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कोचिंग होटल हॉस्पिटल लान वाले हो जाएं सावधान, नही तो वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा सील करवा देंगे आप के संस्थान

  • अवैध कोचिंग संस्थानों पर वीडीए का बड़ा एक्शन
  • सुरक्षित शिक्षा व्यवस्था और नियोजित विकास की दिशा में निर्णायक कदम
  • सभी जोनों में चला व्यापक प्रवर्तन अभियान
  • बिना स्वीकृति संचालित कोचिंग और लाइब्रेरी पर सीलिंग
  • भवन मानकों और अग्नि सुरक्षा को मिली प्राथमिकता
  • छात्रों और अभिभावकों की सुरक्षा सर्वोच्च उद्देश्य
  • नियोजित शहरी विकास के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता
  • भविष्य में भी जारी रहेगी कठोर कार्रवाई
  • नियमों का पालन करने वाले संस्थानों के लिए सकारात्मक संदे

वाराणसी। शिक्षा व्यवस्था को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और नियमानुकूल बनाने की दिशा में वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने एक महत्वपूर्ण और व्यापक अभियान चलाते हुए अनाधिकृत रूप से संचालित कोचिंग संस्थानों एवं लाइब्रेरी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की है। 24 जून 2026 को चलाए गए इस विशेष अभियान में विभिन्न जोनों में संचालित कुल 35 संस्थानों की जांच कर उन परिसरों पर सीलिंग की कार्रवाई की गई, जहां भवन मानकों, मानचित्र स्वीकृति अथवा अन्य आवश्यक अनुमतियों का पालन नहीं किया जा रहा था। यह कार्रवाई केवल नियमों के अनुपालन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक उद्देश्य छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी है। हाल के वर्षों में देशभर में व्यावसायिक भवनों, कोचिंग संस्थानों और सार्वजनिक परिसरों में सुरक्षा मानकों को लेकर बढ़ी चिंताओं के बीच वीडीए का यह अभियान शहरी प्रशासन की जिम्मेदार और सक्रिय भूमिका को दर्शाता है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि किसी भी संस्थान को निर्धारित नियमों से ऊपर नहीं माना जाएगा और सभी को समान रूप से कानूनी प्रावधानों का पालन करना होगा।

सुरक्षित शिक्षा और विकास की दिशा में बड़ा कदम, 35 अवैध कोचिंग संस्थानों पर की सख्त कार्रवाई

शहर में तेजी से बढ़ रहे कोचिंग संस्थानों और लाइब्रेरी के बीच छात्रों की सुरक्षा, भवन मानकों के अनुपालन और सुनियोजित शहरी विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पूर्ण बोरा ने व्यापक प्रवर्तन अभियान चलाकर बड़ा प्रशासनिक संदेश दिया है। प्राधिकरण द्वारा विभिन्न जोनों में निरीक्षण के दौरान बिना मानचित्र स्वीकृति, भवन मानकों के उल्लंघन अथवा आवश्यक अनुमतियों के अभाव में संचालित कुल 35 कोचिंग संस्थानों एवं लाइब्रेरी के विरुद्ध उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 के प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए कई परिसरों को सील कर पुलिस अभिरक्षा में सौंप दिया गया। यह अभियान केवल नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई भर नहीं है, बल्कि इसका मूल उद्देश्य छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित शिक्षण वातावरण तैयार करना तथा शहर में नियमानुसार विकास की संस्कृति को मजबूत करना है। वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जनसुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी संस्थानों को भवन निर्माण, अग्नि सुरक्षा तथा स्वीकृत मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।

बढ़ती कोचिंग संस्कृति के बीच सुरक्षा का सवाल

पिछले कुछ वर्षों में वाराणसी पूर्वांचल के प्रमुख शैक्षणिक केंद्र के रूप में तेजी से उभरा है। प्रतियोगी परीक्षाओं, इंजीनियरिंग, मेडिकल, बैंकिंग, एसएससी और अन्य पाठ्यक्रमों की तैयारी के लिए बड़ी संख्या में छात्र यहां आते हैं। इसके साथ ही निजी कोचिंग संस्थानों और अध्ययन केंद्रों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालांकि इस विस्तार के साथ एक चुनौती भी सामने आई है। कई संस्थान ऐसे भवनों में संचालित होने लगे जो मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए बने थे या जिनमें व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आवश्यक स्वीकृतियां उपलब्ध नहीं थीं। कई स्थानों पर बहुमंजिला इमारतों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का आवागमन होता है, लेकिन वहां पर्याप्त पार्किंग, आपातकालीन निकास, अग्निशमन व्यवस्था या संरचनात्मक सुरक्षा के मानकों का पालन नहीं किया जाता। ऐसी स्थिति में किसी भी दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इन्हीं संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए वाराणसी विकास प्राधिकरण ने विशेष जांच अभियान चलाया और विभिन्न जोनों में संचालित संस्थानों का निरीक्षण किया।

उपाध्यक्ष के निर्देश पर चला विशेष अभियान

वीडीए के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनहित और छात्र सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाए। निरीक्षण दलों को विभिन्न क्षेत्रों में भेजकर भवनों की वैधता, मानचित्र स्वीकृति, निर्माण की प्रकृति तथा वास्तविक उपयोग की जांच कराई गई। जहां-जहां अनियमितताएं मिलीं, वहां उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 के तहत नियमानुसार नोटिस की कार्रवाई करते हुए आगे की विधिक प्रक्रिया अपनाई गई। कई मामलों में परिसरों को सील कर पुलिस अभिरक्षा में सौंप दिया गया।

जोन-1 में सबसे व्यापक कार्रवाई

जोन-1 के अंतर्गत द्वारिका नगर कॉलोनी, भरलाई, शिवपुर और सिकरौल क्षेत्रों में कई प्रमुख संस्थानों पर कार्रवाई हुई। जांच के दौरान पाया गया कि कुछ भवनों में बड़े पैमाने पर कोचिंग संचालन किया जा रहा था जबकि आवश्यक स्वीकृतियां उपलब्ध नहीं थीं अथवा निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं था।
रैंकर्स कोचिंग, ट्राई क्लासेज, एपीसीज ट्यूटोरियल्स, कौटिल्य एकेडमी तथा मोमेंटम कैरियर क्लासेस जैसे संस्थानों से संबंधित परिसरों पर नोटिस के बाद सीलिंग की कार्रवाई की गई। कई स्थानों पर भूतल से लेकर बहुमंजिला निर्माण तक का उपयोग शिक्षण गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। प्राधिकरण का मानना है कि ऐसे भवनों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति के कारण सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक है और इसमें किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।

सारनाथ क्षेत्र में भी चला अभियान

जोन-2 के अंतर्गत आशापुर और सारनाथ क्षेत्र में बिना आवश्यक स्वीकृति संचालित लाइब्रेरी और कोचिंग परिसरों की जांच की गई। निरीक्षण के दौरान संबंधित भवनों में अनियमितताएं मिलने पर मौके पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि प्रशासन केवल शहर के केंद्रीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि बाहरी इलाकों में भी नियमों के पालन को समान गंभीरता से लागू कर रहा है।

महमूरगंज और सिगरा में जांच

जोन-3 के अंतर्गत महमूरगंज और सिगरा क्षेत्र में संचालित शिक्षण संस्थानों का निरीक्षण किया गया। यहां भी भवन उपयोग और आवश्यक अनुमतियों की समीक्षा की गई तथा नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई अमल में लाई गई। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थी अध्ययन करते हैं, इसलिए प्रशासन विशेष रूप से यह सुनिश्चित करना चाहता है कि शिक्षण गतिविधियां सुरक्षित और विधिसम्मत भवनों में संचालित हो।

दुर्गाकुंड और संकटमोचन में कार्रवाई

जोन-4 में दुर्गाकुंड और संकटमोचन क्षेत्र के कई संस्थानों के विरुद्ध प्रवर्तन कार्रवाई की गई। यह इलाका लंबे समय से कोचिंग गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है, जहां प्रतिदिन हजारों छात्र पहुंचते हैं।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में संचालित संस्थानों को भवन सुरक्षा और अग्निशमन संबंधी सभी मानकों का पालन करना होगा ताकि किसी भी आपात स्थिति में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

रामनगर और मुगलसराय क्षेत्र में व्यापक निरीक्षण

जोन-5 के अंतर्गत रामनगर, साहित्यनाका, पंचवटी, गोलाघाट तथा मुगलसराय के अनेक शिक्षण एवं अध्ययन केंद्रों का निरीक्षण किया गया। आर्गन एकेडमी, स्टडी प्वाइंट लाइब्रेरी, नाथ कॉमर्स क्लासेज, टॉपर विजन एकेडमी, राय एकेडमी, स्टार इंस्टीट्यूट, एसएएस लाइब्रेरी, पाठक इकोनॉमिक्स प्वाइंट, अमेरिकन कोचिंग, सीबीएस कोचिंग, कॉमर्स एकेडमी, द मास्टर क्लास एकेडमी तथा महेन्द्रा कोचिंग सहित कई संस्थानों से संबंधित परिसरों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई दर्शाती है कि अभियान किसी एक क्षेत्र तक सीमित न रहकर पूरे अधिकार क्षेत्र में समान रूप से लागू किया गया।

कानून का पालन ही सर्वोत्तम विकल्प

प्राधिकरण का स्पष्ट संदेश है कि भवनों का निर्माण और उपयोग स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप होना चाहिए। यदि किसी आवासीय भवन का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है अथवा अतिरिक्त निर्माण कर लिया गया है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। नियमों का पालन करने वाले संस्थानों के लिए यह अभियान सकारात्मक संदेश भी है, क्योंकि इससे पारदर्शिता और समान प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा।

छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

किसी भी कोचिंग संस्थान में प्रतिदिन सैकड़ों छात्र एकत्रित हो सकते हैं। यदि भवन में पर्याप्त निकास मार्ग, चौड़ी सीढ़ियां, अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन व्यवस्था और संरचनात्मक सुरक्षा उपलब्ध न हो, तो किसी दुर्घटना की स्थिति में गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
इसी कारण प्रशासन अब केवल शैक्षणिक गतिविधि नहीं, बल्कि उस गतिविधि के लिए उपयोग किए जा रहे भवन की सुरक्षा और वैधता पर भी विशेष ध्यान दे रहा है।

सुनियोजित शहर के निर्माण की दिशा में पहल

तेजी से विस्तार कर रहे महानगर में नई सड़कें, फ्लाईओवर, आवासीय कॉलोनियां और व्यावसायिक प्रतिष्ठान विकसित हो रहे हैं। यदि भवन मानकों की अनदेखी कर अनियोजित निर्माण बढ़ता है तो भविष्य में यातायात, पार्किंग, आपदा प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। वीडीए का यह अभियान शहरी नियोजन की उसी व्यापक सोच का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें विकास और सुरक्षा दोनों को समान महत्व दिया जा रहा है।

प्रशासन का स्पष्ट संदेश

उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने दोहराया कि सभी कोचिंग संस्थान, लाइब्रेरी और व्यावसायिक प्रतिष्ठान निर्धारित भवन मानकों, अग्नि सुरक्षा प्रावधानों तथा आवश्यक स्वीकृतियों के अनुरूप ही संचालित किए जाएं। नियमों की अनदेखी करने वालों के विरुद्ध भविष्य में भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। संकेत दिया कि निरीक्षण अभियान निरंतर चलता रहेगा और किसी भी क्षेत्र में शिकायत मिलने पर तत्काल जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

अभिभावकों और छात्रों के लिए महत्वपूर्ण संकेत

यह अभियान छात्रों और अभिभावकों को भी जागरूक करता है कि किसी संस्थान में प्रवेश लेने से पहले उसके बुनियादी ढांचे, सुरक्षा व्यवस्था और वैधानिक स्थिति के बारे में जानकारी लेना आवश्यक है। सुरक्षित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करना प्रत्येक विद्यार्थी का अधिकार है। वाराणसी विकास प्राधिकरण की 24 जून 2026 की यह कार्रवाई केवल अवैध निर्माणों के विरुद्ध प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि सुरक्षित शिक्षा, कानून के समान अनुपालन और सुनियोजित शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। पांचों जोनों में चलाए गए अभियान ने स्पष्ट कर दिया है कि सार्वजनिक हित, छात्र सुरक्षा और भवन मानकों के मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि सभी संस्थान समय रहते आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त कर नियमों के अनुरूप संचालन सुनिश्चित करें, तो वाराणसी एक सुरक्षित, अनुशासित और आधुनिक शैक्षणिक नगरी के रूप में और अधिक सशक्त होकर उभर सकता है।

* वाराणसी विकास प्राधिकरण ने 24 जून 2026 को विशेष अभियान चलाकर 35 कोचिंग संस्थानों और लाइब्रेरी पर कार्रवाई की।
* बिना मानचित्र स्वीकृति और भवन मानकों के संचालन पर कई परिसरों को सील किया गया।
विभिन्न जोनों में धारा 27 के अंतर्गत नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई।
* जनसुरक्षा, अग्नि सुरक्षा और भवन मानकों के अनुपालन पर विशेष जोर।
* उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने नियमों के उल्लंघन पर भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए।
* अभियान का उद्देश्य छात्रों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित शिक्षण वातावरण सुनिश्चित करना है।
* अवैध निर्माण और अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रशासन की शून्य सहनशीलता नीति।
* शहर के सुनियोजित विकास और कानून के समान अनुपालन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल।

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