सूबे के डीजीपी का धन्यवाद, सीपी मोहित अग्रवाल, डीसीपी नीतू कादयान, SOG-2 के पंकज चौहान ने बीजेपी एमएलए अवधेश के भतीजे गौरव के जुएखाने को किया तबाह व बर्बाद

- अचूक संघर्ष में खबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आया पुलिस महकमा
- सिगरा में कथित जुए के अड्डे पर पड़ा छापा 47 गिरफ्तार
- सिगरा में कथित जुए के अड्डे पर डीसीपी क्राइम के साथ एसओजी-2 की बड़ी छापेमारी
- दरवाजा नहीं खुला तो पुलिस टीम ने तोड़कर वातानुकूलित हॉल में किया प्रवेश
- मौके से 47 जुआरी गिरफ्तार, 19 लाख 53 हजार रुपये नकद बरामद
- वाराणसी समेत आसपास के सात जिलों के लोगों की मौजूदगी का दावा
- कई वाहन, मोबाइल फोन और अन्य सामान पुलिस ने कब्जे में लिया
- भाजपा के पिंडरा विधायक अवधेश सिंह के भतीजे गौरव सिंह पिंचू के कार्रवाई से पहले फरार होने की खबर
- सबसे पड़ा यक्ष प्रश्न बाहर से आई टीम को अड्डा मिल गया तो स्थानीय पुलिस की निगरानी कहां थी? खबर छपी तो खुल गया खेल!

वाराणसी/ सिगरा में कथित जुए के अड्डे को लेकर अचूक संघर्ष द्वारा लगातार उठाए गए सवालों का असर आखिरकार दिखाई दिया। जिस स्थान पर कथित तौर पर बड़े पैमाने पर जुए का खेल चलने, लाखों रुपये के दांव लगने और संदिग्ध गतिविधियों को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे थे, वहां पुलिस की विशेष टीम ने धावा बोल दिया। डीसीपी क्राइम के साथ एसओजी-2 की टीम ने छापेमारी कर 47 लोगों को गिरफ्तार किया और 19 लाख 53 हजार रुपये नकद बरामद किए।
कार्रवाई के दौरान टीम को उस समय अंदर प्रवेश करने में मशक्कत करनी पड़ी जब दरवाजा नहीं खोला गया। पुलिस टीम ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो वातानुकूलित हॉल में कथित तौर पर जुए के दांव लगाए जा रहे थे। एसओजी की टीम देखते ही वहां अफरा तफरी मच गई। पुलिस ने मौके से कई वाहन, मोबाइल फोन और अन्य सामान भी कब्जे में लिया। कार्रवाई में वाराणसी के अलावा आसपास के सात जिलों के लोगों के जुए में शामिल होने की बात सामने आई है। इससे यह सवाल और गंभीर हो गया है कि यदि इतने बड़े स्तर पर दूसरे जिलों से लोग यहां पहुंच रहे थे और लाखों रुपये का कथित खेल चल रहा था तो स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था आखिर किस काम की थी?
अचूक संघर्ष ने अपनी खबर में जिस सवाल को सामने रखा था ‘अवैध धंधा है तो कार्रवाई क्यों नहीं?’ विशेष टीम की छापेमारी के बाद अब उसी सवाल का जवाब पुलिस की कार्रवाई ने तलाशना शुरू कर दिया है।


सवाल उठे और पुलिस की नींद टूटी?
सिगरा क्षेत्र में कथित जुए के अड्डे को लेकर भाजपा विधायक अवधेश सिंह के कुकर्मी भतीजे गौरव सिंह पिंचु की लंबे समय से चर्चाओं और शिकायतों की बात सामने आती रही थी। कुबेर कॉम्प्लेक्स के सामने कथित तौर पर बड़े पैमाने पर जुआ चलने और रोजाना भारी रकम के दांव लगने के दावे किए जा रहे थे। अदिति गेस्ट हाउस के लाइसेंस और उसके वास्तविक उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। इन गंभीर सवालों के बावजूद स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं होने से पुलिस की निगरानी व्यवस्था कठघरे में थी। अब विशेष टीम की कार्रवाई में 47 लोगों की गिरफ्तारी और 19.53 लाख रुपये की बरामदगी ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या स्थानीय पुलिस को इस गतिविधि की भनक नहीं थी? यदि नहीं थी तो उसकी मुखबिरी और बीट पुलिसिंग व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। और यदि जानकारी थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यही वह सवाल है जिसका जवाब अब सिगरा पुलिस और उसके वरिष्ठ अधिकारियों को देना होगा।
दरवाजा नहीं खुला तो तोड़कर अंदर घुसी टीम
बताया जा रहा है कि एसओजी-2 की टीम जब मौके पर पहुंची तो पहले दरवाजा खटखटाया गया। दरवाजा नहीं खुलने पर टीम ने उसे तोड़कर अंदर प्रवेश किया। भीतर का दृश्य देखकर पुलिसकर्मी भी चौंक गए। वातानुकूलित हॉल में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और कथित तौर पर जुए के दांव लगाए जा रहे थे। पुलिस टीम को देखते ही वहां हड़कंप मच गया। कुछ लोगों के भागने की भी बात सामने आई है। हालांकि इस संबंध में पुलिस की आधिकारिक जांच से ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी। मौके से बरामद नकदी ने कार्रवाई की गंभीरता और बढ़ा दी। पुलिस के अनुसार कुल 19 लाख 53 हजार रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अलावा मोबाइल फोन, वाहन और अन्य सामान भी जब्त किया गया। अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा यह होगा कि बरामद रकम किसकी थी, उसका हिसाब कौन रख रहा था और कथित जुआ संचालन के पीछे कौन लोग थे।
47 गिरफ्तारियां, सात जिलों तक पहुंच
मौके से 47 लोगों की गिरफ्तारी इस कार्रवाई को सामान्य जुआ पकड़ने की कार्रवाई से कहीं बड़ा बनाती है। पुलिस के अनुसार इनमें वाराणसी के अलावा आसपास के सात जिलों के लोग भी शामिल थे।
यदि जांच में यह तथ्य पुष्ट होता है तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि इतने लोगों को यहां कौन बुलाता था? क्या इसके लिए कोई संगठित व्यवस्था थी? लोगों को जुए के लिए कैसे जोड़ा जाता था? दांव की रकम का हिसाब कौन रखता था? और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था? जांच में मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अहम साबित हो सकते हैं। पुलिस यदि कॉल डिटेल, चैट, भुगतान संबंधी जानकारी और संपर्कों की जांच करती है तो कथित नेटवर्क की कड़ियां सामने आ सकती हैं।

विधायक के भतीजे का नाम, कार्रवाई से पहले फरार होने की चर्चा
इस कार्रवाई में भाजपा के पिंडरा विधायक अवधेश सिंह के भतीजे गौरव सिंह पिंचू का नाम भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि छापेमारी से पहले ही वह मौके से फरार हो गया। हालांकि किसी व्यक्ति की रिश्तेदारी या राजनीतिक पहचान अपने आप में अपराध का प्रमाण नहीं है। गौरव सिंह पिंचू की वास्तविक भूमिका क्या थी, वह मौके पर क्यों था और उसके खिलाफ क्या कार्रवाई बनती है। यह जांच और साक्ष्यों के आधार पर तय होगा। लेकिन उसका नाम सामने आने के कारण मामले की जांच और अधिक पारदर्शिता के साथ किए जाने की जरूरत है।
अदिति गेस्ट हाउस के लाइसेंस पर भी उठे सवाल
जिस परिसर को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे, उसके लाइसेंस और संचालन की भी जांच जरूरी हो गई है। प्रशासन को यह देखना होगा कि परिसर किस उद्देश्य के लिए अधिकृत है और उसका वास्तविक उपयोग उसी के अनुरूप हो रहा था या नहीं। यदि वहां लंबे समय से ऐसी गतिविधियां चल रही थीं तो गेस्ट हाउस प्रबंधन, संचालक और संबंधित जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए साथ ही कथित अनैतिक गतिविधियों को लेकर पहले सामने आई शिकायतों की भी जांच जरूरी है। शिकायतें सही थी या नहीं, इसका फैसला जांच के बाद ही हो सकता है, लेकिन शिकायतों पर कार्रवाई हुई या नहीं इसकी समीक्षा जरूर होनी चाहिए। अचूक संघर्ष ने पूछा था पुलिस की नजर क्यों नहीं? पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि अचूक संघर्ष की खबर के बाद पुलिस की विशेष टीम ने कार्रवाई की। खबर में उठाए गए सवाल महज आरोप नहीं थे बल्कि प्रशासन से जवाब मांगने वाले सवाल थे यदि किसी स्थान पर बड़े पैमाने पर अवैध गतिविधि की शिकायतें हैं तो वहां निगरानी क्यों नहीं? यदि दूसरे जिलों से लोग पहुंच रहे हैं तो स्थानीय खुफिया तंत्र क्या कर रहा है? यदि लाखों रुपये का लेनदेन हो रहा है तो पुलिस को जानकारी क्यों नहीं? अब एसओजी की कार्रवाई के बाद इन सवालों को नजरअंदाज करना और मुश्किल हो गया है। क्योंकि जिस जगह को लेकर सवाल उठाए गए, वहीं पुलिस को 47 लोग और 19.53 लाख रुपये की नकदी मिली।
स्थानीय पुलिस की सक्रियता पर अब सीधा सवाल
विशेष टीम की कार्रवाई के बाद सिगरा पुलिस की भूमिका पर सवाल और तीखे हो गए हैं। यदि गतिविधि लंबे समय से चल रही थी तो स्थानीय पुलिस ने पहले कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या किसी स्तर पर शिकायत पहुंची थी? क्या बीट पुलिसकर्मियों को इसकी जानकारी थी? क्या स्थानीय मुखबिर तंत्र ने कोई सूचना दी थी?
और यदि कोई सूचना नहीं थी तो फिर इतनी बड़ी संख्या में लोगों का लगातार आना-जाना पुलिस की नजर से कैसे बचा रहा? यह सिर्फ एक जुआ अड्डे का सवाल नहीं है। यह थाना क्षेत्र में पुलिस की निगरानी, सूचना तंत्र और जवाबदेही का सवाल है।
सिर्फ जुआरियों की गिरफ्तारी काफी नहीं
47 लोगों को पकड़ना कार्रवाई का पहला चरण हो सकता है, लेकिन असली जांच अब शुरू होनी चाहिए। पुलिस को यह पता लगाना होगा कि इस कथित खेल का संचालक कौन था, रकम कहां से आती थी, कहां जाती थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े थे।
साथ ही यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि यदि इतनी बड़ी गतिविधि चल रही थी तो स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। अचूक संघर्ष ने सवाल उठाया था, पुलिस ने छापा मारकर जवाब दिया है। जिम्मेदार कौन था और इतने दिनों तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यही इस पूरे प्रकरण की सबसे बड़ी जांच है।
खबर का असर यही है कि प्रश्न अब कागज से निकलकर कार्रवाई की मेज पर पहुंच चुका है। लेकिन कार्रवाई की असली सफलता गिरफ्तारियों की संख्या से नहीं, बल्कि उस पूरे नेटवर्क और उसकी कथित मददगार व्यवस्था तक पहुंचने से तय होगी।




