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संजय कुशवाहा के दलान में आदमपुर थाना का सलाम चंद पैसों के लिये खाकी बनी गुलाम पुलिस की नाक के नीचे कॉलोनी बनी बसों का अड्डा, बच्चों की जान से खिलवाड़!

अवैध पार्किंग पर खामोश खाकी? दीवार तोड़ी, सड़क घेरकर कथित वसूली

  • शिकायतकर्ता को धमकी के आरोप ने बढ़ाए सवाल
  • आदमपुर की गंगानगर कॉलोनी में कथित अवैध बस पार्किंग का खेल
  • प्रति बस 1000 से 1500 रुपए वसूली का आरोप, पुलिस की भूमिका पर सवाल
  • प्राथमिक विद्यालय के सामने भारी बसों की आवाजाही, बच्चों की सुरक्षा खतरे में
  • दो बच्चों के पैरों पर बस का पहिया चढ़ने का स्थानीय लोगों का दावा
  • बसों की सुविधा के लिए स्कूल की दीवार तोड़ने का आरोप, जिम्मेदार कौन?
  • शिकायतकर्ता को कथित जान से मारने की धमकी, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

वाराणसी। आदमपुर थाना क्षेत्र की ए-16/1 गंगानगर कॉलोनी में कथित अवैध बस पार्किंग को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। आरोप है कि संजय कुशवाहा द्वारा कॉलोनी की सड़क पर बिना वैध अनुमति बड़ी-बड़ी पर्यटक बसों और अन्य वाहनों की पार्किंग कराई जा रही है तथा प्रति बस प्रतिदिन करीब एक हजार से डेढ़ हजार रुपये तक की कथित वसूली की जाती है। मामला इसलिए और गंभीर है क्योंकि पार्किंग के आसपास प्राथमिक विद्यालय है, जहां छोटे-छोटे बच्चों का रोजाना आवागमन होता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि पूर्व में दो बच्चों के पैरों पर बस का पहिया चढ़ने की घटनाएं भी हो चुकी हैं। इसके बावजूद भारी बसों की आवाजाही और पार्किंग जारी रहने का आरोप है। इतना ही नहीं, बसों को आसानी से निकालने के लिए विद्यालय की करीब चार फुट ऊंची दीवार को तोड़कर छोटा किए जाने का भी दावा किया गया है। सवाल यह है कि यदि सार्वजनिक सड़क पर भारी वाहनों की कथित पार्किंग लंबे समय से चल रही है तो स्थानीय पुलिस की नजर इससे कैसे बची रही। शिकायतकर्ता अरविंद का आरोप है कि पुलिस और संबंधित विभागों को शिकायतों की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। यही नहीं, शिकायतकर्ता अरविंद को जान से मारने की धमकी दिए जाने के आरोप ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि शिकायतकर्ता को वास्तव में धमकाया गया है तो अब तक मुकदमा, जांच और सुरक्षा की कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

पुलिस की चौखट पर शिकायत, फिर भी कार्रवाई कहां?

किसी भी इलाके में सार्वजनिक सड़क पर भारी वाहनों की लगातार पार्किंग और बच्चों के स्कूल के सामने उनका आवागमन सामान्य स्थिति नहीं मानी जा सकती। स्थानीय लोगों का आरोप है कि गंगानगर कॉलोनी में यह गतिविधि कोई छिपी हुई चीज नहीं है। बड़ी पर्यटक बसें खुलेआम सड़क पर खड़ी होती हैं और उनके आने-जाने से स्थानीय यातायात प्रभावित होता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल आदमपुर पुलिस की सक्रियता को लेकर है। यदि पुलिस को इसकी जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं? और यदि जानकारी नहीं है तो इलाके में पुलिस की गश्त और निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद मामला जस का तस बना हुआ है। इससे स्थानीय लोगों में यह संदेश जा रहा है कि प्रभावशाली व्यक्ति के खिलाफ शिकायत करना शायद बेअसर है।

कॉलोनी की सड़क बनी कथित कमाई का जरिया

स्थानीय लोगों के अनुसार कॉलोनी की सड़क पर बसों को खड़ा कराने के बदले प्रति बस 1000 से 1500 रुपए तक लिए जाते हैं। यदि यह आरोप सही है तो सार्वजनिक सड़क का इस्तेमाल निजी व्यावसायिक गतिविधि के लिए किए जाने के साथ-साथ कथित अवैध वसूली का मामला भी बनता है। प्रशासन को यह जांचना चाहिए कि पार्किंग के लिए कोई अनुमति है या नहीं, सड़क किसके अधिकार क्षेत्र में आती है और वहां व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति किसने दी। यदि कोई अनुमति नहीं है तो कार्रवाई करने में देरी क्यों हो रही है।

बच्चों के पैरों पर चढ़ा पहिया, फिर भी सबक नहीं

मामले का सबसे चिंताजनक पहलू स्कूल के छोटे बच्चों की सुरक्षा है। स्थानीय लोगों का दावा है कि पहले दो बच्चों के पैरों पर बस का पहिया चढ़ चुका है। पुलिस और प्रशासन को तत्काल सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए थी। स्कूल के समय भारी वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण, नो-पार्किंग व्यवस्था और यातायात निगरानी जैसे कदम उठाए जाने चाहिए थे।
लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या खत्म होने के बजाय बढ़ती गई। क्या वाराणसी कमिश्नरेट की पुलिस किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है।

स्कूल की दीवार भी कथित तौर पर रास्ते में आई

बसों की आवाजाही आसान बनाने के लिए प्राथमिक विद्यालय की करीब चार फुट ऊंची दीवार को तोड़कर छोटा किए जाने का आरोप भी बेहद गंभीर है। यदि विद्यालय की संपत्ति में इस तरह का परिवर्तन किया गया है तो संबंधित विभागों की अनुमति की जांच होनी चाहिए। पुलिस को भी यह देखना चाहिए कि सार्वजनिक या संस्थागत संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का कोई मामला बनता है या नहीं। आखिर किसके इशारे पर दीवार में बदलाव हुआ और संबंधित विभागों ने इस पर आपत्ति क्यों नहीं की।

‘कहीं शिकायत कर लो, कोई कुछ नहीं कर सकता’

स्थानीय लोगों का आरोप है कि संजय कुशवाहा क्षेत्र में दबंग व्यक्ति के रूप में प्रभाव रखते हैं और कथित तौर पर यह कहते हैं कि कहीं भी शिकायत कर लो, उनका कोई कुछ नहीं कर सकता। यदि शिकायतकर्ताओं को व्यवस्था का मजाक उड़ाते हुए खुलेआम चुनौती दे।
लोगों का यह भी आरोप है कि स्थानीय थाना, नगर निगम और परिवहन विभाग के कुछ लोगों को कथित सुविधा शुल्क देकर मैनेज किया गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुलिस और प्रशासन के लिए इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

धमकी के आरोप ने पुलिस की परीक्षा बढ़ाई

मामले में दूसरा गंभीर आरोप शिकायतकर्ता अरविंद कुमार को धमकी दिए जाने का है। आरोप है कि राम जनम ने शिकायत करने और शिकायत की जानकारी मिलने पर जान से हाथ धोने की धमकी दी। यह आरोप सत्य है या नहीं। लेकिन पुलिस के सामने कम से कम दो स्पष्ट जिम्मेदारियां हैं पहली शिकायतकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करना और दूसरी, धमकी के आरोप की निष्पक्ष जांच करना। शिकायतकर्ता ने लिखित शिकायत दी तो पुलिस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उस पर क्या कार्रवाई की गई।

जेपीएम स्कूल की आड़ में कथित व्यावसायिक गतिविधियां

स्थानीय लोगों ने जेपीएम इंग्लिश स्कूल के संचालन से जुड़े राम जनम पर स्कूल की आड़ में मीटिंग हाल के नाम पर लॉन और लॉज चलाने का आरोप भी लगाया है। इन आरोपों की जांच के लिए भवन का वास्तविक उपयोग, मानचित्र, अग्निशमन व्यवस्था, पार्किंग, व्यापारिक अनुमति और अन्य वैधानिक दस्तावेजों की जांच आवश्यक है। यदि सभी गतिविधियां नियमों के अनुरूप हैं तो संबंधित पक्ष को दस्तावेजों के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

पुलिस की भूमिका सबसे अहम

इस पूरे प्रकरण में नगर निगम, परिवहन विभाग और शिक्षा विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन कानून-व्यवस्था और शिकायतकर्ता की सुरक्षा के लिहाज से पुलिस की भूमिका सबसे अहम हो जाती है।
यदि सार्वजनिक सड़क पर भारी बसों की आवाजाही से दुर्घटना का खतरा है तो पुलिस को यातायात व्यवस्था लागू करनी चाहिए। यदि धमकी का आरोप है तो पुलिस को शिकायत दर्ज कर जांच करनी चाहिए। शिकायत के बावजूद सब कुछ पहले जैसा चलता रहे तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर पुलिस किसका इंतजार कर रही है।

हादसे के बाद जागेगी खाकी या पहले

गंगानगर कॉलोनी का मामला सिर्फ पार्किंग विवाद नहीं है। यह सीधे तौर पर सार्वजनिक सड़क, स्कूल के बच्चों की सुरक्षा, कथित अवैध वसूली और शिकायतकर्ताओं के संरक्षण से जुड़ा मामला है। स्थानीय लोगों की मांग है कि पुलिस और प्रशासन संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण करे। बस पार्किंग की वैधता की जांच हो। स्कूल की दीवार से जुड़े आरोपों की जांच हो। कथित वसूली की पड़ताल की जाए। धमकी के आरोप पर शिकायतकर्ता का बयान लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए। क्या पुलिस किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है या इस बार हादसे से पहले ही कार्रवाई होगी।

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