकारियों से पूछा है कि क्या आवास योजना के तहत किसी फर्जी व्यक्ति को आवास योजना का लाभ दिया गया है। पिछली सरकार में करीब 16 लाख लोगों को 1.2 लाख रुपये दिए गए थे। सूत्रों का कहना है कि अब पंचायत विभाग को जांच करनी होगी कि जिनके नाम SIR में कटे हैं, उन्हें भी पैसा मिला था या नहीं।
बिहार में भी महिलाओं का खदेड़ा
पश्चिम बंगाल की तर्ज पर बिहार की भाजपा-जेडीयू सरकार ने भी SIR के बहाने से बड़ी संख्या में लोगों को सरकारी राशन और कल्याणकारी योजनाओं से बेदखल कर दिया है। सीएम सम्राट चौधरी ने साफ कर दिया है कि SIR की प्रक्रिया में बाहर कर दिए गए लोगों को अब न तो राशन मिलेगा और न ही सरकारी योजनाओं का लाभ। सम्राट चौधरी ने बताया कि SIR की प्रक्रिया से बाहर कर दिए गए लोगों के बैंक पासबुक भी एक निर्धारित प्रक्रिया के बाद बंद कर दिए जाएंगे। अभी यह पता नहीं चला है कि क्या बिहार सरकार ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। बीती जुलाई में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा €था कि अगर SIR की प्रक्रिया में किसी व्यक्ति को बाहर कर दिया जाता है तो वह भारत का नागरिक नहीं माना जाएगा।




