पहलगाम के गुनहगार,यही है देश के असली गद्दार
पाकिस्तान से चोरी-छिपे बातचीत, बंद कमरे में भाजपा और पूर्व सेनाध्यक्ष भी- विपक्ष बोला: यह रिश्ता क्या कहलाता है?

- कोलंबो के हिल्टन होटल में बातचीत का हिस्सा बने राम माधव और जनरल नरवणे
- विदेश सचिव ने इसे बताया निजी वार्ता, गंभीर सवालों से पल्ला झाड़ा
- ऑपरेशन सिंदूर के बाद ऐसी चार दौर की बातचीत हो चुकी है
- अंतर्राष्ट्रीय सामरिक अध्ययन संस्थान ने बुलाई थी बैठक
- संस्थान को पैसा देती हैं अमेरिका और यूरोप की बड़ी कंपनियां

नई दिल्ली। भारत सरकार यह दावा करती है कि पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 भारतीयों की हत्या और उसके बाद ऑपरेशन सिंदूर को देखते हुए पाकिस्तान से कोई बात नहीं होगी। लेकिन, श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में दोनों देशों के प्रतिनिधि बंद दरवाजों के पीछे मिलते हैं, दावतें होती हैं और इसे ट्रैक 2 डिप्लोमेसी कहा जाता है। बातचीत करने वालों में आरएसएस के राम माधव और भारत के पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल नरवणे भी होते हैं। इस तरह की चार बार की बातचीत अभी तक हो चुकी है। अब भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस तरह की बातचीत को निजी बताकर पल्ला झाड़ लिया है। वहीं, विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से पूछा है कि यह रिश्ता क्या कहलाता है?
दिया गया क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन का नाम
भारत और पाकिस्तान के बीच इस चोरी-छिपी बातचीत को क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन का नाम दिया गया है। बताया जा रहा है कि कोलंबो की बातचीत से पहले दोहा (कतर) में फरवरी 2026 में, थाईलैंड में दिसंबर 2025 में भी दोनों देशों के बीच इस अनौपचारिक तरीके से संपर्क साधा गया है।
विदेश मंत्रालय ने हंसी में उड़ाया
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सेशल्स में एक न्यूज एजेंसी से कहा कि उन्होंने वो मीडिया रिपोर्ट देखी हैं और वो उनके बारे में जानते हैं। विक्रम मिस्री ने कहा, “इस तरह के दर्जनों कार्यक्रम दुनिया भर में दर्जनों जगहों पर कई तरह के विषयों पर होते रहते हैं। इसलिए इन कार्यक्रमों में कुछ भी नया या कुछ भी खास नहीं है। दूसरी बात, जहां तक हमारा संबंध है, ये निजी कार्यक्रम हैं जो निजी पक्षों द्वारा आयोजित किए जाते हैं। जहां तक हमारा संबंध है, इनमें कुछ भी आधिकारिक नहीं है।”
इससे सबसे पहला सवाल यही खड़ा होता है कि अगर यह निजी कार्यक्रम है तो कोलंबो, कतर, दोहा जैसे शहरों में इस तरह की बातचीत का खर्च कौन उठा रहा है? इससे भी बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि आतंकवाद और भारत-पाक नदी जल समझौता जैसे गंभीर द्विपक्षीय विषयों बातचीत का एजेंडा कौन सेट कर रहा है ? भारत के विदेश सचिव फिलहाल ऐसी बैठकों को हंसी में उड़ा रहे हैं, लेकिन देश को यह बताना चाहिए कि इन बैठकों के पीछे कौन है? अगर ऐसी बैठकों के पीछे अमेरिका है, जो भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते सुधारना चाहता है तो यह भी भारत की जनता को बताना चाहिए कि इसके पीछे उसका मकसद क्या है? कोलंबो की बैठक में आरएसएस के राम माधव के शामिल होने पर भी सवाल उठते हैं, क्योंकि संघ हमेशा से भारत सरकार की नीतियों और कामकाज में किसी तरह के हसतक्षेप न करने का दावा करता है। ऐसे में इन बैठकों में आरएसएस की प्रतिभागिता भारत सरकार की विदेश और रक्षा नीतियों को प्रभावित करने के मकसद से हो रही है ?

भाषण देने बुलाया था- माधव
आरएसएस से भाजपा में आए राम माधव का कहना है कि कोलंबो की बैठक अंतर्राष्ट्रीय सामरिक अध्ययन संस्थान की ओर से बुलाई गई थी और उन्हें इसमें एक सत्र में केवल भाषण देने बुलाया गया था। लेकिन सवाल यह है कि लंदन स्थित इस संस्थान में भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक रिश्तों पर भाषण देने के लिए उन्होंने भारत सरकार से परमिशन ली थी ? उन्हें किस हैसियत से बैठक में बुलाया गया था? क्या राम माधव यह जानते हैं कि IISS को पैसा देने वाले अधिकांश बड़ी कंपनियां अमेरिकी हैं? लेकिन जैसा की विदेश सचिव कह रहे हैं कि यह एक निजी कार्यक्रम था, तो जाहिर तौर पर राम माधव पर भारत सरकार को इसकी सूचना देने की बाध्यता नहीं थी। क्या यह हितों का टकराव नहीं है ? राम माधव ने कहा कि यह कार्यक्रम आईआईएसएस का सालाना ‘दक्षिण एशिया संवाद’ था, न कि भारत और पाकिस्तान के बीच कोई ‘ट्रैक-2’ मीटिंग। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से गलत बात है। यह कोई ट्रैक 2 बातचीत नहीं थी। इस चर्चा में भारत से राम माधव, सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एमएम नरवणे और पूर्व भारतीय राजनयिक रुचि घनश्याम शामिल हुए। इसमें यह भी बताया गया कि पाकिस्तानी प्रतिनिधियों में पूर्व राजनयिक सज्जाद हैदर खान, पूर्व मंत्री शेरी रहमान और रिटायर्ड मेजर जनरल इसफंदियार अली खान पटौदी शामिल थे। बैठक में भारत, श्रीलंका, अमेरिका, ब्रिटेन, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के विद्वान शामिल हुए थे।
क्या हुई बातचीत
रिपोर्ट के मुताबिक हिल्टन होटल कोलंबो में हुई बैठक के दौरान भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने लगभग डेढ़ दिन तक बातचीत की। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह चर्चा भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते सुधारने के लिए पिछले दरवाजे से जारी बातचीत की कड़ी का एक और हिस्सा है। बातचीत में आतंकवाद, सीमा पार बहने वाली नदियों के पानी के बंटवारे, संकट के समय बातचीत को बेहतर बनाने और तनाव बढ़ने से रोकने के संभावित उपायों पर चर्चा हुई। बैठक से कोई खास नतीजा नहीं निकला।
बोले विदेश सचिव- भारत से नाता नहीं
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच ट्रैक-टू वार्ता का दावा करने वाली कई मीडिया रिपोर्ट्स सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों का भारत सरकार से कोई नाता नहीं है। इन यात्राओं में भारत सरकार की कोई आधिकारिक भागीदारी, कोई आधिकारिक समर्थन या संलिप्तता नहीं है। विक्रम मिस्री ने कहा कि भारत से जो कोई भी इन कार्यक्रमों में भाग ले रहा है, चाहे वे रिटायर्ड डिप्लोमैट्स हों, रिटायर्ड मिलिट्री अधिकारी हों या सिविल सोसाइटी के सदस्य हों, वे जब ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेते हैं, तो वे अपनी ओर से बोलते हैं। वे किसी भी तरह से भारत सरकार के दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं और न ही कर सकते हैं।
क्या होती है ट्रैक-2 वार्ता?
ट्रैक-2 वार्ता दो देशों के बीच अनौपचारिक कूटनीतिक बातचीत होती है। इसमें सरकार के नुमाइंदे भाग नहीं लेते। आमतौर पर ऐसे कार्यक्रमों में रिटायर्ड डिप्लोमैट्स हों, रिटायर्ड मिलिट्री अधिकारी, शिक्षाविद्, थिंक-टैंक और पूर्व नौकरशाह हिस्सा लेते हैं। ऐसी बातचीत का मकसद दो देशों के बीच विश्वास, तनाव कम करना और समाधान के सुझाव देना होता है।
राम माधव पर भड़के ओवैसी
एआईएमआईएम चीफ और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया है कि आरएसएस के विचारक और पूर्व बीजेपी नेता राम माधव पाकिस्तान के साथ ट्रैक-2 डिप्लोमेसी में जुटे हुए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी सवाल किया है कि जिस पाकिस्तान ने पहलगाम में 26 भारतीयों की हत्या कर दी, उससे इस तरह की कूटनीति कैसे की जा सकती है। असदुद्दीन ओवैसी ने अपने एक्स हैंडल पर अपने ही एक भाषण का वीडियो शेयर किया है। इसमें वे काफी तल्खी वाले अंदाज में बीजेपी और आरएसएस पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘..हमको बोलते कि ये पाकिस्तानी है, ये जिहादी है, ये बांग्लादेशी है..।’ …तो ये राम माधव जाकर पाकिस्तान से ट्रैक टू डिप्लोमेसी कैसे कर रहे हैं?..आरएसएस के.. वो पाकिस्तान जिसने पहलगाम में भारत के 26 लोगों को गोली मार दी थी। वो पाकिस्तान जिसकी सपोर्ट पर दिल्ली में लाल किले पर सुसाइड बम के जरिए 50 लोगों की मौत हुई, जिसमें हिंदू और मुसलमान मारे गए…बोलो बीजेपी वालों, बोलो प्रधानमंत्री, कैसे राम माधव जाकर बात कर रहे हैं?
ट्रैक 2 डिप्लोमेसी के पीछे कौन ?
यह जानना मुश्किल नहीं है। चारों बार की ट्रैक 2 डिप्लोमेसी की बातचीत की फंडिंग अमेरिका और ब्रिटेन के विद्वानों ने की थी। इनमें दोनों देशों के राजनयिक खासतौर पर शामिल हुए। पहले इस तरह की वार्ता मध्य-पूर्व के संकट का हल निकालने के लिए हुआ करती थीं, लेकिन अब इसका फोकस भारत और पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर के बाद खराब हुए रिश्तों को सुधारने के लिए होने लगा है। कोलंबो में जिस आईआईएसएस ने वार्ता का आयोजन किया, वही हर साल शांग्री-ला वार्ता भी आयोजित करती है, जिसमें विभिन्न देशों के राजनयिक और नेता भाग लेते हैं। जिओ पॉलिटिकल विशेषज्ञों का मानना है कि पहलगाम हमले के बाद भारत का पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को रद्द कर देना दोनों देशों को सामरिक रूप से फिर आमने-सामने खड़ा कर सकता है। पाकिस्तान ने भारत को बदनाम करने के लिए यह झूठ फैलाया हुआ है कि भारत पानी को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि, भारत ने पाकिस्तान के साथ बातचीत न करने और जल समझौते को रद्द करने का फैसला आतंकवाद के खिलाफ अपने रुख को साफ करते हुए किया था। लेकिन इस तरह की वार्ताओं का कोई नतीजा इसलिए भी नहीं निकल सकता, क्योंकि दोनों ही पक्षों में कोई किसी देश का आधिकारिक नुमाइंदा नहीं है। हालांकि, इस तरह की खुफिया बातचीत के बजाय भारत सरकार को खुले दरवाजे की बातचीत से मसले का हल निकालना चाहिए।
संवाद का असर- 117 हस्तियों की चिट्ठी
भारत-पाकिस्तान के रिश्तों को सुधारने के लिए दोनों देशों की 117 हस्तियों ने पीएम मोदी और पाक पीएम शहबाज शरीफ को चिट्ठी लिखी है। इसमें कहा गया है कि टकराव नहीं, बातचीत का रास्ता चुनिए, ताकि दक्षिण एशिया में शांति और विकास का माहौल बन सके। इन 117 हस्तियों में पूर्व अधिकारी, सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां शामिल हैं। भारत की ओर से जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और आरजेडी सांसद मनोज झा समेत 61 लोगों और पाकिस्तान की ओर से पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी समेत 56 लोगों ने चिट्ठी पर साइन किए हैं।



