धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा के बाद कोमा में योगी सरकार,युवाओ का रुख ही तय करेगा जीत- हार
प्रधान के इस्तीफे का यूपी विधानसभा चुनाव पर असर पड़ना तय

- पेपर लीक के आरोपों से घिरी है योगी सरकार, कॉकरोचों का विपक्ष को सपोर्ट तय करेगा जीत-हार
- धर्मेद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर से योगी सरकार को चेतावनी
- यूपी में किसी विरोध-प्रदर्शन को आंदोलन में न बदलने देने पर प्रशासन मुस्तैद
- कॉकरोच जनता पार्टी की जीत से बढ़ी युवाओं की ताकत
- भाजपा युवाओं की मांगों को हल्के में ले रही, विपक्ष नहीं
- जेन जी संवाद का आयोजन करेगी समाजवादी पार्टी
- कांग्रेस ने बनाया युवाओं के एक और जंतर-मंतर का प्लान

नई दिल्ली/लखनऊ। दिल्ली समेत पूरे भारत में पेपर लीक के खिलाफ जेन जी और युवाओं के आंदोलन के 36 दिन बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा असल में भाजपा की केंद्रीय और राज्यों की डबल इंजन सत्ताओं की करारी हार है। बीते 8 साल में यह दूसरी बार है कि केंद्र की मोदी सरकार के किसी कैबिनेट मंत्री को कुर्सी छोड़नी पड़ी हो। भाजपा की हार और प्रशासनिक कमजोरी आने वाले यूपी विधानसभा चुनाव में भी भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभर सकती है। उधर, इस जीत से कॉकरोच जनता पार्टी की भारत के युवाओं में छवि और ज्यादा मजबूत हुई है। खबर है कि कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके भीम आर्मी के टिकट से यूपी का आगामी चुनाव भी लड़ सकते हैं। अभी यह तय नहीं है कि कॉकरोच जनता पार्टी का राजनीतिक भविष्य क्या होगा, लेकिन इतना तय है कि इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म से अपनी ताकत जुटाने वाले देश के युवाओं ने देश की राजनीति को हिंदू-मुस्लिम के विभाजन से अलग शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और गरीबी जैसे मुद्दों से जोड़ने की तैयारी कर ली है, जिन पर यूपी की भाजपा सरकार का पाया बहुत ढीला है।
योगी सरकार ने आंदोलन को दबाया
यूपी के युवाओं को इस बात का मलाल रहेगा कि पेपर लीक के मुद्दे पर इलाहाबाद और वाराणसी जैसे शहरों में हुए आंदोलन को योगी सरकार ने बेहद सख्ती से कुचला। नतीजा यह रहा कि यूपी से हजारों युवाओं ने दिल्ली की राह पकड़ी और जंतर-मंतर पर पुलिस की लाठियां खाने के बावजूद जीत हासिल की। हालांकि, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के संसद में बिल पेश करने से मुद्दा सुलझेगा नहीं, क्योंकि यूपी में पेपर लीक का लंबा इतिहास रहा है।
यूपी में पेपर लीक का इतिहास
2012 उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा पेपर लीक विवाद
2012 में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप सामने आए। यह मामला तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल से जुड़ा था। अभ्यर्थियों की शिकायतों और आरोपों के बाद भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने और मामले की जांच कराने का निर्णय लिया गया।
2017 यूपी पीसीएस और अन्य भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता
2017 में उत्तर प्रदेश में पीसीएस और अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी सामने आई थी। यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के शुरुआती कार्यकाल से जुड़ा था। अभ्यर्थियों की शिकायतों और जांच में कुछ परीक्षाओं की प्रक्रिया, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और चयन प्रणाली पर सवाल उठे। संबंधित मामलों की जांच कराई गई और कुछ परीक्षाओं में अनियमितता पाए जाने पर उन्हें रद्द करने या प्रक्रिया में सुधारात्मक कार्रवाई की गई। इन घटनाओं के बाद उत्तर प्रदेश सरकार और भर्ती आयोगों ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया।
2022 उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती और अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक आरोप
2022 में उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती और अन्य सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप सामने आए। यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल से जुड़ा था। अभ्यर्थियों की शिकायतों के बाद सरकार और संबंधित भर्ती एजेंसियों ने आरोपों की जांच शुरू कराई तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया।
2024 यूपीएससी सिविल सेवा फर्जीवाड़ा मामला
2024 में संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ा फर्जीवाड़े का मामला सामने आया, जिसमें परीक्षा प्रक्रिया में धोखाधड़ी और गलत पहचान के इस्तेमाल के आरोप लगे। यह मामला केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल से जुड़ा था। उम्मीदवारों द्वारा लगाए आरोपों के अनुसार कुछ अभ्यर्थियों ने फर्जी दस्तावेज, गलत पहचान या अनुचित तरीकों का सहारा लेकर परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की। मामले की जानकारी सामने आने के बाद संबंधित एजेंसियों और पुलिस ने जांच शुरू की तथा आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। जांच में दोषी पाए जाने वालों पर कानूनी कार्रवाई और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े नियमों के तहत कदम उठाए गए।
2024 उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामला
2024 में उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आया, जिससे राज्य की सबसे बड़ी भर्ती परीक्षाओं में से एक विवादों में आ गई। यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल से जुड़ा था। उम्मीदवारों द्वारा लगाए गए आरोपों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से अभ्यर्थियों तक पहुंच गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने परीक्षा को रद्द कर दिया, जिससे करीब 60 लाख से अधिक अभ्यर्थी प्रभावित हुए। परीक्षा रद्द करने के बाद मामले की जांच शुरू की गई और पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
2024 उत्तर प्रदेश आरओ/एआरओ परीक्षा पेपर लीक मामला
2024 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आया, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल से की घटना थी। इस मामले में परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होकर कुछ अभ्यर्थियों तक पहुंच गया था, जिसके बाद अभ्यर्थियों ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और विरोध प्रदर्शन किए। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार और यूपीएसएसएससी ने परीक्षा को निरस्त करने का फैसला लिया। इसके बाद मामले की जांच शुरू की गई और पेपर लीक में शामिल संदिग्धों तथा नेटवर्क की भूमिका की जांच की गई।

सपा पर दोष मढ़कर बच नहीं सकती भाजपा
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ आज बेशक समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार पर पेपर लीक का दोष मढ़ रही है। लेकिन जेन जी को यह बखूबी मालूम है कि खुद योगी की सरकार भी अपने कार्यकाल में पेपर लीक को रोक नहीं पाई। उत्तरप्रदेश सरकार ने जुलाई 2024 में उत्तर प्रदेश पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 लागू किया। संगठित पेपर लीक गिरोहों के लिए आजीवन कारावास, 1 करोड़ रुपए तक जुर्माना और संपत्ति जब्त करने का प्रावधान रखा गया है। परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए दो साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। लेकिन, इस कानून के बाद भी यूपी सरकार 2024 में ही पेपर लीक को रोक नहीं सकी। ऐसे में चुनाव के दौरान युवा अपने भविष्य की सुरक्षा को लेकर सरकार के काम पर सवाल तो उठाएंगे ही, साथ में रोजगार की मांग पर मिलती राज्य सरकार की पुलिस की लाठियों पर भी सवाल करेंगे। इनका जवाब न तो भाजपा के पास है और न ही केंद्र सरकार के पास, जो खुद दागी है। यूपी में जौहर यूनिवर्सिटी को तोड़ने के योगी सरकार के फैसले के खिलाफ भी युवाओं का आंदोलन जारी है। ऐसे में तय है कि योगी सरकार राज्य में युवाओं की मांग को अनदेखा करने की भूल नहीं करेगी। साथ ही वह कॉकरोच जनता पार्टी की आगामी रणनीति को भी कमजोर समझने की गलती नहीं करेगी।

कॉकरोचों ने दी धमकी
योगी सरकार को चिंता है कि कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन राज्य में भी फैल सकता है, खासकर 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के मंच से ही योगी सरकार को पेपर लीक रोकने या फिर जंतर-मंतर जैसा आंदोलन करने की परोक्ष धमकी भी दी गई। कहा गया कि सरकार संभल जाए, वरना जंतर-मंतर पर जितने युवा यूपी से आए, उससे कहीं ज्यादा योगी सरकार के खिलाफ लखनऊ में जुट सकते हैं।
बुधवार को गोरखपुर में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर “नफरत फैलाने और छात्रों को भड़काने” का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई कि उनकी सरकार बढ़ते प्रदर्शन को लेकर सतर्क है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश पुलिस को हाईअलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस से कहा गया है कि किसी भी प्रदर्शन को बड़े आंदोलन में बदलने से रोका जाए। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि विरोध प्रदर्शनों को जल्द से जल्द नियंत्रित किया जाए। फिलहाल यह रणनीति काम करती दिख रही है। प्रयागराज और कानपुर में हाल ही में पेपर लीक के आरोपों को लेकर हुए प्रदर्शन कुछ घंटों में ही खत्म करा दिए गए।
हालांकि, मुख्यमंत्री के खास सिपहसालार राज्य में किसी भी विरोध प्रदर्शन को बड़ा आंदोलन बनने से रोकने की अपनी रणनीति के तहत आश्वस्त हैं। मुख्यमंत्री योगी की छवि एक सख्त प्रशासक की है, जो किसी भी तरह की अशांति को बर्दाश्त नहीं करते। उत्तर प्रदेश के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कॉकरोचों का आंदोलन ऐसे युवाओं के द्वारा संचालित है, जिनमें कई पहली या दूसरी बार वोट देने वाले हैं। उनके लिए मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण है और वे उसी पर ध्यान दे रहे हैं। यह सत्ताधारी सरकारों के लिए चुनौती है, खासकर उन पांच राज्यों में जहां आने वाले महीनों में चुनाव होने हैं। इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि यह आंदोलन उत्तर प्रदेश की राजनीति को भी प्रभावित करे। हालांकि, अभी चुनावी असर का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी, क्योंकि राजनीतिक मुद्दे अक्सर चुनाव के करीब जाकर तय होते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी पेपर लीक एक मुद्दा था, लेकिन ‘संविधान बचाओ’ का मुद्दा ज्यादा प्रभावी रहा। 2027 के विधानसभा चुनाव के करीब ही पता चलेगा कि कौन सा मुद्दा मतदाताओं पर ज्यादा असर डालता है।
अगर कॉकरोच सपा को सपोर्ट करे तो?

सपा सांसद डिंपल यादव के जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने के बाद समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को पूरे राज्य में ले जाने की तैयारी कर रही है। पार्टी ‘जेन जी संवाद’ नाम से अभियान शुरू करेगी, जिसके तहत पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव अलग-अलग जिलों में युवाओं से बातचीत करेंगे। सपा नेताओं के अनुसार, अखिलेश यादव इस योजना को अंतिम रूप देने के लिए लखनऊ पहुंच चुके हैं। उत्तर प्रदेश के हर घर में जेन जी युवा हैं। सपा नेताओं का मानना है कि युवा इन मुद्दों को समझ रहे हैं और अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। पेपर लीक, महंगी शिक्षा और बढ़ती बेरोजगारी उनके बड़े मुद्दे हैं। वे अब रुकने वाले नहीं हैं और वे भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ वोट करेंगे। हम भी अपना पक्ष लोगों के सामने रखेंगे। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सुधांशु बाजपेयी का मानना है कि जेन जी प्रदर्शन का चुनावी असर निश्चित रूप से होगा। कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में जंतर-मंतर जैसे संयुक्त प्रदर्शन की योजना बना रही है। यह किसी राजनीतिक पार्टी के बैनर तले नहीं होगा, बल्कि सिविल सोसाइटी के समर्थन से होगा ताकि आम लोग भी इसमें शामिल हो सकें। जंतर-मंतर पर हुए युवाओं के प्रदर्शन में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने जिस तरह से आगे बढ़कर जेन जी को सपोर्ट किया है, उसका राजनीतिक लाभ उन्हें आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा। ऐसे में अगर कॉकरोच जनता पार्टी बिना कोई राजनीतिक चोला ओढ़े, अगर किसी एक दल को समर्थन की घोषणा कर दें तो भाजपा के लिए दोबारा सत्ता का रोडमैप बेहद मुश्किल हो सकता है।
युवाओं के मुद्दे बेअसर- भाजपा
भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि पहले भी ऐसे दावे किए गए थे, लेकिन वे चुनावों में सही साबित नहीं हुए। उन्होंने कहा, “किसान आंदोलन, नागरिकता संशोधन कानून आंदोलन और कोरोना संकट के समय भी कहा गया था कि इन मुद्दों का असर 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और नतीजे हमारे पक्ष में आए। इस बार भी विपक्ष मुद्दा बनाने की कोशिश करेगा, लेकिन नतीजे फिर से भाजपा के पक्ष में होंगे।” युवाओं को पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर जोड़ने की कोशिश के बीच भाजपा चुनावी रणनीति में शासन और कानून व्यवस्था को मुख्य मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है। गोरखपुर में अपने भाषण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछली समाजवादी पार्टी सरकार पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्तियों में गड़बड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि 86 पदों में से 56 पद एक ही जाति के उम्मीदवारों को दिए गए थे और एक अयोग्य उम्मीदवार को टॉपर बना दिया गया था। उन्होंने विपक्षी दलों पर जाति के आधार पर समाज को बांटने, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए नफरत फैलाने और छात्रों को भड़काने का भी आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि विपक्ष की सहानुभूति आम लोगों के बजाय माफियाओं के साथ है। उन्होंने कहा, “आज उत्तर प्रदेश माफिया मुक्त, गुंडा मुक्त, दंगा मुक्त और कर्फ्यू मुक्त है। विपक्ष इस बदलाव को स्वीकार नहीं कर पा रहा है, क्योंकि उनके शासन में राज्य ने दंगे, कर्फ्यू, लूट और अराजकता देखी थी।” मुख्यमंत्री के करीबी सूत्रों ने बताया कि योगी आदित्यनाथ अपने चुनावी भाषणों में पिछली सपा सरकार की कथित नाकामियों का जिक्र करते रहेंगे। उनके अनुसार, BJP की रणनीति 2027 के चुनाव को इस रूप में पेश करने की है कि मतदाताओं के सामने दो विकल्प हैं। एक तरफ ‘योगी आदित्यनाथ का सख्त शासन’ और दूसरी तरफ ‘समाजवादी पार्टी के दौर की कानून व्यवस्था की स्थिति’।
योगी बोले- नीट के दोषियों की संपत्ति जब्त करेंगे
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि नीट पेपर लीक के दोषियों की संपत्ति जब्त की जाएगी। वहीं, अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब यूपी में 2027 में सत्ता परिवर्तन होगा। वहीं, केंद्रीय शिक्षामंत्री के इस्तीफे पर लोगों ने मिठाई बांटकर जश्न मनाया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अखिलेश यादव ने कहा कि ये छात्रों के आंदोलन की जीत है। इसी तरह 2027 के चुनाव में यूपी में भी सत्ता परिवर्तन होगा। वहीं, लखनऊ में नौकरी की मांग को लेकर शिक्षक अभ्यर्थियों ने मायावती का आवास घेरा। योगी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और सपा के शासन में युवाओं का शोषण हुआ और नकल माफिया को संरक्षण मिला। कहा कि छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। नीट परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपियों पर कार्रवाई का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दोषियों की संपत्तियां भी जब्त की जाएंगी। वहीं, पेपर लीक पर संसद में बिल भी आएगा।
भीम आर्मी से चुनाव लड़ेंगे अभिजीत दीपके?
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया है कि कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके भविष्य में भीम आर्मी के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं। झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद ने कहा कि यह आंदोलन अभी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना नेता मानता है और अपनी समस्याओं के समाधान के लिए उनकी ओर देखता है। दुबे ने संसद भवन परिसर में पत्रकारों से कहा, “हर आंदोलन से राजनीतिक नेता निकले हैं। जेपी आंदोलन से लालू प्रसाद यादव जैसे नेता निकले। अरविंद केजरीवाल भी अन्ना हजारे के आंदोलन से ही सामने आए।” उन्होंने आगे कहा, “अभिजीत दीपके भी भविष्य में चुनाव लड़ सकते हैं। नेपाल में भी जेन जी आंदोलन से जुड़े लोग आखिरकार किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल हो गए। इसी तरह अभिजीत दिपके भी किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल होंगे। मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हूं कि वह भीम आर्मी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे।”





