चार साल का खत्म होगा वनवास, यूपी को मिलेगा डीजीपी के रूप में राजीव कृष्ण का साथ!
कानून व्यवस्था के अनुभवी रणनीतिकार के हाथों में होगी प्रदेश पुलिस की कमान

- यूपीएससी की मुहर के बाद जल्द जारी हो सकता है आदेश
- कम से कम दो वर्ष तक संभालेंगे प्रदेश पुलिस का नेतृत्व
- अपराध के खिलाफ निर्णायक अभियान, पुलिस सुधारों की नई पटकथा और कानून व्यवस्था के सुदृढ़ नेतृत्व का युग शुरू होने की तैयारी
- चार वर्षों की अनिश्चितता के बाद स्थायी कमान, यूपी पुलिस को मिला अनुभवी कप्तान
- सिस्टम के हर मोर्चे पर तपकर निकला अफसर अब संभालेगा प्रदेश की सबसे बड़ी जिम्मेदारी
- यूपीएससी की मुहर के बाद सरकार के अंतिम फैसले का इंतजार, कम से कम दो वर्ष तक मिल सकता है नेतृत्व
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की पुलिस व्यवस्था के लिए यह एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है। लगभग चार वर्षों के लंबे इंतजार के बाद प्रदेश को स्थायी पुलिस महानिदेशक मिलने जा रहा है। सूत्रों के अनुसार वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण को उत्तर प्रदेश का नया स्थायी पुलिस महानिदेशक नियुक्त किए जाने का रास्ता लगभग साफ हो चुका है। राज्य सरकार जल्द ही इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं होगी, बल्कि प्रदेश की कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिस प्रशासन के लिए स्थिर नेतृत्व की नई शुरुआत भी मानी जाएगी। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है, जहां कानून व्यवस्था की चुनौतियां भी सबसे जटिल और व्यापक हैं। ऐसे में पुलिस विभाग के शीर्ष पद पर स्थायी नेतृत्व का होना हमेशा महत्वपूर्ण माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों से प्रदेश में कार्यवाहक डीजीपी व्यवस्था चल रही थी, जिसके कारण शीर्ष स्तर पर दीर्घकालिक नीतियों और सुधारों को लेकर लगातार चर्चा होती रही। अब राजीव कृष्ण के स्थायी डीजीपी बनने की संभावना ने पुलिस महकमे में नई ऊर्जा और स्पष्टता का माहौल बनाया है।
राजीव कृष्ण का प्रशासनिक और पुलिस सेवा का अनुभव तीन दशकों से अधिक का है। उन्होंने अपने करियर में प्रदेश के कई संवेदनशील जिलों, महत्वपूर्ण जोनों और प्रशासनिक इकाइयों में काम किया है। अपराध नियंत्रण, कानून व्यवस्था प्रबंधन और पुलिसिंग के आधुनिक तौर-तरीकों को लागू करने में उनकी पहचान एक व्यवहारिक और परिणामोन्मुख अधिकारी के रूप में रही है। यही कारण है कि उन्हें लंबे समय से प्रदेश पुलिस के सबसे अनुभवी और सक्षम अधिकारियों में गिना जाता रहा है। संघ लोक सेवा आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने 19 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम आयोग को भेजे थे। 26 मई को हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद आयोग ने तीन अधिकारियों रेणुका मिश्रा, पीयूष आनंद और राजीव कृष्ण का पैनल तैयार कर राज्य सरकार को भेजा। अंतिम निर्णय राज्य सरकार को लेना है, लेकिन प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि राजीव कृष्ण की वर्तमान भूमिका, अनुभव और सरकार के साथ बेहतर कार्य समन्वय उन्हें इस दौड़ में सबसे आगे खड़ा करता है। यदि उनकी नियुक्ति पर अंतिम मुहर लगती है तो वे ऐसे समय में प्रदेश पुलिस की कमान संभालेंगे, जब उत्तर प्रदेश अपराध नियंत्रण, तकनीकी पुलिसिंग, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध और पुलिस आधुनिकीकरण जैसे कई महत्वपूर्ण मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में अनुभवी नेतृत्व से इन प्रयासों को और मजबूती मिलने की उम्मीद की जा रही है।

चार साल का इंतजार खत्म यूपी को मिला मजबूत नेतृत्व
उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को स्थायी नेतृत्व मिलने का इंतजार अब समाप्ति की ओर है। लगभग चार वर्षों के बाद प्रदेश को एक स्थायी पुलिस महानिदेशक मिलने जा रहा है। सूत्रों के अनुसार वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण को उत्तर प्रदेश का नया स्थायी डीजीपी नियुक्त किए जाने का निर्णय लगभग तय माना जा रहा है। राज्य सरकार जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर सकती है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और संवेदनशील राज्य में पुलिस महानिदेशक का पद केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि कानून व्यवस्था की दिशा तय करने वाला शीर्ष पद माना जाता है। ऐसे में राजीव कृष्ण की संभावित नियुक्ति को प्रदेश पुलिस के लिए स्थिरता, निरंतरता और अनुभव आधारित नेतृत्व के रूप में देखा जा रहा है। राजीव कृष्ण ने एक जून 2025 को कार्यवाहक डीजीपी का कार्यभार संभाला था। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण और पुलिस प्रशासन को प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल में पुलिसिंग को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने तथा जवाबदेही बढ़ाने के प्रयासों को भी गति मिली। संघ लोक सेवा आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने स्थायी डीजीपी के चयन के लिए 19 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम भेजे थे। 26 मई को दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इन नामों पर विस्तार से विचार किया गया। इसके बाद आयोग ने तीन अधिकारियों का पैनल तैयार कर राज्य सरकार को भेजा। इस पैनल में 1990 बैच की आईपीएस अधिकारी रेणुका मिश्रा, 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी पीयूष आनंद तथा 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण शामिल हैं। हालांकि वरिष्ठता के आधार पर रेणुका मिश्रा का नाम सूची में सबसे ऊपर बताया जा रहा है, लेकिन प्रशासनिक हलकों में राजीव कृष्ण को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। इसकी वजह उनका वर्तमान कार्य अनुभव, प्रदेश पुलिस में सक्रिय भूमिका और सरकार के साथ बेहतर समन्वय को माना जा रहा है। राजीव कृष्ण का जन्म 26 जून 1969 को हुआ। वे मूल रूप से नोएडा क्षेत्र से संबंध रखते हैं। वर्ष 1991 में भारतीय पुलिस सेवा में चयनित होने के बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रशिक्षु अधिकारी के रूप में तत्कालीन इलाहाबाद में की। इसके बाद बरेली, कानपुर और अलीगढ़ में सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्य किया। 10 मार्च 1997 को उन्हें पहली बार किसी जिले की कमान मिली और वे फिरोजाबाद के पुलिस अधीक्षक बनाए गए।
राजधानी की कानून व्यवस्था संभालना किसी भी अधिकारी के लिए बड़ी जिम्मेदारी मानी
मायावती सरकार के दौरान जब बड़े जिलों में एसएसपी के स्थान पर डीआईजी स्तर के अधिकारियों की तैनाती की गई थी, तब राजीव कृष्ण को राजधानी लखनऊ का डीआईजी बनाया गया। राजधानी की कानून व्यवस्था संभालना किसी भी अधिकारी के लिए बड़ी जिम्मेदारी मानी जाती है और उन्होंने इस चुनौती को सफलतापूर्वक निभाया। इसके बाद उन्होंने मेरठ रेंज के आईजी के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2012 में वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गए। केंद्रीय स्तर पर अनुभव हासिल करने के बाद सितंबर 2017 में उनकी वापसी हुई। लौटने पर उन्हें पुलिस अकादमी मुरादाबाद में तैनाती दी गई, जहां उन्होंने पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दिया।
5 फरवरी 2018 को उन्हें लखनऊ जोन का एडीजी बनाया गया। इसके बाद उन्होंने आगरा जोन के एडीजी के रूप में भी लगभग ढाई वर्षों तक सेवाएं दीं। दोनों जोन प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण पुलिस क्षेत्रों में गिने जाते हैं। इन क्षेत्रों में उनकी कार्यशैली को संतुलित, कठोर और परिणाम आधारित माना गया।
भारतीय राजस्व सेवा में अधिकारी हैं पत्नी मीनाक्षी
राजीव कृष्ण का पारिवारिक पृष्ठभूमि भी प्रशासनिक सेवाओं से गहराई से जुड़ी रही है। उनकी पत्नी मीनाक्षी सिंह भारतीय राजस्व सेवा की अधिकारी हैं और वर्तमान में सीबीडीटी में डिप्टी सेक्रेटरी के रूप में कार्यरत हैं। उनके साले राजेश्वर सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं और वर्तमान में लखनऊ की सरोजनीनगर विधानसभा सीट से विधायक हैं। राजेश्वर सिंह की पत्नी लक्ष्मी सिंह गौतमबुद्धनगर की पुलिस आयुक्त हैं। परिवार के अन्य सदस्य भी लंबे समय तक प्रशासनिक सेवाओं में महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। राजीव कृष्ण की संभावित नियुक्ति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उनका संभावित कार्यकाल माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और यूपीएससी की गाइडलाइन के अनुसार स्थायी डीजीपी को न्यूनतम दो वर्ष का कार्यकाल दिया जाता है। ऐसे में उनकी नियुक्ति होने पर उन्हें कम से कम दो वर्षों तक प्रदेश पुलिस का नेतृत्व करने का अवसर मिलेगा।
लंबा और निरंतर कार्यकाल किसी अधिकारी को नहीं मिला
उनका मूल सेवाकाल वर्ष 2029 तक है। यदि वे दो वर्ष का निर्धारित कार्यकाल पूरा करते हैं तो कार्यवाहक डीजीपी के रूप में बिताए गए एक वर्ष को जोड़कर उनका कुल कार्यकाल लगभग तीन वर्ष का हो जाएगा। हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश पुलिस के शीर्ष पद पर इतना लंबा और निरंतर कार्यकाल किसी अधिकारी को नहीं मिला है। पुलिस महकमे के जानकारों का मानना है कि लंबे कार्यकाल से पुलिस सुधारों, तकनीकी आधुनिकीकरण, साइबर अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा और संगठित अपराध के विरुद्ध चल रही कार्रवाई को निरंतरता मिलेगी। साथ ही प्रदेश सरकार की कानून व्यवस्था संबंधी प्राथमिकताओं को भी प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।
अनुभवी और स्थायी नेतृत्व की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में जहां 25 करोड़ से अधिक आबादी की सुरक्षा और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिस पर है, वहां अनुभवी और स्थायी नेतृत्व की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। राजीव कृष्ण की संभावित नियुक्ति को इसी दृष्टि से देखा जा रहा है। यह नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को स्थिर और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के औपचारिक आदेश पर टिकी हैं। आदेश जारी होते ही राजीव कृष्ण उत्तर प्रदेश पुलिस के स्थायी मुखिया के रूप में नई जिम्मेदारी संभालेंगे और प्रदेश की कानून व्यवस्था को नई दिशा देने का कार्य करेंगे।
● चार वर्षों बाद उत्तर प्रदेश को मिलने जा रहा है स्थायी पुलिस महानिदेशक।
● 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरा।
● यूपीएससी ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों का पैनल राज्य सरकार को भेजा।
● एक जून 2025 से कार्यवाहक डीजीपी के रूप में संभाल रहे हैं जिम्मेदारी।
● कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिस सुधारों में रहा प्रभावी योगदान।
● प्रदेश के कई संवेदनशील जिलों और महत्वपूर्ण जोनों में संभाल चुके हैं कमान।
● परिवार में कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी, दो पीढ़ियों से सार्वजनिक सेवा का मजबूत रिकॉर्ड।
● सुप्रीम कोर्ट और यूपीएससी की गाइडलाइन के अनुसार मिलेगा न्यूनतम दो वर्ष का कार्यकाल।
● कार्यवाहक और स्थायी कार्यकाल मिलाकर तीन वर्ष तक शीर्ष पद पर बने रहने की संभावना।




