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मोदी का खासमखास चंपत राय ने प्रभु श्री राम के पैसो को लगाई चपत,रामभक्त निकला लम्पट

राम मंदिर में चोरी- चंपत, अनिल मिश्रा का इस्तीफा, टिन्नू समेत 8 जेल में; अब जमीन खरीदी की होगी जांच, विपक्ष के तीखे हमलों से भाजपा की साख को आंच

  • – आरएसएस के दबाव में चंपत ने दिया इस्तीफा
  • – इस्तीफों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं
  • – आप नेता संजय सिंह ने एसआईटी को सौंपे सबूत, केजरीवाल का हमला
  • – प्रियंका गांधी ने कहा- आस्था पर डाका, जांच में पूरा मामला साफ हो

अयोध्या/लखनऊ। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने भी अपना पद छोड़ दिया है। हालांकि, दोनों इस्तीफों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। चंपत राय के करीबी एक सूत्र ने बताया, “जब ऐसे आरोप लग रहे हों तो पद से दूर रहना ही ठीक है। ऐसा निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है।” इससे पहले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कृष्ण मोहन की शिकायत पर गुरुवार शाम को राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया था।

आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को राम मंदिर में दान के कथित गबन और आभूषणों की चोरी के मामले में दर्ज प्राथमिकी को धोखा करार दिया। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि इस मामले में सिर्फ छोटे कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि बड़े लोगों को बचाया जा रहा है। केजरीवाल ने शुक्रवार को अयोध्या में श्री राम लला के दर्शन किए।

टिन्नू यादव को भेजा जेल

राम मंदिर के चढावा में कथित हेराफेरी मामले में अरेस्ट हुए रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू को पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया। चढ़ावा चोरी मामले में टिन्नू यादव समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सभी की भूमिका जांची जा रही है। इनमें टिन्नू यादव का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है क्योंकि वह ट्रस्ट से जुड़े असरदार लोगों का करीबी बताया जाता है। टिन्नू के अलावा ट्रस्ट कर्मी अनुकल्प मिश्र, उसका बहनोई लवकुश मिश्र, टिन्नू का भतीजा मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल व रिटायर्ड बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। एफआईआर में ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारी चंपतराय, डा. अनिल मिश्र, गोपाल राव आदि के नाम नहीं हैं।

अब जमीन खरीदी की भी जांच करेगी एसआईटी

राम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण की पड़ताल कर रही एसआईटी अब ट्रस्ट के लिए खरीदी गई भूमि के कागजातों की जांच करेगी। इन आरोपों की सत्यता परखी जाएगी कि किन जमीनों की खरीद में कितना अधिक लाभ कमाया गया और किन कारणों से ट्रस्ट के धन का दुरुपयोग करके महंगी जमीन खरीदी गई। इसके लिए एसआईटी के सदस्य न केवल उन ट्रस्टियों से पूछताछ करेंगे, जो भूमि खरीद से जुड़े रहे, बल्कि उन्हें भी बुलाया जाएगा जिन्होंने स्थानीय स्तर पर बिचौलिए की भूमिका निभाकर जमीन खरीदवाई। ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण शुरू होने और प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अब तक राम मंदिर व आसपास के क्षेत्रों में लगभग 44 एकड़ जमीन खरीदी है। गुरुवार को आम आदमी पाटी के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने एसआईटी को जमीनों से जुड़े कागजात पेश किए। संजय सिंह ने कुल 11 जमीनों से जुड़े कागजातों को सौंपा है। उन्होंने उन्होंने एसआईटी को जो सबूत सौंपे सौंपे हैं, उनमें से लगभग सभी में चार करोड़ से लेकर 16 करोड़ रुपये तक अधिक दाम पर इन्हें खरीदने का आरोप लगाया है। इन सबूतों में कहा गया है कि अयोध्या के कुछ नामचीन लोगों ने इस गोरखधंधे में बिचौलिए की भूमिका निभाई। जिस जमीन की कीमत दो करोड़ रुपये रही, उसे ट्रस्ट के लिए साढ़े 18 करोड़ रुपये में खरीदवा कर बड़ा लाभ कमाया गया। सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट के लिए भूमि खरीद प्रक्रिया में ट्रस्ट महासचिव चंपतराय व व्यवस्थापक गोपाल राव की तो अहम भूमिका रही ही, इनके सहयोगी के रूप में ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र व पांच-छह स्थानीय लोग भी रहे हैं। इन लोगों ने ट्रस्टियों से कई गुना अधिक कीमत दिलवाई।

 

बाथरूम में छिपाते थे नोटों को

एसआईटी की जांच में कई तथ्य सामने आए हैं। पुलिस सूत्रों का दावा है कि दानपात्र से कथित रूप से निकाली गई नकदी को पहले मंदिर परिसर के बाथरूम में छिपाया जाता था। मौका मिलने पर नोटों की गड्डियों को मंदिर परिसर से बाहर ले जाया जाता था। इसके बाद एक मकान में कथित रूप से रकम का बंटवारा किया जाता था। यह कथित तरीका लंबे समय से अपनाया जा रहा था। पुलिस को शक है कि दान राशि की चोरी का काम पिछले दो से तीन वर्षों से चल रहा था। इस दावे की पुष्टि के लिए वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है। जांच में यह भी सामने आया है कि महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण दान की राशि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई थी। पुलिस इस अवधि के लेन-देन और दानपात्र से जुड़े रिकॉर्ड की विशेष रूप से जांच कर रही है। करीब 70 स्थानों के सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि कई फुटेज में संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दी हैं, जिनका तकनीकी विश्लेषण कराया जा रहा है।

एफआईआर में इनके नाम

1-रामशंकर यादव टिन्नू : ट्रस्ट महासचिव चंपतराय का पहले ड्राइवर रहा और मंदिर के लगभग समस्त कार्यों में इसका सीधा दखल मिला। दानपात्रों की चाबियां भी इसी के पास पाई गईं।

2-अनुकल्प मिश्र : नकदी की गणना में संलग्न रहा कर्मी है। इसी को मास्टरमाइंड बताया गया है। इसके कौशलपुरी स्थित घर से 20 लाख की बरामदगी हुई।

3-लवकुश मिश्र : रिश्ते में अनुकल्प मिश्र का बहनोई है। इसके घर से लगभग दस लाख रुपये नकद मिले थे।

4- मनीष यादव : रिश्ते में टिन्नू यादव का भतीजा है। इसके यहां से भी कुछ नकदी बरामद हुई है।

5 -सुभाष श्रीवास्तव : यह नकदी की गणना की निगरानी करता ।

6-अविनाश शुक्ल : गणना से जुड़ा रहा। इसके खाते से पांच लाख रुपये रिकवर किए गए थे।

7-करुणेश पांडेय : गणना से जुड़ा रहा और अनुकल्प का काफी करीबी बताया गया।

8-रमाशंकर मिश्र : नकदी की गणना से जुड़ा रहा। इसके पास से भी कुछ नकदी बरामद हुई थी।

 

इन धाराओं में दर्ज हुई प्राथमिकी

1- बीएनएस की धारा-306 : संपत्ति की चोरी। सात वर्ष की सजा का प्रावधान।

का प्रावधान।

2- बीएनएस की धारा- 316(5) : आपराधिक विश्वासघात। आजीवन कारावास या दस वर्ष तक की सजा।

3- बीएनएस की धारा-317(4) व 317(5) : चोरी या गबन की संपत्ति को जानबूझकर छिपाना या निस्तारण में मदद करना। तीन से सात वर्ष तक की सजा।

4- बीएनएस की धारा-61 : योजनाबद्ध रूप से आपराधिक षड्यंत्र रचना। अपराध साबित हो जाने पर मुख्य अपराध के बराबर सजा।

5- बीएनएस की धारा- 3 (5) : सामूहिक रूप से संगठित होकर अपराध करना। अपराध साबित हो जाने पर मुख्य अपराध के बराबर सजा।

6-बीएनएस की धारा-305 : पूजा/उपासना के लिए समर्पित किसी भवन, तंबू या जलयान में रखी संपत्ति की चोरी। सात वर्ष तक का कारावास और जुर्माना

7- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(ए) सहपठित धारा 13(2) : लोक सेवक द्वारा अपने पद के कारण सौंपी गई या अपने नियंत्रण में आई संपत्ति/राशि का बेईमानी से गबन, दुरुपयोग या हेराफेरी करना। न्यूनतम चार वर्ष से अधिकतम 10 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना।

दबाव में दिया चंपत राय ने इस्तीफा

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा आरएसएस के दबाव में लिखवाया गया। इस्तीफे की ‘स्क्रिप्ट’ हरिद्वार में 8 दिन पहले 18 और 19 जून को विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान लिखी गई थी, जिसमें चंपत राय भी शामिल थे। इस बैठक में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने राम मंदिर चढ़ावे में हुई चोरी की घटना पर गहन चर्चा की। होसबोले ने चंपत राय और व्यवस्था प्रमुख गोपाल राव को तलब किया था। राम मंदिर के चढ़ावे और दान के हिसाब-किताब में सामने आईं गंभीर खामियों को लेकर संघ नेतृत्व ने दोनों को कड़ी फटकार लगाई और स्पष्टीकरण मांगा। इससे चंपत राय पर दबाव काफी बढ़ गया और उन्हें 25 जून की रात तक पद छोड़ने का अंतिम निर्देश दे दिया गया था। उन्होंने अंततः शुक्रवार सुबह अपना इस्तीफा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को सौंप दिया। हरिद्वार में हुई बैठक के परिणामस्वरूप और दान चोरी विवाद के कारण साधु-संतों में बढ़े भारी आक्रोश को देखते हुए 26 जून से अयोध्या के कारसेवकपुरम में होने वाली विहिप की 4 दिवसीय बड़ी बैठक को फिलहाल टालना पड़ा है। साधु-संतों के आक्रोश को देखते हुए यह फैसला लिया गया।

 

आधुनिक रावणों को नहीं बख्शेंगे: धीरेंद्र शास्त्री

राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी को लेकर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसमें शामिल लोगों को आधुनिक युग का ‘रावण’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के दान पात्र में चोरी केवल धन की नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की पवित्र श्रद्धा और विश्वास की चोरी है। शास्त्री ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि ऐसे कृत्य करने वालों को न केवल सरकारी कानून के तहत दंड मिलेगा, बल्कि उन्हें ईश्वर के ‘महादंड’ का भी सामना करना पड़ेगा, जिसका परिणाम सर्वनाश के रूप में होगा।

 

श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ हुआ: प्रियंका गांधी

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि यह मामला सिर्फ वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि देश-विदेश के करोड़ों राम भक्तों की धार्मिक भावनाओं और अटूट आस्था से जुड़ा हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभु श्री राम के चरणों में अर्पित किया जाने वाला दान श्रद्धालुओं की परम श्रद्धा का प्रतीक है और इसमें किसी भी प्रकार की हेराफेरी या धांधली को बेहद गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की अत्यंत निष्पक्ष, गहन और पारदर्शी जांच कराने की पुरजोर मांग की है ताकि इस मामले से जुड़े सच को किसी भी स्तर पर दबाया या छुपाया न जा सके।

 

जेल में टिन्नू को नहीं आई नींद

जेल सूत्रों ने मुताबिक, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत 8 आरोपियों को फैजाबाद जेल में पहली रात नींद नहीं आई। सभी करवटें बदलते रहे। इस कांड को लेकर सभी आपस में चर्चा करते और कहासुनी भी करते रहे। सोमवार को उन्हें दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा। इस बीच, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने राम मंदिर में अरविंद केजरीवाल के वीआईपी ट्रीटमेंट पर सवाल उठाए हैं। ‘एक्स’ पर दो तस्वीरें शेयर कर पूछा- केजरीवाल के लिए कैमरे और विशेष छूट, लेकिन बाकियों के लिए कड़े नियम? कुछ दिन पहले जब मैंने दर्शन किए, तब व्यवस्था अलग थी। सरकार बताए कि ये रिश्ता क्या कहलाता है?

 

अयोध्या को बनाएंगे सियाराम-धाम- अखिलेश

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए अयोध्या के विकास और वहां के नागरिकों के पारंपरिक अधिकारों को लेकर एक बड़ा संकल्प लिया है। उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा कि “हम धर्मनिष्ठता और सत्यनिष्ठता के साथ ये संकल्प लेते हैं कि नई सरकार बनाकर ‘अयोध्या’ को एक ऐसी अनुपम-अनुकरणीय धार्मिक नगरी के रूप में विकसित करेंगे, जहां विश्व भर से आए श्रद्धालु सच्ची आध्यात्मिकता की अद्वितीय अनुभूति करेंगे। प्रभु के आशीर्वाद के साथ, हम अयोध्या के सनातन मान को आस्था-श्रद्धा, अखंड विश्वास और सच्ची भावना के ‘सियाराम-धाम’ के रूप में पुनर्स्थापित और पल्लवित करेंगे।

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