
– बंगाल में भाजपा के पांच मंत्रियों को शपथ
– सीएम शुभेंदु अधिकारी पर नारडा चिटफंड मामले में घूसखोरी के दाग
– पीएम नरेंद्र मोदी समेत 20 राज्यों के सीएम और भाजपा के आला नेता मौजूद
कोलकाता/चेन्नई। पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में 4 मई को भारी जीत दर्ज करने के बाद शनिवार 9 मई को भाजपा ने सीएम शुभेंद्र अधिकारी समेत 6 मंत्रियों के साथ सरकार का गठन किया। उधर, चेन्नई में तमिलनाडु सरकार के गठन पर अभी तक सस्पेंस कायम है। बताया जाता है कि वीसीके पार्टी ने शुक्रवार देर रात को टीवीके सुप्रीमो और एक्टर विजय से समर्थन के बदले डिप्टी सीएम की कुर्सी मांगी थीत्र इसी बात को लेकर असहमति बनने के बाद टीवीके के पास केवल 116 विधायक ही रह गए, जो बहुमत से 2 कम थे। इसके कारण शनिवार को होने वाला शपथ ग्रहण टल गया।

कौन हैं शुभेंदु अधिकारी?
बांग्ला में सीएम पद की शपथ लने वाले शुभेंदु अधिकारी पहले ममता बनर्जी की टीएमसी पार्टी से जुड़े थे। उनका नाम नारदा चिटफंड घोटाले में सामने आया था। तहलका मैग्जीन के एक रिपोर्टर ने शुभेंदु को बाकी तृणमूल नेताओं के साथ कैमरे के सामने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने 2016 में शुभेंदु का नाम न लेते हुए मंच पर सार्वजनिक रूप से उन्हें रिश्वतखोर कहा था। 2020 में शुभेंदु ममता का साथ छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। वहां वे वॉशिंग मशीन में धुलकर बेदाग हो गए। उन्हीं शुभेंदु अधिकारी को पीएम मोदी ने सीएम बनने पर बधाई दी।
पांच और मंत्रियों ने भी शपथ ली
बंगाल के गवर्नर आरएन रवि ने सुवेंदु के अलावा 5 और विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। इनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टूडू और निषिथ प्रमाणिक शामिल रहे। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ लेने के बाद, पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी औपचारिक रूप से राइटर्स बिल्डिंग में प्रवेश करेंगे। यहां कोलकाता पुलिस और सेंट्रल फोर्स तैनात हैं। इससे पहले नबन्ना में पूर्व सीएम ममता बनर्जी का सचिवालय हुआ करता था। लेकिन बंगाल में परिवर्तन की लहर के साथ सत्ता में आई भाजपा ने संगीनों के साए में पुराने सचिवालय राइटर्स बिल्डिंग से राज्य का प्रशासनिक कामकाज करने का फैसला लिया है। 20 राज्यों के मुख्यमंत्री भी इस पल के गवाह बनें। बीजेपी और एनडीए शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री भी वहां मौजूद रहे। चार मई को आए विधानसभा चुनाव के परिणाम में भाजपा ने 293 में से 207 सीटों पर जीत दर्ज की। ममता बनर्जी की टीएमसी को 80 सीटों पर जीत मिली। ममता राज्य के 15 साल से मुख्यमंत्री थीं।
आईपैक और अभिषेक ने तृणमूल को हराया
सत्ता से बेदखल होने के बाद अब पश्चिम बंगाल में तृणमूल नेताओं के चुनाव कंसल्टेंसी फर्म आईपैक और पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी पर आरोप लगने लगे हैं। आपको बता दें कि पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को चुनाव के पहले चरण में प्रचार और प्रबंधन की खुली जिम्मेदारी दी थी। लेकिन पहले चरण में ही तृणमूल कांग्रेस को इस कदर नुसान हुआ कि अगले आखिरी चरण तक वह उससे उबर नहीं सकी। अभिषेक पर पार्टी कार्यकर्ताओं से बेरुखी, उनकी बातें नहीं सुनने और चुनाव प्रचार के दौरान की गई कथित गलतियों की शिकायतें सुनने को मिल रही हैं। तृणमूल के विभिन्न नेताओं ने अभिषेक पर चुनाव कंसल्टेंसी फर्म आईपैक पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने का भी आरोप लगाया है। उनका दावा है कि अगर अभिषेक ने कार्यकर्ताओं की बातों को सुनकर जमीनी हकीकत पर ध्यान दिया होता तो आज पार्टी बंगाल की सत्ता नहीं गंवाती। इन शिकायतों के बाद अब तृणमूल ने शिकायत करने वाले नेताओं को ही नोटिस थमा दिया है। सूत्रों के अनुसार, ऐसे चार नेताओं को पार्टी ने नोटिस भेजा है। बताया जाता है कि चुनाव के दौरान टिकट वितरण को लेकर भी पैसा मांगे जाने की शिकायतें हुईं, लेकिन उन्हें दबा दिया गया। अब हार के बाद इन शिकायतों ने जोर पकड़ लिया है। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि बंगाल में तृणमूल के कई नेता और कार्यकर्ता भाजपा के साथ जाने का मन बना रहे हैं।
तमिलनाडु में वीसीके ने कर दिया खेला, कर दी डिप्टी सीएम पद की मांग
एक्टर से राजनेता बन तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरे विजय की तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) को वीसीके और आईयूएमएल ने शुक्रवार को अपन समर्थन देने का वादा किया था। दोनों दलों के पास दो-दो विधायक हैं। लेकिन बताया जाता है कि शुक्रवार देर रात वीसीके ने विजय से डिप्टी सीएम पद की मांग की। वहीं, आईयूएमएल ने भी टीवीके से कैबिनेट मं मलाईदार पद मांगे। टीवीके और दोनों दलों के बीच इस पर असहमति की स्थिति होने के बाद सहमति के पत्र नहीं सौंपे गए। इससे पहले शुक्रवार देर शाम को टीवीके ने राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मिलकर 121 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंप दिया था। लेकिन बाद में वीसीके ने ऐसी कोई सहमति से इनकार कर दिया, जिससे विजय के पास बहुमत से 2 कम 116 विधायकों का ही समर्थन रह गया।
आज मिल सकता है समर्थन
वामपंथी दलों के पुराने सहयोगी विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके) शनिवार को विजय के नेतृत्व वाली पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कषगम’ (टीवीके) को औपचारिक समर्थन देने की घोषणा कर सकती है। वीसीके के प्रमुख टी. थिरुमावलवन ने पहले ही घोषणा कर दी है कि उनकी पार्टी का निर्णय वामपंथी दलों के फैसले के अनुरूप होगा। वाम दलों ने पहले ही सरकार गठन के लिए टीवीके को अपना समर्थन देने का एलान कर दिया है। टीवीके के मनोनीत विधायक मैरी विल्सन ने विश्वास व्यक्त किया है कि उनके नेता विजय जल्द ही मुख्यमंत्री बनेंगे। टीवीके अध्यक्ष विजय, सरकार गठन के संबंध में वीसीके प्रमुख थिरुमलावन से मुलाकात करने की उम्मीद है। इस संभावित बैठक से पहले यहां अशोक नगर स्थित वीसीके कार्यालय में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। इस बीच खबर है कि विजय की पार्टी को समर्थन देने का भरोसा देने वाली एक और पार्टी आईयूएमएल ने स्टालिन की डीएमके पर भरोसा जताया है।
अन्नाद्रमुक नहीं भूली है जयललिता के साथ दुर्व्यवहार
25 मार्च 1989 को तमिलनाडु विधानसभा में तत्कालीन विपक्ष की नेता जे. जयललिता के साथ तत्कालीन सीएम और डीएमके नेता करुणानिधि के विधायकों ने जमकर दुर्व्यवहार किया था। जयललिता पर शारीरिक रूप से हमला हुआ और उनके बाल नोंचे गए। उनकी साड़ी तक खींचने की कोशिश हुई। किसी तरह अन्नाद्रमुक पार्टी के विधायकों ने जयललिता को हमले से बचाया। अन्नाद्रमुक पार्टी अपनी दिवंगत नेता के साथ डीएमके विधायकों के द्वारा किए गए अपमान को अभी तक भूली नहीं है। यही कारण है कि पूर्व सीएम स्टालिन की लाख कोशिशों के बाद भी अन्नाद्रमुक में डीएमके को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने पर सहमति नहीं हुई। इसी समर्थन के लिए भाजपा ने लगातार कोशिशें कीं और यहां तक की राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर की हठधर्मिता को भी भाजपा की इन्हीं कोशिशों का हिस्सा माना जा रहा है।
अगर टीवीके सरकार नहीं बना पाती है तो क्या होगा?
तमिलनाडु के राजभवन से लगातार 118 विधायकों के समर्थन की मांग और दो बार बहुमत का आंकड़ा नहीं जुटा पाने के बाद विजय की टीवीके पर यह सवाल उठने लगे हैं कि अगर वह समर्थन नहीं जुटा पाती है या फिर उसके साथ गए छोटे दल किसी बात पर नाराज होकर सरकार गिरा दें तो क्या होगा? टीवीके ने 108 सीटें जीती हैं, चूंकि दो सीटों से जीतने वाले विजय को एक सीट से इस्तीफ़ा देना होगा, इसलिए पार्टी की संख्या घटकर 107 रह जाएगी। उस स्थिति में सदन की कुल संख्या 233 हो जाएगी और बहुमत के लिए 117 विधायकों का समर्थन पर्याप्त होगा। यदि विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) टीवीके का होता है, तो उस सूरत में बहुमत तक पहुंचने के लिए पार्टी को 11 और सदस्यों के समर्थन की ज़रूरत पड़ेगी। अगर वे समर्थन पत्र के साथ फिर से सरकार बनाने का दावा पेश करते हैं, तो राज्यपाल को उन्हें सरकार गठन के लिए आमंत्रित करना पड़ सकता है। यदि अस्थायी स्पीकर के चुनाव के समय एक सदस्य की संख्या कम होती है, तो किसी बाहरी पार्टी के विधायक को अस्थायी स्पीकर बनाया जा सकता है। यदि यह भी संभव नहीं होता, तो कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि विश्वास मत कराने के लिए हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को अस्थायी स्पीकर और रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया जा सकता है। अगर सदन में विजय की पार्टी बहुमत साबित नहीं कर पाई तो उसे इस्तीफा देना होगा। फिलहाल डीएमके और अन्नाद्रमुक दोनों के पास सरकार बनाने का बहुमत नहीं है। वे आपस में मिलकर भी सरकार नहीं बना सकते। ऐसे में राज्यपाल को मजबूरन तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ सकता है।




