सीपी मोहित अग्रवाल बाढ़ पीड़ितों का रख रहें ख्याल, मातहतों को दिए सख्त निर्देश कहा “लेते रहे इन लोगो का हाल-चाल”
अचूक संघर्ष डेस्क

● पुलिस कमिश्नर की अगुवाई में बाढ़ से जंग, राहत, सुरक्षा और सतर्कता का बना अभेद्य कवच
● गंगा-वरुणा के बढ़ते जलस्तर के बीच एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीएसी व जल पुलिस अलर्ट
● ड्रोन और मोटरबोट से निगरानी, महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता
● पुलिस कमिश्नर ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया निरीक्षण, लिया व्यवस्थाओं का जायजा
● रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए 24×7 सतर्क रहेंगी टीमें
● मोटरबोट और ड्रोन से हो रही निगरानी
● रात में ‘बोट पेट्रोलिंग’ से चोरों व अपराधियों पर नजर
● महिलाओं की सुरक्षा में कोई समझौता नहीं
● जर्जर मकानों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की अपील
● थाना प्रभारियों और एसीपी को क्षेत्रीय निगरानी की जिम्मेदारी
● अफवाहों पर कड़ी नजर, फर्जी खबर फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

वाराणसी। काशी इन दिनों गंगा और वरुणा की बाढ़ से जूझ रहा है, लेकिन इस संकट की घड़ी में उम्मीद की सबसे बड़ी किरण बनकर सामने आए हैं पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल। उन्होंने अपने नेतृत्व में ना केवल राहत और बचाव कार्यों की कमान संभाली है, बल्कि जनसुरक्षा, महिला सुरक्षा और आपराधिक घटनाओं पर नियंत्रण के लिए भी एक मजबूत व्यवस्था खड़ी कर दी है। शहर की बाढ़ प्रभावित बस्तियों में एनडीआरएफ की बोट हो या पीएसी के जवान, हर ओर एक ही संदेश है हम हैं तैयार, आप निश्चिंत रहें। प्रशासनिक सजगता व पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के नेतृत्व ने इस संकट को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया है। बाढ़ की भयावहता के बीच राहत, सुरक्षा और संवेदना का जो त्रिकोणिक मॉडल उन्होंने तैयार किया है, वह किसी भी आपदा प्रबंधन की मिसाल बन सकता है।

रेस्क्यू और राहत में समर्पण की मिसाल
पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल की अगुवाई में बाढ़ में फंसे लोगों की मदद के लिए 24 घंटे काम कर रही एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें बोट से गली-गली जाकर राहत पहुंचा रही हैं। डायल-112 पर कॉल करते ही संबंधित क्षेत्र में मोटरबोट के साथ पुलिस और राहत कर्मी पहुंच रहे हैं। अब तक हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।
नारी सुरक्षा बनी सर्वोच्च प्राथमिकता
शिविरों में रह रही महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा को लेकर विशेष ध्यान दिया गया है। महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती ने पीड़ित महिलाओं के मन से डर और झिझक को खत्म किया है। मोहित अग्रवाल ने स्वयं कई शिविरों का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया कि हर महिला खुद को महफूज महसूस करे।

रात में भी पुलिस है सक्रिय
अक्सर बाढ़ जैसे हालात में रात के अंधेरे में अपराधी तत्व सक्रिय हो जाते हैं। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पा रहा, क्योंकि पुलिस की ‘बोट पेट्रोलिंग’ रात में भी जारी है। हर नाव एक मोबाइल थाने की तरह गश्त कर रही है, जिससे चोरों और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर रोक लगी है।मोहित अग्रवाल इसकी विशेष निगरानी कर रहे है।
तकनीक का इस्तेमाल ड्रोन से निगरानी व जीपीएस ट्रैकिंग
बाढ़ग्रस्त इलाकों में ड्रोन से निगरानी की जा रही है। इससे जहां फंसे लोगों को चिन्हित करना आसान हो रहा है, वहीं दूरदराज के इलाकों की भी सटीक स्थिति सामने आ रही है। मोटरबोट और राहत वाहनों में निपीएस ट्रैकर लगाए गए हैं, जिससे उनकी गतिविधियों पर नियंत्रण और पारदर्शिता बनी हुई है।
कंट्रोल रूम बना जनता की आवाज का माध्यम
112 नंबर अब सिर्फ पुलिस कॉल नहीं, बल्कि राहत का नंबर बन गया है। कंट्रोल रूम से हर कॉल का संज्ञान तुरंत लिया जा रहा है। साथ ही, अफवाहों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। जो लोग झूठी या डर फैलाने वाली जानकारी फैला रहे हैं, उन पर सख्त कार्रवाई हो रही है।
जनता से सतर्क रहने की अपील
पुलिस कमिश्नर ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी जानकारी को सोशल मीडिया पर शेयर करने से पहले सत्यापन कर लें। जर्जर भवनों में रह रहे नागरिकों से कहा गया है कि वे राहत शिविरों में स्थानांतरित हो जाएं। प्रशासन की हर योजना का उद्देश्य सिर्फ एक है— जान और माल की सुरक्षा।
हर अधिकारी को सौंपी गई जिम्मेदारी
पुलिस आयुक्त ने हर थाना प्रभारी व एआईपी स्तर के अधिकारियों को उनके क्षेत्रों की विशेष जिम्मेदारी दी है। वे रोजाना क्षेत्रों में गश्त कर व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे हैं। इस कार्यप्रणाली से पुलिस का मानवीय और कर्तव्यपरायण चेहरा और अधिक सामने आ रहा है।
एकजुटता की मिसाल बना पुलिस कमिश्नर का राहत अभियान
पूरे शहर में पुलिस, प्रशासन, राहत एजेंसियों और समाजसेवियों की जो एकजुटता दिखाई दे रही है, वह एक मॉडल बन सकती है। पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल के नेतृत्व में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी नागरिक अकेला न पड़े, हर किसी तक मदद पहुंचे।




