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धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में शिवपुरी के गुप्ता गेस्ट हाउस में देह व्यापार, शर्म करो मोदी सरकार

पत्रकार ने लगाया धमकी और फर्जी मुकदमे में फंसाने का आरोप, एसीपी से लेकर डीसीपी स्तर तक शिकायत पहुंचने का दावा

  • शिवपुर बाईपास स्थित गुप्ता गेस्ट हाउस को लेकर गंभीर आरोपों से मचा हड़कंप
  • कथित देह व्यापार की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचने का दावा
  • शिवपुर थाना प्रभारी अजीत कुमार वर्मा की भूमिका पर शिकायतकर्ता ने उठाए सवाल
  • पत्रकार ने जान से मारने की धमकी और फर्जी मुकदमे में फंसाने का आरोप लगाया
  • पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग

वाराणसी।काशी धर्म और आध्यात्म की नगरी के रूप में सुविख्यात है,लेकिन विगत कई सालों से कुछ गंदे लोगो के कारण काशी देहव्यापार, नशा,जुआ व हुक्का का हब बना हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में शिवपुर क्षेत्र स्थित एक गेस्ट हाउस को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिवपुर बाईपास स्थित गुप्ता गेस्ट हाउस में कथित रूप से देह व्यापार संचालित होने की शिकायत किए जाने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से मामले की जानकारी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने की बात कही गई है। साथ ही शिकायतकर्ता ने स्थानीय पुलिस की भूमिका को लेकर भी कई सवाल खड़े किए हैं।
हालांकि, गेस्ट हाउस में देह व्यापार संचालित होने अथवा पुलिसकर्मियों की संलिप्तता से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले में पुलिस जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

 

वरिष्ठ अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने का दावा

शिकायतकर्ता के मुताबिक गुप्ता गेस्ट हाउस में कथित अनैतिक गतिविधियों को लेकर लगातार संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी जा रही है। दावा है कि मामले की शिकायत एसीपी स्तर से लेकर एडीसीपी महिला एवं अपराध तथा डीसीपी स्तर तक की गई है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कई बार सूचना और शिकायत दिए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि गेस्ट हाउस में वास्तव में किसी तरह की गैरकानूनी गतिविधि संचालित हो रही है या नहीं।

शिवपुर थाना प्रभारी की भूमिका पर लगाए गंभीर आरोप

मामले में शिवपुर थाना प्रभारी अजीत कुमार वर्मा की भूमिका को लेकर भी शिकायतकर्ता ने गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि थाना स्तर से गेस्ट हाउस के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि क्षेत्र में होने वाली कथित अवैध गतिविधियों की जानकारी पुलिस को दिए जाने के बावजूद कार्रवाई के बजाय शिकायतकर्ता से बार-बार लिखित तहरीर मांगी जाती है। शिकायतकर्ता का कहना है कि कई मामलों में फोटो और वीडियो जैसे साक्ष्य उपलब्ध कराए जाने की बात भी कही गई, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

पत्रकार को धमकी देने का भी आरोप

मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से एक पत्रकार को कथित तौर पर जान से मारने की धमकी देने और फर्जी मुकदमे में फंसाने का आरोप लगाया गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि गेस्ट हाउस से जुड़ी खबरों और कथित गतिविधियों को सामने लाने के बाद पत्रकार पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। आरोप है कि उसे जेल भेजने और मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई।
यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह स्वतंत्र पत्रकारिता और कानून-व्यवस्था दोनों से जुड़ा गंभीर विषय होगा। ऐसे में शिकायतकर्ता की मांग है कि धमकी के आरोपों की भी अलग से जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।

देह व्यापार और अन्य अवैध गतिविधियों के आरोप

शिकायत में गुप्ता गेस्ट हाउस को लेकर केवल कथित देह व्यापार ही नहीं, बल्कि अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के भी आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता की ओर से क्षेत्र में मादक पदार्थों की कथित बिक्री और जुए के संचालन जैसी गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है।
हालांकि इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति या प्रतिष्ठान को दोषी ठहराने से पहले पुलिस जांच, प्राथमिकी और न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
स्थानीय लोगों की ओर से भी यदि इस तरह की शिकायतें पुलिस के पास पहुंच रही हैं तो पुलिस के लिए मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाना जरूरी है।

गेस्ट हाउस संचालक और बेटे को लेकर भी सवाल

शिकायतकर्ता पक्ष ने गेस्ट हाउस संचालक और उसके पुत्र अनमोल गुप्ता के पुराने आपराधिक मामलों का भी उल्लेख किया है। आरोप लगाया गया है कि दोनों के खिलाफ पूर्व में गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हुए और गिरफ्तारी भी हुई थी।
इन पुराने मामलों के संबंध में लगाए गए सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है। किसी व्यक्ति के पूर्व मामले या गिरफ्तारी को वर्तमान आरोप का प्रमाण नहीं माना जा सकता। वर्तमान में गुप्ता गेस्ट हाउस में कथित रूप से कोई गैरकानूनी गतिविधि संचालित हो रही है या नहीं, यह जांच का विषय है।

पुलिस की निष्पक्ष जांच से सामने आएगी सच्चाई

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि गुप्ता गेस्ट हाउस को लेकर लगातार शिकायतें पुलिस अधिकारियों तक पहुंच रही हैं तो इन शिकायतों की जांच किस स्तर पर हुई और उसका निष्कर्ष क्या निकला।
यदि आरोप निराधार हैं तो पुलिस जांच के जरिए स्थिति स्पष्ट कर सकती है। वहीं यदि जांच में किसी प्रकार की गैरकानूनी गतिविधि सामने आती है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसी तरह थाना प्रभारी और अन्य पुलिस अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस पर लगाए गए गंभीर आरोपों की पुष्टि अथवा खंडन जांच के बाद ही संभव है।

डीजीपी और पुलिस आयुक्त से निष्पक्ष जांच की मांग

शिकायतकर्ता पक्ष ने पूरे प्रकरण में उच्च पुलिस अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। मांग है कि स्थानीय थाना स्तर से अलग निष्पक्ष जांच कराई जाए और गुप्ता गेस्ट हाउस से जुड़े सभी आरोपों की वास्तविकता सामने लाई जाए।
साथ ही पत्रकार को कथित धमकी देने के आरोप की भी जांच कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने कानून तोड़ा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन शिकायत करने या खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकार को धमकाना अथवा फर्जी मुकदमे में फंसाने की कोशिश किसी भी स्थिति में जांच का विषय होना चाहिए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि इन गंभीर आरोपों पर वाराणसी पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी क्या कदम उठाते हैं। गुप्ता गेस्ट हाउस से जुड़े कथित देह व्यापार, अन्य अवैध गतिविधियों और पुलिस की भूमिका संबंधी आरोपों की निष्पक्ष जांच होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारी किसकी बनती है।

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