मोदी की सलाह का असर,चौतरफा बढ़ रही महंगाई ,टूट रही आम जनता की कमर
दूध से लेकर खाद्य तेल तक सभी जरूरी चीजों के दाम बढ़े, गिरते रुपए ने बताई इकोनमी की पतली हालत; रिजर्व बैंक ने चेताया- आगे और खराब होगी हालत

– पेट्रोल-डीजल और सीएनजी के दाम में इजाफा, लेकिन तेल कंपनियों का पेट नहीं भरा
– प्लास्टिक के दाम बढ़े तो कंपनियों ने भी पैकेजिंग के दाम बढ़ाए
– लोगों के लिए किराने के जरूरी सामानों के दाम में 30% का इजाफा
– देश में ईंधन और बिजली की कीमतों में भारी उछाल

नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जैसे ही लोगों को रसोई में कम तेल इस्तेमाल करने, गाड़ियों में तेल जलाने की जगह कार पूल करने और सोना न खरीदने जैसे 7 उपाय सुझाए कि चार दिन बाद महंगाई के बेतहाशा बढ़ने के आंकड़े आने लगे। जाहिर है इसके पीछे केवल पश्चिम एशिया का तेल संकट ही नहीं, भारत का गिरता रुपया, बहुत ही खराब अर्थव्यवस्था और विदेशी निवेशकों का बाजार से पलायन जिम्मेदार है। लेकिन पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के चलते इस कमजोरी को जानबूझकर छिपाया गया और अब, जबकि अप्रैल 2026 में थोक महंगाई दर 8.30 फीसदी पर पहुंच गई है, पूरे देश में महंगाई का रोना रोया जा रहा है।
विगत सप्ताह सुबह मोदी सरकार ने देश में पेट्रोल-डीजल के दाम 3 रुपए बढ़ा दिए, साथ में सीएनजी भी 2 रुपए महंगी कर दी। आम जरूरत की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे है। अकेले दूध नहीं, बीते दो महीने के दौरान कंपनियों ने खाद्य तेल, मसाले, सूखे मेवे, चायपत्ती, साबून, शैंपू से लेकर अन्य वस्तुओं के दामों में 10-30 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर दी है।

कीमतें बढ़ाने का स्मार्ट तरीका
ऐसा लगता है कि भारत की मोदी सरकार कॉर्पोरेट कंपनियों की तरह ही चल रही है। तेल कंपनियों पर केंद्र का करीब 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक का बकाया है। खुद पेट्रोलियम मंत्री यह कह चुके हैं कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से सरकार को रोजाना 1000 करोड़ का घाटा हो रहा है। असम और बंगाल के चुनाव जीतने के बाद केंद्र सरकार चाहती तो एक झटके में पेट्रोल-डीजल के दाम में 15 से 20 रुपए का इजाफा कर सकती थी। लेकिन दाम धीरे-धीरे बढ़ाए जा रहे हैं, ताकि लोगों का गुस्सा न भड़के। ठीक कॉर्पोरेट कंपनियों की तरह, जो हर माह जरूरी चीजों के दाम बढ़ा देती है। वस्तुओं की मात्रा कम कर दती है और ग्राहक ठगा सा उन चीजों को खरीदने पर मजबूर हो जाता है, क्योंकि उनके बिना उसका गुजारा नहीं चल सकता। लेकिन अब थोक महंगाई की दरें बीते 3 साल में सबसे ज्यादा उछली हैं। रिजर्व बैंक के गवर्नर ने भी साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में महंगाई और ज्यादा बढ़ेगी, क्योंकि वैश्विक तेल संकट जल्दी खत्म होने वाला नहीं है। इसी को देखते हुए 5 किलो राशन पर जिंदा देश की 60 प्रतिशत जनता और 20 हजार रुपए की औसत सैलरी में गुजारा करने पर मजबूर 20 फीसदी मध्यम वर्ग को किस्तों में हलाल करने की बेहद स्मार्ट तकनीक केंद्र सरकार इस समय आजमा रही है।
खाद्य तेलों से लेकर चाय पत्ती तक- चौतरफा महंगाई
मार्च के अंत तक ब्रांडेड कंपनी के एक किलोग्राम चायपत्ती का पैकेट 500 रुपये का था, जिसकी कीमत अप्रैल में बढ़ाकर 515 रुपये कर दी गई। अब वह अधिकांश स्टोर व ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर 539 से लेकर 545 रुपये के बीच बेचा जा रहा है। खाद्य तेल की कीमतों में बीते दो महीने में करीब 30 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो गई है। जहां दाम नहीं बढ़े, वहां बोतल का आकार कम कर दिया है। खाद्य तेल की कीमतों में बढ़ोतरी 10-20 प्रतिशत के बीच रही है, जिसमें आने वाले दिनों में अधिक तेजी देखने को मिल सकती है, क्योंकि भारत अपने जरूरत का 60 फीसदी से अधिक खाद्य तेल आयात करता है। भारत करीब 16 मिलियन टन खाद्य तेल के आयात पर प्रति वर्ष लगभग 1.61 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है। अब डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी के चलते खाद्य तेल की खरीद पर विदेश मुद्रा भंडार से बड़ी रकम खर्च करनी पड़ेगी, जिससे खाद्य तेल पहले से अधिक महंगा होगा।
बढ़ गई प्लास्टिक की कीमत- पैकेजिंग महंगी
फरवरी के आखिर में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद से प्लास्टिक दाने की कीमतों में 30-70 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। पीपी और पीई ग्रेड के दाने की कीमतें बीते ढाई महीनों में दो से चार हजार रुपये प्रति टन तक बढ़ी हैं। इससे पैकेजिंग सामग्री की औसत कीमतों पर भी 40 फीसदी तक असर पड़ा है। टिन और मेटल कंटेनर पैकेजिंग भी 5-15 फीसदी तक महंगी हुई है। कांच की बोतलों के दाम भी 15 फीसदी तक बढ़े है। यानी डियोडोरेंट्स से लेकर अचार तक की पैकेजिंग, चाहे वह कांच की बोतल में हो या फिर टिन के कंटेनर में, महंगी हो चुकी है। साबुन, शैंपू, तेल, बिस्किट, पानी की बोतल बेचने वाली कंपनियों के कुल खर्च का करीब 20 प्रतिशत पैकेजिंग पर होता है।
थोक महंगाई 9% तक पहुंचेगी
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की निदेशक मेघा अरोड़ा ने कहा कि मई में थोक महंगाई और बढ़कर नौ प्रतिशत तक पहुंच सकती है। उनका कहना है कि ऊंची ऊर्जा कीमतों का असर धीरे-धीरे पूरी अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र पर दिखाई देगा।, वहीं बजाज ब्रोकिंग के विश्लेषक शाश्वत सिंह के अनुसार, बढ़ती माल ढुलाई लागत और चीजों की कीमतों में बढेातरी का असर अब थोक महंगाई में दिखने लगा है और आने वाले महीनों में इसका असर उपभोक्ता महंगाई पर भी पड़ सकता है। बार्कलेज का अनुमान है कि मई में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब पांच रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। शुक्रवार को पेट्रोल-डीजल पर सरकार के बढ़ाए 3 रुपए काफी नहीं है, क्योंकि सरकारी तेल कंपनियों को अभी भी पेट्रोल-डीजल पर 28 से 32 रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में और इजाफे की सूरत दिख रही है।
थोक महंगाई में दोगुना उछाल
अप्रैल 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दर बढ़कर 8.30 प्रतिशत पहुंच गई, जो पिछले 42 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। मार्च में यह दर 3.88 प्रतिशत थी। यानी सिर्फ एक महीने में इनमें दोगुना उछाल आया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2022 (8.39 प्रतिशत) के बाद पहली बार थोक महंगाई आठ फीसदी के पार दर्ज की गई है। महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ईंधन और बिजली की कीमतों में तेजी रही।

जरूरी चीजों की कीमतों में इजाफा
मसाले 10-15
हेयर ऑयल 7-10
टूथपेस्ट 5-7
सूखे मेवे 15-25
साबून 4-8
शैंपू 4-6
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा महंगाई?
सेक्टर अप्रैल 2026
ईंधन और बिजली 24.71%
प्राथमिक वस्तुएं 9.17%
विनिर्मित उत्पाद 4.62%
फूड इंडेक्स 2.31%
सिंगापुर ने चेताया, हॉर्मूज ने डराया
सिंगापुर के पीएम लारेंस वोंग ने होर्मुज को लेकर कहा कि इस रास्ते के बंद होने का असर सिर्फ कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरी सामान की सप्लाई पर भी दबाव दिख रहा है। खाड़ी देशों से आने वाले तेल पर निर्भर एशिया के कई देशों में ईंधन की कमी सामने आई है। कुछ-कुछ वैसा ही जैसा 1970 के दशक में हुआ था। 1970 के दशक में दुनिया ने स्टैगफ्लेशन का अनुभव किया था। यानी एक ऐसी स्थिति जिसमें महंगाई और बेरोजगारी दोनों चौतरफा तरीके से बढ़ती है। इसे अर्थव्यवस्था की सबसे कठिन स्थितियों में से एक माना जाता है। ” अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने चेतावनी दी है कि मौजूदा संकट 1970 के दशक से भी अधिक गंभीर हो सकता है। इसी वजह से स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तैयारी करने की जरूरत है, ताकि आने वाले समय की चुनौतियों के लिए मानसिक और आर्थिक रूप से तैयार रहा जा सके।
सीमेंट, सरियों के दाम बढ़े
निर्माण क्षेत्र में भी सीमेंट, सरिया और लोहे के दाम बढ़ने की संभावनाएं तेज हो गई हैं। कारोबारियों का मानना है कि यदि तेल और सीएनजी की कीमतों में यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले दिनों में मकान निर्माण से लेकर छोटे व्यापार तक सब कुछ महंगा हो जाएगा।सबसे बड़ा असर आम लोगों की रसोई पर पड़ता दिखाई दे रहा है। ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने के कारण फल, सब्जियां, राशन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दामों में भी उछाल आने की आशंका है। गृहिणियों और मध्यम वर्गीय परिवारों में इसे लेकर चिंता साफ नजर आने लगी है। लोगों का कहना है कि पहले ही महंगाई ने घरेलू बजट बिगाड़ रखा था और अब ईंधन कीमतों की आग ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
कांग्रेस ने मोदी को कहा-महंगाई मैन
केंद्र सरकार के ईंधन के दाम में बढ़ोतरी के बाद विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए पीएम को महंगाई मैन कहा। कांग्रेस ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें 3 रुपये बढ़ाए जाने के बाद उन्होंने जनता पर “कोड़े बरसाए” हैं। कांग्रेस ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनावों के खत्म होने से जोड़ते हुए कहा कि चुनावों के बाद पीएम मोदी की “वसूली शुरू” हो गई है। कांग्रेस ने कहा, “महंगाई-मैन मोदी ने आज एक बार फिर जनता पर कोड़े बरसाए हैं। पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें 3-3 रुपये बढ़ा दी गई हैं। इसके साथ ही, CNG की कीमतें भी 2 रुपये बढ़ा दी गई हैं। चुनाव खत्म – मोदी की वसूली शुरू।”
भाजपा ने मूल्यवृद्धि का किया बचाव
भाजपा के नेताओं ने पेट्रोल-डीजल और सीएनजी के दाम में बढ़ोतरी के केंद्र सरकार के फैसले का बचाव किया है। भाजपा नेताओं ने भारत और अन्य देशों में तेल कीमतों में बढ़ोतरी की तुलना की। साथ ही, दावा किया कि बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत वह देश रहा जहां आम नागरिकों पर सबसे कम बोझ पड़ा। इस दौरान, उन्होंने निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी को हर चीज का राजनीतिकरण करने पर शर्म आनी चाहिए। भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी उछाल आया है। तेल आपूर्ति बाधित होने के कारण अप्रैल और मई के अधिकांश समय ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा। लेकिन भारत इस पूरी तस्वीर में एक अलग और उल्लेखनीय अपवाद बनकर उभरा है।”
अखिलेश यादव ने ”साइकिल” को विकल्प बताया
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस महंगाई पर निशाना साधा है। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, “आगे बढ़ना है तो साइकिल ही विकल्प है।” उनका यह बयान लोगों के बीच काफी चर्चा में है। अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर महंगाई बढ़ाने का आरोप लगाया है। लखनऊ में पेट्रोल के दाम 2 रुपये 84 पैसे बढ़ गए हैं। अब पेट्रोल की नई कीमत 97.55 रुपये प्रति लीटर हो गई है। डीजल के दामों में 3.01 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। अब डीजल 90 रुपये 82 पैसे प्रति लीटर मिलेगा। सीएनजी भी महंगी हो गई है। लखनऊ में सीएनजी के दाम 2 रुपये बढ़कर अब 98 रुपये प्रति किलो हो गए हैं।
भारत को लगेगा तगड़ा झटका- उदय कोटक
सीआईआई एनुअल बिजनेस समिट में बोलते हुए कोटक महिंद्रा बैंक के फाउंडर उदय कोटक ने कहा कि मौजूदा संकट जितना बड़ा दिखाई दे रहा है, असली चुनौती उससे भी कहीं ज्यादा गंभीर हो सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले समय में जंग से भी बड़ा ‘एनर्जी शॉक’ देखने को मिल सकता है। उदय कोटक ने कहा कि देश को बाहरी आर्थिक झटकों और वैश्विक संकटों से निपटने के लिए पहले से तैयारी करनी होगी। उनके मुताबिक आगे की परिस्थितियां आम लोगों के लिए बड़ा असर डाल सकती हैं, इसलिए देश को सबसे कठिन हालात के लिए मानसिक और आर्थिक रूप से तैयार रहना चाहिए। उदय कोटक के अनुसार दुनिया अब मिल-जुलकर चलने वाली ‘दावोस मानसिकता’ से हटकर 1945 से पहले वाले दौर की ओर जा रही है, जिसे उन्होंने ‘कबीलाई’ फेज करार दिया। कोटक ने कहा कि देश को कठिन समय के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने PM मोदी की अपील का समर्थन करते हुए कहा कि भारतीयों को फिर से वर्क-फ्रॉम-होम, ऑनलाइन मीटिंग और कम यात्रा करने जैसी आदतों को अपनानी चाहिए। जिससे पेट्रोल-डीजल पर कम खर्च होगा, और डॉलर बचेगा। कोटक का मानना है कि हमें संकट आने का इंतजार नहीं करना चाहिए, सभी को मिलकर इस मुसीबत से मुकाबला करना चाहिए।
पीएम मोदी ने अदानी की रिहाई का सौदा किया: राहुल
अमेरिका में उद्योगपति गौतम अडाणी से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में नया मोड़ आने के बाद भारत की राजनीति फिर गरमा गई है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी न्याय विभाग अडाणी समूह के खिलाफ लगाए गए आरोपों को वापस लेने पर विचार कर रहा है। इस खबर के सामने आते ही कांग्रेस ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। विपक्ष का आरोप है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और विदेश नीति के फैसलों के पीछे राष्ट्रीय हित नहीं बल्कि अडाणी समूह को राहत दिलाने की कोशिश थी। इसी मुद्दे पर राहुल गांधी और जयराम रमेश ने सरकार को घेरते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए लिखा कि कॉमप्रोमाइज्ड पीएम ने व्यापार समझौता नहीं बल्कि अदानी की रिहाई का सौदा किया। राहुल गांधी ने पहले भी कई बार कम्प्रोमाइज्ड पीएम शब्द का इस्तेमाल करते हुए सरकार पर उद्योगपति गौतम अदानी को संरक्षण देने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस का कहना है कि अमेरिकी एजेंसियों द्वारा लगाए गए आरोप बेहद गंभीर थे और अब यदि मामला कमजोर किया जा रहा है तो उसके पीछे राजनीतिक और आर्थिक दबाव हो सकता है।
15 मई से पराग का दूध भी महंगा
अमूल के बाद अब यूपी की सबसे बड़े डेयरी ब्रांड पराग ने भी दूध की कीमतों में 2 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं। नई दरें 15 मई की शाम से लागू होंगी। फुल क्रीम दूध का रेट 69 रुपए लीटर से बढ़ाकर 71 रुपए लीटर कर दिया गया है। फुल क्रीम, सुपर स्टैंडर्ड, टोंड मिल्क और स्टैंडर्ड सभी दूध के रेट में बढ़ोतरी की गई है। पराग डेयरी ने इससे पहले दूध के दाम मई 2025 में बढ़ाए थे। उस समय भी कंपनी ने दूध की कीमतों में 2 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की थी। अब करीब एक साल बाद फिर से पराग दूध के दाम बढ़ाए गए हैं।
दूध का नाम पैक साइज पुरानी कीमत नई कीमत
एफसीए गोल्ड 6 लीटर पैक ₹420 ₹425
एफसीएम गोल्ड 1 लीटर पैक ₹69 ₹71
एफसीएम गोल्ड 500 ML ₹35 ₹36
पराग टोंड मिल्क 5 लीटर पैक ₹285 ₹290
पराग टोंड मिल्क 1 लीटर पैक ₹57 ₹59
पराग टोंड मिल्क 500 ML ₹29 ₹30
पराग स्टैंडर्ड मिल्क 500 ML ₹32 ₹33
पराग स्टैंडर्ड मिल्क 5 लीटर पैक ₹290 ₹300
टी-स्पेशल मिल्क 1 लीटर पैक ₹64 ₹66
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस महंगाई पर निशाना साधा है। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, “आगे बढ़ना है तो साइकिल ही विकल्प है।” उनका यह बयान लोगों के बीच काफी चर्चा में है। अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर महंगाई बढ़ाने का आरोप लगाया है। लखनऊ में पेट्रोल के दाम 2 रुपये 84 पैसे बढ़ गए हैं। अब पेट्रोल की नई कीमत 97.55 रुपये प्रति लीटर हो गई है। डीजल के दामों में 3.01 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। अब डीजल 90 रुपये 82 पैसे प्रति लीटर मिलेगा। सीएनजी भी महंगी हो गई है। लखनऊ में सीएनजी के दाम 2 रुपये बढ़कर अब 98 रुपये प्रति किलो हो गए हैं।
सीआईआई एनुअल बिजनेस समिट में बोलते हुए कोटक महिंद्रा बैंक के फाउंडर उदय कोटक ने कहा कि मौजूदा संकट जितना बड़ा दिखाई दे रहा है, असली चुनौती उससे भी कहीं ज्यादा गंभीर हो सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले समय में जंग से भी बड़ा ‘एनर्जी शॉक’ देखने को मिल सकता है। उदय कोटक ने कहा कि देश को बाहरी आर्थिक झटकों और वैश्विक संकटों से निपटने के लिए पहले से तैयारी करनी होगी। उनके मुताबिक आगे की परिस्थितियां आम लोगों के लिए बड़ा असर डाल सकती हैं, इसलिए देश को सबसे कठिन हालात के लिए मानसिक और आर्थिक रूप से तैयार रहना चाहिए। उदय कोटक के अनुसार दुनिया अब मिल-जुलकर चलने वाली ‘दावोस मानसिकता’ से हटकर 1945 से पहले वाले दौर की ओर जा रही है, जिसे उन्होंने ‘कबीलाई’ फेज करार दिया। कोटक ने कहा कि देश को कठिन समय के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने PM मोदी की अपील का समर्थन करते हुए कहा कि भारतीयों को फिर से वर्क-फ्रॉम-होम, ऑनलाइन मीटिंग और कम यात्रा करने जैसी आदतों को अपनानी चाहिए। जिससे पेट्रोल-डीजल पर कम खर्च होगा, और डॉलर बचेगा। कोटक का मानना है कि हमें संकट आने का इंतजार नहीं करना चाहिए, सभी को मिलकर इस मुसीबत से मुकाबला करना चाहिए।
अमेरिका में उद्योगपति गौतम अडाणी से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में नया मोड़ आने के बाद भारत की राजनीति फिर गरमा गई है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी न्याय विभाग अडाणी समूह के खिलाफ लगाए गए आरोपों को वापस लेने पर विचार कर रहा है। इस खबर के सामने आते ही कांग्रेस ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। विपक्ष का आरोप है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और विदेश नीति के फैसलों के पीछे राष्ट्रीय हित नहीं बल्कि अडाणी समूह को राहत दिलाने की कोशिश थी। इसी मुद्दे पर राहुल गांधी और जयराम रमेश ने सरकार को घेरते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए लिखा कि कॉमप्रोमाइज्ड पीएम ने व्यापार समझौता नहीं बल्कि अदानी की रिहाई का सौदा किया। राहुल गांधी ने पहले भी कई बार कम्प्रोमाइज्ड पीएम शब्द का इस्तेमाल करते हुए सरकार पर उद्योगपति गौतम अदानी को संरक्षण देने का आरोप लगाया है।



